कंपनी के कितने शेयर बाजार में हैं उपलब्ध? Free Float Market Cap से समझें
अगर आपको लगता है कि Share Market में किसी कंपनी का साइज सिर्फ उसके Market Capitalization से ही पता चल सकता है, तो ऐसा नहीं है आपको मार्केट कैपिटलाइजेशन के साथ-साथ Free Float Market Cap को समझना भी उतना ही जरूरी है. इन दोनों कॉन्सेप्ट्स को समझने से अच्छा मुनाफा कमाने का रास्ता खुल सकता है. इसके अलावा, फ्री फ्लोट मार्केट कैप को समझने से इन्वेस्टर्स को कंपनी की मार्केट लिक्विडिटी और शेयरों की उपलब्धता का अंदाजा लगाने में मदद मिलती है. इससे यह भी पता चलता है कि क्या कंपनी के कुल शेयरों का एक बड़ा हिस्सा प्रमोटरों या दूसरे बड़े शेयरहोल्डर्स के पास है। साथ ही, ज्यादा फ्री फ्लोट का मतलब है कि बाजार में ट्रेडिंग के लिए काफी ज्यादा शेयर उपलब्ध हैं. हालांकि अब तक आपको शायद इसकी बेसिक समझ हो गई होगी, लेकिन नीचे दी गई जानकारी से आपको और भी बातें पता चलेंगी जो शेयर बाजार में इन्वेस्टमेंट को बेहतर ढंग से समझने में आपकी मदद करेंगी.
Free Float Market Cap क्या होता है?
फ्री फ्लोट मार्केट कैप से पता चलता है कि किसी कंपनी के कुल कितने शेयर असल में आम जनता के लिए मार्केट में ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध हैं. यह इंडेक्स और स्टॉक वेटेज को समझने में बहुत अहम भूमिका निभाता है. आसान शब्दों में कहें तो, किसी कंपनी के सभी शेयर मार्केट में ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध नहीं होते, कुछ शेयर जैसे प्रमोटरों, सरकार, स्ट्रैटेजिक इन्वेस्टर्स या दूसरे बड़े शेयरहोल्डर्स के पास लंबे समय के लिए रखे गए शेयर फ्री फ्लोट में शामिल नहीं किए जाते हैं.
फॉर्मूले के हिसाब से समझे तो फ्री फ्लोट मार्केट कैप = फ्री फ्लोट शेयर्स × मौजूदा मार्केट प्राइस. उदाहरण के लिए मान लीजिए कि किसी कंपनी के कुल 10 करोड़ शेयर हैं और प्रमोटरों के पास उनमें से 4 करोड़ शेयर हैं, तो आम निवेशकों के लिए 6 करोड़ शेयर उपलब्ध होंगे. अगर शेयर की कीमत ₹100 है, तो कैलकुलेशन इस तरह होगा फ्री फ्लोट मार्केट कैप = 6 करोड़ × ₹100 = ₹600 करोड़.
Market Cap और Free Float Market Cap में अंतर
मार्केट कैप का मतलब है किसी कंपनी के सभी आउटस्टैंडिंग शेयरों की कुल मार्केट वैल्यू. वहीं, फ्री-फ्लोट मार्केट कैप सिर्फ उन शेयरों की मार्केट वैल्यू बताता है जो असल में मार्केट में ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध हैं. आइए इसे एक उदाहरण से समझते हैं अगर किसी कंपनी के कुल 10 करोड़ शेयर हैं और शेयर की कीमत ₹100 है, तो मार्केट कैप ₹1,000 करोड़ होगा. लेकिन, अगर फ्री-फ्लोट शेयर 6 करोड़ हैं, तो फ्री-फ्लोट मार्केट कैप ₹600 करोड़ होगा. इस तरह दोनों की वैल्यू अलग-अलग हो सकती है.
कौन-से शेयर Free Float में शामिल नहीं होते?
आम तौर पर जो शेयर लंबे समय तक सामान्य मार्केट ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध नहीं माने जाते, उन्हें फ्री फ्लोट की गणना करते समय शामिल नहीं किया जाता है. इनमें प्रमोटर की हिस्सेदारी, सरकार की कुछ खास रणनीतिक हिस्सेदारी, कंट्रोलिंग शेयरहोल्डर्स की हिस्सेदारी और अन्य प्रतिबंधित या रणनीतिक हिस्सेदारी शामिल हो सकती हैं. फ्री फ्लोट से जुड़े नियम और वर्गीकरण स्टॉक एक्सचेंज और इंडेक्स की कार्यप्रणाली (मेथडोलॉजी) द्वारा तय किए जाते हैं.
Free Float Market Cap क्यों जरूरी है?
फ्री-फ्लोट मार्केट कैपिटलाइजेशन से निवेशकों को आसानी से यह पता चल जाता है कि किसी कंपनी के कितने शेयर असल में मार्केट में उपलब्ध हैं. यह पैमाना स्टॉक इंडेक्स के लिए बहुत अहम माना जाता है कई बड़े इंडेक्स में कंपनियों का वेटेज उनके फ्री-फ्लोट मार्केट कैपिटलाइजेशन के आधार पर तय किया जाता है. इसलिए, आम तौर पर जिस कंपनी का फ्री-फ्लोट मार्केट कैप ज्यादा होता है, उसका इंडेक्स पर ज्यादा असर माना जाता है.
डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश बाजार के जोखिमों के अधीन है. किसी भी शेयर में पैसा लगाने से पहले अपने सर्टिफाइड फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह जरूर लें.
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