Sri Lanka के पूर्व मंत्री Keheliya Rambukwella दो मामलों में गिरफ्तार, मिली जमानत
श्रीलंका में भ्रष्टाचार और साजिश के आरोपों में पूर्व मंत्री केहेलिया रामबुकवेला को दो अलग-अलग मामलों में गिरफ्तार किया गया है। भ्रष्टाचार निरोधक आयोग ने यह जानकारी दी। रिश्वत या भ्रष्टाचार आरोप अन्वेषण आयोग (सीआईएबीओसी) ने एक बयान में बताया कि मंगलवार को उसने पूर्व मीडिया और स्वास्थ्य मंत्री रामबुकवेला को दो अलग-अलग मामलों के सिलसिले में गिरफ्तार किया।
सीआईएबीओसी के अनुसार, एक मामला तब का है जब रामबुकवेला जनसंचार मंत्री थे और उन्होंने सरकारी श्री लंका रूपवाहिनी कॉर्पोरेशन में मान्य कर्मी संख्या से ज़्यादा, छह कर्मचारियों की कथित तौर पर भर्ती की थी। दूसरा मामला कैंडी साम्राज्य के आखिरी सिंहली राजा, श्री वीरा पराक्रम नरेंद्रसिंघा के महल से संदकदा पहाना (मूनस्टोन) नामक ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण पुरातात्विक कलाकृति की चोरी की जांच में कथित दखल देने से जुड़ा है। हालांकि बाद में, कोलंबो के मुख्य मजिस्ट्रेट ने पूर्व मंत्री को दोनों मामलों में पांच-पांच लाख श्रीलंकाई रुपये की दो जमानतों पर रिहा कर दिया।
रामबुकवेला को पहले भी अलग-अलग मामलों में तीन बार गिरफ्तार किया जा चुका है। फरवरी 2024 में, उन्हें तब गिरफ्तार किया गया था जब उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री रहते हुए भारतीय ऋण सुविधा का इस्तेमाल करके घटिया दवाएं खरीदने के लिए कथित रूप से फर्जीवाड़ा किया था।। मई 2025 में, उन्हें मंत्रालय के कर्मचारियों की कथित तौर पर गैर-कानूनी भर्ती करने और राज्य को आर्थिक नुकसान पहुंचाने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था।
जून 2025 में धनशोधन एवं बिना घोषित संपत्ति के मामले में उन्हें गिरफ्तार किया गया था।
प्रतिस्पर्धा मामलों में 'कमिटमेंट' आवेदन के लिए नए नियम लागू, सीसीआई ने बढ़ाई समयसीमा
नई दिल्ली, 19 अगस्त (आईएएनएस)। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने प्रतिस्पर्धा कानून से जुड़े मामलों में कमिटमेंट (प्रतिबद्धता) आवेदन के लिए संशोधित विनियम, 2026 को अधिसूचित किया है। नए नियमों के तहत कंपनियों को आवेदन दाखिल करने के लिए अधिक समय दिया जाएगा, जिससे उन्हें जांच के दौरान प्रस्तावित सुधारात्मक उपायों को प्रस्तुत करने में सुविधा मिलेगी।
सीसीआई द्वारा 18 अगस्त को जारी अधिसूचना के अनुसार, कमिटमेंट आवेदन दाखिल करने की समयसीमा 45 दिनों से बढ़ाकर 60 दिन कर दी गई है। इसके अलावा, आयोग द्वारा ऐसे आवेदनों पर प्रारंभिक विचार के लिए उपलब्ध समय भी 7 कार्य दिवसों से बढ़ाकर 15 कार्य दिवस कर दिया गया है।
नए नियमों के तहत पूरे मामले के निपटारे की अधिकतम समयसीमा भी बढ़ाई गई है। पहले यह अवधि 130 दिन थी, जिसे अब बढ़ाकर 180 दिन कर दिया गया है।
गौरतलब है कि प्रतिस्पर्धा (संशोधन) अधिनियम, 2023 के माध्यम से कानून में धारा 48ए और 48बी जोड़ी गई थीं। इनके तहत कंपनियों को यह अवसर दिया गया कि यदि उन पर प्रतिस्पर्धा-विरोधी गतिविधियों, विशेषकर बाजार में प्रभुत्व के दुरुपयोग, के आरोपों की जांच चल रही है तो वे स्वेच्छा से सुधारात्मक कदम या शर्तें प्रस्तावित कर मामले का समाधान कर सकती हैं। इसका उद्देश्य लंबी कानूनी प्रक्रिया से बचते हुए प्रतिस्पर्धा संबंधी चिंताओं का शीघ्र समाधान करना है।
वर्तमान में सीसीआई के समक्ष दो महत्वपूर्ण कमिटमेंट प्रस्ताव विचाराधीन हैं। पहला प्रस्ताव इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो एयरलाइन की मूल कंपनी) का है, जबकि दूसरा प्रस्ताव गूगल द्वारा दायर किया गया है।
गूगल का मामला प्ले स्टोर पर रियल मनी गेमिंग ऐप्स की सूचीबद्धता से संबंधित कथित अनुचित कारोबारी व्यवहार की जांच से जुड़ा है। वहीं इंडिगो का प्रस्ताव दिसंबर 2025 में बड़े पैमाने पर उड़ान व्यवधान के बाद शुरू हुई प्रभुत्व के दुरुपयोग संबंधी जांच से संबंधित है।
दोनों मामलों पर सार्वजनिक परामर्श प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अब अंतिम निर्णय सीसीआई को लेना है।
सीसीआई ने कहा कि कमिटमेंट व्यवस्था का मकसद बाजार में जल्द सुधार लाना और प्रतिस्पर्धा संबंधी चिंताओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करना है। इससे न केवल आयोग और उसके महानिदेशक के संसाधनों की बचत होती है, बल्कि कंपनियों को भी लंबी जांच और मुकदमेबाजी से राहत मिलती है।
हालांकि यह सुविधा केवल उन मामलों में उपलब्ध है जहां बाजार में प्रभुत्व के दुरुपयोग की जांच चल रही हो। कार्टेल (गुप्त सांठगांठ) से जुड़े मामलों को इस व्यवस्था से बाहर रखा गया है।
आयोग ने बताया कि नए संशोधन पिछले कुछ समय के अनुभव के आधार पर किए गए हैं। कार्यान्वयन के दौरान समयसीमा, आवेदन में त्रुटियों के सुधार, शुल्क समायोजन और अमान्य आवेदन से जुड़े कुछ प्रशासनिक एवं प्रक्रियागत मुद्दे सामने आए थे, जिन्हें दूर करने के लिए नियमों में बदलाव किया गया है।
सीसीआई ने इन प्रस्तावित संशोधनों पर हितधारकों से सुझाव भी मांगे थे। कुछ पक्षों ने सुझाव दिया था कि महानिदेशक की जांच रिपोर्ट प्रस्तुत होने से पहले किसी भी चरण पर कमिटमेंट आवेदन की अनुमति दी जानी चाहिए। हालांकि आयोग ने इस सुझाव को स्वीकार नहीं किया। सीसीआई का मानना है कि ऐसा करने से जांच प्रक्रिया में अनिश्चितता बढ़ सकती है और मामलों के निपटारे में देरी हो सकती है।
--आईएएनएस
डीबीपी
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