कभी-कभी बड़े सपने देखने के लिए अपने बचपन को थैंक्यू कहना पड़ता है : अनुपम खेर
मुंबई, 17 अगस्त (आईएएनएस)। अभिनेता अनुपम खेर आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। उन्होंने अपनी मेहनत के दम पर भारत समेत अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खास पहचान बनाई है, जिसे लेकर उन्होंने अपने किशोरावस्था के अनुपम खेर को धन्यवाद दिया। अभिनेता का मानना है कि कभी-कभी अपने बचपन को थैंक्यू कह देना चाहिए।
Nag Panchami Special: साल में सिर्फ एक बार खुलते हैं नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट, नाग शय्या पर विराजमान हैं शिव-पार्वती; जानें मंदिर से जुड़े 7 तथ्य
Nagchandreshwar Temple: उज्जैन के प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर की धार्मिक परंपराओं में नागचंद्रेश्वर मंदिर का विशेष स्थान है। मंदिर के कपाट आम श्रद्धालुओं के लिए साल में सिर्फ एक बार नाग पंचमी के अवसर पर खोले जाते हैं।
यहां भगवान शिव और माता पार्वती को नाग के फनों के नीचे विराजमान स्वरूप में पूजा जाता है। मंदिर के साल में केवल एक दिन खुलने की परंपरा को नागराज तक्षक से जुड़ी पौराणिक मान्यता से जोड़ा जाता है।
1.क्या है नागचंद्रेश्वर मंदिर की खासियत?
नागचंद्रेश्वर मंदिर भगवान शिव के उस स्वरूप को समर्पित है, जिसमें उनका संबंध नाग और चंद्रमा से जुड़ा माना जाता है। मंदिर की प्राचीन प्रतिमा और साल में सिर्फ एक बार दर्शन की परंपरा इसे खास बनाती है।
इस मंदिर की प्रतिमा में भगवान शिव और माता पार्वती को नाग के फनों के नीचे विराजमान दिखाया गया है। प्रतिमा को 11वीं शताब्दी का बताया जाता है।
2.कहां स्थित है मंदिर?
नागचंद्रेश्वर मंदिर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर की सबसे ऊपरी यानी तीसरी मंजिल पर स्थित है। महाकाल मंदिर के तीन स्तरों में सबसे नीचे महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग, उसके ऊपर ओंकारेश्वर और सबसे ऊपर नागचंद्रेश्वर मंदिर स्थित है।
3.कब खुलते हैं मंदिर के कपाट?
नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट आम श्रद्धालुओं के लिए साल में सिर्फ एक बार नाग पंचमी के दिन खोले जाते हैं। इस दौरान करीब 24 घंटे तक श्रद्धालुओं को दर्शन का अवसर मिलता है।
इसके बाद मंदिर के कपाट अगले साल नाग पंचमी तक बंद रहते हैं। 2026 में नाग पंचमी 17 अगस्त, सोमवार को है। इस बार नाग पंचमी और सावन सोमवार का भी संयोग है।
4. प्रतिमा में विराजमान हैं शिव-पार्वती
नागचंद्रेश्वर मंदिर में भगवान शिव और माता पार्वती के नाग से जुड़े स्वरूप की पूजा की जाती है। मंदिर में मौजूद प्रतिमा में दोनों को नाग के फनों के नीचे विराजमान दिखाया गया है। नाग पंचमी के अवसर पर यहां विशेष पूजा-अर्चना की परंपरा भी है। परंपरा के अनुसार नाग पंचमी की शुरुआत में संतों द्वारा विशेष पूजा की जाती है।
5. साल में सिर्फ एक दिन क्यों खुलता है मंदिर?
मंदिर के कपाट साल में केवल एक दिन खोलने के पीछे पौराणिक मान्यता बताई जाती है। मान्यता है कि सर्पराज तक्षक ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अमरत्व का वरदान दिया।
कहा जाता है कि तक्षक नाग भगवान शिव के सान्निध्य में एकांत साधना करना चाहते थे। इसी मान्यता के चलते मंदिर के कपाट साल भर बंद रहते है।
6. नाग पंचमी पर होती है विशेष पूजा
नाग पंचमी के दिन मंदिर के कपाट खुलने के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इस अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और मंदिर में अलग-अलग समय पर पूजन की परंपरा निभाई जाती है।
7. प्रतिमा को लेकर भी जुड़ी हैं मान्यताएं
नागचंद्रेश्वर मंदिर की प्राचीन प्रतिमा को लेकर यह भी मान्यता है कि इसे नेपाल से उज्जैन लाया गया था। हालांकि, इसके नेपाल से लाए जाने का मजबूत ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं होने के कारण इसे मान्यता के तौर पर ही देखा जाना चाहिए, पुख्ता ऐतिहासिक तथ्य के रूप में नहीं।
(Disclaimer): इस लेख में मंदिर और नागचंद्रेश्वर से जुड़ी जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक कथाओं और उपलब्ध ऐतिहासिक विवरणों पर आधारित है। धार्मिक मान्यताओं से जुड़े दावों को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तथ्य न माना जाए।
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