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आज का पंचांग 15 अगस्त 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त, राहुकाल, चौघड़िया, सूर्योदय-सूर्यास्त

आज की तिथि क्या है?: आज श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि है, जो शाम 05:34 बजे तक रहेगी। इसके बाद चतुर्थी तिथि शुरू हो जाएगी। यहां जानें ज्योतिषाचार्य डॉक्टर मनीष गौतम जी महाराज से आज के दिन का पंचांग, सूर्य, चंद्रमा की स्थिति और शुभ-अशुभ समय।

  • वार: शनिवार
  • नक्षत्र: उत्तर फाल्गुनी-रात 03:22 बजे तक
  • योग: शिव योग-सुबह 07:03 बजे तक
  • करण: तैतिल-सुबह 06:03 बजे तक, इसके बाद गारा-शाम 05:34 बजे तक
  • चंद्र राशि: सिंह
  • विक्रमी संवत: 2083
  • शक संवत: 1948, पराभव
  • मास: श्रावण

शुभ मुहूर्त

  • अभिजीत मुहूर्त: 11:56 बजे से 12:48 बजे तक
  • ब्रह्म मुहूर्त: लगभग 04:00 बजे से 04:48 बजे तक
  • अमृत मुहूर्त: दिन के शुभ समय में अमृत काल का उपयोग पूजा-पाठ एवं धार्मिक कार्यों के लिए किया जा सकता है।
  • विजय मुहूर्त: दोपहर लगभग 02:30 बजे से 03:20 बजे तक
  • शुभ कार्य के लिए अभिजीत मुहूर्त 11:56 से 12:48 बजे तक विशेष माना जाएगा।

राहुकाल और अशुभ समय

  • राहुकाल: 09:06 बजे से 10:44 बजे तक
  • यमगण्ड: 01:59 बजे से 03:37 बजे तक
  • गुलिक काल: 07:28 बजे से 09:06 बजे तक
  • दुर्मुहूर्त: दिन में पड़ने वाले दुर्मुहूर्त में शुभ कार्य करने से बचना चाहिए।

सूर्योदय और चंद्रोदय

  • सूर्योदय: सुबह 05:51 बजे
  • सूर्यास्त: शाम 06:53 बजे
  • चंद्रोदय: सुबह 07:14 बजे
  • चंद्रास्त: रात 08:01 बजे

आज के व्रत
हरियाली तीज व्रत श्रावण शुक्ल तृतीया के दिन रखा जाने वाला प्रमुख व्रत है। इस दिन विशेष रूप से माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा की जाती है। 2026 में हरियाली तीज 15 अगस्त को पड़ रही है।

आज का पर्व

  • हरियाली तीज
  • स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त को भारत का स्वतंत्रता दिवस भी मनाया जाता है।

आज का धार्मिक महत्व
श्रावण शुक्ल तृतीया को हरियाली तीज के रूप में विशेष धार्मिक महत्व प्राप्त है। मान्यता है कि इस दिन माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। इसलिए विवाहित महिलाएं पति की लंबी आयु, सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा, श्रृंगार, मेहंदी और झूला झूलने की परंपरा भी कई क्षेत्रों में प्रचलित है। तृतीया तिथि, उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र और शिव योग का संयोग धार्मिक दृष्टि से शुभ माना जाता है।

आज राहुकाल कब है?: 15 अगस्त 2026 को राहुकाल सुबह 09:06 बजे से 10:44 बजे तक रहेगा।

आज कौन सा व्रत है?: आज हरियाली तीज का व्रत रखा जाएगा। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है।

आज कौन सा नक्षत्र है?: आज उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र है, जो रात 03:22 बजे तक रहेगा।

आज कौन सा योग है?: आज शिव योग है, जो सुबह 07:03 बजे तक रहेगा।

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Right to Fly National Flag: आजादी के पांच दशक बाद तक आम नागरिकों को नहीं थी तिरंगा फहराने की छूट; जानिए कैसे मिला यह अधिकार

देशभर में स्वतंत्रता दिवस का उल्लास है और केंद्र सरकार के 'हर घर तिरंगा' अभियान के तहत करोड़ों नागरिक अपने घरों पर शान से राष्ट्रीय ध्वज लहरा रहे हैं। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि 1947 में देश के आजाद होने के बाद करीब 50 वर्षों तक आम नागरिकों को अपनी मर्जी से रोजाना तिरंगा फहराने की इजाजत नहीं थी। तत्कालीन नियमों और फ्लैग कोड के सख्त प्रतिबंधों के कारण केवल गिने-चुने राष्ट्रीय पर्वों पर ही आम जनता को झंडा फहराने की अनुमति दी गई थी।

​आजादी के बाद क्यों लगाई गई थी आम जनता पर पाबंदी 
वर्ष 1950 में राष्ट्रीय ध्वज के अनावरण और संविधान लागू होने के बाद से ही ध्वज के सम्मान को बनाए रखने के लिए नियम तय किए गए थे। सरकार का मुख्य दृष्टिकोण यह था कि तिरंगे के उपयोग को सीमित रखा जाए ताकि किसी भी तरह से इसका अनादर न हो।

सरकार की आशंका थी कि बिना रोक-टोक छूट देने से इसका व्यावसायिक दुरुपयोग हो सकता है, रैलियों या प्रदर्शनों में अंधाधुंध इस्तेमाल होगा और रख-रखाव में लापरवाही बरती जा सकती है। इसी वजह से देश में यह आम धारणा बन गई कि राष्ट्रीय ध्वज का उपयोग केवल मंत्रियों, सरकारी भवनों और प्रशासनिक कार्यालयों तक ही सीमित है।

​फ्लैग कोड की वैधानिक स्थिति और उससे जुड़े नियम 
राष्ट्रीय ध्वज के उपयोग को नियमित करने के लिए संसद ने दो मुख्य कानून पारित किए थे- पहला, व्यावसायिक दुरुपयोग रोकने के लिए 'द एम्ब्लेम्स एंड नेम्स (प्रिवेंशन ऑफ इम्प्रॉपर यूज) एक्ट, 1950' और दूसरा, राष्ट्रीय प्रतीकों के अपमान को रोकने के लिए 'प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट्स टू नेशनल ऑनर एक्ट, 1971'। इन कानूनों के अलावा गृह मंत्रालय द्वारा 'फ्लैग कोड' जारी किया गया था।

यह कोड संसद से पारित कानून नहीं था, बल्कि कार्यपालिका के प्रशासनिक दिशा-निर्देशों का एक समूह था। इसके तहत आम नागरिकों, निजी संस्थानों और स्कूलों को केवल स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस जैसे खास अवसरों पर ही झंडा फहराने की इजाजत थी, जबकि सामान्य दिनों में निजी परिसरों पर झंडा लगाना प्रतिबंधित माना जाता था।

​रायगढ़ की फैक्ट्री में फहराया तिरंगा और कमिश्नर की आपत्ति 
इस पूरी व्यवस्था को चुनौती तब मिली जब अमेरिका से पढ़ाई पूरी कर लौटे युवा उद्योगपति नवीन जिंदल ने अपने देश में तिरंगा फहराने की पहल की। अमेरिका में पढ़ाई के दौरान यूनिवर्सिटी स्टूडेंट सीनेट के अध्यक्ष रहते हुए उन्हें गर्व से ध्वज फहराने की आदत थी। 1990 के दशक में भारत लौटकर जब उन्होंने तत्कालीन मध्य प्रदेश (वर्तमान छत्तीसगढ़) के रायगढ़ में अपनी फैक्ट्री के कार्यालय परिसर में रोजाना तिरंगा फहराना शुरू किया, तो सितंबर 1994 में बिलासपुर के तत्कालीन डिवीजनल कमिश्नर ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई।

कमिश्नर ने चेतावनी दी कि तत्कालीन फ्लैग कोड के तहत निजी परिसर में झंडा फहराना गैर-कानूनी है और ऐसा करने पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

​अदालत की चौखट तक कैसे पहुंचा मामला 

अपनी ही मातृभूमि पर अपनी इमारत पर राष्ट्रध्वज न फहरा पाने की पाबंदी नवीन जिंदल को स्वीकार नहीं हुई। उन्होंने पूर्व कानून मंत्री व वरिष्ठ अधिवक्ता शांति भूषण सहित देश के शीर्ष कानूनी विशेषज्ञों से परामर्श लिया। कानूनी राय में यह बात सामने आई कि संसद के दोनों कानूनों में कहीं भी सम्मानपूर्वक झंडा फहराने पर रोक नहीं है, बल्कि यह पाबंदी केवल सरकारी प्रशासनिक निर्देशों के जरिए थोपी गई है।

इसके बाद नवीन जिंदल ने दिल्ली हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर कर फ्लैग कोड के उन कड़े प्रतिबंधों को चुनौती दी जो नागरिकों को अपनी भावनाएं व्यक्त करने से रोकते थे।

​दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला और केंद्र सरकार के तर्क 
मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने तर्क दिया कि 'द एम्ब्लेम्स एंड नेम्स एक्ट, 1950' की धारा 3 के तहत सरकार को सार्वजनिक स्थानों या इमारतों पर ध्वज के उपयोग को नियंत्रित और प्रतिबंधित करने का पूरा अधिकार है, और यह नीतिगत फैसला अदालतों के दखल से बाहर होना चाहिए।

हालांकि, सितंबर 1995 में दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकार के तर्कों को खारिज करते हुए नवीन जिंदल के पक्ष में फैसला सुनाया। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि फ्लैग कोड संसद से पारित कानून नहीं बल्कि प्रशासनिक निर्देश है, इसलिए इसके जरिए नागरिकों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को छीना नहीं जा सकता। यदि कोई नागरिक देश के किसी वास्तविक कानून का उल्लंघन किए बिना गरिमा के साथ तिरंगा फहराना चाहता है, तो उसे रोका नहीं जा सकता।

​सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप और फ्लैग कोड ऑफ इंडिया 2002 
दिल्ली हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर कर दी। जब यह अपील शीर्ष अदालत में लंबित थी, तब सुप्रीम कोर्ट के सुझाव पर केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय ध्वज से जुड़े प्रतिबंधों की समीक्षा के लिए अक्टूबर 2000 में एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया।

इस समिति की सिफारिशों के आधार पर सरकार ने 'फ्लैग कोड ऑफ इंडिया, 2002' तैयार किया, जो 26 जनवरी 2002 से देश में प्रभावी हुआ। इस नए कोड के जरिए पहली बार आम नागरिकों, निजी संस्थानों और शैक्षणिक संगठनों को साल के सभी दिनों में मर्यादा के साथ राष्ट्रध्वज फहराने की व्यवहारिक अनुमति मिल गई।

​23 जनवरी 2004: सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की पीठ का ऐतिहासिक फैसला 
रायगढ़ की फैक्ट्री से शुरू हुआ यह संघर्ष करीब एक दशक बाद 23 जनवरी 2004 को अपने अंतिम मुकाम पर पहुंचा। तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जस्टिस वी.एन. खरे, जस्टिस बृजेश कुमार और जस्टिस एस.बी. सिन्हा की तीन जजों की पीठ ने 'यूनियन ऑफ इंडिया बनाम नवीन जिंदल' मामले में सर्वसम्मति से ऐतिहासिक फैसला सुनाया।

शीर्ष अदालत ने स्पष्ट शब्दों में व्यवस्था दी कि सम्मान और गरिमा के साथ राष्ट्रीय ध्वज फहराना संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अभिन्न अंग है, जो कि प्रत्येक भारतीय नागरिक का एक मौलिक अधिकार है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह अधिकार असीमित नहीं है और अनुच्छेद 19(2) तथा राष्ट्रीय सम्मान के संरक्षण से जुड़े कानूनों के तहत इस पर युक्तियुक्त प्रतिबंध लागू रहेंगे।

​नियमों में निरंतर बदलाव और 24 घंटे तिरंगा फहराने की आधुनिक छूट 
इस ऐतिहासिक फैसले के बाद राष्ट्रीय ध्वज से जुड़े नियमों में समय-समय पर बड़े सुधार किए गए। दिसंबर 2021 में सरकार ने फ्लैग कोड में संशोधन कर हाथ से बने खादी के अलावा मशीन से बने और पॉलिएस्टर के झंडों के उपयोग को भी मंजूरी दी। इसके बाद जुलाई 2022 में एक और अहम संशोधन किया गया, जिसके तहत यदि तिरंगा खुले आसमान के नीचे या किसी नागरिक के निजी आवास पर फहराया गया है, तो उसे दिन और रात (24 घंटे) फहराए रखने की अनुमति दे दी गई। आज देश का हर नागरिक जिस गर्व से अपने घर पर तिरंगा लहराता है, उसकी नींव इसी ऐतिहासिक अदालती लड़ाई से जुड़ी हुई है।

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  Sports

Kuldeep Yadav टीम योजना में शामिल हैं, साइराज बहुतुले ने गॉल टेस्ट के बाद किया बचाव

भारत के स्पिन गेंदबाजी कोच साइराज बहुतुले ने कुलदीप यादव का बचाव करते हुए शुक्रवार को कहा कि बाएं हाथ का यह कलाई का स्पिनर टीम प्रबंधन की योजनाओं का हिस्सा है और एक मैच में खराब प्रदर्शन से उनकी काबिलियत तय नहीं होती। पहले टेस्ट में कुलदीप को दोनों पारियों में कुल 25 ओवर गेंदबाजी करने के बाद सिर्फ एक विकेट मिला था। दूसरी ओर बाएं हाथ के युवा स्पिनर मानव सुथार और अनुभवी रविंद्र जडेजा ने मिलकर 14 विकेट लिए थे।

बहुतुले ने कहा, ‘‘कुलदीप शानदार गेंदबाजी कर रहे हैं। गॉल में परिस्थितियां अलग थीं। उन्हें एक अलग भूमिका निभानी पड़ी।कुलदीप हमेशा से मैच जिताने वाले गेंदबाज रहे हैं और टीम की योजना में शामिल हैं।’’ बहुतुले ने कहा, ‘‘ सभी स्पिनरों को नरम गेंद से परेशानी होती है।

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लेकिन बाएं हाथ के स्पिनर या ऑफ स्पिनर उंगलियों से गेंद को नियंत्रित कर लेते हैं, इसलिए उनके लिए यह थोड़ा आसान होता है। वहीं, लेग स्पिनर के लिए नरम गेंद से गेंदबाजी करना ज्यादा मुश्किल होता है, क्योंकि गेंद की सीम दबकर नीचे चली जाती है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ कलाई के स्पिनर के लिए नरम गेंद से गेंदबाजी करना ज्यादा मुश्किल होता है। गेंद की सीम नरम होने के कारण नीचे चली जाती है।

ऐसे में गेंद को मनचाही तरह से घुमाना और उछाल हासिल करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।’’ बहुतुले ने कहा, ‘‘एक मैच के प्रदर्शन से किसी गेंदबाज का आकलन नहीं किया जा सकता। कुलदीप ने भी परिस्थितियों के मुताबिक अपनी भूमिका में बदलाव करने की पूरी कोशिश की।’’ गॉल की पिच और कूकाबुरा गेंद की स्थिति ने भी कुलदीप को अपनी गेंदबाजी की दिशा और गति में बदलाव करने के लिए मजबूर किया। गेंद की शुरुआती चमक खत्म होने के बाद वह नरम हो गई थी।

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मानव सुथार ने गॉल टेस्ट में 10 विकेट लेकर अपने शानदार प्रदर्शन को जारी रखा। उनकी गेंदबाजी से बहुतुले काफी प्रभावित नजर आए। बहुतुले ने कहा, ‘‘सुथार अब टीम के लिए एक भरोसेमंद खिलाड़ी बनते जा रहे हैं।

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घरेलू क्रिकेट में काफी गेंदबाजी करने के कारण उन्हें हर परिस्थिति में अपनी गेंदबाजी की अच्छी समझ है।’’ टीम प्रबंधन उन्हें अलग-अलग परिस्थितियों में गेंदबाजी करने के तरीके समझाने पर काम कर रहा है। इसमें अलग पिच, अलग बल्लेबाज और बाएं या दाएं हाथ के बल्लेबाज के खिलाफ रणनीति शामिल है। बहुतुले ने कहा, ‘‘ सुथार गेंद को अच्छी तरह टर्न कराते हैं और हमारे लिए बेहद भरोसेमंद गेंदबाज हैं।

वह लगातार उसी लाइन पर गेंदबाजी करते हैं, जिस पर हम चाहते हैं। इसी के साथ उनकी गेंदबाजी में भी लगातार निखार आ रहा है।

Fri, 21 Aug 2026 15:28:00 +0530

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