डायबिटीज के मरीजों को अपनी डाइट का खास ख्याल रखना जरूरी होता है। दवाओं के साथ जब तक आप सही डाइट नहीं लेंगे, हेल्दी लाइफस्टाइल को नहीं फॉलो करते हैं। तब तक ब्लड शुगर को कंट्रोल करना पॉसिबल नहीं है। डायबिटीज मरीजों के लिए डाइट में लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले फूड्स को शामिल करना जरूरी है। लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले फूड्स का मतलब उन फूड्स से है, जो ब्लड में ग्लूकोज लेवल जल्दी नहीं बढ़ाते हैं। वहीं मौसम के हिसाब से भी अपनी डाइट में बदलाव करना जरूरी होता है।
क्योंकि मानसून में पाचन कमजोर हो जाता है। ऐसे में जरूरी है कि ऐसी चीजों को डाइट में शामिल करें, जिनको पचाना आसान हो और शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद कर सके। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको 3 ऐसे आटे के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनसे बनने वाली रोटी को मानसून में डायबिटीज के मरीजों को अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए।
ज्वार की रोटी
मानसून में डायबिटीज के मरीजों को ज्वार से आटे से बनने वाली रोटी को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए। क्योंकि इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है। इसमें फाइबर भरपूर मात्रा में पाया जाता है। ज्वार की रोटी खाने से ब्लड शुगर लेवल अचानक नहीं बढ़ता है। इससे इंसुलिन सेंसिटिविटी में सुधार होता है और यह ग्लूटन फ्री है। इसको खाने से पेट लंबे समय तक भरा महसूस होता है और वेट कम करने में भी मदद मिलती है।
जौ की रोटी
डायबिटीज मरीजों के लिए जौ की रोटी फायदेमंद होती है। इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स भी कम होता है और गट हेल्थ के लिए भी इसको अच्छा माना जाता है। जौ में मौजूद बीटा-ग्लूकॉन नामक घुलनशील फाइबर ग्लूकोज के अब्जॉर्बशन को स्लो कर देता है। अगर आप भी जौ के आटे की रोटी नहीं खाना चाहती हैं, तो आप इसमें गेहूं का भी आटा मिला सकती हैं।
चने के आटे की रोटी
डायबिटीज के मरीजों को चने के आटे यानी कि बेसन वाली रोटी को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए। गेहूं की रोटी की तुलना में बेसन में कार्बोहाइड्रेट कम होता है। इससे ब्लड शुगर लेवल बैलेंस होता है। इससे मेटाबॉलिज्म भी दुरुस्त रहता है और वेट लॉस में भी मदद मिलती है। वहीं बेसन की रोटी खाने से इंसुलिन रेजिस्टेंस और कोलेस्ट्रॉल लेवल भी कम होता है।
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भारत को महिला एशिया कप और एशियाई खेलों से पहले बड़ा झटका लगा है। भारतीय बल्लेबाज जेमिमा रोड्रिग्स हैमस्ट्रिंग की चोट के कारण इन दोनों अहम प्रतियोगिताओं से बाहर हो गई हैं। जेमिमा को 3 अगस्त को इंग्लैंड में द हंड्रेड प्रतियोगिता के दौरान सदर्न ब्रेव के लिए खेलते हुए चोट लगी थी। बेंगलुरु स्थित बीसीसीआई उत्कृष्टता केंद्र में जांच के बाद उनकी चोट की गंभीरता की पुष्टि हुई है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, जेमिमा की चोट इतनी गंभीर है कि वह संयुक्त अरब अमीरात में होने वाले महिला एशिया कप और जापान में होने वाले एशियाई खेलों में भारतीय टीम का हिस्सा नहीं बन पाएंगी। महिला एशिया कप शुरू होने में अब करीब दो सप्ताह का समय बचा है। ऐसे में उनकी गैरमौजूदगी भारतीय टीम की तैयारियों के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है।
जेमिमा रोड्रिग्स भारतीय महिला क्रिकेट की महत्वपूर्ण बल्लेबाजों में शामिल हैं। छोटे प्रारूप में वह भारत के लिए 131 मुकाबले खेल चुकी हैं। उनकी बल्लेबाजी के साथ मैदान पर उनकी चुस्ती और अलग-अलग परिस्थितियों में तेजी से रन बनाने की क्षमता भी टीम के लिए काफी उपयोगी रही है। ऐसे में बड़े टूर्नामेंट से ठीक पहले उनका चोटिल होना भारतीय टीम के लिए चिंता की बात है।
बता दें कि जेमिमा को 3 अगस्त को इंग्लैंड में सदर्न ब्रेव की ओर से खेलते समय हैमस्ट्रिंग में परेशानी हुई थी। इसके बाद उनकी चोट का आकलन किया गया और आगे की जांच के लिए उन्हें भारत लाया गया। बेंगलुरु में बीसीसीआई की चिकित्सकीय टीम ने उनकी स्थिति की जांच की, जिसके बाद उन्हें आगामी प्रतियोगिताओं से बाहर रखने का फैसला किया गया है।
जेमिमा की जगह महिला चयन समिति ने एशिया कप के लिए प्रतीका रावल को भारतीय टीम में शामिल किया है। प्रतीका हाल के दिनों में भारत ए की टीम के लिए लगातार सक्रिय रही हैं और उनके प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें दोबारा राष्ट्रीय टीम में जगह मिली है। उनके लिए यह खुद को बड़े मंच पर साबित करने का अच्छा मौका होगा।
महिला एशिया कप का आयोजन 28 अगस्त से शुरू होना है। भारत अपने अभियान की शुरुआत 30 अगस्त को थाईलैंड के खिलाफ करेगा। टूर्नामेंट में भारतीय टीम की कप्तानी हरमनप्रीत कौर के हाथों में होगी, जबकि स्मृति मंधाना उपकप्तान की जिम्मेदारी संभालेंगी।
भारत की संशोधित टीम में हरमनप्रीत कौर, स्मृति मंधाना, शेफाली वर्मा, भारती फुलमाली, दीप्ति शर्मा, ऋचा घोष, जी कमालिनी, अरुंधति रेड्डी, प्रेमा रावत, राधा यादव, श्री चरणी, रेणुका ठाकुर, नंदनी शर्मा, क्रांति गौड़ और प्रतीका रावल शामिल हैं।
गौरतलब है कि एशिया कप के बाद भारतीय महिला टीम के सामने एशियाई खेलों की चुनौती भी होगी। ऐसे में जेमिमा की चोट से टीम प्रबंधन को बल्लेबाजी संयोजन पर दोबारा विचार करना पड़ सकता है। फिलहाल भारतीय टीम की नजरें एशिया कप में अच्छी शुरुआत करने और मौजूद खिलाड़ियों के साथ मजबूत संयोजन तैयार करने पर टिकी हुई हैं।
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