Damp Wall Tips: दीवार की सीलन का राज खोलेगा एल्युमिनियम फॉयल! बिना तोड़-फोड़ करें ये आसान टेस्ट
Wall Moisture Check At Home: बारिश और उमस में दीवार पर सीलन के दाग दिखें तो तुरंत पेंट कराने की जरूरत नहीं। पहले यह समझना जरूरी है कि दीवार पर नमी कमरे की हवा से जम रही है या अंदर से पानी रिस रहा है। इसका अंदाजा लगाने के लिए किचन में रखी एल्युमिनियम फॉयल भी काम आ सकती है। बस फॉयल और टेप की मदद से एक आसान-सा टेस्ट करें और जानें, दीवार की नमी की असली कहानी क्या है।
कैसे करें एल्युमिनियम फॉयल टेस्ट?
सबसे पहले जिस हिस्से पर सीलन दिखाई दे रही है, उसे कपड़े से अच्छी तरह सुखा लें। इसके बाद इतना एल्युमिनियम फॉयल काटें कि हिस्से को पूरी तरह ढक सके। अब फॉयल को दीवार पर चिपकाकर उसके चारों किनारों को टेप से अच्छी तरह सील कर दें।
किनारों पर कोई गैप नहीं रहना चाहिए, क्योंकि वहां से कमरे की हवा अंदर जाने पर टेस्ट का नतीजा बदल सकता है। फॉयल को करीब 24 से 48 घंटे तक उसी जगह लगा रहने दें। इसके बाद इसे सावधानी से हटाकर फॉयल की दोनों सतहों को देखें।
फॉयल के किस तरफ नमी मिले तो क्या समझें?
अगर पानी की बूंदें फॉयल की बाहर तरफ दिखाई देती हैं, तो यह कमरे की हवा में मौजूद नमी की ओर इशारा कर सकता है। वहीं, अगर नमी फॉयल की अंदर वाली सतह पर मिलती है, तो इसका मतलब हो सकता है कि पानी दीवार के अंदर से आ रहा है। इसकी वजह बाहरी पानी का रिसाव या जमीन से ऊपर आती नमी जैसी समस्या हो सकती है।
सीलन की वजह जानना क्यों जरूरी है?
कंडेन्सेशन और दीवार के अंदर से आने वाली नमी का इलाज अलग-अलग होता है। अगर समस्या कमरे में ज्यादा नमी की है, तो बेहतर वेंटिलेशन, एग्जॉस्ट फैन और हवा के बेहतर सर्कुलेशन से मदद मिल सकती है।
लेकिन अगर पानी दीवार के अंदर से रिस रहा है, तो सिर्फ कमरे की हवा को सुखाने से समस्या खत्म नहीं होगी। ऐसी स्थिति में पाइप लीकेज, बाहरी दीवार, छत, दरार या वॉटरप्रूफिंग जैसी वजहों की जांच जरूरी हो सकती है।
क्या फॉयल टेस्ट से पूरी तरह समस्या का पता चल जाता है?
यह तरीका सिर्फ शुरुआती संकेत देता है और इसे किसी प्रोफेशनल नमी जांच का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। कुछ लीकेज खास मौसम या तेज बारिश के दौरान ही दिखाई दे सकते हैं, इसलिए एक बार टेस्ट में नमी न मिलने का मतलब यह नहीं कि दीवार में कोई समस्या बिल्कुल नहीं है।
(Disclaimer): यह जानकारी सामान्य घरेलू जानकारी के लिए है। एल्युमिनियम फॉयल टेस्ट केवल शुरुआती संकेत दे सकता है, इसे प्रोफेशनल जांच का विकल्प न मानें। दीवार पर लगातार या ज्यादा सीलन, रिसाव या फफूंदी होने पर विशेषज्ञ की सलाह लें।
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