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Refrigerator Gas Leak: फ्रिज चालू है फिर भी नहीं हो रही पहले जैसी कूलिंग? तुरंत पहचानें गैस लीक के ये संकेत

Refrigerator Gas Leak: गर्मी का मौसम आते ही घर में रेफ्रिजरेटर की अहमियत कई गुना बढ़ जाती है. दूध, सब्जियां, फल और बना हुआ खाना सुरक्षित रखने के लिए फ्रिज दिन-रात चलता रहता है. कई बार ऐसा होता है कि फ्रिज का स्विच ऑन रहता है, अंदर की लाइट भी जलती है और तापमान का बटन भी सही जगह सेट होता है, लेकिन अंदर रखा सामान ठंडा नहीं होता है. लोग अक्सर इसे मौसम की मार या कोई साधारण बात मान लेते हैं. असलियत यह है कि कूलिंग न होने के पीछे सबसे बड़ी वजह फ्रिज की कूलिंग गैस का बाहर निकल जाना यानी गैस लीक होना हो सकता है. अगर इस खराबी को समय रहते न पहचाना जाए, तो फ्रिज की कार्यक्षमता प्रभावित होती है और बाद में हजारों रुपये की चपत लग सकती है.

फ्रिज में गैस लीकेज के शुरुआती लक्षण

गैस लीकेज की स्थिति में फ्रिज कई प्रकार के इशारे देने लगता है. सबसे पहला और सीधा लक्षण यह है कि फ्रिज का कंप्रेसर लगातार काम करता रहता है, लेकिन कैबिनेट के अंदर जरा सी भी ठंडक महसूस नहीं होती है. इसके अलावा, फ्रीजर वाले हिस्से पर ध्यान देने से असलियत तुरंत समझ आ जाती है. सामान्य दिनों में जहां फ्रीजर में चारों तरफ अच्छी बर्फ जमी होती है, वहीं गैस निकलने के बाद बर्फ जमना पूरी तरह बंद हो जाता है. कई बार फ्रीजर की किसी एक कोने वाली पट्टी पर हल्की सी सफेद बर्फ दिखाई देती है, जबकि बाकी पूरा हिस्सा सूखा और साधारण तापमान पर रहता है.

फ्रिज के आसपास एक अजीब सी रासायनिक गंध आना भी गैस रिसाव की पहचान कराता है. यदि आपको रेफ्रिजरेटर के पीछे या दरवाज़ा खोलने पर हल्की केमिकल जैसी महक लगे, तो समझ लेना चाहिए कि अंदरूनी पाइपलाइन से गैस धीरे-धीरे बाहर आ रही है. ऐसे में चीजों को अंदर रखे रहने का कोई फायदा नहीं होता, क्योंकि सामान्य तापमान के चलते भोजन जल्दी सड़ने लगता है.

बिजली के बिल और कंप्रेसर पर सीधा असर

बहुत से लोग सोचते हैं कि फ्रिज कम ठंडा कर रहा है तो चलने देते हैं, लेकिन ऐसा करना आपकी जेब पर बहुत भारी पड़ता है. फ्रिज के अंदर एक थर्मोस्टेट लगा होता है, जो तापमान ठंडा होने पर कंप्रेसर को अपने आप बंद कर देता है. जब गैस लीक हो जाती है, तो फ्रिज अंदर कभी ठंडा हो ही नहीं पाता है. नतीजतन, सेंसर कंप्रेसर को कट-ऑफ का आदेश नहीं भेज पाता और कंप्रेसर बिना रुके चौबीसों घंटे लगातार भागता रहता है.

लगातार और क्षमता से अधिक चलने के कारण घर का बिजली मीटर तेजी से दौड़ने लगता है, जिससे महीने के अंत में भारी-भरकम बिजली बिल आता है. इससे भी बड़ा नुकसान यह होता है कि लगातार चलने और अत्यधिक लोड पड़ने से कंप्रेसर बहुत ज्यादा गर्म हो जाता है. अधिक हीटिंग की वजह से कंप्रेसर की मोटर जल सकती है या वह अंदर से जाम हो सकता है. नया कंप्रेसर डलवाना काफी खर्चीला काम होता है, इसलिए शुरुआत में ही ध्यान देकर इस दोहरी मार से बचा जा सकता है.

आखिर क्यों लीक हो जाती है फ्रिज की गैस

फ्रिज के अंदर गैस लीक होने के पीछे कई मानवीय और तकनीकी कारण जिम्मेदार होते हैं. सबसे आम गलती लोग फ्रीजर की सफाई करते वक्त करते हैं. जब फ्रीजर में ज्यादा बर्फ जम जाती है, तो लोग उसे जल्दी हटाने के चक्कर में चाकू, कैंची या पेचकस जैसी नुकीली चीजों से बर्फ को खुरचने लगते हैं. फ्रीजर की दीवारें और कूलिंग कॉइल एल्युमिनियम या पतली तांबे की बनी होती हैं. जरा सा भी नुकीला वार लगने पर कॉइल में छेद हो जाता है और पूरी गैस कुछ ही पलों में बाहर निकल जाती है.

इसके अलावा, लंबे समय तक नमी जमा रहने से कूलिंग पाइप्स में जंग लग जाती है, जिसे कोरोजन कहा जाता है. जंग लगने से पाइप्स में बेहद बारीक छेद हो जाते हैं, जहां से गैस धीरे-धीरे रिसती रहती है. मकान बदलते समय या कमरे में फ्रिज को घसीटते वक्त लगने वाले तेज झटकों से भी अंदरूनी जोड़ ढीले पड़ जाते हैं या तांबे की पाइपलाइन चटक जाती है. पुराने हो चुके मॉडल्स में पार्ट्स के घिसने से भी यह परेशानी अक्सर देखने को मिलती है.

समस्या दिखने पर क्या करें और कैसे रखें सुरक्षित

अगर आपको अपने रेफ्रिजरेटर में ऊपर बताए गए लक्षण नजर आएं, तो खुद कोई जोड़-तोड़ करने से बचें. तुरंत फ्रिज का पावर प्लग निकाल दें ताकि कंप्रेसर पर अतिरिक्त दबाव न पड़े और वह जलने से बच जाए. इसके बाद किसी प्रशिक्षित और कुशल मैकेनिक को बुलाकर पूरे सिस्टम की जांच करवाएं. मैकेनिक पहले लीकेज वाली जगह को ढूंढकर उसे वेल्डिंग के जरिए सील करेगा और फिर प्रेशर टेस्ट करने के बाद सही मात्रा में नई गैस भरेगा.

फ्रिज को सुरक्षित रखने के लिए कुछ सामान्य नियमों का पालन हमेशा करें. फ्रीजर में ज्यादा बर्फ जमने पर डिफ्रोस्ट बटन का इस्तेमाल करें और बर्फ को अपने आप पिघलने दें. सफाई के लिए हमेशा मुलायम कपड़े और गुनगुने पानी का प्रयोग करें. फ्रिज को दीवार से कम से कम छह इंच की दूरी पर रखें ताकि पीछे की जाली और कंप्रेसर को पर्याप्त हवा मिलती रहे. हर साल गर्मी का सीजन शुरू होने से पहले फ्रिज की सामान्य सर्विसिंग करा लेने से इस तरह की बड़ी परेशानियों से बचा जा सकता है.

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सरकार ने ईवी, हाइड्रोजन और सीएनजी से चलने वाले वाणिज्यिक वाहनों की आयु सीमा 5 साल बढ़ाने का रखा प्रस्ताव

नई दिल्ली, 18 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय परमिट प्रणाली के अंतर्गत आने वाले इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी), हाइड्रोजन ईंधन आधारित वाहनों और प्राकृतिक गैस (सीएनजी) से चलने वाले वाणिज्यिक वाहनों की निर्धारित आयु सीमा में 5 वर्ष की अतिरिक्त बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा है।

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (एमओआरटीएच) द्वारा हाल ही में जारी एक अधिसूचना के अनुसार, यह प्रस्ताव राष्ट्रीय परमिट प्रक्रियाओं को सरल बनाने और डिजिटल प्रक्रियाओं के उपयोग को बढ़ाने के लिए एक मसौदा

संशोधन का हिस्सा है, जिन पर सरकार ने आम जनता, उद्योग जगत और अन्य हितधारकों से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित किए हैं। इसके लिए 30 दिनों का समय दिया गया है। इन सुझावों पर विचार करने के बाद अंतिम नियमों को राजपत्र (गजट) में प्रकाशित किया जाएगा, जिसके बाद ही वे लागू होंगे।

केंद्रीय मोटर वाहन नियम (सीएमवीआर), 1989 में संशोधन के मसौदे में प्रस्तावित प्रावधान में राष्ट्रीय परमिट प्रक्रियाओं को सरल बनाने और प्रक्रिया को डिजिटल बनाने का भी प्रयास किया गया है।

मुख्य प्रस्ताव नियम 88 में है, जो राष्ट्रीय परमिट प्रणाली के अंतर्गत वाहनों की आयु सीमा निर्धारित करता है। मंत्रालय ने बैटरी से चलने वाले हाइड्रोजन ईंधन आधारित और सीएनजी से चलने वाले वाहनों के लिए इन सीमाओं को 5 साल तक बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है।

यदि इसे अंतिम रूप दे दिया जाता है, तो मौजूदा 12 वर्ष और 15 वर्ष की सीमाएं प्रभावी रूप से क्रमशः 17 और 20 वर्ष हो जाएंगी। यह संशोधन सभी वाणिज्यिक वाहनों के लिए एक समान विस्तार नहीं है। यह विशेष रूप से नियम 88 के अंतर्गत आने वाले वाहनों पर लागू होता है। हालांकि अधिसूचना में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि संशोधन के बाद इन वाहनों की अधिकतम अनुमत आयु कितनी होगी। साथ ही प्रस्तावित विस्तार सभी वाणिज्यिक वाहनों पर लागू नहीं होगा और यह केवल कुछ वाहनों तक ही सीमित रहेगा।

यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है, जब सरकार वाणिज्यिक परिवहन में स्वच्छ वाहनों का उपयोग बढ़ाने का प्रयास कर रही है।

सरकार ने राष्ट्रीय परमिट प्रणाली को भी अधिक डिजिटल और सरल बनाने का प्रस्ताव रखा है। मसौदा नियमों के अनुसार, आवेदक अपनी सुविधा के अनुसार एक बार में अधिकतम पांच वर्ष की अवधि के लिए राष्ट्रीय परमिट प्राधिकरण प्राप्त कर सकेंगे। इसके लिए प्रति वर्ष 16,500 रुपए शुल्क निर्धारित किया गया है, जिसे राष्ट्रीय परमिट खाते में जमा करना होगा।

इसके अलावा, राष्ट्रीय परमिट के लिए फॉर्म-46 के माध्यम से आवेदन और फॉर्म-47 के तहत अनुमति प्रदान करने की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन करने का प्रस्ताव है। इससे परिवहन क्षेत्र में कागजी कार्यवाही कम होगी और प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी।

मंत्रालय ने अस्थायी पंजीकरण से जुड़े नियमों में भी महत्वपूर्ण बदलाव प्रस्तावित किए हैं। यदि किसी वाहन का केवल चेसिस है और उस पर अभी बॉडी नहीं लगी है, तो उसका अस्थायी पंजीकरण जारी होने की तारीख से 6 महीने तक वैध रहेगा।

यदि 6 महीने के बाद भी बॉडी फिटमेंट का कार्य पूरा नहीं हो पाता है या किसी अन्य अनियंत्रित परिस्थितियों के कारण वाहन कार्यशाला में ही रहता है, तो संबंधित पंजीकरण प्राधिकरण इसकी वैधता को हर बार 30 दिनों के लिए बढ़ा सकेगा।

वहीं, ऐसे पूर्ण निर्मित वाहनों के लिए जिन्हें विशेष रूप से अनुकूलित बनाया जा रहा है या किसी अन्य राज्य में पंजीकरण कराया जाना है, उनके लिए अस्थायी पंजीकरण 45 दिनों तक वैध रहेगा।

सरकार ऑटोमोबाइल उद्योग में अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) को बढ़ावा देने के लिए पात्र ऑटो कंपोनेंट निर्माताओं को भी ट्रेड सर्टिफिकेट से जुड़े प्रावधानों के दायरे में लाने की तैयारी कर रही है।

इसके तहत वही निर्माता पात्र होंगे जिन्हें वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग (डीएसआईआर) से मान्यता प्राप्त होगी और जो ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए नए उत्पादों के विकास में अनुसंधान एवं विकास कार्य कर रहे होंगे।

मसौदा नियमों में वाहन संबंधी दस्तावेजों को और अधिक डिजिटल बनाने का भी प्रस्ताव है। इसके तहत डीलरशिप प्राधिकरण प्रमाणपत्र या वाहन पंजीकरण संख्या दर्ज करते ही आवश्यक जानकारी वाहन पोर्टल से स्वतः प्राप्त हो जाएगी।

संशोधित फॉर्म में डीलरों के लिए जीएसटी पंजीकरण संख्या, पैन, उद्यम आधार और कॉर्पोरेट आइडेंटिफिकेशन नंबर (सीआईएन) जैसी जानकारियां भी शामिल की जाएंगी।

वाहन मालिकों के लिए प्रस्तावित संशोधनों के तहत फॉर्म-20 में आधार से जुड़े मोबाइल नंबर का उल्लेख अनिवार्य किया जा सकता है। इसके अलावा, हायर-परचेज, लीज या हाइपोथेकेशन व्यवस्था से जुड़े दस्तावेजों में संबंधित एग्रीमेंट या लोन अकाउंट नंबर दर्ज करने का भी प्रावधान किया गया है।

सरकार ने फॉर्म-48 में भी बदलाव का प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत वाहन के वैध पंजीकरण, बीमा, प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसी), फिटनेस सर्टिफिकेट, लंबित चालान और पहले प्राप्त किसी राष्ट्रीय परमिट से जुड़ी जानकारी दर्ज करना अनिवार्य होगा।

--आईएएनएस

डीबीपी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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