RBI के लिए Digital Payments के बीच नकदी की मांग का अनुमान कठिन: SC Murmu
डिजिटल भुगतान में भारी उछाल के बावजूद प्रचलन में नकदी के बढ़ने के विरोधाभास से भारतीय रिजर्व बैंक जूझ रहा है। केंद्रीय बैंक के डिप्टी गवर्नर एस सी मुर्मू ने यह बात कही। उन्होंने 13 अगस्त को जकार्ता में बैंक इंडोनेशिया द्वारा आयोजित नकदी पारिस्थितिकी तंत्र पर एक वैश्विक संगोष्ठी में कहा कि इस विरोधाभास की वजह से भविष्य की मुद्रा मांग का अनुमान लगाना कठिन हो गया है।
उन्होंने इसे नकदी का विरोधाभास करार दिया और कहा, ‘‘डिजिटल भुगतान को तेजी से अपनाए जाने के कारण व्यक्तिगत लेनदेन में नकदी की हिस्सेदारी घटने के बावजूद प्रचलन में मौजूद मुद्रा दहाई अंक की दर से बढ़ रही है।’’ उन्होंने कहा कि इस वजह से भविष्य में नकदी की मांग का अनुमान लगाना कठिन हो गया है, जिससे उत्पादन और वितरण क्षमता के लिए आरबीआई की योजना जटिल हो जाती है। उन्होंने आगे जोड़ा कि भारतीय केंद्रीय बैंक आमतौर पर हर साल मुद्रा मांग पर पांच साल का अग्रिम अनुमान तैयार करता है। वैश्विक सभा को संबोधित करते हुए मुर्मू ने कहा, ‘‘यदि आप में से किसी को इसकी वजह पता करने का कोई अच्छा तरीका मिला है, तो मैं अपनी चर्चा के दौरान इसे वास्तव में सुनना चाहूंगा।’’ उल्लेखनीय है कि आरबीआई की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार प्रचलन में मुद्रा वित्त वर्ष 2024-25 के 41.23 लाख करोड़ रुपये से लगभग 12 प्रतिशत बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 के अंत में 41.6 लाख करोड़ रुपये हो गई।
इस दौरान यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) से भुगतान की मात्रा में 21 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई।
Rupee में गिरावट जारी, US Dollar के मुकाबले 13 पैसे टूटकर 95.74 के स्तर पर बंद
पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव जारी रहने और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के दबाव में रुपया मंगलवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 13 पैसे कमजोर होकर 95.74 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौते में देरी, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और डॉलर में व्यापक मजबूती के कारण डॉलर-रुपये की विनिमय दर में निकट अवधि में हल्का नकारात्मक रुख रहने का अनुमान है। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 95.68 प्रति डॉलर पर खुला और कारोबार के दौरान 95.64 से लेकर 95.75 के दायरे में रहा।
कारोबार के अंत में यह 95.74 प्रति डॉलर पर बंद हुआ, जो पिछले बंद भाव से 13 पैसे की गिरावट है। सोमवार को रुपया 19 पैसे टूटकर 95.61 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के शोध प्रमुख सिद्धार्थ खेमका ने कहा, ‘‘ब्रेंट क्रूड की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच जाने और होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने का मुद्दा अनसुलझा रहने से तेल की कीमतें रुपये, मुद्रास्फीति और विदेशी पूंजी प्रवाह के लिए महत्वपूर्ण बनी रहेंगी।’’ उन्होंने कहा कि कमजोर वैश्विक संकेतकों और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की बिकवाली ने भी बाजार धारणा को प्रभावित किया।
एफआईआई ने सोमवार को तीन सप्ताह में सबसे अधिक 2,535 करोड़ रुपये की बिकवाली की। उन्होंने कहा कि अमेरिका के 10 साल के बॉन्ड पर प्रतिफल भी ऊंचा बना हुआ है। इस बीच, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.04 प्रतिशत घटकर 99.60 पर आ गया।
वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड वायदा बाजार में 0.01 प्रतिशत बढ़कर 90.88 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। खेमका ने कहा कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, भू-राजनीतिक अनिश्चितता और विदेशी निवेशकों की बिकवाली निकट अवधि में बाजार धारणा को कमजोर रख सकती हैं। हालांकि, घरेलू अर्थव्यवस्था के मजबूत बुनियादी आधार और लगातार नीतिगत समर्थन से मध्यम अवधि में स्थिति सकारात्मक रह सकती है।
घरेलू शेयर बाजार में सेंसेक्स 492.70 अंक गिरकर 77,235.46 अंक पर और निफ्टी 132.75 अंक की गिरावट के साथ 24,154.90 अंक पर बंद हुआ। शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) बाजार में शुद्ध लिवाल रहे। उन्होंने मंगलवार को शुद्ध रूप से 1,651.53 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर खरीदे।
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