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Astrology Tips: शनिवार को भूलकर भी न खरीदें Salt और Broom, जीवन में बढ़ सकती है आर्थिक दरिद्रता

ज्योतिष और ग्रह शास्त्र में शनिवार का दिन मुख्य रूप से न्याय और कर्म के देवता शनि देव को समर्पित होता है। शनि देव का स्वभाव कठोर माना जाता है। माना जाता है कि अगर कुंडली में शनि ग्रह की स्थिति अच्छी होती है, तो जातक को अपार सफलता मिलती है। वहीं हिंदू धर्म के ज्यादातर लोग शनिवार के दिन कुछ खास सावधानियों बरतते हैं। जिससे कि शनि दोष के प्रभाव से मुक्त रहा जा सके। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि शनिवार के दिन क्या करना सही और किन कार्यों को करने की मनाही होती है।

शनिवार को क्या न खरीदें


लोहे और स्टील की चीजें न खरीदें

शनिवार के दिन स्टील और लोहे से जुड़ी चीजों को खरीदने से बचना चाहिए। लोहा शनि से जुड़ी वस्तु है। जिस कारण शनिवार को इन चीजों को खरीदने से घर-परिवार में दुर्भाग्य का आगमन होता है।

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सरसों या वनस्पति का तेल न खरीदें

वहीं शनिवार को शनि देव की प्रतिमा पर सरसों का तेल चढ़ाना शुभ होता है। लेकिन शनिवार को सरसों का तेल आदि खरीदने से बचना चाहिए। इस दिन तेल खरीदने से बीमारियां घर आती हैं।

नमक

इसके अलावा शनिवार के दिन किसी से नमक न तो उधार या मांग कर लेना चाहिए और न ही इसको खरीदना चाहिए। अगर ऐसा करते हैं, तो इससे कर्ज बढ़ सकता है।

झाड़ू

शनिवार को झाड़ू भी नहीं खरीदना चाहिए। माना जाता है कि ऐसा करने से घर में दरिद्रता का वास होता है। कुछ लोग शनिवार के दिन झाड़ू खरीदना शुभ मानते हैं, तो कुछ अशुभ मानते हैं।

स्याही और पेन

पेन, कॉपी, स्याही, कागज, कलम और दवात का संबंध विद्या से माना जाता है। वहीं विद्या का ग्रह बृहस्पति को माना जाता है। इसलिए पढ़ाई-लिखाई से जुड़ी चीजों को गुरुवार के दिन खरीदना चाहिए। शनिवार को स्याही और पेन खरीदने से जातक अपयश का भागी होता है।

ईंधन

शनिवार के दिन ईंधन से जुड़ी वस्तुएं जैसे केरोसिन, पेट्रोल और माचिस खरीदने से बचना चाहिए। भारतीय संस्कृति में ईंधन को अग्नि देवता से जोड़कर देखा जाता है, जो पंच तत्वों में से एक और बेहद पवित्र है। माना जाता है कि, शनिवार के दिन खरीदा गया ईंधन परिवार को कष्ट पहुंचाने का कार्य करता है।

काले जूते

माना जाता है कि, शनिवार के दिन काले रंग के जूते, कपड़े और काली छतरी खरीदने से बचनी चाहिए। मान्यता है कि, शनिवार को खरीदी गई वस्तु का इस्तेमाल करने से व्यक्ति को असफलता का सामना करना पड़ सकता है।

शनिवार के दिन क्या करें

शनिवार का दिन दान के लिए अत्यंत विशेष होता है। माना जाता है कि शनिवार को शनि से जुड़ी कुछ वस्तुओं का दान करने से घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। वहीं इससे शनि देव भी प्रसन्न होते हैं।

शनिवार के दिन शनिदेव को प्रसन्न करने से लिए उनकी प्रतिमा पर काले तिल अर्पित करना चाहिए। शनिदेव को तिल से बनी चीजें अत्यंत पसंद है। जो व्यक्ति शनिवार को काले तिल का दान करता है, उसके सभी शनि दोष मिटते हैं।

शनिवार के दिन घर के पश्चिमी कोने में कच्चा नमक रखने से यह निगेटिव एनर्जी को सोख लेता है। वहीं जब नमक में नमी आ जाए, तो इसको बिना छुए पानी में बहा देना चाहिए।

शनिवार के दिन उन तमाम लोगों को किसी न किसी तरह की मदद करें, जो आपको किसी न किसी तरह की सेवा प्रदान करते हैं। शनिदेव उन लोगों से काफी प्रसन्न होते हैं, जिन्हें दूसरों की मदद करना पसंद है।

वहीं शनिवार को अनाथालय में किताब का दान करना चाहिए। ऐसा करने से करियर में सफलता मिलती है। क्योंकि शनि को अनुशासन पसंद है। ऐसे में अगर आप किसी जरूरतमंद को किताबों का दान करते हैं, तो उसका आध्यात्मिक लाभ कई गुना बढ़कर मिलता है।

शनिवार को शनि देव के अलावा हनुमान जी की पूजा करने से भी शनिदेव प्रसन्न होते हैं। इस दिन शनि चालीसा और हनुमान चालीसा का पाठ करना शुभ माना जाता है।

शनि देव को वह लोग अधिक पसंद हैं, जो अपना काम पूरी ईमानदारी से करते हैं। उनको निस्वार्थ, अन्याय और दुष्ट लोग नहीं पसंद होते हैं। ऐसे लोगों पर शनि देव की हमेशा महादशा रहती है। इसलिए शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए सबसे पहले अपने अंदर ईमानदारी और सकारात्मक बदलाव लाने चाहिए।

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Singapore में ISMR बैठक की अगुआई करेंगी Nirmala Sitharaman, व्यापार पर जोर

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नयी दिल्ली, 19 अगस्त केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल दक्षिण-पूर्व एशिया के वित्तीय केंद्र सिंगापुर के साथ आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के उद्देश्य से उच्चस्तरीय वार्ता के लिए सिंगापुर की यात्रा पर हैं। गोयल के साथ 70 सदस्यीय भारतीय व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल नए निवेश, व्यापार और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में साझेदारी के अवसर तलाशेगा। वहीं, सीतारमण चौथी भारत-सिंगापुर मंत्रिस्तरीय गोलमेज बैठक (आईएसएमआर) के लिए एक मंत्रिस्तरीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रही हैं, जिसमें विदेश मंत्री एस. जयशंकर, गोयल और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी तथा वाणिज्य एवं उद्योग राज्यमंत्री जितिन प्रसाद शामिल हैं। अधिकारियों की ओर जारी बयानों के अनुसार, बैठक 20 अगस्त को होनी है। वर्ष 2022 में स्थापित आईएसएमआर दोनों देशों के बीच प्रमुख उच्चस्तरीय आर्थिक तंत्र है। इसमें उन्नत विनिर्माण, संपर्क, डिजिटलीकरण, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा, कौशल विकास और स्थिरता जैसे क्षेत्र शामिल हैं। चौथी बैठक में इन क्षेत्रों में हुई प्रगति की समीक्षा की जाएगी और आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए नए अवसर तलाशे जाएंगे। गोयल 19 अगस्त से सिंगापुर की तीन दिवसीय यात्रा पर हैं और वह कृत्रिम मेधा (एआई), प्रौद्योगिकी, विनिर्माण, बुनियादी ढांचे, वित्तीय सेवाओं, स्वास्थ्य, खाद्य एवं कृषि, लॉजिस्टिक, समुद्री क्षेत्र और व्यापार समेत विभिन्न क्षेत्रों के करीब 70 उद्योगपतियों के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल निवेश, बाजार पहुंच, प्रौद्योगिकी सहयोग, साझेदारी और प्रतिभा विकास पर केंद्रित सरकार-से-व्यवसाय तथा व्यवसाय-से-व्यवसाय बैठकों में हिस्सा लेगा। आईएसएमआर के साथ-साथ भारत-सिंगापुर व्यापार गोलमेज बैठक भी आयोजित की जाएगी। इसमें दोनों देशों के कारोबारी दिग्गजों के लिए समानांतर मंच उपलब्ध होगा। कार्यक्रम में समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर समारोह भी होगा। वित्त मंत्रालय ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘चौथी आईएसएमआर इन स्तंभों के तहत हुई प्रगति को आगे बढ़ाएगी तथा भारत-सिंगापुर आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए नए अवसर तलाशेगी।’’ भारतीय मंत्री सिंगापुर के अपने समकक्षों और वरिष्ठ नेताओं से भी मुलाकात करेंगे। बयान के अनुसार, गोयल अपनी यात्रा के दौरान सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग से मुलाकात करेंगे। भारत के लिए सिंगापुर विदेशी पूंजी का एक प्रमुख स्रोत और दक्षिण-पूर्व एशिया में एक महत्वपूर्ण आर्थिक साझेदार है। भारत इन निवेश संबंधों को आगे बढ़ाने के साथ ही प्रौद्योगिकी, विनिर्माण, डिजिटलीकरण और अन्य उभरते क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार करना चाहता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत-सिंगापुर व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते के लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार में काफी वृद्धि हुई है। यह वित्त वर्ष 2004-05 के 6.7 अरब डॉलर से बढ़कर 2025-26 में 36.1 अरब डॉलर हो गया। वित्त वर्ष 2025-26 में सिंगापुर 19.8 अरब डॉलर के साथ भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का सबसे बड़ा स्रोत रहा। अप्रैल, 2000 से मार्च, 2026 के बीच सिंगापुर से कुल एफडीआई प्रवाह 194.68 अरब डॉलर रहा, जो भारत में कुल एफडीआई प्रवाह का 24.72 प्रतिशत है। यह मंत्रिस्तरीय एवं व्यापारिक स्तर की बातचीत दोनों देशों की व्यापक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के प्रयासों के बीच हो रही है। पिछली आईएसएमआर बैठकों ने विनिर्माण, संपर्क, डिजिटल प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, कौशल जैसे क्षेत्रों में सहयोग को आकार देने में मदद की है।

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