West Bengal के तारापीठ में होटल में आग से 9 लोगों की मौत, मालिक समेत दो हिरासत में
पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में सोमवार तड़के एक होटल में आग लगने से नौ लोगों की मौत हो गई, जिसके बाद पुलिस ने होटल में उचित अग्निशमन व्यवस्था न होने के आरोप में होटल के मालिक समेत दो लोगों को हिरासत में ले लिया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों के अनुसार मृतकों में मेघालय के एक ही परिवार के पांच सदस्य शामिल हैं।
अधिकारियों ने बताया कि घटना के समय होटल में ठहरे 43 लोगों में से 34 को प्राथमिक चिकित्सा के बाद छुट्टी दे दी गई, जबकि एक घायल व्यक्ति का इलाज अस्पताल में किया जा रहा था, जिसने बाद में शाम को दम तोड़ दिया। किंवदंती के अनुसार, 13वीं सदी का तारापीठ मंदिर भारत की 51 शक्तिपीठों में से एक है और यहां देवी तारा की पूजा की जाती है। मंदिर नगरी तारापीठ में चार मंजिला होटल के भूतल पर तड़के करीब 4:30 बजे आग लगी जिस समय ज्यादातर मेहमान सो रहे थे।
इनमें कई श्रद्धालु थे, जो सावन महीने के सोमवार को पूजा करने आए थे। अधिकारियों के अनुसार, आग लगने के बाद घना धुआं पूरे भवन में फैलने के कारण कई मेहमान ऊपरी मंजिलों पर फंस गए, इसके बाद दमकल की गाड़ियां घटनास्थल पर भेजकर आग पर काबू पाया गया। उन्होंने कहा कि घायलों को रामपुरहाट सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल ले जाया गया।
अधिकारियों ने बताया कि कुछ लोग झुलस गए, जबकि कुछ लोग दम घुटने के कारण बीमार हो गए। होटल के अधिकारियों ने दावा किया कि आग शॉर्ट सर्किट के कारण लगी। उन्होंने कहा कि बिजली आपूर्ति व्यवस्था के एक उपकरण में चिंगारी भड़कने के बाद होटल के ‘रिसेप्शन’ के पास आग शुरू हुई।
हालांकि आग लगने का सही कारण अभी पता नहीं चल पाया है। अधिकारियों ने बताया कि होटल के अंदर सजावट और फाइबर की सामग्री के कारण आग तेजी से फैल गई और धुआं ऊपरी मंजिलों तक पहुंच गया, जिसके कारण कई मेहमान अपने कमरों में फंस गए। अधिकारियों ने बताया कि होटल में आग बुझाने वाले उपकरणों के रखरखाव में कथित लापरवाही के संबंध में पुलिस ने होटल के मालिक समेत दो लोगों को हिरासत में लिया है।
मेघालय के एक ही परिवार के पांच सदस्यों की मौत से मातम छा गया है। अधिकारी पीड़ितों के परिवारों को सहायता प्रदान करने के लिए मेघालय सरकार और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय कर रहे हैं। इस घटना और आगामी कौशिकी अमावस्या पर्व के दौरान भारी भीड़ जुटने के मद्देनजर बीरभूम जिला प्रशासन ने तारापीठ के होटलों, लॉज और अन्य प्रतिष्ठानों में बिजली व्यवस्था और अग्निशमन व्यवस्था की विशेष जांच कराने की घोषणा की है।
प्रशासन ने कहा कि यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि सभी होटल, लॉज, गेस्ट हाउस, होमस्टे एवं अन्य प्रतिष्ठानों में पर्याप्त और सुरक्षित बिजली व्यवस्था तथा आग से बचाव एवं आग बुझाने की प्रभावी व्यवस्था हो। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने हादसे में लोगों की मौत होने पर दुख जताया और कहा कि श्रद्धालु सावन के सोमवार पर मंदिर में पूजा करने के लिए तारापीठ आए थे। अधिकारी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “बीरभूम जिले के तारापीठ में होटल में आग लगने से जान गंवाने वाले तीर्थयात्रियों से जुड़ी इस घटना से मैं बहुत दुखी हूं।” उन्होंने कहा कि अपने प्रियजन को खोने वाले परिवारों के दुख को शब्दों में पूरी तरह व्यक्त नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि पुलिस और प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए बड़ी संख्या में लोगों को बचाया, लेकिन “सभी प्रयासों के बावजूद लोगों की दुखद मौत को नहीं टाला जा सका।” अधिकारी ने कहा कि पुलिस अधीक्षक, जिलाधिकारी, स्थानीय विधायक ध्रुव साहा और अग्निशमन विभाग के राज्य मंत्री कौशिक चौधरी मौके पर रहे और बचाव कार्य की निगरानी की। उन्होंने कहा कि वे प्रभावित और मृतकों के परिवारों को सभी जरूरी सहायता उपलब्ध कराने के लिए मेघालय सरकार और अलीपुरद्वार के स्थानीय प्रशासन के साथ भी समन्वय कर रहे हैं। अधिकारी ने कहा, “राज्य सरकार ने इस घटना के मूल कारण का पता लगाने के लिए कड़े कदम उठाए हैं।” उन्होंने लोगों को भरोसा दिलाया कि “जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाएगा और कानून के अनुसार उन्हें सख्त सजा दी जाएगी।” उन्होंने यह भी कहा कि पीड़ितों के लिए उचित मुआवजे की घोषणा उचित समय पर की जाएगी।
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री एवं तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने घटना पर दुख जताया। उन्होंने ‘एक्स’ पर कहा, “मैं तारापीठ में अचानक आग लगने की घटना से बेहद स्तब्ध हूं। मैं इस भयानक हादसे में जान गंवाने वाले लोगों की आत्मा की शांति और अपने प्रियजनों को खो चुके लोगों को इस दुख से उबरने की शक्ति देने की कामना करती हूं।
मैं इलाज करा रहे लोगों के जल्द और पूरी तरह स्वस्थ होने की भी प्रार्थना करती हूं।
Farmers का Delhi March रोके जाने पर खनौरी बॉर्डर पर डटे किसान, 20 को प्रदर्शन
पंजाब के किसानों ने दिल्ली तक 228 किलोमीटर लंबी ‘किसान बचाओ पदयात्रा’ जारी रखने से हरियाणा पुलिस द्वारा रविवार को रोके जाने के बाद सोमवार को खनौरी बॉर्डर पर ही डेरा डॉल दिया। पुलिस ने रविवार को पंजाब और हरियाणा के सीमा बिंदु खनौरी में किसानों को रोकने के लिए कई स्तरीय अवरोधक लगाए थे। इस पैदल मार्च की अगुवाई कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) के नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने सोमवार को संवाददाताओं से कहा कि किसानों का एक छोटा समूह खनौरी बॉर्डर पर डेरा डाले रहेगा।
डल्लेवाल ने कहा, ‘‘हमने उमस भरे मौसम से बचाव के लिए छोटे तंबू लगाए हैं। लेकिन यहां पक्का मोर्चा बनाना हमारा मकसद नहीं है।’’ डल्लेवाल ने कहा कि किसान 20 अगस्त को देश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध मार्च निकालने की कोशिश करेंगे। वे पुतले जलाएंगे और सरकार से पूछेंगे कि क्या उन्हें शांतिपूर्ण तरीके से राष्ट्रीय राजधानी तक पैदल मार्च करने का अधिकार नहीं है।
उन्होंने कहा,‘‘सरकार ने यह विमर्श बनाया है कि किसान सड़कें रोक रहे हैं, लेकिन जैसा कि हर कोई देख सकता है, हम सर्विस रोड के किनारे बैठे हैं, जबकि हरियाणा प्रशासन ने राजमार्ग को कंक्रीट के भारी अवरोधकों से बाधित कर दिया है।’’ डल्लेवाल ने कहा, ‘‘वे कहते थे कि किसानों को ट्रैक्टर और दूसरी गाड़ियों के साथ नहीं जाने दिया जाएगा, लेकिन अब वे हमें पैदल भी नहीं जाने दे रहे हैं। इस बार 300 से भी कम किसान शांतिपूर्ण तरीके से दिल्ली तक मार्च करना चाहते हैं, फिर भी सरकार को हमसे दिक्कत है। क्या हमें अपनी राष्ट्रीय राजधानी पैदल जाने का बुनियादी अधिकार भी नहीं है?’’ संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) के प्रतिनिधियों और हरियाणा सरकार के अधिकारियों के बीच रविवार को तीन दौर की बातचीत हुई लेकिन बेनतीजा रही।
डल्लेवाल ने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मिलने का प्रस्ताव ठुकरा दिया और अपने मुख्य मुद्दे प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर चर्चा के लिए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मिलने की मांग पर अड़े हैं।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
prabhasakshi










