14 साल बाद जेल से निकले 73 साल के मुस्लिम शख्स को लेकर ब्रिटेन और पाकिस्तान में भयंकर बवाल हो गया है। यह खबर भारत को भी चौंका देगी। शबीर अहमद नाम के इस खतरनाक व्यक्ति को 2012 में 22 सालों के लिए सलाखों के पीछे डाला गया था। लेकिन इसे अचानक रिहा कर दिया गया है। शबीर अहमद के जेल से बाहर आते ही ब्रिटेन और पाकिस्तान के बीच अजीब सी जंग शुरू हो गई है। दरअसल शबीर अहमद एक पाकिस्तानी है जिसने ब्रिटेन की नागरिकता ले ली थी। लेकिन अब ब्रिटेन शबीर अहमद को वापस पाकिस्तान भेजना चाहता है। लेकिन पाकिस्तान ने शबीर अहमद को लेने से मना कर दिया है। यहीं से शबीर अहमद की यह खतरनाक कहानी शुरू होती है।
आपको याद होगा कि हाल ही में ब्रिटेन की संसद में ढाई लाख ब्रिटिश बच्चियों के साथ दुष्कर्म करने वाले पाकिस्तानी मुस्लिम ग्रूमिंग गैंग्स का काला चिट्ठा खोला गया था। पाकिस्तानी ग्रूमिंग गैंग्स ब्रिटेन में इस वक्त का सबसे बड़ा राजनैतिक मुद्दा है क्योंकि ब्रिटिश पीएम की स्टारमर के इस्तीफे के ऐलान के बाद नया प्रधानमंत्री बनने की रेस शुरू हो गई है। ऐसे में लाखों ब्रिटिश बच्चियों का शोषण करने वाले पाकिस्तानी अपराधियों को सजा दिलाने वाला और उन्हें डिपोर्ट करने वाला ब्रिटिश जनता की पहली पसंद बन सकता है। इसी कड़ी में शबीर अहमद ने ब्रिटिश राजनीति को गरमा दिया है। ब्रिटेन के जिन 149 इलाकों में मुस्लिम आबादी 50% तक पहुंच गई है, वहां सबसे ज्यादा पाकिस्तानी ग्रूमिंग गैंग्स एक्टिव थे। यहीं पर सबसे ज्यादा ब्रिटिश बच्चियों का शोषण हुआ था। इन्हीं में से सबसे खतरनाक था रॉचडेल ग्रूमिंग गैंग।
आपको बता दें कि रॉचडेल इंग्लैंड में एक शहर है। इसी शहर में चलने वाले रॉचडेल ग्रूमिंग गैंग को चलाने वाला मुख्य अपराधी शबीर अहमद था। शबीर अहमद को कम उम्र की लड़कियों के साथ कई बार दुष्कर्म करने और यौन अपराध करने जैसे गंभीर मामलों में सजा सुनाई गई थी। 2012 में फैसला आया था कि शबीर अहमद को 22 सालों तक जेल में रखा जाएगा। यानी इसे 2034 में रिहा होना था। लेकिन इसे अचानक 2026 में ही रिहा कर दिया गया है। कई एक्सपर्ट्स का कहना है कि ब्रिटेन की मौजूदा लेबर सरकार ने जानबूझकर शबीर अहमद को जल्दी रिहा किया है ताकि उन्हें पाकिस्तानी मुस्लिमों समेत दूसरे देशों के मुस्लिमों के भी वोट मिल जाएं। मगर ब्रिटेन की जनता और ब्रिटेन के दक्षिणपंथी नेताओं ने कहा है कि शबीर अहमद को तुरंत पाकिस्तान डिपोर्ट किया जाए। लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि पाकिस्तान ने बयान दिया है कि वो शबीर अहमद को वापस नहीं बुलाएगा क्योंकि शबीर अहमद ने तो पाकिस्तान के साथ-साथ ब्रिटेन की भी नागरिकता ले ली थी। ऐसे में पाकिस्तान ने कहा है कि शबीर अहमद को अब अपने ही पास रखो। हालांकि ब्रिटेन ने कहा है कि हमने शबीर अहमद की नागरिकता 2012 में ही खत्म कर दी थी।
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अमेरिका में हुई ताकतवर व्यक्ति की मौत ने कई देशों में बवाल मचा दिया है। यह व्यक्ति भारत को अमेरिका का आर्थिक गुलाम बनाना चाहता था। भारत को बर्बाद करने की चाह थी। भारत पर 500% टैरिफ लगाने का आइडिया इसी व्यक्ति ने डोनाल्ड ट्रंप को दिया था। लेकिन यह व्यक्ति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बात करने के कुछ घंटों बाद इनकी मौत हो गई। इनका नाम लिंडसे ग्राहम था। यह रिपब्लिकन पार्टी के सीनेटर थे और डोनाल्ड ट्रंप के सबसे करीबी दोस्त। की मौत के बाद अमेरिकी लोगों का कहना है कि इन्हें रूस या ईरान ने जहर देकर मरवाया है। इजरायल के कुछ एक्सपर्ट्स बोल रहे हैं कि लिंडसे ग्राहम की मौत के पीछे रूस, ईरान या फिर कोई अमेरिकी भी शामिल हो सकता है। इससे पेचीदा मौत दुनिया में किसी की नहीं हुई।
लिंडसे ग्राहम कश्मीर को आजाद देखना चाहते थे। उन्हें पसंद नहीं था कि भारत ने जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 हटा दिया। लिंडसे ग्राहम ने ट्रंप से कहा था कि हमें भारत पर 500% टैरिफ लगाने चाहिए क्योंकि भारत रूस का दोस्त है। रूस के साथ व्यापार कर रहा है। को सजा देनी चाहिए। भारत की अर्थव्यवस्था को कुचल देना चाहिए। लेकिन सबसे बड़ा सवाल है कि अमेरिकी संसद में भारत के सबसे बड़े विरोधी लिंडसे ग्राहम अचानक मर कैसे गए। आप सिर्फ क्रोनोलॉजी को देखिए। 10 जुलाई को लिंडसे ग्राहम यूक्रेन में जेलेंस्की से मिलने पहुंचे थे। उन्होंने कीव स्थित एक गुप्त ड्रोन कारखाने का दौरा किया। यूक्रेन से ही लिंडसे ग्राहम ने ऐलान किया कि वह रूस पर अब तक के सबसे भयानक सैंक्शंस लगाने का प्रस्ताव रखने जा रहे हैं। इसके अलावा जो देश रूस के दोस्त हैं, उन्हें भी छोड़ा नहीं जाएगा। लेकिन उसके बाद यूक्रेन में एक धमाका हुआ। लिंडसे ग्राहम यूक्रेन के जिस ड्रोन कारखाने में गए थे, उस पर अटैक कर दिया। पूरा कारखाना तबाह हो गया। इसके बाद खबर आई कि रूस के एक सटीक मिसाइल हमले से कीव के एक प्रतिष्ठित होटल को ध्वस्त कर दिया गया। इस होटल में नाटो के शीर्ष कमांडर आए हुए थे। यहीं पर लिंडसे ग्राहम भी मौजूद थे। हालांकि इस होटल अटैक में लिंडसे ग्राहम को कुछ नहीं हुआ, लेकिन जब लिंडसे ग्राहम अमेरिका पहुंचे तो अचानक उनकी मौत हो गई।
कुछ एक्सपर्ट्स ने दावा किया कि रूस ने लिंडसे ग्राहम को कोई जहर देकर मारा है। इतना सुनकर आपको लग रहा होगा कि रूस ने ही लिंडसे ग्राहम को मरवाया है। लेकिन इस कहानी में अब दूसरा ट्विस्ट देखिए। लिंडसे ग्राहम की मौत से कुछ दिन पहले ईरान में ट्रंप की तस्वीरों के साथ उनकी तस्वीर भी लहराई गई थी। कहा गया था कि लिंडसे ग्राहम हमारे टारगेट पर है। लिंडसे ग्राहम के मरते ही ईरान के सरकारी न्यूज़ चैनल पर लिंडसे ग्राहम की मौत की बधाई दी गई। अब कई लोगों का कहना है कि ईरान ने लिंडसे ग्राहम को मरवाया है। लिंडसे ग्राहम चाहते थे कि ईरान का खात्मा होना चाहिए। ईरान के साथ कोई पीस डील नहीं होनी चाहिए। मगर अमेरिका के वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस ईरान के साथ शांति समझौता करने पर अड़ गए। लिंडसे ग्राहम चाहते थे कि ईरान में तख्ता पलट होना चाहिए। लेकिन जेडी वेंस पाकिस्तान के साथ मिलकर पीस डील पर जोर डाल रहे थे।
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