भारत-इंग्लैंड समेत 10 टीमों की जगह लगभग पक्की, वनडे वर्ल्ड कप 2027 से आयरलैंड हुआ बाहर! वेस्टइंडीज पर भी मंडराया संकट
अफगानिस्तान ने आयरलैंड के खिलाफ तीसरे वनडे में 3 विकेट की जीत दर्ज कर 2027 वनडे वर्ल्ड कप के लिए अपनी जगह पक्की कर ली। दरअसल यह मुकाबला उसके लिए बेहद अहम था, क्योंकि सीधे क्वालिफिकेशन की रेस में अफगानिस्तान को अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए सीरीज में बेहतर प्रदर्शन की जरूरत थी। जीत के साथ अफगानिस्तान ने पांच मैचों की सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त भी बना ली। अब टीम के पास सीरीज के बाकी मुकाबलों में अपनी तैयारी मजबूत करने का मौका है।
वहीं ICC के मुताबिक 2027 का वनडे वर्ल्ड कप 14 टीमों का होगा। दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया इस टूर्नामेंट की मेजबानी करेंगे। पहले से तय रास्ते के तहत मेजबान टीमों और रैंकिंग के जरिए सीधे क्वालिफाई करने वाली टीमों के बाद बाकी जगहों के लिए क्वालिफायर मुकाबले होंगे।
भारत समेत इन टीमों की स्थिति मजबूत
दरअसल भारत इस समय ODI रैंकिंग में नंबर-1 पर है और 2027 वर्ल्ड कप की रेस में उसकी स्थिति काफी मजबूत है। ICC की मई 2026 की अपडेटेड रैंकिंग में भारत के बाद न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया टॉप तीन में थे। टॉप आठ में दक्षिण अफ्रीका, पाकिस्तान, श्रीलंका, अफगानिस्तान और इंग्लैंड भी शामिल थे। 2027 वर्ल्ड कप के लिए मेजबान दक्षिण अफ्रीका और जिम्बाब्वे को सीधे एंट्री मिलेगी। इसके अलावा ODI रैंकिंग के आधार पर आठ और टीमों को डायरेक्ट क्वालिफिकेशन मिलना है। इसलिए भारत, पाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, श्रीलंका, अफगानिस्तान और इंग्लैंड जैसी टीमों की स्थिति काफी अहम है। हालांकि कटऑफ तक रैंकिंग में बदलाव संभव है, इसलिए सभी टीमों को अपने बचे हुए ODI मुकाबलों में प्रदर्शन पर ध्यान देना होगा।
वहीं सबसे बड़ा झटका दो बार की वनडे वर्ल्ड चैंपियन वेस्टइंडीज को लगा है। टीम सीधे क्वालिफाई करने की रेस से बाहर हो चुकी है और अब उसे 2027 वर्ल्ड कप में पहुंचने के लिए क्वालिफायर खेलना होगा। 2023 में भी वेस्टइंडीज वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई नहीं कर पाया था। अब लगातार दूसरी बार ऐसा होना टीम के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
2027 ODI World Cup में बदला फॉर्मेट
दरअसल 2027 वनडे वर्ल्ड कप पहले के मुकाबले काफी अलग नजर आएगा। ICC ने जुलाई 2026 में टूर्नामेंट के फॉर्मेट में बदलाव किया है। कुल 14 टीमें टूर्नामेंट में हिस्सा लेंगी और शुरुआत में सबसे निचली रैंक वाली तीन टीमों के बीच Super Series चरण होगा। इसमें से एक टीम अगले राउंड में पहुंचेगी। इसके बाद 12 टीमें दो ग्रुप में बांटी जाएंगी। दोनों ग्रुप से आगे बढ़ने वाली टीमों के बाद Super 7 चरण खेला जाएगा और फिर सेमीफाइनल व फाइनल होंगे। वहीं ICC का कहना है कि नए फॉर्मेट का मकसद टूर्नामेंट के शुरुआती मुकाबलों को भी ज्यादा अहम बनाना है। यानी टीमों को सिर्फ सेमीफाइनल की रेस में पहुंचने के लिए नहीं, बल्कि शुरुआत से ही हर मैच में बेहतर प्रदर्शन करना होगा।
वर्ल्ड कप में कुल 14 टीमें और 54 मैच होंगे
दरअसल वर्ल्ड कप में कुल 14 टीमें और 54 मैच होंगे। मेजबान देशों के अलावा रैंकिंग से सीधे जगह बनाने वाली टीमों के बाद बाकी चार स्थानों के लिए क्वालिफिकेशन प्रक्रिया होगी। हालांकि ICC के नए फॉर्मेट के बाद शुरुआती चरणों में भी टीमों के लिए हर मुकाबला काफी महत्वपूर्ण रहने वाला है। वेस्टइंडीज के लिए सबसे बड़ी चुनौती अब क्वालिफायर से वर्ल्ड कप तक पहुंचने की है। ICC के पहले से तय क्वालिफिकेशन सिस्टम में चार टीमें Global Qualifier के जरिए 14 टीमों वाले वर्ल्ड कप में जगह बनाती थीं। इसमें World Cup League 2 से आने वाली टीमों के साथ क्वालिफायर प्लेऑफ और डायरेक्ट क्वालिफिकेशन से बाहर रहने वाली टीमें शामिल होती हैं।
झारखंड में स्टूडेंट्स पर लाठीचार्ज पर सियासत, सत्ता पक्ष का विपक्ष पर पलटवार-“राहुल गांधी जवाब दो” बैनर पोस्टर के साथ प्रदर्शन
संसद के मानसून सत्र का ये अन्तिम सप्ताह चल रहा है दो दिन बाद 13 अगस्त को ये सत्र समाप्त हो जायेगा लेकिन पिछले तीन सप्ताह से जो तस्वीर मकर द्वार के सामने की दिखाई दे रही थी आज बदल गई। अभी तक यहाँ कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के सांसदों के साथ विपक्ष दिल्ली छात्र आंदोलन और राम मंदिर दान चोरी को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे, दिल्ली में विद्यार्थियों पर हुए लाठीचार्ज पर गृह मंत्री से जवाब मांग रहे थे लेकिन आज सबकुछ पलट गया आज सत्ता पक्ष ने मकर द्वार पर “राहुल गांधी जवाब दो” लिखे बैनर और पोस्टर को लेकर प्रदर्शन किया।
कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने पिछले तीन सप्ताहों की की तरह ही आज भी अमित शाह जवाब दो लिखा बैनर और राम मंदिर दान चोरी के मुद्दे लिखे पोस्टर को लेकर मकर द्वार पर विरोध प्रदर्शन जारी रखा लेकिन वे तब चौक गए भाजपा के नेतृत्व में NDA के सांसद भी वहां प्रदर्शन करने पहुंच गए, सांसदों के हाथ में एक बड़ा सा बैनर था, पोस्टर थे जिस पर राहुल गांधी जवाब दो लिखा हुआ था, सत्ता पक्ष राहुल गांधी पर जवाब देने से बचने के आरोप लगा रहे थे।
नीट पेपर लीक के मुद्दे को लेकर जंतर मंतर में प्रदर्शन के दौरान 20 जुलाई को संसद घेराव के समय दिल्ली पुलिस द्वारा किये गए लाठीचार्ज को लेकर विपक्ष सरकार पर हमलावर है, इस मुद्दे को लेकर संसद विपक्ष गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांग रहा है अमित शाह सदन में नहीं आ रहे विपक्ष संसद नहीं चलने दे रहा, सदन में कोई काम नहीं हो पा रहा, बैठकें स्थगित हो रही हैं कई बिल अटके पड़े हैं इस बीच झारखंड में चल रहे छात्र आंदोलन के दौरान विधान सभा घेराव करने जा रहे विद्यार्थियों पर पुलिस ने बर्बरता की, लाठीचार्ज किया, आंसू गैस वाटर कैनन छोड़ी जिसपर विपक्ष का रुख देखकर सत्ता पक्ष हमलवार हो गया है।
झारखंड पर विपक्ष की आँखें बंद क्यों हो गई : भाजपा
भाजपा ने एनडीए घटक दलों के साथ आज मकर द्वार पर प्रदर्शन किया और कांग्रेस सहित उनके सहयोगी दलों पर निशाना साधा, झारखंड में विद्यार्थियों के साथ हुई पुलिस बर्बरता पर विपक्षी नेताओं की चुप्पी, एक पखवाड़े से अधिक समाया से चल रहे आंदोलन से बनाई गई दूरी को लेकर आज सत्ता पक्ष ने विपक्ष को आड़े हाथ लिया, भाजपा नेताओं ने कहा कांग्रेस और उनके सहयोगियों को दिल्ली में पुलिस बर्बरता दिखाई दी लेकिन झारखंड के विद्यार्थियों के साथ हुई बर्बरता पर आँखें बंद हो गई , यानि विपक्ष ने नेताओं विद्यार्थीं आंदोलन में भी राजनीति तलाश रहे हैं।
राहुल गांधी की दोहरी नीति देश देख रहा है : साक्षी महाराज
भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने कहा अमित शाह जवाब देंगे लेकिन राहुल गांधी भागना मत, उन्होंने कहा झारखंड में छात्रों पर ही अत्याचार पर राहुल गांधी को जवाब देना होगा, साक्षी महाराज ने कहा जब अमित शाह जवाब देने के लिए तैयार तो विपक्ष चर्चा नहीं चाहता भाग रहा है, उनकी जंतर मंतर के लिए सोच अलग है और झारखंड के लिए अलग है ये विपक्ष का चरित्र है, तरुण चुघ ने कहा ये दोहरा मापदंड है राहुल गांधी सदन से भी भाग रहे हैं और झारखंड में बच्चों पर हुए अत्याचार पर चुप है देश उनकी दोहरी नीति को देख रहा है।
राहुल गांधी सदन में आते नहीं, गृह मंत्री से जवाब मांगते हैं : अनुराग ठाकुर
अनुराग ठाकुर ने कहा झारखंड के युवाओं को न्याय मिलना चाहिए। उन पर जिस तरह से लाठीचार्ज किया गया और ज़्यादतियां हुईं, उससे राहुल गांधी की सोच का पता चलता है, इससे साफ़ होता है कि उनके समर्थकों की सरकार वाले राज्य में युवाओं के साथ कैसा बुरा बर्ताव हो रहा है और उन्हें न्याय से कैसे वंचित रखा जा रहा है। फिर भी, दूसरी तरफ़, वे ख़ुद तो सदन में आते नहीं, लेकिन गृह मंत्री से जवाब मांगते हैं। गृह मंत्री जवाब देने के लिए तैयार हैं, लेकिन राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी सिर्फ़ सुर्खियों में बने रहने के लिए झूठ फैला रहे हैं और गैर-ज़िम्मेदाराना बयान दे रहे हैं।
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