8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग से पेंशनभोगियों की नजर, न्यूनतम पेंशन 45 हजार करन की मांग
8th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों के बाद अब पेंशनर्स की नजर भी आठवें वेतन आयोग पर टिकी हुई हैं. आठवें वेतन आयोग के आने के बाद सरकारी कर्मचारियों की सैलरी के साथ-साथ पेंशनर्स की पेंशन में भी बड़े बदलाव होने की उम्मीद जताई जा रही है. ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि अगर नया वेतन सिस्टम लागू होता है तो पेंशनर्स की पेंशन आखिर कितनी बढ़ेगी?
फिलहाल हम आपको बताते हैं कि आठवें वेतन आयोग के तहत केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक पेंशन 9000 रुपये प्रति महीने है. अब पेंशनर्स संगठन आठवें वेतन आयोग के सामने पेंशन बढ़ाने की कई मांगे रख रहे हैं. इसमें सबसे ज्यादा चर्चा न्यूनतम पेंशन को 45,000 करने की मांग है.
पेंशनर संगठन भारत पेंशनर समाज यानी बीपीएस ने मांग की है कि आठवें वेतन आयोग के तहत न्यूनतम बेसिक सैलरी को बढ़ाकर कम से कम 45,000 रुपये प्रति महीने किया जाना चाहिए. इसके अलावा संगठन ने महंगाई राहत यानी डीआर में भी बदलाव की बड़ी मांग उठा दी है. मांग है कि डीआर को हर 3 महीने में बढ़ाया जाए. साथ ही जब डीआर 25% से ज्यादा हो जाए तो उसे बेसिक पेंशन में जोड़ दिया जाए. लेकिन यहां एक बात समझना बहुत ज्यादा जरूरी हो गया है.
वित्त मंत्री सीतारमण के नेतृत्व वाला प्रतिनिधिमंडल चौथे आईएसएमआर सम्मेलन में भाग लेने के लिए सिंगापुर के लिए हुआ रवाना
नई दिल्ली, 19 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण भारत और सिंगापुर के बीच आर्थिक सहयोग को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से आयोजित चौथे भारत-सिंगापुर मंत्रिस्तरीय गोलमेज सम्मेलन (आईएसएमआर) में भाग लेने के लिए बुधवार को सिंगापुर रवाना हो गई हैं। वित्त मंत्रालय ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी साझा की।
वित्त मंत्रालय के अनुसार, निर्मला सीतारमण एक उच्चस्तरीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रही हैं, जिसमें विदेश मंत्री एस. जयशंकर, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी तथा वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद शामिल हैं।
वर्ष 2022 में स्थापित भारत-सिंगापुर मंत्रिस्तरीय गोलमेज सम्मेलन दोनों देशों के बीच एक उच्चस्तरीय आर्थिक तंत्र है, जिसका उद्देश्य द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग की समीक्षा करना और साझेदारी के नए क्षेत्रों की पहचान करना है।
वित्त मंत्रालय ने बताया कि इस बार का सम्मेलन छह प्रमुख क्षेत्रों में अब तक हुई प्रगति की समीक्षा करेगा, जिनमें उन्नत विनिर्माण, कनेक्टिविटी, डिजिटलीकरण, स्वास्थ्य एवं औषधि, कौशल विकास और सतत विकास शामिल हैं। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए उभरते अवसरों पर भी चर्चा की जाएगी।
आईएसएमआर दोनों देशों को एक ऐसा मंच उपलब्ध कराता है, जहां वे विभिन्न क्षेत्रों में हुई प्रगति का आकलन कर सकते हैं और आर्थिक भागीदारी को और गहरा करने के उपायों पर विचार कर सकते हैं। भारत और सिंगापुर के बीच निवेश, डिजिटल अर्थव्यवस्था, तकनीकी सहयोग, वित्तीय सेवाओं और बुनियादी ढांचे के क्षेत्रों में पहले से मजबूत संबंध हैं, जिन्हें और विस्तार देने पर इस बैठक में विशेष ध्यान रहने की उम्मीद है।
इस बीच, विदेश मंत्री एस. जयशंकर सम्मेलन से पहले ही मंगलवार को सिंगापुर पहुंच चुके थे। भारत में सिंगापुर के उच्चायुक्त साइमन वोंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उनका स्वागत करते हुए कहा कि चौथे भारत-सिंगापुर मंत्रिस्तरीय गोलमेज सम्मेलन के लिए विदेश मंत्री का सिंगापुर आगमन दोनों देशों के मजबूत संबंधों का प्रतीक है।
विदेश मंत्रालय (एमईए) के अनुसार, आईएसएमआर भारत और सिंगापुर के बीच पारंपरिक क्षेत्रों के अलावा नए और उभरते क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। इसका पहला सम्मेलन वर्ष 2022 में आयोजित किया गया था। इसके बाद दूसरा सम्मेलन अगस्त 2024 में सिंगापुर में और तीसरा सम्मेलन अगस्त 2025 में नई दिल्ली में आयोजित हुआ था।
--आईएएनएस
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