तेज बारिश के बीच झालावाड़ के स्कूल में फंसे बच्चे:चीख - पुकार मचने लगी, गांव वालों की मदद से 80 बच्चों को रेस्क्यू किया
झालावाड़ के एक गांव में बने सरकारी स्कूल में रोजाना की तरह कक्षाएं चल रही थीं। तब ही पास बहने वाले बरसाती नाले में अचानक पानी का बहाव तेज हो गया। कुछ ही देर में नाले का गंदा और तेज पानी स्कूल परिसर में घुसने लगा। देखते ही देखते पूरा स्कूल पानी से घिर गया और अंदर मौजूद बच्चों में चीख-पुकार मच गई। यह घटना झालावाड़ के मनोहरथाना क्षेत्र की ग्राम पंचायत टोडरी मीरा के झिकनी गांव की है। गांव वासियों की मदद से तकरीबन 80 बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। ये हालात तेज बारिश के बीच बच्चों को स्कूल से समय पर नहीं छोड़ने के चलते बने। टीचर्स और गांव वालों ने बच्चों को घर पहुंचाया बच्चों को सुरक्षित स्कूल ने निकालने के लिए स्कूल के 7 टीचर्स और ग्रामीणों ने साहस दिखाया और उन्हें बाहर निकाला। टीचर्स और गांव वालों की मदद से सभी बच्चों को उनके घर पहुंचाया गया। वहीं, नाले के तेज बहाव की चपेट में आने से स्कूल की करीब 50 फीट लंबी बाउंड्री टूट गई। चेन बनाकर तेज बहते पानी से निकाले बच्चे इस रेस्क्यू के दौरान पानी का बहाव इतना तेज था कि बच्चों को अकेले बाहर निकालना खतरनाक था। इसलिए शिक्षकों और गांव वालों ने एक-दूसरे का हाथ पकड़कर लोगों की चेन बनाई। इसी के सहारे बच्चों को एक-एक करके तेज बहते पानी से बाहर निकाला गया। सोशल मीडिया पर यूजर्स ने जताई नाराजगी इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर यूजर्स ने जमकर नाराजगी जताई। एक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा - ‘ये कोई झरना नहीं, झालावाड़ के सरकारी स्कूल की तस्वीर है। सरकार बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के दावे करती है, लेकिन स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं और जल निकासी तक नहीं है। यह शिक्षा व्यवस्था की बदहाली नहीं तो और क्या है?’ वहीं दूसरे यूजर ने लिखा - 'पिछले साल जिन भवनों को जमीदोंज किया, अभी तक उनके बनाने के बारे में कोई योजना नहीं है न बजट की स्वीकृति। जबकि शिक्षा मंत्री जी ने उनके विधानसभा क्षेत्र रामगंजमंडी में बागेश्वर बाबा के लिए करोड़ो रुपये खर्च किये। इतने बजट में तो पूरी विधानसभा के स्कूलों का कायाकल्प हो जाता। इसी साल गिर चुकी है झालावाड़ के एक स्कूल की छत इसी साल जुलाई में झालावाड़ जिले के मनोहर थाना क्षेत्र के पीपलोदी में राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय की छत गिरने से 7 छात्रों की मौत हो गई थी। जबकि 17 बच्चे घायल हुए थे। इसके बाद भी कुछ बच्चों के मलबे मे दबे होने की आशंका है। क्लास के अंदर करीब 60 बच्चे मौजूद थे। इस मामले में स्कूल के सभी 5 शिक्षकों को सस्पेंड किया गया है। जानकारी के मुताबिक बच्चों के बार-बार कहने पर भी कि मलबा गिर रहा है, शिक्षकों ने ध्यान नहीं दिया. इसलिए उनके खिलाफ एक्शन लिया गया है। बता दें कि स्कूल की छत गिरने से हुए हादसे के बाद इलाके के लोग मदद के लिए पहुंचे। मलबे में दबे बच्चों को लोग निकालने लगे। छत गिरने के बाद मलबे को देखकर ऐसा लग रहा था जैसे स्कूल खंडहर में तब्दील हो गया हो। ------------ ये खबर भी पढ़ें… 180 छात्र हॉस्टल छोड़कर 12 किमी पैदल घर निकले: कमरों में ठूंसकर रखे गए, खाने में कीड़ों की शिकायत, प्रिंसिपल का हुआ ट्रांसफर ओडिशा के एक हॉस्टल में लगभग 180 छात्र रह रहे थे। छात्रों ने आरोप लगाया कि उन्हें केवल दो कमरों में ठूंसकर रखा गया है। खाने की क्वालिटी खराब है। यहां तक कि चावल-दाल में कीड़े मिलने की शिकायत भी की। पूरी खबर यहां पढ़ें
देहरादून में दृष्टिबाधित छात्रों का प्रदर्शन:स्कॉलरशिप बंद, मंहगी किताबों से परेशान छात्रों ने किया आंदोलन, अब भूख हड़ताल की तैयारी
राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान (NIEPVD), देहरादून में दृष्टिबाधित छात्र-छात्राएं बीते पांच दिनों से धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। ये बच्चे अच्छी शिक्षा, शिक्षक और किताबों जैसी सुविधाओं को लेकर सिस्टम के खिलाफ नारे लगा रहे हैं। 10 अगस्त 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट में छात्रों ने संस्थान में हो रहे बुरे बर्ताव और शारीरिक हिंसा के गंभीर आरोप लगाए हैं। एक छात्रा के अनुसार, अलग-अलग प्रकार की दिव्यांगता वाले बच्चों के लिए अलग-अलग देखभाल और स्पेशल स्टाफ की जरूरत है, लेकिन ऐसी व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। एक अन्य छात्रा ने आरोप लगाया कि कुछ बच्चों को चोट पहुंचाई जाती है और लात-घूंसों से मारपीट की जाती है। स्कॉलरशिप दोबारा शुरू करने की मांग देहरादून के राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान में दृष्टिबाधित छात्रों के लिए 12वीं के बाद सरकार से मिलने वाली स्कॉलरशिप भी बंद कर दी गई है, जिससे काफी मदद मिलती थी। ये स्कॉलरशिप फिर से शुरू की जाना चाहिए। छात्रों का कहना है कि अगर समय रहते उनकी बात नहीं सुनी गई तो उन्हें मजूबरन भूख हड़ताल पर बैठना पड़ेगा। देहरादून के राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान में दृष्टिबाधित छात्र सस्ती किताबों की मांग भी कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि प्रशासन के साथ दो दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन उनकी मांगों का समाधान नहीं हुआ। इसलिए उन्होंने आंदोलन जारी रखने का फैसला किया है। छात्रों ने भूख हड़ताल शुरू करने की चेतावनी भी दी है। NIEPVD का देहरादून मॉडल स्कूल नर्सरी से कक्षा 12वीं तक दृष्टिबाधित बच्चों को शिक्षा देता है। इस समय वहां 247 बच्चे पढ़ रहे हैं। छात्राओं ने बताया कि संस्थान में किताबों के लिए पर्याप्त आर्थिक सहायता, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, प्रशिक्षित प्रशिक्षक और स्थायी निदेशक जैसी सुविधाएं नहीं हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि डिस्पेंसरी में उनके साथ दुर्व्यवहार किया जाता है और छात्रावास के खाने की क्वालिटी लगातार खराब बनी हुई है। इसके अतिरिक्त, किताबों की बढ़ती कीमतों को लेकर भी छात्र परेशान हैं। मल्टी डिसेबल बच्चों के लिए अलग यूनिट नहीं प्रदर्शन में शामिल एक दिव्यांग छात्रा ने कहा कि इस बार मल्टी डिसेबल बच्चों को एडमिशन दिया गया है। उनकी केयर करने के लिए अलग से कोई यूनिट नहीं है। एक दूसरी छात्रा ने कहा - इन बच्चों के लिए अलग टीचर होता है, गाइड करने वाले अगल होते हैं लेकिन जो टीचर यहां आए हैं, वो बच्चो को चोट पहुंचा रहे हैं। बच्चों के साथ मारपीट तक हो रही है। लात-घूसे मारे जाते हैं। यहां अलग डिसेबिलिटी वाले बच्चे बहुत परेशान हैं। सोशल मीडिया पर लोगों ने जताई नाराजगी सोशल मीडिया पर इस पोस्ट के वायरल होने के बाद कई यूजर्स इन छात्रों का समर्थन करते हुए अपनी राय दे रहे हैं। एक यूजर ने लिखा - दृष्टिबाधित छात्र-छात्राओं को अपनी मूलभूत सुविधाओं के लिए आंदोलन और भूख हड़ताल की नौबत आना किसी भी संवेदनशील व्यवस्था के लिए शर्मनाक है। मंत्रालय और संस्थान को तुरंत बातचीत कर उनकी जायज मांगों का समाधान करना चाहिए। अधिकार मांगना अपराध नहीं है। छात्रा ने बताया कि इस संस्थान के छात्र काफी पहले से सुविधाओं की मांग कर रहे थे। लिखित में भी रिक्वेस्ट की गई। लेकिन कोई सुनवाई नहीं होने के बाद छात्रों ने प्रदर्शन का रास्ता अपनाया है। हालांकि, प्रदर्शन के बाद कुछ चीजें ठीक हुई हैं, लेकिन अब भी बहुत सारी चीजों में सुधार की जरूरत है। छात्रों ने 6 प्रमुख मांगें प्रशासन के सामने रखी हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अभी तक उन्हें प्रशासन से कोई समाधान नहीं मिला है। मांगें पूरी नहीं होने पर छात्र भूख हड़ताल की तैयारी कर रहे हैं। 26 अप्रैल 2023 को खराब मोबाइल का किया विरोध NIEPVD के कक्षा 12वीं के छात्रों ने ADIP योजना के तहत मिले मोबाइल खराब होने को लेकर विरोध किया। छात्रों के अनुसार नवंबर 2020 में उन्हें जो फोन दिए गए थे, मार्च 2021 से उसमें तकनीकी समस्याएं आने लगीं। छात्रों ने कई बार शिकायत की। दिसंबर 2021 में अधिकारियों ने नए फोन देने का आश्वासन दिया। नवंबर 2022 में फिर CSR फंड से नए फोन देने की बात कही गई। लेकिन अप्रैल 2023 तक समस्या का समाधान नहीं हुआ। ये खबर भी पढ़ें 180 छात्र हॉस्टल छोड़कर 12 किमी पैदल घर निकले:कमरों में ठूंसकर रखे गए, खाने में कीड़ों की शिकायत, प्रिंसिपल का हुआ ट्रांसफर ओडिशा के एक हॉस्टल में लगभग 180 छात्र रह रहे थे। छात्रों ने आरोप लगाया कि उन्हें केवल दो कमरों में ठूंसकर रखा गया है। खाने की क्वालिटी खराब है। यहां तक कि चावल-दाल में कीड़े मिलने की शिकायत भी की। पूरी खबर यहां पढ़ें
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