सुप्रीम कोर्ट ने फांसी खत्म करने की याचिका खारिज की, कहा “केंद्र सरकार कर सकती है विकल्पों की समीक्षा”
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को मौत की सजा पाए दोषियों को फांसी देने की मौजूदा व्यवस्था को खत्म करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि मौजूदा समय में फांसी को असंवैधानिक घोषित करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है। हालांकि, कोर्ट ने केंद्र सरकार के लिए भविष्य में इस व्यवस्था की व्यापक समीक्षा का रास्ता खुला रखा है।
यह याचिका अधिवक्ता ऋषि मल्होत्रा की ओर से दायर की गई थी। इसमें दलील दी गई थी कि फांसी की प्रक्रिया दोषी के लिए अत्यधिक पीड़ादायक हो सकती है और यह मानवीय गरिमा के अनुरूप नहीं है। याचिका में मौत की सजा के क्रियान्वयन के लिए फांसी की जगह कम पीड़ादायक और अधिक मानवीय तरीकों को अपनाने की मांग की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा
सुप्रीम कोर्ट ने फांसी को मौजूदा समय में असंवैधानिक घोषित करने से इनकार किया। साथ ही इस मामले को बड़ी पीठ के पास भेजने की मांग भी स्वीकार नहीं की। अदालत ने कहा कि यदि भविष्य में वैज्ञानिक या चिकित्सकीय प्रमाण सामने आते हैं, जिनसे यह साबित हो कि कोई अन्य तरीका अधिक मानवीय और कम पीड़ादायक है, तो इस मुद्दे पर दोबारा विचार की गुंजाइश बनी रहेगी।
केंद्र सरकार कर सकती है विशेषज्ञों से समीक्षा
अदालत ने अपने फैसले में यह स्पष्ट किया कि उसका निर्णय केंद्र सरकार को मौत की सजा लागू करने के वैकल्पिक तरीकों की समीक्षा करने से नहीं रोकता। सरकार विशेषज्ञों की समिति गठित कर मौजूदा व्यवस्था और दूसरे संभावित तरीकों का वैज्ञानिक एवं चिकित्सकीय आधार पर अध्ययन करा सकती है। इससे पहले भी केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष कहा था कि वह फांसी की जगह कम पीड़ादायक और अधिक मानवीय तरीके की संभावना पर विचार कर रही है, हालांकि उस समय कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया था।
पहले भी उठता रहा है सवाल
फांसी के विकल्प पर सुप्रीम कोर्ट में यह बहस नई नहीं है। पिछले साल भी अदालत ने केंद्र से यह विचार करने को कहा था कि क्या मौत की सजा पाए कैदियों को फांसी और घातक इंजेक्शन जैसे विकल्पों में से चुनने का अधिकार दिया जा सकता है। उस समय केंद्र ने वैकल्पिक तरीकों पर विचार के लिए और समय मांगा था। अब फिर हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की मौजूदा व्यवस्था को हटाने से इनकार कर दिया है, लेकिन केंद्र के लिए विशेषज्ञ समिति के जरिए वैकल्पिक और कम पीड़ादायक तरीकों की वैज्ञानिक समीक्षा का रास्ता खुला रखा है।
एआई-171 विमान दुर्घटना जांच: अंतिम रिपोर्ट से पहले पायलटों के संगठन ने एएआईबी से तकनीकी सुनवाई की मांग की
नई दिल्ली, 18 अगस्त (आईएएनएस)। एयर इंडिया की अहमदाबाद में हुई एआई-171 विमान दुर्घटना की जांच की रिपोर्ट को अंतिम रूप देने से पहले फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (एफआईपी) ने विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) के साथ औपचारिक सुनवाई और तकनीकी चर्चा की मांग की है। पायलटों के संगठन का कहना है कि जांच रिपोर्ट को अंतिम रूप देने से पहले परिचालन और तकनीकी पहलुओं पर उसके सुझावों पर विचार किया जाना चाहिए।
यह मांग सुप्रीम कोर्ट के 28 जुलाई के उस आदेश के बाद की गई है, जिसमें केंद्र सरकार ने आश्वासन दिया था कि पायलट संगठन द्वारा दिए गए सुझावों और तकनीकी टिप्पणियों पर जांच प्रक्रिया के दौरान उचित विचार किया जाएगा।
एफआईपी ने एएआईबी से खुद को विमानन क्षेत्र के एक महत्वपूर्ण हितधारक (स्टेकहोल्डर) के रूप में औपचारिक मान्यता देने, उसके तकनीकी प्रस्तुतिकरणों को जांच रिकॉर्ड का हिस्सा बनाने और उसके द्वारा उठाए गए मुद्दों की जांच टीम द्वारा समीक्षा किए जाने का आग्रह किया है।
एफआईपी के अध्यक्ष कैप्टन सी.एस. रंधावा ने एक पत्र में अनुरोध किया है कि अंतिम जांच रिपोर्ट तैयार होने से पहले उन्हें जांच अधिकारी और संबंधित तकनीकी विशेषज्ञों के साथ व्यक्तिगत सुनवाई या तकनीकी बैठक का अवसर दिया जाए।
पायलट संगठन ने कहा है कि वह जांच में कई महत्वपूर्ण विषयों पर अपने तकनीकी सुझाव देना चाहता है, जिनमें फ्लाइट सिम्युलेटर परीक्षण और पुनर्निर्माण, घटनाक्रमों का क्रमिक विश्लेषण, क्रू प्रदर्शन और मानव कारक, विमान और उसके सिस्टम का व्यवहार, तथा ऑपरेशनल और नियामकीय निगरानी जैसे विषय शामिल हैं।
एफआईपी विशेष रूप से सिम्युलेटर कॉन्फिगरेशन, परीक्षण की कार्यप्रणाली, फ्लाइट डेटा के विश्लेषण, कॉकपिट में पायलटों की गतिविधियों, कार्यभार, चेतावनी प्रणालियों, विमान के सिस्टम व्यवहार और प्रशिक्षण प्रक्रियाओं पर चर्चा करना चाहता है।
संगठन ने यह भी अनुरोध किया है कि जांच एजेंसी यह स्पष्ट करे कि उसके द्वारा उठाए गए प्रत्येक प्रमुख तकनीकी मुद्दे का परीक्षण किस विशेषज्ञ या तकनीकी विभाग द्वारा किया गया है।
हालांकि एफआईपी ने स्पष्ट किया है कि वह जांच से जुड़ी कोई गोपनीय व्यक्तिगत जानकारी या ऐसी सामग्री नहीं मांग रहा है, जिससे जांच की स्वतंत्रता या गोपनीयता प्रभावित हो।
अपने पत्र में संगठन ने कहा, एफआईपी का उद्देश्य स्वतंत्र जांच में हस्तक्षेप करना, उसे प्रभावित करना या उसके निष्कर्षों का पूर्वानुमान लगाना नहीं है। हमारा उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना है कि अंतिम निष्कर्ष तय होने से पहले जांच प्राधिकरण के समक्ष सभी प्रासंगिक परिचालन और तकनीकी दृष्टिकोण उपलब्ध हों।
पायलट संगठन ने एएआईबी से अनुरोध किया है कि प्रस्तावित तकनीकी बैठक 15 सितंबर से पहले आयोजित की जाए। संगठन का कहना है कि जांच रिपोर्ट के अक्टूबर के पहले सप्ताह तक पूरी होने की संभावना है, इसलिए उससे पहले चर्चा आवश्यक है।
गौरतलब है कि एयर इंडिया की उड़ान एआई-171, जो एक बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर थी, 12 जून को अहमदाबाद से उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। इस भीषण हादसे में 260 लोगों की मौत हुई थी। यह भारत की हालिया विमानन इतिहास की सबसे गंभीर दुर्घटनाओं में से एक मानी जाती है।
अब विमानन क्षेत्र की नजर एएआईबी की अंतिम जांच रिपोर्ट पर है, जिससे दुर्घटना के कारणों और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उपायों को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
--आईएएनएस
डीबीपी
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