Explainer: फर्स्ट लुक, Teaser और Trailer में क्या होता है फर्क? यहां जानिए इन तीनों के बीच का गणित
Difference Between First Look Teaser Trailer: जब भी थिएटर में कोई बड़ी फिल्म रिलीज होने वाली होती है, उससे पहले दर्शकों तक उसकी जानकारी एक साथ नहीं पहुंचाई जाती. मेकर्स धीरे-धीरे फिल्म की झलक सामने लाते हैं. सबसे पहले कलाकार का फर्स्ट लुक जारी होता है. फिर टीजर आता है और उसके ट्रेलर रिलीज किया जाता है. हालांकि, आमतौर पर कई लोग टीजर और ट्रेलर को ही चीज समझ लेते हैं. दोनों वीडियो के जरिए फिल्म का प्रमोशन जरूर होता है, लेकिन इनका मकसद और कंटेंट अलग होता है. फर्स्ट लुक के जरिए फिल्म की पहली पहचान कराई जाती है, वहीं टीजर कम समय में फिल्म का माहौल और एक्साइटमेंट पैदा करता है. जबकि ट्रेलर के जरिए फिल्म की स्टोरी, किरदारों और फिल्म की टोन के बारे में पता चलता है. हालांकि इनकी लंबाई और रिलीज का टाइम तय करने का कोई एक तयशुदा नियम नहीं है. अलग-अलग फिल्मों की मार्केटिंग स्ट्रैटेजी के हिसाब से मेकर्स इनमें बदलाव कर सकते हैं.
फिल्म का फर्स्ट लुक क्या होता है?
फर्स्ट लुक किसी फिल्म की ऑडियंस के सामने आने वाली पहली विजुअल झलक होती है. यह अक्सर पर पोस्टर, तस्वीर या मोशन पोस्टर के रूप में सामने आती है. इसमें फिल्म के लीड एक्टर या एक्ट्रेस होते हैं और उनके कपड़े, लुक या फिल्म के माहौल को दिखाया जा सकता है. उदाहरण के लिए अगर कोई एक्टर किसी फिल्म में पुलिस ऑफिसर है तो उसका पुलिस की वर्दी वाला फर्स्ट लुक हो सकता है. इसी तरह किसी ऐतिहासिक फिल्म में कलाकार का खास गेटअप पहली बार दिखाना भी फर्स्ट लुक हो सकता है. इसका मैन मकसद फिल्म की पूरी स्टोरी बताना नहीं होता. मेकर्स चाहते हैं कि ऑडियंस को फिल्म के बारे में पहली विजुअल पहचान मिले और सोशल मीडिया पर इसकी चर्चा हो. कई बार फर्स्ट लुक किसी खास मौके पर जारी किया जाता है. यह एक्टर के जन्मदिन, फिल्म की अनाउंसमेंट या किसी दूसरे प्रमोशनल मौके से जुड़ा हो सकता है.
टीजर में क्या दिखाया जाता है?
टीजर First Look के बाद फिल्म के बारे में ज्यादा जानकारी देता है. यह एक छोटी वीडियो क्लिप होती है, जिसमें फिल्म के कुछ विजुअल, किरदार, डायलॉग, बैकग्राउंड म्यूजिक या एक्शन देखने को मिलता है. टीजर का नाम ही 'Tease' शब्द से जुड़ा है. इसका मकसद दर्शकों को पूरी स्टोरी बताना नहीं, बल्कि उनके मन में एक्साइटमेंट पैदा करना होता है. इसलिए कई बार लोग Teaser देखने के बाद फिल्म की स्टोरी के बारे में अंदाजा लगाने लग जाते हैं. लेकिन उसमें उन्हें सारी जानकारी नहीं मिलती है.
Teaser की ड्यूरेशन के लिए भी कोई तय रूल नहीं है. यह फिल्म और उसकी मार्केटिंग स्ट्रैटेजी के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है. कई बार टीजर कुछ सेकंड का हो सकता है, जबकि कुछ फिल्मों के Teaser एक-दो मिनट के भी हो सकते हैं. यही वजह है कि टीजर को फिल्म का छोटा ट्रेलर समझना सही नहीं है. दोनों में जानकारी अलग-अलग दी जा सकती हैं.
ट्रेलर किसे कहते हैं?
किसी भी फिल्म के लिए ट्रेलर प्रमोशन के लिए सबसे अहम होता है. इसमें ऑडियंस को फिल्म की स्टोरी, मैन किरदार, सपोर्टिंग किरदार, स्ट्रगल और फिल्म के टोन के बारे में ज्यादा जानकारी दी जाती है. अगर कोई फिल्म एक्शन है, तो ट्रेलर में एक्शन की झलक दिखाई जा सकती है. अगर रोमांटिक फिल्म है, तो एक्टर और एक्ट्रेस के रिलेशन को दिखाया जा सकता है. वहीं थ्रिलर या मिस्ट्री फिल्म में स्टोरी का आधार बताया जा सकता है. लेकिन मेकर्स आमतौर पर कोशिश करते हैं कि बड़ा ट्विस्ट पूरी तरह रिवील ना हो. ट्रेलर का मैन काम ऑडियंस को थिएटर तक लाने का होता है. इसलिए इसमें फिल्म के शानदार डायलॉग, बड़े सीन, केमिस्ट्री और स्टोरी के अहम हिस्सों को जगह दी जाती है.
तीनों को एक साथ क्यों नहीं किया जाता रिलीज?
यह फिल्म की मार्केटिंग स्ट्रैटेजी का हिस्सा होता है. अगर फिल्म बनने के बाद मेकर्स एक ही दिन फर्स्ट लुक, टीजर और ट्रेलर रिलीज कर दें, तो मेकर्स के पास लोगों को एक्साइटेड बनाए रखने के लिए ज्यादा प्रमोशनल कंटेंट नहीं बचेगा. इसके बजाय मेकर्स अलग-अलग टाइम और मौके पर फिल्म की जानकारी शेयर करते हैं. पहले फर्स्ट लुक से फिल्म को लेकर लोगों के बीच जानकारी दी जाती है. फिर टीजर से फिल्म के माहौल के बारे में पता चलता है और बाद में ट्रेलर के जरिए कहानी और किरदारों के बारे में ज्यादा जानकारी दी जाती है. इस तरह फिल्म की चर्चा लंबे समय तक बनी रहती है. आज सोशल मीडिया के दौर में इसकी इंपोर्टेंस और भी बढ़ गई है, इसके जरिए कम टाइम में लोगों तक फिल्म के बारे में एक्साइटमेंट पैदा की जा सकती है.
फर्स्ट लुक, टीजर और ट्रेलर में सीधा फर्क
फर्स्ट लुक को आप फिल्म की सबसे पहली झलक मान सकते हैं. इसमें पोस्टर के जरिए कलाकार और फिल्म का लुक सामने आता है. टीजर, इससे एक कदम आगे जाते हैं. इसमें वीडियो के जरिए फिल्म की दुनिया, माहौल, आवाज, म्यूजिक और कुछ किरदारों की झलक दिखाई जा सकती है. लेकिन स्टोरी को बहुत ज्यादा खोलने से बचा जाता है. ट्रेलर, प्रमोशन के लिए सबसे अहम वीडियो होता है. इसमें स्टोरी का आधार, मैन किरदारों जानकारी, स्ट्रगल और फिल्म का टोन समझाने की कोशिश की जाती है. इसलिए आसान भाषा में कहें तो फर्स्ट लुक में दिखता है कि फिल्म कैसी नजर आएगी, टीजर बताता है कि फिल्म का विजुअल्स और फील कैसा है और ट्रेलर यह समझाने की कोशिश करता है कि फिल्म में क्या देखने को मिलेगा.
क्या हर फिल्म के लिए तीनों जरूरी हैं?
आपको बता दें कि हर फिल्म के लिए इन तीनों प्रमोशनल स्ट्रैटेजी की जरूरत नहीं होती है. फिल्म की मार्केटिंग स्ट्रैटेजी, बजट, रिलीज प्लान और ऑडियंस को ध्यान में रखते हुए मेकर्स अलग-अलग तरीके अपना सकते हैं. कुछ फिल्मों को केवल पोस्टर और ट्रेलर के जरिए प्रमोट किया जाता है. वहीं, कुछ फिल्मों के लिए टीजर को ज्यादा वैल्यू दी जाती है. वहीं, बड़ी फिल्मों में लंबे प्रमोशनल कैंपेन किए जाते हैं. इसलिए उसके लिए फर्स्ट लुक, टीजर, ट्रेलर, गाने और दूसरे वीडियो जारी किए जा सकते हैं. इसलिए इन सबको लेकर कोई तय नियम नहीं है कि हर फिल्म की रिलीज से पहले इतने टाइम के बीच इन्हें रिलीज किया जाना अनिवार्य है. मेकर्स का असली मकसद लंबे समय तक लोगों के बीच ज्यादा से ज्यादा एक्साइटमेंट बनाए रखने का होता है.
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