Satyendar Jain और पूर्व IAS अधिकारी समेत 6 गिरफ्तार, DJB tender केस में ACB का एक्शन
भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) ने दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) की मलजल शोधन संयंत्र (एसटीपी) परियोजनाओं की निविदा प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार के मामले में दिल्ली के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन और डीजेबी के पूर्व मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) व आईएएस अधिकारी उदित प्रकाश राय समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया है। एक अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी। एसीबी द्वारा जारी बयान के अनुसार, गिरफ्तार किए गए अन्य आरोपियों में दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व सलाहकार अंकित श्रीवास्तव और नागेंद्र यादव, राजा कुमार कुर्रा तथा पंकज वर्मा शामिल हैं।
यह मामला दिल्ली जल बोर्ड के मलजल शोधन संयंत्रों के संवर्धन और उन्नयन से जुड़ी निविदा प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं, निविदाओं की शर्तों में हेरफेर और आपराधिक साजिश के आरोपों को लेकर सतर्कता निदेशालय की शिकायत पर 11 मई 2024 को दर्ज किया गया था।
Haryana में संपत्ति हस्तांतरण पर Stamp Duty छूट नाती-नातिन को भी मिलेगी
हरियाणा सरकार ने संपत्ति हस्तांतरण के मामले में परिवारों को राहत देते हुए स्पष्ट किया है कि परिवार के भीतर अचल संपत्ति के ‘आजीवन हस्तांतरण’ पर स्टाम्प शुल्क में पूर्ण छूट का लाभ पुत्रियों के बच्चों (नाती-पोतों) तक भी विस्तारित होगा। राजस्व और आपदा प्रबंधन विभाग की वित्तीय आयुक्त सुमिता मिश्रा ने मंगलवार को कहा कि राज्य सरकार ने 2014 की अपनी अधिसूचना के हिंदी अनुवाद में भाषाई अस्पष्टता को दूर करने के लिए एक औपचारिक सुधार जारी किया है। मिश्रा ने बताया कि 16 जून, 2014 को हरियाणा सरकार ने इंडियन स्टाम्प एक्ट, 1899 की धारा 9 के तहत संपत्ति के मालिक के जीवित रहते हुए खून के रिश्तों (जैसे माता-पिता, बच्चे, पोते-पोतियां, भाई-बहन और जीवनसाथी) के पक्ष में किए गए संपत्ति हस्तांतरण के दस्तावेजों पर 100 प्रतिशत स्टाम्प शुल्क माफ कर दिया था।
आधिकारिक बयान के अनुसार, अंग्रेजी पाठ में व्यापक रूप से ‘ग्रैंडचिल्ड्रन’ शब्द का प्रयोग किया गया था, जबकि हिंदी अधिसूचना में केवल ‘पौत्र-पौत्री’ (पुत्र के बच्चों) का उल्लेख था। इस शब्दावली ने स्थानीय उप-पंजीयक कार्यालयों में भ्रम पैदा किया, जिससे अक्सर पुत्री के बच्चों को शून्य-शुल्क लाभ से वंचित होना पड़ता था। हरियाणा के राजस्व और आपदा प्रबंधन विभाग ने इस समस्या के समाधान के लिए एक शुद्धि-पत्र जारी किया, जिसमें ‘पौत्र-पौत्री’ वाक्यांश को ‘पौत्र-पौत्री, दोहता-दोहती/नाती-नातिन’ से बदल दिया गया।
इससे स्टाम्प शुल्क छूट के मामले में सभी को समान स्तर पर रखा गया है।
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