Hariyali Teej 2026: हरियाली तीज व्रत में भूलकर भी न करें ये 7 गलतियां, वरना अधूरी रह सकती है पूजा
सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरियाली तीज का पर्व मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं। कई जगहों पर महिलाएं झूला झूलने, तीज के गीत गाने और सुहाग सामग्री से जुड़े पारंपरिक रीति-रिवाजों में भी हिस्सा लेती हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हरियाली तीज के व्रत में सिर्फ पूजा-पाठ ही नहीं, बल्कि मन और व्यवहार में संयम रखना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। कुछ ऐसी बातें हैं, जिन्हें व्रत के दौरान करने से बचने की सलाह दी जाती है।
व्रत के दौरान मन को रखें शांत
हरियाली तीज पर व्रत रखने वाली महिलाओं को पूरे दिन शांत और सकारात्मक रहने की कोशिश करनी चाहिए। किसी से विवाद करना, गुस्सा करना या अपशब्द बोलना धार्मिक दृष्टि से उचित नहीं माना जाता। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का स्मरण करते हुए मन को शांत रखने की मान्यता है।
पूजा में रखें शुद्धता का ध्यान
पूजन के दौरान साफ और शुद्ध सामग्री का इस्तेमाल करना चाहिए। सुहाग सामग्री अर्पित करते समय टूटी या खराब वस्तुओं से बचने की धार्मिक मान्यता है। पूजा की सामग्री को श्रद्धा के साथ तैयार करना और शिव-पार्वती को विधि-विधान से अर्पित करना चाहिए।
कपड़ों के रंग को लेकर क्या मान्यता है?
हरियाली तीज के दिन हरे और लाल रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। वहीं, कुछ धार्मिक परंपराओं में काले और सफेद रंग के कपड़ों से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि, रंगों से जुड़ी मान्यताएं अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में अलग हो सकती हैं।
तीज की कथा अधूरी न छोड़ें
हरियाली तीज की पूजा में व्रत कथा सुनने का भी विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता के अनुसार कथा को श्रद्धापूर्वक पूरा सुनना चाहिए। इसके बाद आरती कर भगवान शिव और माता पार्वती का स्मरण किया जाता है।
घर के बड़ों का सम्मान करें
धार्मिक परंपराओं में बड़ों का आशीर्वाद लेना शुभ माना जाता है। इसलिए पूजा के बाद घर के बुजुर्गों का सम्मान करें और उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें। व्रत के दौरान घर में सकारात्मक और शांत वातावरण बनाए रखना बेहतर माना जाता है।
नोट: ऊपर बताए गए नियम धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में हरियाली तीज की पूजा-पद्धति और व्रत के नियम अलग हो सकते हैं।
PM Modi Independence Day Speech: विकसित भारत, ऊर्जा सुरक्षा से लेकर नक्सलवाद तक, लाल किले से पीएम मोदी के 10 बड़े संदेश
PM Modi Red Fort speech: स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर लाल किले से देश को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए संकल्पों के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं और बताया कि आज हर घर और हर मन में तिरंगे की भावना है। यह एक बेहद खास पल है क्योंकि आजादी के इतिहास में पहली बार लाल किले पर 'वंदे मातरम' की गूंज सुनाई दी है। आइए सिलसिलेवार तरीके से जानते हैं प्रधानमंत्री के भाषण की 10 सबसे बड़ी बातें और मुख्य संदेश:
1. वर्ष 2047 तक 'विकसित भारत' का निर्माण
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि देश का सबसे बड़ा लक्ष्य आने वाले 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाना है। जब दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश इस तरह का संकल्प लेता है, तो वैश्विक पटल पर भारत की छवि पूरी तरह बदल जाती है। आज दुनिया भारत को एक नए और सशक्त नजरिए से देख रही है और इस बड़े सपने को साकार करने की असली ऊर्जा 140 करोड़ देशवासियों के सामूहिक सामर्थ्य से मिल रही है।
#WATCH | Delhi: For the first time, the National Song Vande Mataram is rendered during Independence Day celebrations at Red Fort.
— ANI (@ANI) August 15, 2026
Prime Minister Shri Narendra Modi leads the 80th Independence Day Celebrations from the Red Fort. pic.twitter.com/miSIlH6Dki
2. ऊर्जा सुरक्षा और परमाणु ऊर्जा का महत्वाकांक्षी लक्ष्य
आज की आधुनिक तकनीक पूरी तरह से क्रिटिकल मिनरल्स और सेमीकंडक्टर पर टिकी हुई है। भविष्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा केंद्रों को सुचारू रूप से चलाने के लिए भारी मात्रा में बिजली की आवश्यकता होगी। इसी ऊर्जा मांग को पूरा करने के लिए सरकार परमाणु ऊर्जा को बढ़ावा दे रही है, जिसके तहत साल 2047 तक 100 गीगावॉट न्यूक्लियर पावर का बड़ा लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा देश में पांच नए न्यूक्लियर रिएक्टरों पर भी तेजी से काम चल रहा है।
3. बाढ़ और प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित परिवारों के साथ एकजुटता
देश के विभिन्न इलाकों में हाल ही में आई प्राकृतिक आपदाओं का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने अपनी गहरी संवेदना प्रकट की। असम, केरल, उत्तराखंड और नागालैंड समेत कई राज्यों में भारी मानसूनी बारिश, अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त किया है। उन्होंने देश को यह विश्वास दिलाया कि सरकार प्रभावित परिवारों के दर्द और पीड़ा को पूरी तरह महसूस करती है और इस मुश्किल वक्त में पूरा देश उनके साथ मजबूती से खड़ा है।
4. आत्मनिर्भरता का महत्व और संसाधनों के हथियारीकरण पर प्रहार
संकट के दौर को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि कैसे कुछ ताकतों ने पेट्रोल, डीजल, फर्टिलाइजर, दवाइयों और तकनीक जैसे जरूरी संसाधनों का हथियारीकरण करने की कोशिश की थी। यदि देश ने आत्मनिर्भरता के रास्ते को नहीं अपनाया होता, तो ऐसी गंभीर चुनौतियों से पार पाना असंभव होता। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि जिन बुनियादी विकास कार्यों को पूरा होने में पहले पांच दशक लग जाते थे, उन्हें मौजूदा सरकार ने महज 5 से 7 साल के भीतर जमीन पर उतार कर दिखाया है।
5. 'समुद्र मंथन' और समुद्री संसाधनों के द्वार खोलना
कच्चे तेल की विदेशी निर्भरता पर बोलते हुए उन्होंने स्वीकार किया कि पूर्व की गलत नीतियों के कारण समुद्र तट का 99 प्रतिशत हिस्सा 'नो गो एरिया' घोषित कर दिया गया था, जिससे खोजबीन का काम ठप पड़ गया था। सरकार ने इस पुरानी नीति को बदलकर महासागरों के भीतर अन्वेषण के रास्ते खोल दिए हैं। इसी विजन के तहत 'समुद्र मंथन' की घोषणा की गई थी और इस प्रक्रिया को गति देने के लिए हाल ही में 85 हजार करोड़ रुपये का भारी-भरकम फंड आवंटित किया गया है।
6. वैश्विक नेतृत्व और फॉर्च्युन 500 में भारतीय कंपनियों का दबदबा
प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि अब समय आ गया है जब दुनिया का नेतृत्व भारत के हाथों में होना चाहिए। वैश्विक स्तर पर शीर्ष फॉर्च्युन 500 कंपनियों की सूची में हमारे अपने ब्रांड्स होने चाहिए, दुनिया के अग्रणी बैंकों में भारतीय बैंकों की मजबूत हिस्सेदारी दिखनी चाहिए और फार्मा सेक्टर में भी भारत की बड़ी कंपनियां वैश्विक पहचान बनानी चाहिए। उन्होंने सभी राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों से अपनी कार्य-रफ़्तार को और तेज करने का आह्वान किया।
7. नक्सलवाद के खात्मे की ओर ऐतिहासिक कदम
माओवाद और नक्सलवाद पर कड़ा प्रहार करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि इस समस्या ने चार दशकों तक देश की एक बड़ी आबादी को आतंक के साये में रखा, जिसमें सुरक्षा बलों के करीब साढ़े तीन हजार जवानों ने अपने प्राणों की आहुति दी। साल 2014 में सरकार ने इसे जड़ से समाप्त करने की कसम खाई थी और आज जहां कभी हिंसक गोलियां चलती थीं, वहां विकास और विश्वास का तिरंगा लहरा रहा है। हालांकि, उन्होंने आगाह किया कि हथियार वाले नक्सल भले ही समाप्त हो गए हों, लेकिन 'दिमागी नक्सल' अब भी देश को अशांत करने की साजिश रच रहे हैं, जिन्हें पहचानकर पूरी तरह अलग-थलग करना जरूरी है।
8. 'शक्ति की सप्तधारा' और गुणवत्ता पर विशेष जोर
देश के विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए प्रधानमंत्री ने 'शक्ति की सप्तधारा' का आह्वान किया। इसके तहत छोटे-बड़े पुर्जे तैयार करने से लेकर डिजाइन और उत्पादन तक पूरी वैल्यू चेन पर भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का केंद्र बनाना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वैश्विक बाजार में टिकने के लिए 'क्वालिटी' से कभी समझौता नहीं किया जाएगा और हमारे उत्पाद ज़ीरो डिफेक्ट तथा यूजर-फ्रेंडली होने चाहिए।
9. युवाओं के लिए एआई (AI) ट्रेनिंग और मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग
युवा शक्ति को देश के भविष्य की रीढ़ बताते हुए उन्होंने बड़ी घोषणा की कि आगामी एक साल के भीतर एक करोड़ से अधिक युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके साथ ही, देश के जरूरतमंद और मेधावी छात्रों को विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।
10. ओलंपिक 2036 की मेजबानी और टैलेंट हंट अभियान
खेल जगत को लेकर सरकार के विजन को साझा करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत वर्ष 2036 के ओलंपिक खेलों की तैयारी में जुटा है और उन खेलों में भी अपनी भागीदारी सुनिश्चित करेगा जो अब तक अछूती रही हैं। देश के कोने-कोने से 5 से 15 वर्ष की आयु के बच्चों की खेल प्रतिभाओं को समय रहते तराशने के लिए एक राष्ट्रव्यापी 'टैलेंट हंट' अभियान शुरू किया जाएगा।
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