East India Company ने 19 अगस्त 1757 को कोलकाता में बनाया था पहला एक रुपये का सिक्का
सिक्के की खनक और सिक्के के दो पहलू जैसे बहुत से जुमले हम रोजमर्रा की में इस्तेमाल करते हैं, लेकिन सिक्कों को पहले कब और किसने बनाया, यह इतिहास के पन्नों में दर्ज है। साल 1757 में 19 अगस्त को ईस्ट इंडिया कंपनी ने कलकत्ता में रुपये का पहला सिक्का बनाया था और कंपनी द्वारा बनाए गए पहले सिक्के को बंगाल के मुगल प्रांत में चलाया गया। दरअसल बंगाल के नवाब के साथ एक संधि के तहत ईस्ट इंडिया कंपनी ने यह टकसाल बनाई थी।
देश-दुनिया के इतिहास में 19 अगस्त की तारीख पर दर्ज कुछ महत्वपूर्ण घटनाओं का सिलसिलेवार ब्योरा इस प्रकार है:- 1600 : अहमद नगर पर अकबर का आधिपत्य। 1757 : कलकत्ता में ईस्ट इंडिया कंपनी का पहला एक रुपये का सिक्का टकसाल में बना। 1918 : शंकर दयाल शर्मा का जन्म जो देश के नौवें राष्ट्रपति बने और 1992 से 1997 के बीच देश के इस सर्वोच्च संवैधानिक पद पर रहे।
1919 : अफगानिस्तान ने ब्रिटेन से अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की। 1949 : भुवनेश्वर ओडिशा की राजधानी बना। 1960 : ‘स्पूतनिक 5’ अंतरिक्ष यान से दो कुत्ते और तीन चूहे अंतरिक्ष में भेजे गये।
परीक्षण सफल रहा और बाद में यह पांचों जीवित पाए गए। 1964 : संचार उपग्रह सिनकोम 3 का प्रक्षेपण। 1966 : तुर्किये में भूकंप से लगभग 2400 लोग मारे गए।
1973 : फ्रांस ने परमाणु परीक्षण किया। 1977 : सोवियत संघ ने सेरी सागान में परमाणु परीक्षण किया। 1999 : भारत की परमाणु नीति के मसौदे से नाराज जी-8 के देशों ने सभी तरह की मदद पर रोक लगाने की घोषणा की।
2004: दुनिया की सबसे बड़ी इंटरनेट कंपनी गूगल ने अपने शेयर बाजार में उतारे। 2005 : श्रीलंका सरकार और लिट्टे में शांति वार्ता फिर शुरू करने पर सहमति। 2007 : अंतरिक्ष स्टेशन पर गये ‘मिशन एंडेवर’ के यात्रियों ने स्पेसवॉक पूरा किया।
2020: देश में कोविड-19 के 64,531 नए मामले सामने आए। 2023: उत्तरी यूक्रेन में रूस के मिसाइल हमले में सात लोग मारे गए। 2024: बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ हत्या के नये मामले दर्ज।
2025: उत्तर-पश्चिमी नाइजीरिया में मस्जिद पर गोलीबारी, 13 लोगों की मौत।
Dabholkar case: Bombay High Court ने आरोपी सचिन अंदुरे को दी जमानत
बंबई उच्च न्यायालय ने मंगलवार को तर्कवादी नरेंद्र दाभोलकर की 2013 में हुई हत्या के मामले में अभियुक्त सचिन अंदुरे की उम्रकैद की सजा निलंबित कर दी तथा उसे जमानत दे दी। उच्च न्यायालय ने कहा कि कि उसके खिलाफ सबूत ‘बहुत कमजोर हैं’ और उसे भी बरी किया जा सकता है। न्यायमूर्ति सारंग कोतवाल और न्यायमूर्ति रंजीतसिन्हा भोंसले की खंडपीठ ने कहा कि चश्मदीद गवाहों ने आठ साल बाद अंदुरे की पहचान की।
खंडपीठ ने अपराध में इस्तेमाल हथियार की बरामदगी से जुड़ी खामियों की ओर इशारा किया। उच्च न्यायालय के फैसले में कहा गया, ‘‘इस मामले में गिरफ़्तारी के बाद से ही आवेदक कमजोर सबूतों के आधार पर लगभग छह साल से हिरासत में है, इसलिए उसे जमानत पर रिहा किया जाना चाहिए।’’ उच्च न्यायालय ने अंदुरे को 50,000 रुपये का निजी मुचलका भरने का आदेश दिया। महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के संस्थापक 67 वर्षीय दाभोलकर की 20 अगस्त, 2013 को पुणे में सुबह की सैर के दौरान मोटरसाइकिल सवार दो हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।
आरंभ में, इस मामले की जांच स्थानीय पुलिस ने की थी, लेकिन उनकी बेटी मुक्ता दाभोलकर की ओर से उच्च न्यायालय में याचिका दायर किए जाने के बाद, 2014 में जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी गई। अभियोजन पक्ष ने दावा किया था कि अंदुरे हमलावरों में से एक था। दस मई 2024 को, एक सत्र अदालत ने दाभोलकर की हत्या के मामले में अंदुरे और शरद कालस्कर को दोषी ठहराया था तथा उम्रकैद की सज़ा सुनाई थी।
हालांकि, उन्हें गैर-कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) और शस्त्र अधिनियम के तहत लगे आरोपों से बरी कर दिया गया था। उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में मामले में गवाहों के बयानों को ‘बहुत कमज़ोर’ बताते हुए कहा कि मामले के दो चश्मदीद गवाहों ने गोलीबारी के लगभग आठ साल बाद पहली बार अंदुरे की पहचान की थी, जो पहचान के लिए बहुत लंबा समय है। उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि हत्या में इस्तेमाल हथियार की बरामदगी और बैलिस्टिक विशेषज्ञ की राय को लेकर भी कुछ कमियां हैं।
खंडपीठ ने कहा कि अंदुरे के बरी होने की अच्छी संभावना है, क्योंकि उसके खिलाफ सबूत बहुत कमज़ोर हैं। अंदुरे पर सामाजिक कार्यकर्ता गोविंद पानसरे की हत्या के मामले में भी मुकदमा चल रहा है। वह अब जेल से बाहर आ सकता है क्योंकि उसे दोनों मामलों में ज़मानत मिल गई है।
अंदुरे ने अपनी सज़ा को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में अपील दायर की थी और एक अंतरिम अर्जी में जमानत देने तथा अपनी उम्रकैद की सज़ा पर रोक लगाने का अनुरोध किया था। उच्च न्यायालय ने मंगलवार को इस अर्ज़ी को मंज़ूरी दे दी। दाभोलकर की बेटी मुक्ता ने भी उच्च न्यायालय में अपील दायर की थी, जिसमें अंदुरे तथा कालस्कर के खिलाफ यूएपीए के तहत आरोप न लगाने को चुनौती दी गई थी।
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