भारत के खिलाफ शतक जड़ सोनल दिनुशा ने बनाया बड़ा कीर्तिमान, तिलकरत्ने दिलशान जैसे दिग्गजों के क्लब में मारी एंट्री
IND vs SL: भारत के खिलाफ गॉल टेस्ट में श्रीलंका के युवा बल्लेबाज सोनल दिनुशा ने शतक लगाकर बड़ा कीर्तिमान स्थापित कर दिया. उन्होंने शतक लगाकर न सिर्फ श्रीलंका को फॉलोऑन से बचाया, बल्कि एक खास उपलब्धि भी हासिल की. बता दें कि गॉल टेस्ट के तीसरे दिन सोनल दिनुशा तब बल्लेबाजी करने उतरे, जब 59 रन के स्कोर पर श्रीलंका ने अपने 4 विकेट गंवा दिए थे.
सोनल दिनुशा ने गॉल में जड़ा अपने टेस्ट करियर का पहला शतक
भारत और श्रीलंका के बीच गॉल इंटरनेशनल स्टेडियम में खेले जा रहे पहले टेस्ट मैच के तीसरे दिन सोनल दिनुशा ने तीसरे सेशन में अपना शतक लगाया. यह उनके टेस्ट करियर का पहला शतक है। उन्होंने 167 गेंदों में अपनी सेंचुरी पूरी की, लेकिन फिर अगली ही गेंद पर आउट हो गए. सोनल दिनुशा ने 168 गेंदों पर 100 रनों की पारी खेली, जिसमें 4 चौके और 2 छक्के शामिल रहे। उन्हें रवींद्र जडेजा ने पवेलियन भेजा.
भारत के खिलाफ किया बड़ा कारनामा
भारत के खिलाफ शतक लगाकर 25 साल के बाएं हाथ के बल्लेबाज सोनल दिनुशा ने एक रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया. दिनुशा अब टेस्ट क्रिकेट में भारत के खिलाफ नंबर-6 पर बल्लेबाजी करते हुए सेंचुरी लगाने वाले चौथे श्रीलंकाई बल्लेबाज बन गए हैं. उनसे पहले भारत के खिलाफ यह कारनामा श्रीलंका के पूर्व कप्तान अर्जुन रणतुंगा, दिग्गज बल्लेबाज तिलकरत्ने दिलशान और दिनेश चांदीमल ने किया था.
दिनेश चांदीमल ने साल 2015 में भारत के खिलाफ नंबर-6 पर बल्लेबाजी करते हुए नाबाद 162 रनों की पारी खेली थी. इससे पहले तिलकरत्ने दिलशान ने साल 2008 में नाबाद 125 रन बनाए थे, जबकि साल 1985 में श्रीलंका के पूर्व कप्तान अर्जुन रणतुंगा ने 111 रनों की पारी खेली थी. अब दिनुशा ने 100 रनों की पारी के साथ इन दिग्गजों के क्लब में अपनी जगह बनाई है.
A moment of pure class in front of the Galle fort! Sonal Dinusha brings up his debut Test hundred against India, displaying incredible composure and grit under pressure.
— Sri Lanka Cricket ???????? (@OfficialSLC) August 17, 2026
Take a bow, Sonal! ????#SLvIND pic.twitter.com/GVgK6z6gvG
यह भी पढ़ें: 24 वर्षीय मानव सुथार ने रचा इतिहास, गॉल के मैदान पर टेस्ट क्रिकेट में यह कारनामा करने वाले बने सिर्फ दूसरे भारतीय
Explainer: फर्स्ट लुक, Teaser और Trailer में क्या होता है फर्क? यहां जानिए इन तीनों के बीच का गणित
Difference Between First Look Teaser Trailer: जब भी थिएटर में कोई बड़ी फिल्म रिलीज होने वाली होती है, उससे पहले दर्शकों तक उसकी जानकारी एक साथ नहीं पहुंचाई जाती. मेकर्स धीरे-धीरे फिल्म की झलक सामने लाते हैं. सबसे पहले कलाकार का फर्स्ट लुक जारी होता है. फिर टीजर आता है और उसके ट्रेलर रिलीज किया जाता है. हालांकि, आमतौर पर कई लोग टीजर और ट्रेलर को ही चीज समझ लेते हैं. दोनों वीडियो के जरिए फिल्म का प्रमोशन जरूर होता है, लेकिन इनका मकसद और कंटेंट अलग होता है. फर्स्ट लुक के जरिए फिल्म की पहली पहचान कराई जाती है, वहीं टीजर कम समय में फिल्म का माहौल और एक्साइटमेंट पैदा करता है. जबकि ट्रेलर के जरिए फिल्म की स्टोरी, किरदारों और फिल्म की टोन के बारे में पता चलता है. हालांकि इनकी लंबाई और रिलीज का टाइम तय करने का कोई एक तयशुदा नियम नहीं है. अलग-अलग फिल्मों की मार्केटिंग स्ट्रैटेजी के हिसाब से मेकर्स इनमें बदलाव कर सकते हैं.
फिल्म का फर्स्ट लुक क्या होता है?
फर्स्ट लुक किसी फिल्म की ऑडियंस के सामने आने वाली पहली विजुअल झलक होती है. यह अक्सर पर पोस्टर, तस्वीर या मोशन पोस्टर के रूप में सामने आती है. इसमें फिल्म के लीड एक्टर या एक्ट्रेस होते हैं और उनके कपड़े, लुक या फिल्म के माहौल को दिखाया जा सकता है. उदाहरण के लिए अगर कोई एक्टर किसी फिल्म में पुलिस ऑफिसर है तो उसका पुलिस की वर्दी वाला फर्स्ट लुक हो सकता है. इसी तरह किसी ऐतिहासिक फिल्म में कलाकार का खास गेटअप पहली बार दिखाना भी फर्स्ट लुक हो सकता है. इसका मैन मकसद फिल्म की पूरी स्टोरी बताना नहीं होता. मेकर्स चाहते हैं कि ऑडियंस को फिल्म के बारे में पहली विजुअल पहचान मिले और सोशल मीडिया पर इसकी चर्चा हो. कई बार फर्स्ट लुक किसी खास मौके पर जारी किया जाता है. यह एक्टर के जन्मदिन, फिल्म की अनाउंसमेंट या किसी दूसरे प्रमोशनल मौके से जुड़ा हो सकता है.
टीजर में क्या दिखाया जाता है?
टीजर First Look के बाद फिल्म के बारे में ज्यादा जानकारी देता है. यह एक छोटी वीडियो क्लिप होती है, जिसमें फिल्म के कुछ विजुअल, किरदार, डायलॉग, बैकग्राउंड म्यूजिक या एक्शन देखने को मिलता है. टीजर का नाम ही 'Tease' शब्द से जुड़ा है. इसका मकसद दर्शकों को पूरी स्टोरी बताना नहीं, बल्कि उनके मन में एक्साइटमेंट पैदा करना होता है. इसलिए कई बार लोग Teaser देखने के बाद फिल्म की स्टोरी के बारे में अंदाजा लगाने लग जाते हैं. लेकिन उसमें उन्हें सारी जानकारी नहीं मिलती है.
Teaser की ड्यूरेशन के लिए भी कोई तय रूल नहीं है. यह फिल्म और उसकी मार्केटिंग स्ट्रैटेजी के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है. कई बार टीजर कुछ सेकंड का हो सकता है, जबकि कुछ फिल्मों के Teaser एक-दो मिनट के भी हो सकते हैं. यही वजह है कि टीजर को फिल्म का छोटा ट्रेलर समझना सही नहीं है. दोनों में जानकारी अलग-अलग दी जा सकती हैं.
ट्रेलर किसे कहते हैं?
किसी भी फिल्म के लिए ट्रेलर प्रमोशन के लिए सबसे अहम होता है. इसमें ऑडियंस को फिल्म की स्टोरी, मैन किरदार, सपोर्टिंग किरदार, स्ट्रगल और फिल्म के टोन के बारे में ज्यादा जानकारी दी जाती है. अगर कोई फिल्म एक्शन है, तो ट्रेलर में एक्शन की झलक दिखाई जा सकती है. अगर रोमांटिक फिल्म है, तो एक्टर और एक्ट्रेस के रिलेशन को दिखाया जा सकता है. वहीं थ्रिलर या मिस्ट्री फिल्म में स्टोरी का आधार बताया जा सकता है. लेकिन मेकर्स आमतौर पर कोशिश करते हैं कि बड़ा ट्विस्ट पूरी तरह रिवील ना हो. ट्रेलर का मैन काम ऑडियंस को थिएटर तक लाने का होता है. इसलिए इसमें फिल्म के शानदार डायलॉग, बड़े सीन, केमिस्ट्री और स्टोरी के अहम हिस्सों को जगह दी जाती है.
तीनों को एक साथ क्यों नहीं किया जाता रिलीज?
यह फिल्म की मार्केटिंग स्ट्रैटेजी का हिस्सा होता है. अगर फिल्म बनने के बाद मेकर्स एक ही दिन फर्स्ट लुक, टीजर और ट्रेलर रिलीज कर दें, तो मेकर्स के पास लोगों को एक्साइटेड बनाए रखने के लिए ज्यादा प्रमोशनल कंटेंट नहीं बचेगा. इसके बजाय मेकर्स अलग-अलग टाइम और मौके पर फिल्म की जानकारी शेयर करते हैं. पहले फर्स्ट लुक से फिल्म को लेकर लोगों के बीच जानकारी दी जाती है. फिर टीजर से फिल्म के माहौल के बारे में पता चलता है और बाद में ट्रेलर के जरिए कहानी और किरदारों के बारे में ज्यादा जानकारी दी जाती है. इस तरह फिल्म की चर्चा लंबे समय तक बनी रहती है. आज सोशल मीडिया के दौर में इसकी इंपोर्टेंस और भी बढ़ गई है, इसके जरिए कम टाइम में लोगों तक फिल्म के बारे में एक्साइटमेंट पैदा की जा सकती है.
फर्स्ट लुक, टीजर और ट्रेलर में सीधा फर्क
फर्स्ट लुक को आप फिल्म की सबसे पहली झलक मान सकते हैं. इसमें पोस्टर के जरिए कलाकार और फिल्म का लुक सामने आता है. टीजर, इससे एक कदम आगे जाते हैं. इसमें वीडियो के जरिए फिल्म की दुनिया, माहौल, आवाज, म्यूजिक और कुछ किरदारों की झलक दिखाई जा सकती है. लेकिन स्टोरी को बहुत ज्यादा खोलने से बचा जाता है. ट्रेलर, प्रमोशन के लिए सबसे अहम वीडियो होता है. इसमें स्टोरी का आधार, मैन किरदारों जानकारी, स्ट्रगल और फिल्म का टोन समझाने की कोशिश की जाती है. इसलिए आसान भाषा में कहें तो फर्स्ट लुक में दिखता है कि फिल्म कैसी नजर आएगी, टीजर बताता है कि फिल्म का विजुअल्स और फील कैसा है और ट्रेलर यह समझाने की कोशिश करता है कि फिल्म में क्या देखने को मिलेगा.
क्या हर फिल्म के लिए तीनों जरूरी हैं?
आपको बता दें कि हर फिल्म के लिए इन तीनों प्रमोशनल स्ट्रैटेजी की जरूरत नहीं होती है. फिल्म की मार्केटिंग स्ट्रैटेजी, बजट, रिलीज प्लान और ऑडियंस को ध्यान में रखते हुए मेकर्स अलग-अलग तरीके अपना सकते हैं. कुछ फिल्मों को केवल पोस्टर और ट्रेलर के जरिए प्रमोट किया जाता है. वहीं, कुछ फिल्मों के लिए टीजर को ज्यादा वैल्यू दी जाती है. वहीं, बड़ी फिल्मों में लंबे प्रमोशनल कैंपेन किए जाते हैं. इसलिए उसके लिए फर्स्ट लुक, टीजर, ट्रेलर, गाने और दूसरे वीडियो जारी किए जा सकते हैं. इसलिए इन सबको लेकर कोई तय नियम नहीं है कि हर फिल्म की रिलीज से पहले इतने टाइम के बीच इन्हें रिलीज किया जाना अनिवार्य है. मेकर्स का असली मकसद लंबे समय तक लोगों के बीच ज्यादा से ज्यादा एक्साइटमेंट बनाए रखने का होता है.
ये भी पढ़ें: Explainer: शाहरुख खान-गौरी से लेकर अक्षय कुमार-ट्विंकल खन्ना तक, कई साल से सफल हैं इन स्टार्स की शादी, जानें इसकी वजह
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation









