सीएम योगी का विपक्ष पर निशाना, कहा- सपा-कांग्रेस सनातन का अपमान करते हैं, BJP विरासत बचा रही है
बांदा (उप्र): उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बृहस्पतिवार को समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस पर सनातन परंपराओं का अपमान करने और प्रमुख हिंदू धार्मिक स्थलों के विकास का विरोध करने का आरोप लगाया। बांदा में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा की 'डबल-इंजन' सरकार देश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को बचाने के लिए प्रतिबद्ध है। सीएम आदित्यनाथ यहां 710 करोड़ रुपये की 229 विकास परियोजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास के मौके पर बोल रहे थे।
उन्होंने सपा और कांग्रेस पर आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दलों ने हिंदू परंपराओं और सनातन धर्म को अपमानित करना ही अपना 'एकमात्र ध्येय' बना लिया है। मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा, 'सपा और कांग्रेस को अयोध्या में भगवान राम का भव्य मंदिर अच्छा नहीं लगता, उन्हें काशी में काशी विश्वनाथ धाम अच्छा नहीं लगता, उन्हें मिर्जापुर में मां विंध्यवासिनी का भव्य धाम, चित्रकूट धाम के सौंदर्यीकरण के लिए किए जाने वाले प्रयास भी अच्छे नहीं लगते।'
मुख्यमंत्री योगी ने यह भी आरोप लगाया कि विरासत के संरक्षण और मंदिरों के सौंदर्यीकरण के लिए जनप्रतिनिधियों द्वारा दिया जाने वाला धन सपा के शासनकाल में कब्रिस्तान की चहारदीवारी बनाने के लिए खर्च किया जाता था। उन्होंने कहा, 'सपा को कब्रिस्तान से प्यार है इसलिए वह राम मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम, मां विंध्यवासिनी धाम, नैमिषारण्य और चित्रकूट धाम के विकास का विरोध करते हैं।'
पिछली सरकारों पर हमला बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, 'याद करिए, सपा और कांग्रेस के लोगों ने बुंदेलखंड को डकैत दिए थे। नौजवानों को नौकरी तो नहीं दी लेकिन उनके हाथ में तमंचे पकड़ा दिए थे। हमारी सरकार अब बुंदेलखंड को रक्षा विनिर्माण गलियारे का एक केंद्र बना रही है।' उन्होंने आगे कहा कि इस गलियारे के माध्यम से ब्रह्मोस जैसी मिसाइलें बनती हैं और जब भारत वह मिसाइल अपने दुश्मन पर दागता है तो पाकिस्तान भी 'बाप-बाप' करके चिल्लाता है।
अपने संबोधन में आदित्यनाथ ने बांदा जिले के बबेरू से सपा विधायक विशंभर सिंह यादव पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि बांदा जिले में भाजपा के विधायक तो विकास कार्यों में रुचि लेते हैं, लेकिन बबेरू क्षेत्र उदास है क्योंकि वहां के समाजवादी पार्टी के विधायक को विकास में कोई रुचि नहीं है, उनका विकास तो जमीनों पर कब्जा करना है।
सीएम योगी ने कहा कि विरासत और विकास दोनों एक साथ चलने वाली प्रक्रिया का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि अपनी विरासत का संरक्षण करना उसके प्रति कृतज्ञता ज्ञापन है।
चंपत राय इस्तीफे के बाद नाराज नहीं, नई व्यवस्था का कर रहे समर्थन: गोविंद देव गिरि
अयोध्या (उप्र)। अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बृहस्पतिवार को स्पष्ट किया कि चंपत राय दान में चोरी के विवाद को लेकर महासचिव पद से त्यागपत्र देने के बाद नाराज नहीं थे और मंदिर प्रबंधन के नये तंत्र का पूरा समर्थन कर रहे थे।
ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने बृहस्पतिवार को संवाददाताओं से कहा, "मैं कल चंपत राय जी से मुख्य रूप से उनका हाल-चाल जानने के लिए मिला था। वह स्वस्थ हैं, समाधान खोजने वाले व्यक्ति हैं और उन्हें अपने इस्तीफे को लेकर कोई शिकायत नहीं है।"
गिरि ने बुधवार को राय के साथ अपनी मुलाकात के बारे में बताते हुए कहा, "वह (चंपत) एक अनुभवी व्यक्ति हैं जिन्होंने अपना जीवन देश के लिए समर्पित कर दिया है। वे मंदिर प्रबंधन की नयी व्यवस्था का पूरा समर्थन कर रहे हैं और न तो नाराज हैं और न ही गुस्से में हैं।"
गिरि गत छह जुलाई को हुई ट्रस्ट की बैठक के बाद से अयोध्या में ही हैं। इसी बैठक में राय और दूसरे ट्रस्टी अनिल मिश्रा का त्यागपत्र स्वीकृत किया गया था। बैठक के एक दिन बाद ही राय का एक पत्र वायरल हो गया, जिसमें उन्होंने कहा था कि दान में चोरी की जांच कर रहे विशेष अन्वेषण दल (एसआईटी) की अंतिम जांच रिपोर्ट आने के बाद ही वह अपने ऊपर लगे आरोपों का जवाब देंगे।
पत्र के साथ-साथ एसआईटी को दिया गया राय का एक कथित बयान भी वायरल हुआ, जिसमें उन्होंने राम मंदिर में दान की गिनती की प्रक्रिया में भारतीय स्टेट बैंक की भूमिका पर सवाल उठाए थे।
गिरि ने कहा कि उनकी नजर में चंपत राय बिल्कुल 'बेदाग' हैं लेकिन उन्होंने लंबे समय तक 'गलत लोगों' पर भरोसा किया, जिससे कथित गबन का पता नहीं चल पाया। उन्होंने कहा, "मैं अयोध्या के संतों से भी मिला, जो मंदिर के प्रबंधन की नयी व्यवस्था से सहमत हैं और खुश हैं।"
ट्रस्ट के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) चुनने के लिए तीन सदस्यों की एक समिति भी बनाई गई है, जिसमें सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रमोद कोहली, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी और ट्रस्टी सुरेश हवारे शामिल हैं।
गिरि ने बताया कि आगामी 22 जुलाई को ट्रस्ट की एक बार फिर बैठक होगी, जिसमें उन कमियों को दूर करने के उपायों पर चर्चा होगी जिनकी वजह से दान की चोरी हुई। पिछले महीने अयोध्या में राम मंदिर में दान की गिनती में कथित गड़बड़ी का पता चलने के बाद एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया था। इस मामले की जांच के लिये प्रदेश सरकार ने एक एसआईटी बनायी थी जिसकी शुरुआती रिपोर्ट के बाद आठ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया गया था।
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