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'क्या आपको बीफ पसंद आया?':केरलम में एक्ट्रेस मालविका शर्मा से पूछा गया सवाल तो हुईं अनकम्फर्टेबल, बोलीं- मैं शाकाहारी हूं

एक्ट्रेस मालविका शर्मा हाल ही में केरलम में एक रिपोर्टर के सवाल से असहज हो गईं, जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें बीफ पसंद आया। जिस पर एक्ट्रेस ने कहा कि वह शाकाहारी हैं। रिपोर्टर के सवाल को लेकर सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने नाराजगी जताई। दरअसस एक्ट्रेस मालविका शर्मा अपनी अपकमिंग फिल्म ‘खलीफा’ के प्रमोशन के दौरान केरलम में मीडिया से बातचीत कर रही थीं। इसी दौरान उनसे पूछा गया कि केरलम में उन्हें कौन सा खाना पसंद आया? जिस पर उन्होंने कहा कि मुझे बहुत सारा खाना चखने का समय नहीं मिला, लेकिन आमतौर पर मुझे लगता है कि मैंने काफी सारा चावल, ग्रेवी और करी जैसी चीजें खाई हैं। इसके बाद उनसे एक रिपोर्टर ने पूछा, क्या आपको बीफ पसंद आया? इस सवाल पर मालविका थोड़ी असहज नजर आईं और उन्होंने जवाब दिया, "मैं शाकाहारी हूं, इसलिए मैंने बीफ नहीं चखा है।" कई यूजर्स ने रिपोर्टर के सवाल पर नाराजगी जताई सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने रिपोर्टर के इस सवाल को लेकर नाराजगी जताई। एक एक्स यूजर ने लिखा, “क्या ऐसा बेवकूफी भरा सवाल पूछना वाकई जरूरी था?” वहीं दूसरे यूजर ने कहा, “वे सिर्फ विवाद पैदा करना चाहते हैं।” एक अन्य यूजर ने दावा किया कि इसी केरलम मीडिया ने फिल्म प्रमोशन के दौरान प्रिय प्रकाश को भगवा रंग के कपड़े पहनने को लेकर भी ताना मारा था। कौन हैं मालविका शर्मा? मालविका शर्मा एक एक्ट्रेस और मॉडल हैं, जो मुख्य रूप से तेलुगु फिल्मों में काम करती हैं। उनका जन्म 26 जनवरी 1999 को मुंबई में हुआ। उन्होंने साल 2018 में रवि तेजा के साथ फिल्म ‘नेला टिकट’ से एक्टिंग करियर की शुरुआत की। इसके बाद 2021 में वह फिल्म ‘रेड’ में नजर आईं। इस फिल्म में उन्होंने महिमा का किरदार निभाया था। मालविका ने तमिल फिल्म इंडस्ट्री में भी काम किया। 2022 में वह ‘कॉफी विद काधल’ में दिखाई दीं। इसके बाद 2024 में उन्होंने तेलुगु फिल्मों ‘भीमा’ और ‘हरोम हारा’ में काम किया। बता दें कि मालविका ने रिजवी लॉ कॉलेज से एलएलबी की पढ़ाई की, जिसमें क्रिमिनोलॉजी उनकी स्पेशलाइजेशन रही। मालविका की अपकमिंग प्रोजेक्ट्स की बात करें तो वह मलयालम फिल्म ‘खलीफा’ और कन्नड़ फिल्म ‘बृंदाविहारी’ में नजर आएंगी। गौरतलब है कि हाल ही में फिल्म 'ओरु अदार लव' में अपनी मशहूर विंक से चर्चा में आईं एक्ट्रेस प्रिया प्रकाश वारियर केरलम में एक इवेंट में शामिल हुईं। जहां पर उनके कपड़ों के रंग को लेकर सवाल किया गया था। इवेंट में प्रिया ने नारंगी यानी केसरिया रंग की ड्रेस पहनी थी। मीडिया से बातचीत के दौरान एक यूट्यूबर ने उनसे पूछा था कि क्या उन्होंने किसी खास वजह से केसरिया रंग की ड्रेस चुनी है। इस पर प्रिया ने शांति से जवाब देते हुए पूछा, “ड्रेस में समस्या क्या है?” पूरी खबर यहां पढ़ें….

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मानव सेवा से जुड़े वालेंटियरों का सम्मान जरूरी

कुदरती आपदाएं हों या मानवीय हिमाकतों से उपजी विभिन्न किस्म की समस्याएं, प्रत्येक संकटों के वक्त ईश्वर हर मानव को मानवता दिखाने का अवसर देता है। भगवान की इस अदृश्य परीक्षा में कुछ पास होते हैं तो कुछ असफल। आज ‘विश्व मानवतावादी दिवस’ है जो प्रत्येक मानव को मानवता दिखाने के लिए प्रेरित और जागरूक करता है। प्रतिवर्ष 19 अगस्त की तारीख को समूचे संसार में एक साथ ये दिवस मनाया जाता है। दिवस उन मानवीय सहायता कर्मियों, शांति सैनिकों, सिविल डिफेंस, सुरक्षाकर्मियों, को समर्पित है, जो विकराल संकटों में निर्बलों और असहायों की मदद के लिए अपने प्राणों को दांव पर लगाकर औरों के जीवन को बचाते हैं। पर, अफसोस अब आए दिन ऐसे सुरक्षाकर्मियों पर भी हमले होने लगे हैं। जबकि, रक्षाकर्मी सदैव सम्मान के पात्र रहे हैं। मानवतावाद, मानवीय प्रणाली के सभी भागीदारों को एकजुट करके संकट से प्रभावित लोगों के अस्तित्व, कल्याण और गरिमा के लिए मानवीय कार्यकर्ताओं की सुरक्षा और संरक्षण की वकालत करता है। पूरे भारत में करीब 11 करोड़ सिविल डिफेंस कर्मी हैं। सिर्फ दिल्ली में एक लाख 34 हजार वाॅलंटियर्स हैं। इसके अलावा विभिन्न गैर-सरकारी संस्थाओं से भी लोग जुड़े हैं। वैश्विक धरा पर शांति सैनिकों की संख्या 60 करोड़ के आसपास है।
 
मानवतावादी दिवस की शुरुआत 2008 में संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव के बाद हुई थी। प्रस्तावना बगदाद में घटी 19 अगस्त 2003 को एक हृदय विदारक घटना को आधार बनाकर हुई। बगदाद शहर के प्रसिद्ध पांच सितारा होटल ‘कैनाल ब्लू’ में आतंकियों ने सुबह के समय भयानक बम ब्लास्ट किया, जिसमें करीब 22 होटल कर्मी मारे गए और दर्जनों गंभीर रूप से घायल हुए। ब्लास्ट किचन एरिया और सर्वेंट रूमों के अलावा उन जगहों पर किया गया जहां होटल कर्मियों की ही मौजूदगी थी। ब्लास्ट की आवाज सुनकर होटल में रह रहे लोग मदद को भागे। होटल में 208 कमरें थे और सभी में मेहमानों की मौजूदगी थी। उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना ना सिर्फ 85 कर्मियों को बचाया, बल्कि मानवीय सिद्वांतों की अलख जगाकर पूरे विश्व में संदेश दिया कि विकट परिस्थिियों में मदद के लिए कभी मुंह नहीं मोड़ना चाहिए। मानवीय गरिमा को बनाए रखने में प्रत्येक मानव को खुद की जवाबदेही सुनिश्चित करनी चाहिए। इसलिए पहला धर्म यही है कि नागरिकों, मानवीय सहायता कर्मियों और शांति सैनिकों का सम्मान करके उनकी रक्षा जनमानस को करनी चाहिए।

इसे भी पढ़ें: 80th Independence Day: लाल किले से Viksit Bharat का संकल्प और Vande Mataram के 150 साल का गौरवशाली इतिहास

अभी हाल में लेबनान में संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों पर हमले हुए थे, जिसकी भारत सरकार ने भी कड़ी निंदा की और कहा है कि शांति सैनिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वथानेनी हरीश ने इसको लेकर संयुक्त राष्ट्र को वैश्विक प्रस्ताव पेश करने का आह्वान भी किया है। भारत, शांति सैनिकों के खिलाफ अपराधों के लिए जवाबदेही सुनिश्चित करने के प्रयासों में अग्रणी रहा है। इस संदर्भ में भारत ने नई दिल्ली में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2589 का नेतृत्व भी किया है, जिसका उद्देश्य शांति सैनिकों के विरुद्ध अपराधों के लिए जवाबदेही तय करना है। 

आज का दिन जनमानस को मानवतावादी कार्यकर्ताओं को सम्मान देने और वैश्विक संकट से जूझते लोगों की मदद के लिए खड़े होने का आहवान करता है। सुरक्षाकर्मियों पर होने वाले हमले बेहद निंदनीय और किसी भी देश की कानून-व्यवस्था पर घोर आघात जैसा है। शांति बनाए रखने वाले जवानों पर हिंसा समाज और लोकतंत्र पर कालिख समान है। मानवीय सहायता कर्मियों पर हमलों के परिणाम प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित व्यक्तियों से कहीं अधिक व्यापक होते हैं। ये हमले खाद् आपूर्ति, स्वास्थ्य देखभाल, सुरक्षा और अन्य जीवन रक्षक सेवाओं को बाधित करते हैं, जिससे समुदायों के पास जीवित रहने और उबरने के साधन और भी कम हो जाते हैं। इसलिए सभी को आज के दिन संकल्पित होना चाहिए कि मदद के वक्त खड़ा होना चाहिए और सुरक्षाकर्मियों को सम्मान प्रदान करना चाहिए।

- डॉ. रमेश ठाकुर
सदस्य, राष्ट्रीय जन सहयोग एवं बाल विकास संस्थान (NIPCCD), भारत सरकार!

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  Sports

David Warner के बाद Australia की सलामी जोड़ी पर संकट, Matt Renshaw लौटे और Labuschagne के लिए बढ़ी मुश्किलें

ऑस्ट्रेलिया की टीम को बांग्लादेश के खिलाफ घरेलू मैदान पर मिली शर्मनाक हार के बाद चयनकर्ताओं ने बड़ा फैसला लिया है। डार्विन में खेले गए पहले टेस्ट के बाद जैक वेदराल्ड को टीम से बाहर कर दिया गया है। अब उनकी जगह मैट रेनशॉ को अगले टेस्ट के लिए शुरुआती बल्लेबाज के तौर पर मौका मिलने की उम्मीद है।

जैक वेदराल्ड के लिए डार्विन टेस्ट की शुरुआत बेहद खराब रही थी। पहली गेंद पर उन्होंने ऑफ स्टंप से काफी बाहर जाती गेंद पर गलत शॉट खेलने की कोशिश की। इसके बाद अगली गेंद भी ज्यादा प्रभावी नहीं रही। तीसरी गेंद पर उन्होंने ऑफ स्टंप के करीब आई गेंद को काटने की कोशिश की, लेकिन गेंद बल्ले से लगकर विकेटों पर जा लगी। इस तरह छह मिनट से भी कम समय में उनकी पारी खत्म हो गई।

वेदराल्ड के लिए यह मुकाबला खास था क्योंकि डार्विन को उनकी घरेलू वापसी के लिए सही मंच माना जा रहा था। लेकिन वह मौके का फायदा नहीं उठा सके। छह टेस्ट में उनके नाम केवल एक अर्धशतक है और उनका बल्लेबाजी औसत 20.36 रहा है। ऐसे प्रदर्शन के बाद बांग्लादेश के खिलाफ ऑस्ट्रेलिया की हार ने उनकी स्थिति और कमजोर कर दी।

बता दें कि ऑस्ट्रेलिया ने बांग्लादेश के खिलाफ मुकाबले में अपने तेज गेंदबाजों के दम पर दबाव बनाने की कोशिश की थी, लेकिन बांग्लादेश के शीर्ष क्रम ने उन्हें काफी आसानी से खेला। इसी वजह से चयनकर्ताओं के सामने ऊपरी क्रम में बदलाव का दबाव बढ़ गया। माना जा रहा है कि अगर ऑस्ट्रेलिया डार्विन में हार से बच जाता तो वेदराल्ड को एक और मौका मिल सकता था।

अब मैट रेनशॉ के लिए वापसी का रास्ता खुल गया है। रेनशॉ ने पिछले घरेलू सत्र में क्वींसलैंड के लिए शानदार प्रदर्शन किया था। उन्होंने शेफील्ड शील्ड में 46.09 की औसत से रन बनाए और दो शतक भी लगाए। इससे पहले वह ऑस्ट्रेलिया की एशेज टीम में वेदराल्ड से पीछे रह गए थे।

गौरतलब है कि रेनशॉ ने अब तक 14 टेस्ट खेले हैं और उनकी पिछली तीन टेस्ट पारियां मध्यक्रम में आई थीं। उनका आखिरी टेस्ट मैच 2023 की शुरुआत में दिल्ली में हुआ था। अब मैके में उन्हें फिर से पारी की शुरुआत करने की जिम्मेदारी मिल सकती है। इससे पहले उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के जोहानिसबर्ग में भी सलामी बल्लेबाज की भूमिका निभाई थी।

वॉर्नर के संन्यास के बाद से ऑस्ट्रेलिया अब तक नौ अलग-अलग सलामी बल्लेबाज आजमा चुका है। ऐसे में रेनशॉ के लिए यह मौका बेहद अहम है। उनके मार्गदर्शक उस्मान ख्वाजा भी लंबे अंतराल के बाद टेस्ट टीम में लौटकर सफल रहे थे और रेनशॉ उनसे प्रेरणा ले सकते हैं।

दूसरी ओर, मार्नस लाबुशेन पर भी दबाव बढ़ गया है। कोच और चयनकर्ता एंड्रयू मैकडोनाल्ड ने उन्हें साफ संकेत दिया है कि टीम में जगह बनाए रखने के लिए उन्हें बड़ी पारियां खेलनी होंगी। डार्विन की दूसरी पारी में लाबुशेन ने 31 रन बनाए और तेज गेंदबाजों के खिलाफ उनका खेल बेहतर नजर आया, लेकिन मैकडोनाल्ड के मुताबिक यह पारी सिर्फ 31 रन तक ही सीमित रही।

लाबुशेन का टेस्ट औसत अब 44.16 तक गिर चुका है, जबकि एक समय उनका औसत 60 के आसपास था। तीन साल से टेस्ट शतक नहीं लगा पाने के कारण मैके में उनके प्रदर्शन पर खास नजर रहेगी। अगले टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया का लक्ष्य श्रृंखला बराबर करना होगा, क्योंकि घरेलू मैदान पर बांग्लादेश से श्रृंखला हारना टीम के लिए एक और बड़ा झटका साबित हो सकता है।
Tue, 18 Aug 2026 22:18:05 +0530

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