Sainik Farm Legal Status: अरबपतियों का आशियाना, लग्जरी फार्म हाउस फिर भी अनअथॉराइज्ड! सैनिक फार्म के कानूनी पचड़े की इनसाइड स्टोरी
दिल्ली का सैनिक फार्म विशाल फार्महाउसों, लग्जरी बंगलों और देश के सबसे अमीर लोगों के आशियाने के तौर पर जाना जाता है। दक्षिण दिल्ली का यह पॉश इलाका दिखने में जितना भव्य है कानून की किताबों में इसकी पहचान उतनी ही अलग है।
Mindful Parenting Tips: बच्चे से पूछताछ नहीं, भरोसे से बढ़ाएं बॉन्डिंग; अपनाएं ये 5 आसान तरीके
Mindful Parenting Tips: बच्चे के साथ मजबूत रिश्ता सिर्फ पढ़ाई, खाने या आदतों पर नजर रखने से नहीं बनता। इसके लिए जरूरी है कि बच्चा माता-पिता के सामने खुद को सुरक्षित महसूस करे। कई बार माता-पिता बच्चे से उसकी परेशानी जानने के लिए लगातार सवाल करने लगते हैं।
इससे बच्चा खुलने के बजाय चुप भी हो सकता है। ऐसे में बच्चे की भावनाओं को समझते हुए उसके साथ व्यवहार करना मददगार हो सकता है। जानें 5 आसान पैरेंटिंग तरीके जो बच्चे और माता-पिता के बीच बॉन्डिंग मजबूत कर सकते हैं।
1. सवालों की बौछार न करें
बच्चा स्कूल से लौटे तो पूछने के बजाय कि दिन कैसा रहा, किससे बात की और क्या हुआ, उसे थोड़ा समय दें। बातचीत को पूछताछ जैसा बनाने के बजाय सामान्य तरीके से शुरू करें। जब बच्चा सहज महसूस करेगा, तो वह खुद भी अपनी बातें शेयर कर सकता है।
2. बच्चे की बात बीच में न काटें
जब बच्चा कोई बात बताना शुरू करे, तो तुरंत अपनी राय देने या उसकी गलती बताने से बचें। पहले उसकी पूरी बात सुनें। इससे बच्चे को महसूस होता है कि उसकी भावनाओं को महत्व दिया जा रहा है।
3. हर बात पर जज न करें
बच्चे अगर कोई गलती या ऐसी बात शेयर करें जो माता-पिता को पसंद नहीं है, तो तुरंत डांटने से बचना चाहिए। अगर हर बार बात बताने पर बच्चे को डांट का डर रहेगा, तो वह अगली बार अपनी परेशानी छिपा सकता है। गलती समझाने के साथ यह भरोसा देना भी जरूरी है कि वह अपनी बात खुलकर कह सकता है।
4. रोज थोड़ा क्वालिटी टाइम दें
बच्चे से बात करने के लिए हमेशा किसी बड़ी गतिविधि की जरूरत नहीं होती। साथ बैठकर खाना खाना, टहलना, खेलना या सोने से पहले कुछ मिनट बातचीत करना भी अच्छा मौका हो सकता है। ऐसे छोटे-छोटे पलों में बच्चे अपने दिन और मन की बातें आसानी से शेयर कर सकते हैं।
5. बच्चे की भावनाओं को समझें
अगर बच्चा उदास, गुस्से में या परेशान दिखाई दे, तो बच्चे भावना को समझने की कोशिश करें। आप उससे पूछ सकते हैं कि वह कैसा महसूस कर रहा है और अगर वह चाहे तो अपनी परेशानी आपके साथ शेयर कर सकता है। इससे बच्चे को इमोशनल सिक्योरिटी का एहसास मिल सकता है।
बच्चे को बोलने के लिए दें भरोसे का माहौल
बच्चे का माता-पिता से खुलकर बात करना एक दिन में विकसित नहीं होता है। इसके लिए घर में ऐसा माहौल बनाना जरूरी है, जहां बच्चा अपनी खुशी के साथ-साथ डर, गलती और परेशानी भी बिना झिझक बता सके।
माइंडफुल पैरेंटिंग का मतलब हर समय बच्चे पर नजर रखना नहीं, बल्कि उसकी बात को ध्यान से सुनना, उसकी भावनाओं को समझना और जरूरत के समय सही तरीके से उसका साथ देना है।
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