पाकिस्तान में महिला सोशल मीडिया क्रिएटर की गोली मारकर हत्या, महिलाओं के खिलाफ हिंसा पर फिर उठे सवाल
Female Influencers Shot Dead in Pakistan: पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद के पास टैक्सिला में 28 वर्षीय सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर शम्सो बीबी की कथित तौर पर दो हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी। बीबी के सोशल मीडिया पर एक करोड़ से अधिक फॉलोअर्स बताए जाते हैं। उनकी हत्या के बाद पाकिस्तान में महिलाओं की सुरक्षा और सोशल मीडिया पर सक्रिय महिला कंटेंट क्रिएटर्स के खिलाफ बढ़ती हिंसा को लेकर एक बार फिर चिंता जताई जा रही है।
बताया जा रहा है कि शम्सो बीबी पर टैक्सिला इलाके में हमला किया गया, जिसमें उनकी जान चली गई। घटना ने सोशल मीडिया से जुड़े लोगों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। वहीं, महिला के खिलाफ हिंसा का यह मामला पाकिस्तान में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर जारी बहस के बीच सामने आया है। अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू कर दी है और हमले के पीछे की वजह का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।
आयशा गिलामाना था नाम
शम्सो बीबी सोशल मीडिया पर आयशा गिलामाना के नाम से जानी जाती थीं। उनके भाई नियामतुल्लाह ने बताया कि 14 अगस्त को कथित तौर पर वित्तीय विवाद के चलते उनकी हत्या की गई। उन्होंने पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज शरीफ से मामले में हस्तक्षेप कर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की अपील की है।
कार में निकली थी आयशा
ब्रिटिश अखबार ‘द इंडिपेंडेंट’ की रिपोर्ट के मुताबिक, बीबी के पिता फजल साहिबजादा ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि उनकी बेटी को काशिफ नाम के एक व्यक्ति ने टैक्सिला स्थित घर से बाहर बुलाया था। इसके बाद वह अपनी बहन और भाई के साथ कार में घर से निकलीं।
दो बाइकसवारों ने मारी गोली
पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, जब उनकी कार एक बाजार के पास पहुंची तो मोटरसाइकिल सवार दो लोगों ने कथित तौर पर कार पर गोलीबारी कर दी। गोली बीबी के गले में लगी और उनकी मौत हो गई। सोशल मीडिया पर प्रसारित एक कथित वीडियो में दो मोटरसाइकिल सवार लोगों को बीबी की कार के पास रुककर बेहद करीब से गोली चलाते हुए देखा जा सकता है। बताया गया कि गोलीबारी के बाद कार अनियंत्रित होकर एक डंपर ट्रक से टकरा गई, जिससे बीबी की बहन भी गंभीर रूप से घायल हो गईं।
टिकटॉक वीडियो बनाती थी
बीबी के पिता ने शिकायत में बताया कि उनकी बेटी पिछले तीन-चार वर्षों से टिकटॉक वीडियो बनाती थीं। उन्होंने दावा किया कि उनके वीडियो को 3 से 3.5 करोड़ से अधिक लाइक्स मिले थे और उनके एक करोड़ से अधिक फॉलोअर्स थे। बीबी की हत्या ऐसे समय हुई है जब पाकिस्तान में युवा महिला कंटेंट क्रिएटर्स के खिलाफ हिंसक हमलों को लेकर चिंता बढ़ रही है।
पहले छह महीने में 644 हत्याएं
इस्लामाबाद स्थित संगठन साहिल के अनुसार, वर्ष 2026 के पहले छह महीनों में पाकिस्तान में लैंगिक हिंसा के 3,172 मामले दर्ज किए गए। इनमें ट्रांसजेंडर लोगों से जुड़े 18 मामले भी शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इस अवधि में 644 हत्याएं, 514 यातना के मामले, 462 अपहरण, 363 आत्महत्याएं, 280 बलात्कार, 175 चोट के मामले, 132 ऑनर किलिंग और उत्पीड़न, सामूहिक बलात्कार तथा अश्लील सामग्री से जुड़े 21 अन्य मामले दर्ज किए गए।
रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़ितों में 334 की उम्र 21 से 30 वर्ष, 306 की उम्र 11 से 20 वर्ष और 120 पीड़ितों की उम्र 31 से 40 वर्ष के बीच थी। हालांकि, करीब 71 प्रतिशत मामलों में पीड़ितों की उम्र दर्ज नहीं की गई थी।
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वन अधिकारी केवल प्रशासनिक अधिकारी नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रहरी हैं: मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज देहरादून में भारतीय वन सेवा के परिवीक्षार्थियों के साथ आयोजित संवाद कार्यक्रम में भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन एवं उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (से.नि.) गुरमीत सिंह की गरिमामयी उपस्थिति में प्रतिभाग किया. कार्यक्रम में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी, देहरादून के निदेशक डॉ. राजेन्द्र प्रसाद खजुरिया, कोर्स निदेशक मती अजीता लौंगजाम सहित भारतीय वन सेवा के वरिष्ठ अधिकारी एवं परिवीक्षार्थी उपस्थित रहे.
मुख्यमंत्री ने उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन का देवभूमि उत्तराखंड की पावन धरती पर हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन करते हुए कहा कि उनका सार्वजनिक जीवन सादगी, समर्पण, परिश्रम और राष्ट्रसेवा की भावना का प्रेरणादायी उदाहरण है. उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर से सार्वजनिक जीवन की शुरुआत कर देश के द्वितीय सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने की उपराष्ट्रपति जी की यात्रा युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है. राज्यसभा के सभापति के रूप में भी उन्होंने संसदीय परंपराओं और लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.
मुख्यमंत्री ने भारतीय वन सेवा में चयनित सभी परिवीक्षार्थियों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वन सेवा देश की प्राकृतिक विरासत, जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. उन्होंने कहा कि उत्तराखंड का लगभग 70 प्रतिशत भू-भाग वनों से आच्छादित है और यहां के पर्वत, नदियां, वन एवं समृद्ध जैव विविधता प्रदेश की विशिष्ट पहचान हैं. ऐसे में वनों का संरक्षण केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य से जुड़ा दायित्व भी है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की वैश्विक चुनौती के दौर में वन अधिकारियों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है. उन्होंने परिवीक्षार्थियों का आह्वान किया कि वे आधुनिक तकनीक एवं प्रशासनिक दक्षता का उपयोग करते हुए वन संरक्षण के साथ-साथ वन क्षेत्रों में रहने वाले स्थानीय समुदायों के हितों को भी प्राथमिकता दें. उन्होंने कहा कि वन अधिकारी केवल प्रशासनिक अधिकारी नहीं, बल्कि ‘प्रकृति के प्रहरी’ हैं और उन्हें अपने अधिकारों के साथ अपनी जिम्मेदारियों तथा अपने ज्ञान के साथ संवेदनशीलता को भी सर्वोच्च स्थान देना चाहिए.
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ‘विकसित भारत’ के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है और विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी समान महत्व दिया जा रहा है. ‘मिशन LiFE’ और ‘एक पेड़ माँ के नाम’ जैसे अभियानों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ा गया है. उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार भी पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन स्थापित करते हुए कार्य कर रही है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में देश के सबसे बड़े अतिक्रमण विरोधी अभियानों में से एक के माध्यम से लगभग 13 हजार एकड़ वन भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराया गया है. उत्तराखंड देश का पहला राज्य है, जहां समर्पित फॉरेस्ट ड्रोन फोर्स का गठन किया गया है. चारधाम यात्रा मार्ग पर डिजिटल डिपॉजिट रिफंड सिस्टम लागू किया गया है, जिसे शीघ्र ही प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी विस्तार दिया जाएगा.
उन्होंने कहा कि सरकार ने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि विकास परियोजनाएं पर्यावरण की कीमत पर न हों. राजाजी टाइगर रिजर्व से होकर गुजरने वाले दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर लगभग 12 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड वन्यजीव कॉरिडोर का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह परियोजना आधुनिक बुनियादी ढांचे और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन का प्रभावी उदाहरण है.
मुख्यमंत्री ने बताया कि वन उपज के परिवहन को सुगम बनाने के लिए राज्य में नेशनल ट्रांजिट पास सिस्टम लागू किया गया है. मानव-वन्यजीव संघर्ष में होने वाली जनहानि के मामलों में अनुग्रह राशि बढ़ाकर 10 लाख रुपये की गई है. वन पंचायतों को सशक्त बनाने के लिए उत्तराखंड वन पंचायती नियमावली में आवश्यक संशोधन किए गए हैं. साथ ही, वनाग्नि से निपटने वाले फायर वॉचर्स के लिए जीवन बीमा की व्यवस्था तथा पिरुल एकत्रीकरण के माध्यम से ग्रामीणों के लिए रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं.
मुख्यमंत्री ने कहा कि मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए बायोफेंसिंग, त्वरित प्रतिक्रिया दल तथा 24 घंटे सक्रिय वन्यजीव हेल्पलाइन 1926 जैसी व्यवस्थाओं को भी मजबूत किया गया है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य वन संरक्षण के साथ-साथ इकोलॉजी और इकोनॉमी के बीच ऐसा संतुलन स्थापित करना है, जिसमें प्रकृति और वन्यजीव सुरक्षित रहें तथा वनों पर निर्भर स्थानीय समुदायों की आजीविका और समृद्धि भी सुनिश्चित हो. उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारतीय वन सेवा के युवा अधिकारी भी इसी संतुलित दृष्टिकोण को अपनी कार्यशैली का हिस्सा बनाकर देश की प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे.
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकल्प रहित संकल्प’ के अनुरूप देश में वनों और पर्यावरण के व्यापक संरक्षण के प्रयासों को आगे बढ़ाने में युवा वन अधिकारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है. उन्होंने सभी परिवीक्षार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि वे जहां भी अपनी सेवाएं दें, राष्ट्रहित, पर्यावरण संरक्षण और जनकल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दें.
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