सावन में करें इको-फ्रेंडली शिव पूजा, इन आसान तरीकों से कम करें कचरा और बचाएं पर्यावरण
Eco Friendly Sawan Puja: सावन का महीना आते ही घर-घर में भगवान शिव की पूजा, जलाभिषेक और व्रत-उपवास का सिलसिला शुरू हो जाता है. मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती है और लोग पूरे मन से भोलेनाथ की भक्ति में जुट जाते हैं, लेकिन इस दौरान एक ऐसी बात अक्सर नजरअंदाज हो जाती है, जिस पर ध्यान देना आज के समय की जरूरत है. पूजा के बाद बचने वाले प्लास्टिक, पॉलीथिन, फूल-मालाएं, पैकेजिंग और दूसरे पूजा सामग्री का कचरा कई बार नदियों, तालाबों और सार्वजनिक जगहों पर पहुंच जाता है. इससे न सिर्फ गंदगी फैलती है, बल्कि पर्यावरण को भी नुकसान होता है. अच्छी बात यह है कि थोड़ी-सी समझदारी अपनाकर सावन की पूजा को पहले जितना ही पवित्र और उससे भी ज्यादा जिम्मेदार बनाया जा सकता है.
मानसून सक्रिय, छत्तीसगढ़ में अगले 3-4 दिनों तक जमकर बरसेंगे बादल, आज इन जिलों में बारिश की चेतावनी
उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उससे सटे गंगीय पश्चिम बंगाल और उत्तरी ओडिशा के तटों पर बने निम्न दबाव के प्रभाव से अगले 48 घंटो तक छत्तीसगढ़ में अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने की प्रबल संभावना है। वहीं एक-दो स्थानों पर भारी से अति भारी बारिश होने के आसार हैं।
रविवार को 26 जिलों में बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। रायपुर में आकाश सामान्यत: मेघमय रहने तथा गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है।
मौसम केंद्र रायपुर की दैनिक रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उससे सटे पश्चिम बंगाल तट पर बना कम दबाव का क्षेत्र उसी क्षेत्र में बना हुआ है। इससे जुड़ा चक्रवाती परिसंचरण समुद्र तल से 9.4 किमी की ऊंचाई तक फैला हुआ है। इसके अगले 2-3 दिनों तक उसी क्षेत्र में बने रहने और और अधिक स्पष्ट होने की संभावना है।
समुद्र तल पर मानसून द्रोणििका जैसलमेर, दक्षिण-पश्चिम राजस्थान और आसपास के निम्न दबाव वाले क्षेत्र के केंद्र, र्योपुर, दतिया, सीधी, डाल्टनगंज और उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी व उससे सटे पश्चिम बंगाल तट पर बने निम्न दबाव वाले क्षेत्र के केंद्र से होते हुए दक्षिण-पूर्व की ओर उत्तर-पूर्व बंगाल की खाड़ी तक जा रही है और समुद्र तल से 1.5 किमी की ऊंचाई तक फैली हुई है। उपरोक्त दोनों निम्न दबाव क्षेत्रों से संबंध चक्रवाती परिसंचरणों से युक्त पूर्व-पश्चिम कतरनी क्षेत्र, जो मध्य भारत में औसत समुद्र तल से 3.1 से 5.8 किमी की ऊंचाई के बीच बना हुआ है। इसके असर से प्रदेश में अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम और कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है। इस दौरान मेघगर्जन, बिजली गिरने चमकने और तेज आंधी के भी आसार हैं।
रविवार को इन जिलों में अलर्ट
महासमुंद, बलौदा बाजार, जांजगीर-चांपा, बिलासपुर, मुंगेली, नारायणपुर, कोंडागांव, उत्तर बस्तर कांकेर, धमतरी, बालोद, राजनांदगांव, गरियाबंद, महासमुंद, रायपुर, बलौदा बाजार, रायगढ़, कोरबा, गौरिला-पेंड़ा-मरवाही, दुर्ग, बेमेतरा, कबीरधाम, सुकमा, बीजापुर, दक्षिण बस्तर, दंतेवाड़ा, बस्तर, जशपुर, सरगुजा, सूरजपुर, कोरिया में मध्यम से तेज बारिश के साथ मेघगर्जन और आकाशीय बिजली गिरने चमकने की संभावना है। इस दौरान हवा की गति 60 से 80 किमी मीटर प्रति घंटा रह सकती है।
अबतक छत्तीसगढ़ में कहां कितनी हुई बारिश
- राज्य शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा 1 जून से 23 जुलाई 2026 तक औसतन 403.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की जा चुकी है, जो कि बीते 10 वर्षों के औसत (436.3 मिमी) का लगभग 92.5 प्रतिशत है।
- आंकड़ों के अनुसार, सारंगढ़-बिलाईगढ़ में सामान्य औसत से 186.9% अधिक (639 मिमी) बारिश दर्ज की जा चुकी है। इसी तरह बलरामपुर में 158.4%, जांजगीर-चांपा में 127.5%, सक्ती में 123.8%, और प्रदेश की राजधानी रायपुर में 123.1% बारिश हो चुकी है।
- प्रदेश के दक्षिणी छोर पर स्थित सुकमा और बीजापुर जिलों में स्थिति सबसे कमजोर है, जहां इस सीजन की औसत बारिश की तुलना में अब तक क्रमशः मात्र 48.7% और 48.8% पानी ही गिरा है।
- मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में 56.1%, कांकेर में 58.9%, कोंडागांव में 59.3% और बस्तर में 61.1% में भी मानसून की चाल काफी सुस्त बनी हुई है। उत्तर के सरगुजा में 77.2% और जशपुर में 71.6% जिलों में भी सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है।
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