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Explainer: एजुकेश, व्यापार, रक्षा सहयोग... PM मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे से भारत को क्या-क्या होगा फायदा?
PM Modi Australia Visit: पीएम मोदी इन दिनों 3 देशों की यात्रा पर हैं। पहला पड़ाव इंडोनेशिया था, अब दूसरा पड़ाव ऑस्ट्रेलिया होने वाला है। आज पीएम मोदी ऑस्ट्रेलिया पहुंचेंगे। पीएम मोदी यहां 10 जुलाई तक रहेंगे। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथोनी अल्बानीज के निमंत्रण पर वह मेलबर्न में होने वाले सालाना लीडर्स समिट में शामिल होंगे। आइए समझते हैं कि पीएम मोदी के इस दौरे से भारत को क्या क्या फायदा होने वाला है।
ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और एंथोनी अल्बानीज के बीच द्विपक्षीय बैठक भी होगी। इसमें व्यापार, निवेश, रक्षा, सुरक्षा और तकनीक समेत कई अहम मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत-ऑस्ट्रेलिया की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना, आर्थिक सहयोग बढ़ाना और दोनों देशों के लोगों के बीच संबंधों को नई मजबूती देना है।
व्यापार से लेकर ऊर्जा तक क्या डील
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज की बैठक में व्यापार और आर्थिक सहयोग प्रमुख मुद्दा रहेगा। दोनों नेता भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौते (ECTA) की अब तक की प्रगति की समीक्षा करेंगे। साथ ही व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (CECA) को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा होगी, जिससे दोनों देशों के कारोबार और निवेश को नया बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
ऊर्जा सुरक्षा भी इस दौरे का अहम एजेंडा है। भारत में उद्योगों के विस्तार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित डेटा सेंटरों की बढ़ती बिजली जरूरतों को देखते हुए स्वच्छ और भरोसेमंद ऊर्जा स्रोतों पर सहयोग बढ़ाने पर जोर रहेगा। बैठक में ऑस्ट्रेलिया से भारत को यूरेनियम की आपूर्ति बढ़ाने, एलएनजी (LNG), नवीकरणीय ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) के क्षेत्र में साझेदारी मजबूत करने जैसे मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा होने की संभावना है।
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भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा साझेदारी होगी और मजबूत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा में रक्षा और समुद्री सुरक्षा सबसे अहम मुद्दों में शामिल रहने की उम्मीद है। पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों ने नौसेना और वायुसेना के संयुक्त सैन्य अभ्यास बढ़ाए हैं। इसके अलावा खुफिया जानकारी साझा करने और सैन्य रसद (लॉजिस्टिक) सहयोग को भी मजबूत किया गया है।
अब दोनों देश रक्षा सहयोग को अगले स्तर पर ले जाने की तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए एक नए उच्च-स्तरीय संयुक्त रक्षा घोषणापत्र पर काम चल रहा है, जो भविष्य में सैन्य साझेदारी की नई रूपरेखा तय करेगा। भारत में ऑस्ट्रेलिया के उच्चायुक्त फिलिप ग्रीन ने भी कहा कि दोनों सरकारें रक्षा संबंधों को और मजबूत बनाने के लिए मिलकर काम कर रही हैं। उनके मुताबिक, दोनों देशों के नेता चाहते हैं कि रक्षा सहयोग को नई ऊंचाई पर ले जाया जाए और इसी दिशा में नया संयुक्त घोषणापत्र तैयार किया जा रहा है।
हिंद-प्रशांत में समुद्री सुरक्षा पर बढ़ेगा तालमेल
भारत और ऑस्ट्रेलिया हिंद महासागर और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को और मजबूत करने की दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं। बदलते सुरक्षा हालात को देखते हुए दोनों देश समुद्र में निगरानी और आपसी समन्वय बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। हाल ही में क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद एक नई समुद्री निगरानी पहल शुरू करने का फैसला लिया गया। इसका उद्देश्य रियल-टाइम सूचना साझा करना और क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग को और मजबूत बनाना है। इसी कड़ी में भारत और ऑस्ट्रेलिया समुद्री निगरानी, नौसैनिक लॉजिस्टिक सहयोग, बंदरगाहों तक पहुंच और समुद्री गतिविधियों पर नजर रखने जैसे क्षेत्रों में अपनी साझेदारी को और विस्तार देने की तैयारी कर रहे हैं।
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ड्रोन और नई रक्षा तकनीकों पर साझेदारी
भारत और ऑस्ट्रेलिया रक्षा क्षेत्र में नई तकनीकों पर सहयोग बढ़ाने की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं। दोनों देशों के बीच ड्रोन, पानी के भीतर काम करने वाले सेंसर (अंडरवॉटर सेंसर) और स्वायत्त रक्षा प्रणालियों (Autonomous Systems) जैसी आधुनिक तकनीकों पर साझेदारी मजबूत करने पर जोर रहेगा। ऑस्ट्रेलिया की उन्नत तकनीक और भारत की मजबूत विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) क्षमता को साथ लाकर रक्षा उपकरणों के विकास और उत्पादन को नई गति देने की योजना है। इससे दोनों देशों की रक्षा क्षमता मजबूत होने के साथ-साथ रक्षा उद्योग में भी नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
एजुकेशन डील
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा में शिक्षा भी अहम मुद्दा रहेगी। ऑस्ट्रेलिया के कई विश्वविद्यालय भारत में अपने कैंपस शुरू कर चुके हैं, जबकि कई अन्य संस्थान भी भारत में आने की तैयारी कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच अनुसंधान (रिसर्च), कौशल विकास (स्किल डेवलपमेंट), नवाचार (इनोवेशन) और छात्र आदान-प्रदान (स्टूडेंट एक्सचेंज) को बढ़ावा देने पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। फिलहाल करीब 1.40 लाख भारतीय छात्र ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई कर रहे हैं, जिससे दोनों देशों के शैक्षणिक रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं।
इंडो-पैसिफिक में सुरक्षा चुनौतियों पर चर्चा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने पर खास जोर रहेगा। प्रधानमंत्री मोदी और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज समुद्री सुरक्षा, सुरक्षित और निर्बाध व्यापार मार्ग, क्षेत्रीय स्थिरता और इंडो-पैसिफिक में साझा सुरक्षा चुनौतियों पर चर्चा करेंगे। साथ ही, हाल ही में हुई क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में लिए गए फैसलों, जैसे समुद्री सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े सहयोग को आगे बढ़ाने पर भी दोनों नेताओं के बीच सहमति बनने की उम्मीद है।
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ये द्विपक्षीय मुद्दों पर बन सकती है बात
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा में ऊर्जा, रक्षा और नई तकनीकों पर सहयोग बढ़ाने पर खास फोकस रहेगा। भारत अपनी बढ़ती परमाणु ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करना चाहता है। वहीं, इलेक्ट्रिक वाहन और स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र को गति देने के लिए लिथियम समेत महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई चेन मजबूत करने पर भी चर्चा होगी। इसके अलावा, दोनों देश रक्षा सहयोग, संयुक्त नौसैनिक अभ्यास, उन्नत रक्षा तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को और मजबूत बनाने की दिशा में आगे बढ़ेंगे।
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