Explainer: अमेरिका-इजरायल को इस बार ईरान देगा कड़ी चुनौती! जानें किस तरह परमाणु नीति बदलकर बिगाड़ेगा खेल
इस बार अगर मिडिल ईस्ट में युद्ध हुआ तो बहुत विनाश होगा क्योंकि इस बार दोनों तरफ से सबसे विनाशकारी हथियारों का इस्तेमाल होने की आशंका जताई जा रही है. अमेरिका से जंगी के बीच ईरान ने भी दम भरा है कि वो अपनी परमाणु नीति बदलने पर भी विचार कर रहा है. जिससे यह डर बढ़ रहा है कि ईरान पहले के मुकाबले ज्यादा तेजी से एटमी हथियारों को बनाने में आगे बढ़ सकता है, ताकि अमेरिका के हमले का जवाब इस बार एटमी हथियारों से दिया जा सके.
अमेरिका नहीं चाहता है कि ईरान न्यूक्लियर पावर बने
सबसे विनाशकारी हथियार जिसे दुनिया एटम बम के नाम से जानती है. इसके इस्तेमाल से पूरी दुनिया की धड़कने बढ़ जाती है. यह ऐसा हथियार है जिसे ईरान अपने तरकश में शामिल करना चाहता है और अमेरिका इजराइल किसी भी कीमत पर ईरान को न्यूक्लियर ताकत बनने से रोकना चाहते हैं, इसीलिए अमेरिका लगातार ईरान पर हमले कर रहा है. मगर अब जो अपडेट सामने आ रहा है कि अमेरिका की चिंता बढ़ा सकती है क्योंकि ईरान ने अब अपनी परमाणु नीति को बदलने की तैयारी कर ली है.
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परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में कदम
अमेरिका ने सीज फायर तोड़कर ईरान पर हमला किया तो ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के सदस्यों ने और ईरानी शासन के करीबी विशेषज्ञों ने खुलकर कहा कि यदि अमेरिका ने फिर से युद्ध थोपा तो ईरान अपनी रक्षा नीति की समीक्षा करेगा,जिसमें परमाणु तकनीक का सैन्य उपयोग शामिल है. इसका मतलब है कि ईरान अब तेजी से परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ा सकता है. ऐसी रिपोर्ट है कि इस्लामिक रेवोलशनरी गार्ड कॉप्स यानी आईआरजीसी ने ईरान के दक्षिणी तटीय इलाकों पर जिसमें बुशहर और चाबहार जैसे जो क्षेत्र हैं, वहां पर एयर डिफेंस सिस्टम्स की और मिसाइल यूनिट्स की नए सिरे से तैनाती की है. यह तैनाती एक ऐसे समय पर की गई है जब यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका ईरान के साउथ ईस्टर्न पोर्ट चाबहार को उसने बड़े तरीके से हिट किया है.
चाबहार पर अमेरिका का बड़ा हमला
चाबहार पर अमेरिका ने एक बड़ा हमला किया है और उसके बाद जाहिर है कि जो दक्षिणी तटीय इलाके हैं वे इस समय अमेरिकी निशाने पर हैं. अमेरिका वहां पर आने वाले समय में भी बड़ी सैन्य कार्रवाई कर सकता है. ईरान को लेकर बीते कई महीनों से चर्चा चल रही है कि तेहरान या तो न्यूक्लियर हथियार बना चुका है या फिर वो हथियार बनाने के बेहद ही करीब है. ईरान के न्यूक्लियर संवर्धन को लेकर कई तरह की रिपोर्ट आती रहती है. आईएईए की मई 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान के पास 60 प्रतिशत शुद्धता का 408 कि.ग्र.प्रोसेस्ड यूरेनियम है.
फिलहाल कोई परमाणु बम नहीं
अगर यह शुद्धता 90% के करीब हो जाएगी तो ईरान न्यूक्लियर टेस्ट कर सकता है. जाहिर है यह रिपोर्ट ट्रंप को डराती है. इजराइल को परेशान करती है. रिपोर्ट बताती है और ईरान जो दावे करता है उसके मुताबिक ईरान के पास फिलहाल कोई परमाणु बम नहीं है. लेकिन उसके पास इतना संवर्धित यूरेनियम जमा हो चुका है कि वह बहुत कम समय में 10 से 11 परमाणु बम बनाने की क्षमता रखता है. यही बात अमेरिका और इजराइल दोनों को परेशान करती है.
असली परमाणु ताकत के बारे में बता देना चाहिए
कुछ दिनों पहले ईरान के सरकारी चैनल पर ईरान के जाने-माने अर्थशास्त्री रेज यशदी जादे ने एक ऐसा दावा किया जिसके बारे में अब तक सिर्फ कयास लगाए जा रहे थे. यशदी जादे ने खुलकर हुंकार भरते हुए कहा कि अब वक्त आ चुका है जब ईरान को अमेरिका और इजराइल के सामने अपनी असली परमाणु ताकत के बारे में बता देना चाहिए लेकिन चौंकाने वाली बात उनकी धमकी नहीं थी बल्कि उनकी वो कैलकुलेशन थी जो उन्होंने दुनिया के सामने रखी. उनके मुताबिक ईरान के पास 408 कि.ग्र. एनरीच यूरेनियम है. इतने यूरेनियम से महज 10 परमाणु बम बनाए जा सकते हैं. लेकिन इतने ही यूरेनियम से 100 डर्टी बम मिसाइलें बनाई जा सकती हैं. हर एक मिसाइल के वॉर हेड में 5 कि.ग्र. तक 60% एनरीज यूरेनियम का इस्तेमाल किया जा सकता है.
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इससे पता चलता है कि ईरान किस तरह से युद्ध के अगले राउंड में ज्यादा विनाशकारी हथियारों के साथ उतरने की तैयारी कर रहा है. इसीलिए ईरान लगातार अपने हथियारों की पोजीशनिंग भी कर रहा है. आईआरजीसी ने दक्षिणी तटीय इलाकों बुशर और चाहबार में अपनी वायु रक्षा प्रणाली और मिसाइल यूनिट को नए सिरे से तैनात कर दिया है. ईरान की इस्लामिक रिजीम की ओर से यदि न्यूक्लियर वेपन्स को एक्वायर करने के संदर्भ में कोई कदम उठाए जाते हैं.
न्यूक्लियर हथियार बनाने नहीं देंगे
यदि ईरान यूरेनियममेंट को आगे बढ़ाता है वो और न्यूक्लियर वेप्स को एक्वायर करने की दिशा में कोई मेजर स्टेप लेता है तो फिर से एक बार अमेरिका और इजराइल ईरान के ऐसे किसी न्यूक्लियर इंस्टालेशन पर जहां भी ये गतिविधि चल रही हो वहां पर फिर से बड़ा हमला करेंगे. ये बात बिल्कुल स्पष्ट है कि अमेरिका और इजराइल ने इस बात को लेकर को संकल्प लिया है कि वो किसी भी कीमत पर ईरान को न्यूक्लियर हथियार बनाने नहीं करने देंगे.
एक हफ्ते में ही बन सकता है एटमी मुल्क
ईरान ने अमेरिका को बता दिया है कि वो ना ही डरने वाला है ना ही झुकने वाला है. ईरान अब मिडिल ईस्ट में सबसे बड़ी ताकत बन चुका है. इजराइल केवल एटम बम के मामले में ईरान से आगे है. ईरान की मिसाइल और उसके ड्रोन पावर का मुकाबला करना मिडिल ईस्ट के किसी भी देश के पास नहीं है. अब जो दावे सामने आ रहे हैं उसके मुताबिक ईरान चाहे तो एक हफ्ते में ही एटमी मुल्क बन सकता है.
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