Singapore में ISMR बैठक की अगुआई करेंगी Nirmala Sitharaman, व्यापार पर जोर
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नयी दिल्ली, 19 अगस्त केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल दक्षिण-पूर्व एशिया के वित्तीय केंद्र सिंगापुर के साथ आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के उद्देश्य से उच्चस्तरीय वार्ता के लिए सिंगापुर की यात्रा पर हैं। गोयल के साथ 70 सदस्यीय भारतीय व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल नए निवेश, व्यापार और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में साझेदारी के अवसर तलाशेगा। वहीं, सीतारमण चौथी भारत-सिंगापुर मंत्रिस्तरीय गोलमेज बैठक (आईएसएमआर) के लिए एक मंत्रिस्तरीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रही हैं, जिसमें विदेश मंत्री एस. जयशंकर, गोयल और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी तथा वाणिज्य एवं उद्योग राज्यमंत्री जितिन प्रसाद शामिल हैं। अधिकारियों की ओर जारी बयानों के अनुसार, बैठक 20 अगस्त को होनी है। वर्ष 2022 में स्थापित आईएसएमआर दोनों देशों के बीच प्रमुख उच्चस्तरीय आर्थिक तंत्र है। इसमें उन्नत विनिर्माण, संपर्क, डिजिटलीकरण, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा, कौशल विकास और स्थिरता जैसे क्षेत्र शामिल हैं। चौथी बैठक में इन क्षेत्रों में हुई प्रगति की समीक्षा की जाएगी और आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए नए अवसर तलाशे जाएंगे। गोयल 19 अगस्त से सिंगापुर की तीन दिवसीय यात्रा पर हैं और वह कृत्रिम मेधा (एआई), प्रौद्योगिकी, विनिर्माण, बुनियादी ढांचे, वित्तीय सेवाओं, स्वास्थ्य, खाद्य एवं कृषि, लॉजिस्टिक, समुद्री क्षेत्र और व्यापार समेत विभिन्न क्षेत्रों के करीब 70 उद्योगपतियों के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल निवेश, बाजार पहुंच, प्रौद्योगिकी सहयोग, साझेदारी और प्रतिभा विकास पर केंद्रित सरकार-से-व्यवसाय तथा व्यवसाय-से-व्यवसाय बैठकों में हिस्सा लेगा। आईएसएमआर के साथ-साथ भारत-सिंगापुर व्यापार गोलमेज बैठक भी आयोजित की जाएगी। इसमें दोनों देशों के कारोबारी दिग्गजों के लिए समानांतर मंच उपलब्ध होगा। कार्यक्रम में समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर समारोह भी होगा। वित्त मंत्रालय ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘चौथी आईएसएमआर इन स्तंभों के तहत हुई प्रगति को आगे बढ़ाएगी तथा भारत-सिंगापुर आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए नए अवसर तलाशेगी।’’ भारतीय मंत्री सिंगापुर के अपने समकक्षों और वरिष्ठ नेताओं से भी मुलाकात करेंगे। बयान के अनुसार, गोयल अपनी यात्रा के दौरान सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग से मुलाकात करेंगे। भारत के लिए सिंगापुर विदेशी पूंजी का एक प्रमुख स्रोत और दक्षिण-पूर्व एशिया में एक महत्वपूर्ण आर्थिक साझेदार है। भारत इन निवेश संबंधों को आगे बढ़ाने के साथ ही प्रौद्योगिकी, विनिर्माण, डिजिटलीकरण और अन्य उभरते क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार करना चाहता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत-सिंगापुर व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते के लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार में काफी वृद्धि हुई है। यह वित्त वर्ष 2004-05 के 6.7 अरब डॉलर से बढ़कर 2025-26 में 36.1 अरब डॉलर हो गया। वित्त वर्ष 2025-26 में सिंगापुर 19.8 अरब डॉलर के साथ भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का सबसे बड़ा स्रोत रहा। अप्रैल, 2000 से मार्च, 2026 के बीच सिंगापुर से कुल एफडीआई प्रवाह 194.68 अरब डॉलर रहा, जो भारत में कुल एफडीआई प्रवाह का 24.72 प्रतिशत है। यह मंत्रिस्तरीय एवं व्यापारिक स्तर की बातचीत दोनों देशों की व्यापक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के प्रयासों के बीच हो रही है। पिछली आईएसएमआर बैठकों ने विनिर्माण, संपर्क, डिजिटल प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, कौशल जैसे क्षेत्रों में सहयोग को आकार देने में मदद की है।
PNG connection बढ़ाने के लिए सरकार देगी 200 SCM अतिरिक्त सस्ती गैस
सरकार ने घरों में पाइप के जरिये रसोई गैस (पीएनजी) का इस्तेमाल बढ़ाने के लिए शहरी गैस वितरण कंपनियों को हर नए बिल वाले घरेलू पीएनजी कनेक्शन पर 200 मानक घन मीटर (एससीएम) अतिरिक्त सस्ती घरेलू गैस देने की योजना को मंजूरी दी है। एक सितंबर से लागू होने वाली इस योजना के तहत संबंधित भौगोलिक क्षेत्र के लिए तय सीमा से अधिक नए घरेलू पीएनजी कनेक्शन देने वाली पात्र कंपनियों को अतिरिक्त गैस आवंटित की जाएगी। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बयान में कहा है कि इस पहल का उद्देश्य निष्क्रिय और बिना बिल वाले कनेक्शन को सक्रिय स्थिति में लाना और नए क्षेत्रों में पीएनजी नेटवर्क का विस्तार करना है।
देश में फिलहाल करीब 1.74 करोड़ घरेलू पीएनजी कनेक्शन हैं। अतिरिक्त घरेलू गैस आवंटित किए जाने से शहरी गैस वितरण कंपनियों को महंगी आयातित गैस (एलएनजी) की खरीद कुछ हद तक कम करने में मदद मिलेगी। इससे घरेलू पीएनजी कनेक्शन पर किए गए पूंजीगत खर्च की भरपाई की अवधि करीब 10 साल से घटकर लगभग तीन साल रह जाने का अनुमान है।
यह प्रोत्साहन योजना छह-छह महीने की दो किस्तों में लागू की जाएगी। इसके तहत प्रदर्शन अवधि के दौरान निर्धारित सीमा से अधिक नए बिल वाले घरेलू पीएनजी कनेक्शन देने पर हरेक कनेक्शन के लिए 200 एससीएम घरेलू गैस का अतिरिक्त आवंटन किया जाएगा। पश्चिम एशिया संकट के कारण एलपीजी आपूर्ति प्रभावित होने के बाद सरकार ने सिलेंडर पर निर्भरता कम करने और पाइप वाली गैस का इस्तेमाल बढ़ाने पर जोर दिया था।
आधिकारिक बयान के मुताबिक, मार्च से अब तक पांच लाख से अधिक पीएनजी कनेक्शन को गैस की आपूर्ति शुरू की जा चुकी है, जबकि 5.7 लाख से अधिक ग्राहकों ने नए कनेक्शन के लिए पंजीकरण कराया है। सरकार ने पीएनजी के विस्तार के लिए नियामकीय अड़चनें कम करने, गैस पाइपलाइन बिछाने के लिए मार्गाधिकार शुल्क को एकसमान करने और राज्यों से प्राकृतिक गैस पर मूल्य वर्धित कर (वैट) घटाकर पांच प्रतिशत करने का भी अनुरोध किया है। कुछ राज्य पहले ही वैट में कटौती कर चुके हैं।
पीएनजी की आपूर्ति पाइपलाइन के जरिये लगातार होती है और उपभोग के आधार पर बिल दिया जाता है। सरकार का कहना है कि इससे गैस सिलेंडर रखने एवं संभालने की जरूरत कम होती है और यह पारंपरिक ईंधनों की तुलना में अपेक्षाकृत स्वच्छ ईंधन भी है।
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