वेनेजुएला में 24 जून को आए दोहरे भूकंप में मरने वालों की संख्या बढ़ी, मौतों का आंकड़ा 6400 के पार
Venezuela Earthquake: वेनेजुएला की सरकार ने 24 जून को आए दोहरे भूकंप से हुई मौतों के आधिकारिक आंकड़े को अपडेट करते हुए बताया है कि मृतकों की संख्या बढ़कर 6,438 हो गई है. पिछले सप्ताह जारी किए गए आंकड़े की तुलना में मृतकों की संख्या में 137 का इजाफा हुआ है. सरकार की ओर से सोमवार को जारी बुलेटिन के अनुसार, भूकंप से प्रभावित परिवारों को अब तक 335 घर सौंपे जा चुके हैं. इसके अलावा, देशभर में 59,109 इमारतों का निरीक्षण किया गया है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि वे रहने के लिए सुरक्षित हैं या नहीं.
10,696 इमारतें उच्च जोखिम वाली
जिन इमारतों का आकलन किया गया, उनमें से 34,680 को रहने योग्य पाया गया है, जबकि 13,733 इमारतों को प्रतिबंधित पहुंच वाली श्रेणी में रखा गया है. वहीं, 10,696 इमारतों को उच्च जोखिम वाली इमारतों के रूप में चिन्हित किया गया है.
इससे पहले जारी अपडेट में बताया गया था कि भूकंप से प्रभावित परिवारों को 287 से अधिक घर उपलब्ध कराए जा चुके हैं और देशभर में 43,679 इमारतों का मूल्यांकन किया गया है.
ट्रैफिक-लाइट टैगिंग से हो रहा इमारतों का आकलन
वेनेजुएला सरकार ने इमारतों की रहने योग्य स्थिति का आकलन करने के लिए ट्रैफिक-लाइट आधारित टैगिंग प्रणाली लागू की है. इसके तहत हरे रंग का टैग उन इमारतों को दिया जाता है जिन्हें रहने के लिए सुरक्षित माना गया है. पीले रंग का टैग प्रतिबंधित पहुंच वाली इमारतों के लिए है, जबकि लाल रंग का टैग उन इमारतों पर लगाया जाता है जिन्हें उच्च जोखिम वाला माना गया है और जिन्हें गिराया भी जा सकता है.
24 जून को आए थे 7.2 और 7.5 तीव्रता के भूकंप
24 जून को वेनेजुएला में 7.2 और 7.5 तीव्रता के दो भूकंप आए थे. इन दोनों भूकंपों के केंद्र क्रमश: पश्चिमी राज्य याराकुय और मध्य राज्य ला गुआइरा में थे.
तटीय राज्य ला गुआइरा में इन दोनों भूकंपों से सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है. पहले की जानकारी के अनुसार, यहां 10,981 लोग राहत शिविरों में रह रहे हैं. राजधानी कराकस में 6,133 और मध्य राज्य मिरांडा में 1,323 लोग आश्रय स्थलों में हैं.
28 देशों ने भेजी मानवीय सहायता
इस बीच, वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने हाल ही में आए भूकंपों के पीड़ितों की मदद के लिए 28 देशों की ओर से उपलब्ध कराई गई मानवीय सहायता के लिए आभार व्यक्त किया है.
उन्होंने कराकस में एक संग्रह केंद्र का निरीक्षण करने के बाद यह बात कही. इस केंद्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भेजी गई 2,000 टन से अधिक मानवीय सहायता को छांटकर उन अस्थायी शिविरों तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है, जहां जून के भूकंप से प्रभावित लोगों को रखा गया है.
रोड्रिगेज ने कहा, “वेनेजुएला उन देशों, दुनिया के लोगों और दुनिया की सरकारों को धन्यवाद देते नहीं थकता, जिन्होंने मदद के लिए हाथ बढ़ाया है.” मानवीय सहायता को भूकंप प्रभावित लोगों के लिए बनाए गए अस्थायी शिविरों में वितरित किया जा रहा है.
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(DISCLAIMER: हेडिंग, समरी और सबहेड के अलावा, पूरी खबर IANS न्यूज फीड से ली गई है. न्यूजनेशन खबर में किए गए किसी भी डेटा और फैक्ट्स की पुष्टि नहीं करता है.)
टेनिस स्टार सबालेंका के संघर्ष की कहानी:कभी टेनिस छोड़ने का बनाया मन, अब आर्यना सबालेंका की नज़र तीसरे यूएस ओपन पर
‘जब लोग मुझे टेनिस कोर्ट पर खेलते देखते हैं, तो उन्हें एक आक्रामक, तेज फोरहैंड वाली और कभी-कभी गुस्से में अपनी टीम पर चिल्लाने वाली खिलाड़ी दिखाई देती है। वे मुझे बेबाक और खुलकर बोलने वाली कहते हैं। पर, इस मुकाम तक पहुंचने के लिए मैंने कई मुश्किलें, दर्द और आंसुओं से भरी रातें झेली हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। मेरा बचपन बेलारूस के मिन्स्क में बीता। जब मैं छह साल की थी, तब मेरे पिता सर्गेई पहली बार मुझे टेनिस कोर्ट ले गए। वे खुद आइस हॉकी खिलाड़ी रहे थे, पर 19 साल की उम्र में एक कार दुर्घटना ने उनका करिअर खत्म कर दिया। इसलिए शायद वे मेरे भीतर चैंपियन देखते थे। बचपन से ही मेरा स्वभाव सबसे अलग था। जहां दूसरी लड़कियां कोच की हर बात मान लेती थीं, वहीं मैं अपनी राय खुलकर रखती थी और बहस भी करती थी। मेरी दुनिया टेनिस, पढ़ाई और प्रैक्टिस तक ही सीमित थी। सोशल मीडिया से कोई लेना-देना नहीं था। 2018 में, 20 वर्ष की उम्र में, मुझे डब्ल्यूटीए का ‘न्यूकमर ऑफ द ईयर’ चुना गया। मैंने कई बड़ी खिलाड़ियों को हराया। उसी दौरान मैंने और मेरे पिता ने सपना देखा था कि 25 साल की उम्र से पहले मैं कम से कम दो ग्रैंड स्लैम खिताब जीतूंगी। जिंदगी हमेशा हमारी योजनाओं के मुताबिक नहीं चलती। 2019 में मेनिनजाइटिस के कारण मेरे पिता का सिर्फ 43 साल की उम्र में निधन हो गया। वे पिता ही नहीं, बल्कि मेरे सबसे अच्छे दोस्त व मार्गदर्शक थे। उनके जाने से मैं पूरी तरह टूट गई। उन्हें श्रद्धांजलि देने की चाह में मैंने खुद पर ग्रैंड स्लैम जीतने का इतना दबाव बना लिया कि मेरा खेल व आत्मविश्वास दोनों प्रभावित होने लगे। तब मां ने मुझे कहा,‘आर्यना, तुम्हारे पापा तुम्हारी हर उपलब्धि पर गर्व करते थे। तुम्हारा इस स्तर तक पहुंचना ही उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान है।’ मां की इन बातों ने दिल का बोझ कम कर दिया और आगे बढ़ने की ताकत दी। पर, चुनौतियां अभी बाकी थीं। 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद माहौल बदल गया। मुझे आलोचनाओं और नफरत का सामना करना पड़ा, जिससे मैं अक्सर टूट जाती थी। इसका असर खेल पर भी पड़ा और मेरी सर्विस बेहद खराब हो गई। उस साल मैंने 428 डबल फॉल्ट किए। कई एक्सपर्ट ने मेरा करिअर खत्म मान लिया था और मैं खेल छोड़ने तक का सोचने लगी थी। जब पूरी दुनिया मुझे खत्म हो चुका खिलाड़ी मानने लगी थी, मैं खेल छोड़ने के करीब थी। लेकिन मैंने हार नहीं मानी। बायोमैकेनिक्स एक्सपर्ट की मदद से अपनी सर्व तकनीक को नए सिरे से गढ़ा और जबरदस्त वापसी की। मैंने स्पोर्ट्स साइकोलॉजिस्ट पर निर्भर रहना छोड़ दिया और खुद पर भरोसा करना सीखा। मुझे एहसास हुआ कि मुझसे बेहतर मुझे कोई नहीं समझ सकता। मेहनत का फल जनवरी 2023 में मिला, जब मैंने पहला ऑस्ट्रेलियन ओपन और पहला ग्रैंड स्लैम खिताब जीता। इस सफर ने मुझे बड़ी सीख दी है- सपनों के पीछे इतना भी न भागें कि खुद को खो बैठें। जीवन में संतुलन बहुत जरूरी है। कोर्ट पर मेरा गुस्सा ही मेरी ताकत है। मैं जैसी हूं, वैसी ही दिखती हूं। बताना चाहती हूं... जिंदगी कितनी भी चोट दे,सच्चा फाइटर हमेशा उठ खड़ा होता है।' -आर्यना
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