Seeds Laddu Recipe: डाइट के दौरान मीठे की क्रेविंग! ट्राई करें बीज और ड्राई फ्रूट्स से बने ये हेल्दी लड्डू
Seeds Laddu Recipe: आजकल लोग स्वाद के साथ पोषण को भी अपनी डाइट का हिस्सा बनाने की कोशिश करते हैं। ऐसे में सीड्स और ड्राई फ्रूट्स से बने लड्डू एक आसान होममेड स्नैक हो सकते हैं। इन लड्डुओं में अलग-अलग तरह के बीजों के साथ ड्राई फ्रूट्स और प्राकृतिक मिठास का इस्तेमाल किया जा सकता है।
इन्हें किसी बीमारी का इलाज या कैल्शियम की कमी पूरी करने का एकमात्र जरिया नहीं माना जाना चाहिए। जानें सीड्स लड्डू की आसान रेसिपी।
किन चीजों से तैयार होंगे ये लड्डू?
इन लड्डुओं के लिए आप तिल, कद्दू के बीज, सूरजमुखी के बीज और अलसी ले सकते हैं। स्वाद और पोषण बढ़ाने के लिए बादाम जैसे ड्राई फ्रूट्स भी मिलाए जा सकते हैं।
मिठास के लिए खजूर का इस्तेमाल किया जा सकता है। जरूरत के अनुसार थोड़ी मात्रा में घी भी डाला जा सकता है, जिससे मिश्रण आसानी से बंध जाता है।
सीड्स लड्डू बनाने का आसान तरीका
स्टेप 1: सबसे पहले सभी बीजों को अलग-अलग या एक साथ हल्का भून लें। ध्यान रखें कि बीज ज्यादा न जलें, वरना स्वाद खराब हो सकता है।
स्टेप 2: अब भुने हुए बीजों को ठंडा करके दरदरा पीस लें। इसमें कटे हुए या पिसे हुए ड्राई फ्रूट्स मिलाएं।
स्टेप 3: इसके बाद खजूर को मसलकर या पीसकर इस मिश्रण में डालें। जरूरत लगे तो थोड़ा घी मिलाकर सभी चीजों को अच्छी तरह मिक्स करें।
स्टेप 4: जब मिश्रण हाथ में दबाने पर आसानी से बंधने लगे, तो इसके छोटे हिस्से लेकर गोल लड्डू बना लें। तैयार लड्डुओं को एयरटाइट डिब्बे में रखा जा सकता है।
तिल को क्यों माना जाता है खास?
इन लड्डुओं में इस्तेमाल होने वाला तिल कैल्शियम का अच्छा खाद्य स्रोत माना जाता है। वहीं, अलग-अलग सीड्स डाइट में फाइबर, प्रोटीन, हेल्दी फैट और कई मिनरल्स जोड़ सकते हैं। कद्दू के बीज और सूरजमुखी के बीज भी पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, जबकि अलसी में फाइबर और ओमेगा-3 फैटी एसिड (ALA) पाया जाता है।
कितनी मात्रा में खाएं?
सीड्स, ड्राई फ्रूट्स और खजूर पौष्टिक होने के साथ कैलोरी भी बढ़ा सकते हैं। इसलिए इन्हें सीमित मात्रा में खाना बेहतर है। किसी व्यक्ति को कैल्शियम की कमी है या वह किसी खास डाइट का पालन कर रहा है, तो केवल इन लड्डुओं पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह लेना बेहतर रहेगा।
घर पर बने ये लड्डू संतुलित डाइट का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन इन्हें किसी पोषक तत्व की कमी का इलाज नहीं समझना चाहिए। अलग-अलग खाद्य पदार्थों से संतुलित पोषण लेना ज्यादा जरूरी है।
(Disclaimer): यह लेख सामान्य पोषण संबंधी जानकारी के लिए है। किसी बीमारी, पोषक तत्वों की कमी या विशेष डाइट से जुड़ी स्थिति में डॉक्टर या योग्य डाइटिशियन की सलाह लें।
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Damp Wall Tips: दीवार की सीलन का राज खोलेगा एल्युमिनियम फॉयल! बिना तोड़-फोड़ करें ये आसान टेस्ट
Wall Moisture Check At Home: बारिश और उमस में दीवार पर सीलन के दाग दिखें तो तुरंत पेंट कराने की जरूरत नहीं। पहले यह समझना जरूरी है कि दीवार पर नमी कमरे की हवा से जम रही है या अंदर से पानी रिस रहा है। इसका अंदाजा लगाने के लिए किचन में रखी एल्युमिनियम फॉयल भी काम आ सकती है। बस फॉयल और टेप की मदद से एक आसान-सा टेस्ट करें और जानें, दीवार की नमी की असली कहानी क्या है।
कैसे करें एल्युमिनियम फॉयल टेस्ट?
सबसे पहले जिस हिस्से पर सीलन दिखाई दे रही है, उसे कपड़े से अच्छी तरह सुखा लें। इसके बाद इतना एल्युमिनियम फॉयल काटें कि हिस्से को पूरी तरह ढक सके। अब फॉयल को दीवार पर चिपकाकर उसके चारों किनारों को टेप से अच्छी तरह सील कर दें।
किनारों पर कोई गैप नहीं रहना चाहिए, क्योंकि वहां से कमरे की हवा अंदर जाने पर टेस्ट का नतीजा बदल सकता है। फॉयल को करीब 24 से 48 घंटे तक उसी जगह लगा रहने दें। इसके बाद इसे सावधानी से हटाकर फॉयल की दोनों सतहों को देखें।
फॉयल के किस तरफ नमी मिले तो क्या समझें?
अगर पानी की बूंदें फॉयल की बाहर तरफ दिखाई देती हैं, तो यह कमरे की हवा में मौजूद नमी की ओर इशारा कर सकता है। वहीं, अगर नमी फॉयल की अंदर वाली सतह पर मिलती है, तो इसका मतलब हो सकता है कि पानी दीवार के अंदर से आ रहा है। इसकी वजह बाहरी पानी का रिसाव या जमीन से ऊपर आती नमी जैसी समस्या हो सकती है।
सीलन की वजह जानना क्यों जरूरी है?
कंडेन्सेशन और दीवार के अंदर से आने वाली नमी का इलाज अलग-अलग होता है। अगर समस्या कमरे में ज्यादा नमी की है, तो बेहतर वेंटिलेशन, एग्जॉस्ट फैन और हवा के बेहतर सर्कुलेशन से मदद मिल सकती है।
लेकिन अगर पानी दीवार के अंदर से रिस रहा है, तो सिर्फ कमरे की हवा को सुखाने से समस्या खत्म नहीं होगी। ऐसी स्थिति में पाइप लीकेज, बाहरी दीवार, छत, दरार या वॉटरप्रूफिंग जैसी वजहों की जांच जरूरी हो सकती है।
क्या फॉयल टेस्ट से पूरी तरह समस्या का पता चल जाता है?
यह तरीका सिर्फ शुरुआती संकेत देता है और इसे किसी प्रोफेशनल नमी जांच का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। कुछ लीकेज खास मौसम या तेज बारिश के दौरान ही दिखाई दे सकते हैं, इसलिए एक बार टेस्ट में नमी न मिलने का मतलब यह नहीं कि दीवार में कोई समस्या बिल्कुल नहीं है।
(Disclaimer): यह जानकारी सामान्य घरेलू जानकारी के लिए है। एल्युमिनियम फॉयल टेस्ट केवल शुरुआती संकेत दे सकता है, इसे प्रोफेशनल जांच का विकल्प न मानें। दीवार पर लगातार या ज्यादा सीलन, रिसाव या फफूंदी होने पर विशेषज्ञ की सलाह लें।
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