Delhi court ने FIR का आदेश देने से किया इनकार, ट्यूशन छात्राओं से बदसलूकी के थे आरोप
दिल्ली की एक अदालत ने ट्यूशन सेंटर में पढ़ने वाली छात्राओं को कुछ लोगों द्वारा कथित तौर पर परेशान किए जाने और बाद में स्थानीय निवासियों पर हमला करने के आरोपों के सिलसिले में प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि किसी विशेष घटना या पीड़ित का उल्लेख किए बिना लगाए गए ‘‘महज आरोप’’ संज्ञेय अपराध का खुलासा नहीं करते। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह ने निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती देने वाली पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी, जिसमें पुलिस को प्राथमिकी दर्ज कर जांच करने का निर्देश देने से इनकार किया गया था।
अदालत ने 12 अगस्त को पारित आदेश में कहा, ‘‘ट्यूशन सेंटर के इलाके में आरोपियों के आने और छात्राओं को परेशान करने के संबंध में मेरा मानना है कि ये सामान्य आरोप हैं और इनमें विशिष्टता का अभाव है।’’ न्यायाधीश ने कहा, ‘‘किसी विशेष घटना का उल्लेख नहीं किया गया है। कोई पीड़ित सामने नहीं आया है। इसलिए, महज व्यापक आरोप ऐसे अपराधों के किए जाने का खुलासा नहीं करते।’’ अदालत अमित कुमार गुप्ता और नबाब सिंह की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि कई लोग उत्तर-पूर्वी दिल्ली स्थित सविता ट्यूशंस में पढ़ने वाली छात्राओं को नियमित रूप से परेशान करते थे तथा पटाखे फोड़कर, गाली-गलौज कर और उन पर हमला कर स्थानीय निवासियों को भी परेशान करते थे। याचिकाकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया था कि 27 जनवरी 2025 को करीब 50-60 लोगों के एक समूह ने कथित तौर पर आरोपियों में से एक के उकसाने पर, लोहे की छड़ों और डंडों से स्थानीय निवासियों पर हमला किया था। उन्होंने दावा किया था कि कई लोगों को गंभीर चोटें आई थीं और मौके पर मौजूद महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार किया गया था।
हालांकि, अदालत ने पाया कि छात्राओं को परेशान किए जाने से संबंधित आरोप सामान्य थे और उनमें विशिष्टता का अभाव था। हमले के आरोप पर अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने कई लोगों के गंभीर रूप से घायल होने का दावा तो किया, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया कि किस व्यक्ति को किस तरह की चोट लगी। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसे घावों को दर्शाने वाले किसी व्यक्ति के नाम या चिकित्सा दस्तावेज भी पेश नहीं किए गए।
न्यायाधीश ने कहा कि याचिकाकर्ताओं द्वारा पेश की गई तस्वीरों में ऐसी चोटें नहीं दिखतीं, जिन्हें कानून के तहत गंभीर चोट की श्रेणी में रखा जा सके। याचिकाकर्ताओं ने दलील दी थी कि सीसीटीवी फुटेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जुटाने के लिए पुलिस जांच जरूरी है। अदालत ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि सीसीटीवी फुटेज पहले से ही याचिकाकर्ताओं के कब्जे में है और इसे तस्वीरों के साथ पेन ड्राइव में निचली अदालत के समक्ष दाखिल किया जा चुका है।
अदालत ने निचली अदालत के आदेश में कोई अवैधता या खामी नहीं पाते हुए पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी।
CIC ने लॉन्च किया उन्नत APCOMS 2.0 पोर्टल, RTI अपील प्रक्रिया होगी आसान
केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने सोमवार को अपनी उन्नत अपील और शिकायत प्रबंधन प्रणाली (एपकोएमएस 2.0) शुरू की। इसका मकसद सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत दूसरी अपील और शिकायतों की प्रक्रिया को आसान और बेहतर बनाना है। कार्मिक मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि उन्नत पोर्टल को मुख्य सूचना आयुक्त राज कुमार गोयल ने शुरू किया।
मंत्रालय ने कहा कि एपसीओएमएस 2.0 को बेहतर सुरक्षा मानकों, बेहतर सुविधाओं के साथ विकसित किया गया है ताकि सीआईसी के डिजिटल ढांचे को मजबूत किया जा सके और आवेदकों व अन्य हितधारकों को इस्तेमाल में आसान अनुभव प्रदान किया जा सके। एपसीओएमएस एक ऑनलाइन पोर्टल है जिसे सीआईसी ने सितंबर 2016 में शुरू किया था। यह नागरिकों को दूसरी अपील और शिकायतें दर्ज करने की सुविधा देता है और मामलों के डिजिटल प्रसंस्करण (जैसे पंजीकरण, सुनवाई की तारीख तय करना और फैसलों को जारी व अपलोड करना) में मदद करता है।
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