Mumbai Police ने 27 वर्षीय Bangladeshi woman को किया गिरफ्तार, एक महीने पहले हुई थी निर्वासित
मुंबई पुलिस ने 27 वर्षीय एक बांग्लादेशी महिला को अवैध रूप से भारत में दोबारा प्रवेश करने और वैध यात्रा दस्तावेजों के बिना शहर में रहने के आरोप में गिरफ्तार किया है। पुलिस के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। गामदेवी पुलिस के एक अधिकारी के अनुसार, आरोपी महिला की पहचान नादिरा सुल्ताना के रूप में हुई है।
वह अवैध रास्ते से भारत में दाखिल होने के बाद आवश्यक दस्तावेजों के बिना यहां रह रही थी। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि उसने भारत में दोबारा प्रवेश कैसे किया और क्या किसी ने उसकी मदद की थी। अधिकारी ने सोमवार को बताया कि शनिवार को पुलिस को गिरगांव चौपाटी से सटे फुटपाथ क्षेत्र में एक संदिग्ध बांग्लादेशी महिला के घूमने की सूचना मिली।
उन्होंने कहा कि पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ में महिला कथित तौर पर अपनी पहचान और पते के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दे सकी। उसके जवाब संदिग्ध पाए जाने पर उसे पूछताछ के लिए थाने ले जाया गया। जांच के दौरान पता चला कि उसके पास भारत में रहने की अनुमति देने वाले वैध दस्तावेज नहीं थे।
इसके बाद उसके दस्तावेजों और पुराने रिकॉर्ड की जांच की गई। पुलिस ने बताया कि जांच में सामने आया कि सुल्ताना को पिछले महीने ही भारत से बांग्लादेश निर्वासित किया गया था। आरोप है कि निर्वासन के बाद वह अवैध रास्ते से दोबारा भारत में दाखिल हुई और बाद में मुंबई पहुंची।
अधिकारी के अनुसार, संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। महिला से फिलहाल पूछताछ की जा रही है और जांच के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
Jairam Ramesh का आरोप, PM Modi ने Caste Census का विचार बिना कहे दफ़न किया
कांग्रेस ने मंगलवार को आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जाति जनगणना को लेकर एक बार फिर ‘‘यू-टर्न’’ लिया है और अब बिना कुछ कहे जाति जनगणना के विचार को ‘‘दफ़न’’ कर दिया है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने तंज कसते हुए यह भी कहा कि प्रधानमंत्री यू-टर्न के उस्ताद हैं। रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि मोदी सरकार ने 21 सितंबर, 2021 को उच्चतम न्यायालय में दाखिल हलफनामे में जाति जनगणना की मांग को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया था।
उनके मुताबिक, हलफनामे के पैरा 12(डी) में कहा गया था कि 2011 की जनगणना से पहले जातियों का कोई रजिस्टर तैयार नहीं किया गया था और यह बेहतर होता कि जातियों के रजिस्टर में चयन के लिए ‘‘ड्रॉपडाउन मेन्यू’’ दिया गया होता, जिससे लगातार और भरोसेमंद आंकड़े उपलब्ध हो सकते। कांग्रेस महासचिव ने सवाल किया कि जब केंद्र सरकार ने खुद 2021 में इस तरह की व्यवस्था की जरूरत बताई थी, तो 2027 की जनगणना में ऐसा ‘‘ड्रॉपडाउन मेन्यू’’ क्यों नहीं है। जनगणना के डिजिटल फॉर्म में ड्रॉपडाउन मेन्यू विकल्पों की एक छिपी हुई सूची होती है।
किसी खाने पर क्लिक करने पर राज्यों, भाषाओं या तय श्रेणियों जैसे विकल्प नीचे की ओर खुलते हैं, जिनमें से एक को चुनना होता है। कांग्रेस नेता ने दावा किया कि बिहार और तेलंगाना में हुए जाति सर्वेक्षणों से पहले इस तरह का मेन्यू तैयार किया गया था। रमेश ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष ने भी पांच मई, 2025 को प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में ऐसी व्यवस्था का सुझाव दिया था।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने 30 अप्रैल, 2025 को जाति जनगणना कराने की घोषणा करके अपने पुराने रुख से ‘‘पूरी तरह यू-टर्न’’ लिया था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री इससे पहले जाति जनगणना के विचार को ‘‘शहरी नक्सल’’ का विचार बता चुके थे और अब उन्होंने अपने उस यू-टर्न पर भी यू-टर्न ले लिया है। उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘बिना ऐसा कहे उन्होंने जाति जनगणना के विचार को दफन कर दिया है।’’ रमेश ने प्रधानमंत्री पर तंज कसते हुए कहा कि वह ‘‘यू-टर्न के उस्ताद’’ हैं।
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