लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का उद्घाटन: 40 मिनट में पूरा होगा सफर, एक लाख रोजगार और नए उद्योगों की खुलेगी राह
उत्तर प्रदेश के विकास को नई रफ्तार देने वाला लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे अब आम लोगों के लिए खुल गया है. केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस बहुप्रतीक्षित एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया. करीब 63 किलोमीटर लंबे इस छह-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे के शुरू होने से प्रदेश की राजधानी लखनऊ और औद्योगिक शहर कानपुर के बीच यात्रा पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज और सुविधाजनक हो जाएगी.
सरकार का दावा है कि इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने के बाद दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय करीब तीन घंटे से घटकर मात्र 40 मिनट रह जाएगा.
#WATCH | Uttar Pradesh: Defence Minister Rajnath Singh, Union Minister of Road Transport and Highways Nitin Gadkari, and Uttar Pradesh Chief Minister Yogi Adityanath attend the inauguration ceremony of the Kanpur-Lucknow Expressway in Unnao district pic.twitter.com/fvjjtPd8f1
— ANI (@ANI) July 13, 2026
रोजगार और उद्योगों के लिए बनेगा बड़ा केंद्र
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे केवल एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि प्रदेश के आर्थिक विकास का नया आधार बनने जा रहा है. सरकार और उद्योग जगत का अनुमान है कि आने वाले पांच वर्षों में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग एक लाख लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है.
एक्सप्रेसवे के दोनों ओर औद्योगिक इकाइयों, लॉजिस्टिक पार्क, वेयरहाउस, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और नए निवेश की संभावनाएं तेजी से बढ़ेंगी. इससे स्थानीय युवाओं को अपने ही क्षेत्र में रोजगार के अवसर मिलेंगे और उन्हें काम की तलाश में दूसरे राज्यों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा.
43 गांवों की बदलेगी तस्वीर
बनी से लेकर आजाद नगर टोल प्लाजा तक स्थित 43 गांवों के विकास की नई संभावनाएं इस परियोजना से जुड़ी हुई हैं. सड़क संपर्क बेहतर होने से इन गांवों में औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ेंगी.
स्थानीय व्यापारियों का मानना है कि बेहतर कनेक्टिविटी से कृषि उत्पादों की आवाजाही आसान होगी, छोटे कारोबार को नया बाजार मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी. भूमि की कीमतों में भी बढ़ोतरी होने की संभावना जताई जा रही है.
4200 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुआ एक्सप्रेसवे
करीब 4,200 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस आधुनिक एक्सप्रेसवे में यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा गया है.
इस परियोजना में तीन इंटरचेंज, दो फ्लाईओवर, एक रोड ओवरब्रिज (ROB), चार बड़े पुल, 25 छोटे पुल, 12 वाहन अंडरपास, 14 हल्के वाहनों के अंडरपास, 11 पैदल अंडरपास और दो वे-साइड सुविधाएं विकसित की गई हैं. इससे यात्रा न केवल तेज होगी बल्कि पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित भी बनेगी.
स्मार्ट तकनीक से लैस है पूरा एक्सप्रेसवे
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे को अत्याधुनिक इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) से लैस किया गया है. इस सिस्टम के जरिए ट्रैफिक की निगरानी और आपात स्थिति में तुरंत सहायता उपलब्ध कराई जा सकेगी.
एक्सप्रेसवे पर 21 वेरिएबल मैसेज साइन (VMS), 63 PTZ कैमरे, 27 वीडियो इंसिडेंट डिटेक्शन सिस्टम (VIDS), 62 इमरजेंसी कॉल बॉक्स, छह स्पीड रडार और नौ स्टैटिक वे-ब्रिज लगाए गए हैं. इन सुविधाओं का उद्देश्य सड़क सुरक्षा बढ़ाना और ट्रैफिक संचालन को अधिक प्रभावी बनाना है.
प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई गति
विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक्सप्रेसवे केवल लखनऊ और कानपुर के बीच दूरी कम नहीं करेगा, बल्कि उत्तर प्रदेश की औद्योगिक, व्यापारिक और लॉजिस्टिक क्षमता को भी नई ऊंचाई देगा. तेज परिवहन व्यवस्था से उद्योगों की लागत घटेगी, निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और नए कारोबारी अवसर पैदा होंगे.
आने वाले वर्षों में यह एक्सप्रेसवे प्रदेश के विकास मॉडल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है, जिससे रोजगार, निवेश और क्षेत्रीय विकास को नई दिशा मिलने की उम्मीद है.
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उत्तर प्रदेश: सरकार स्कूलों में बढ़ाएगी स्वास्थ्य और पोषण जागरूकता, स्वस्थ जीवनशैली सीखेंगे बच्चे
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार विद्यालयों में स्वास्थ्य शिक्षा, पोषण जागरूकता और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिए व्यापक अभियान चला रही है. इसके अंतर्गत परिषदीय विद्यालयों, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों तथा मान्यता प्राप्त विद्यालयों में भारत सरकार द्वारा विकसित 'माई हेल्थ वर्ल्ड' शिक्षण-अधिगम सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी.
इसके माध्यम से विद्यार्थियों को संतुलित एवं पौष्टिक आहार, नियमित शारीरिक गतिविधियों, मानसिक स्वास्थ्य, स्वच्छ आदतों और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक बनाया जाएगा.
'माई हेल्थ वर्ल्ड' पुस्तक होंगी ये चीजें
महानिदेशक स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक मोनिका रानी ने सभी डायट प्राचार्यों, मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशकों (बेसिक), जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों, खंड शिक्षा अधिकारियों तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं. निर्देशों के अनुसार 'माई हेल्थ वर्ल्ड' पुस्तक के हिंदी एवं अंग्रेजी संस्करण तथा अन्य शिक्षण संसाधन सभी परिषदीय, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों एवं मान्यता प्राप्त विद्यालयों तक उपलब्ध कराए जाएंगे.
इनका उपयोग कक्षा शिक्षण के साथ-साथ प्रार्थना सभा, बाल सभा, अभिभावक-शिक्षक बैठक, विद्यालय स्वास्थ्य कार्यक्रमों तथा अन्य शैक्षणिक गतिविधियों में किया जाएगा. शिक्षकों को भी प्रशिक्षण सत्रों के माध्यम से इस सामग्री के प्रभावी उपयोग के लिए जागरूक किया जाएगा.
स्कूल से अच्छा कोई माध्यम नहीं
सरकार का मानना है कि विद्यालय बच्चों में स्वस्थ आदतों के विकास का सबसे प्रभावी माध्यम हैं. इसी सोच के अनुरूप स्वास्थ्य शिक्षा, पोषण जागरूकता और व्यवहार परिवर्तन को विद्यालयी शिक्षा का अभिन्न हिस्सा बनाया जा रहा है. इससे विद्यार्थियों में स्वास्थ्य के प्रति जिम्मेदार व्यवहार विकसित होगा और उनका सर्वांगीण विकास भी सुनिश्चित होगा.
विद्यालयों में विद्यार्थियों को संतुलित एवं पौष्टिक भोजन, जंक फूड के दुष्प्रभाव, नियमित योग एवं खेलकूद, शारीरिक सक्रियता और स्वस्थ दिनचर्या के महत्व के प्रति जागरूक किया जाएगा. विद्यालयों की समय-सारिणी के अनुसार खेल गतिविधियों का नियमित आयोजन सुनिश्चित किया जाएगा. साथ ही 'स्वस्थ अंग-स्वस्थ जीवन' विषय पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर बच्चों को स्वास्थ्य और अस्वस्थ जीवनशैली के प्रभावों से भी अवगत कराया जाएगा.
नींद के महत्व के प्रति जागरूकता पर जोर
निर्देशों में विद्यार्थियों को स्क्रीन टाइम के संतुलित उपयोग, डिजिटल उपकरणों के जिम्मेदार इस्तेमाल तथा पर्याप्त गुणवत्तापूर्ण नींद के महत्व के प्रति जागरूक करने पर विशेष बल दिया गया है. इसके साथ ही विद्यालयों की समय-सारिणी तथा अतिरिक्त समय में विद्यार्थियों को पुस्तकालय की पुस्तकें पढ़ने के लिए प्रेरित किया जाएगा, ताकि उनमें पढ़ने की आदत विकसित हो और बौद्धिक विकास को बढ़ावा मिले.
विद्यालयों में बैगलेस-डे गतिविधियों के अंतर्गत स्वास्थ्य एवं पोषण विषयक परियोजना कार्य, पोस्टर निर्माण, चित्रकला, वाद-विवाद, निबंध, प्रश्नोत्तरी, रोल-प्ले, क्रिकेट, नाटक तथा अन्य अनुभवात्मक गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा. इसके माध्यम से विद्यार्थी स्वास्थ्य और पोषण संबंधी विषयों को व्यावहारिक रूप से समझ सकेंगे और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित होंगे.
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) द्वारा विकसित अध्ययन सामग्री एवं डिजिटल संसाधनों का विद्यालयों में प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा. साथ ही विद्यालयों के सूचना पट्ट, विभागीय व्हाट्सएप समूहों, विद्यालय प्रबंधन समिति की बैठकों तथा अन्य उपयुक्त माध्यमों से स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी संदेशों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा, ताकि विद्यार्थियों के साथ-साथ अभिभावकों में भी स्वास्थ्य एवं पोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सके.
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