CBI BRO Raid: फंड गबन मामले में CBI की बड़ी कार्रवाई, 11 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 26 ठिकानों पर छापेमारी
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने सीमा सड़क संगठन (BRO) में सरकारी धन के कथित गबन से जुड़े मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 11 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 26 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की है. सीबीआई के अनुसार, यह कार्रवाई जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, असम, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड में की गई.
प्रोजेक्ट विजयक और योजक में फर्जी मजदूरों के नाम पर हुआ फर्जीवाड़ा
यह छापेमारी BRO के प्रोजेक्ट विजयक और प्रोजेक्ट योजक में सरकारी धन के दुरुपयोग से जुड़े चार आपराधिक मामलों की जांच के सिलसिले में हुई. जांच में सामने आया है कि लद्दाख में इन परियोजनाओं के तहत फर्जी कैजुअल मजदूर दिखाकर उनके नाम पर भुगतान जारी किए गए. इस मामले में अनियमितताओं की पुष्टि BRO के तकनीकी बोर्ड ऑफ ऑफिसर्स की आंतरिक जांच में हुई थी. इसके बाद रक्षा मंत्रालय की ओर से दर्ज कराई गई शिकायतों के आधार पर सीबीआई ने चार एफआईआर दर्ज कीं.
लेफ्टिनेंट कर्नल और मेजर समेत 10 अधिकारियों पर FIR दर्ज
सीबीआई ने बताया कि मामलों में सरकारी धन के गबन, धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक विश्वासघात, आपराधिक साजिश, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत आपराधिक कदाचार और रिश्वतखोरी जैसी धाराएं लगाई गई हैं. एफआईआर में लेफ्टिनेंट कर्नल, मेजर और इंजीनियर रैंक के कुल 10 अधिकारियों के साथ कुछ निजी व्यक्तियों को भी नामजद किया गया है.
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छापेमारी में अहम दस्तावेज बरामद, कानूनी कार्रवाई की तैयारी
छापेमारी के दौरान कई अहम दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए हैं. सीबीआई ने कहा कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
कौन हैं कृष्ण मोहन? जिन्हें बनाया गया राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का नया महासचिव
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े विवाद के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया है. ट्रस्ट के महासचिव पद पर कृष्ण मोहन की नियुक्ति की गई है. इससे पहले वे ट्रस्ट के सदस्य के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे थे. हाल के घटनाक्रम के बाद उनका नाम अचानक सुर्खियों में आ गया है, क्योंकि चढ़ावा मामले में दर्ज कराई गई शिकायत में उनकी अहम भूमिका रही है. आइए जानते हैं आखिर कौन हैं कृष्ण मोहन जिन्हें इस बड़े विवाद के बीच मिली है अहम जिम्मेदारी.
हरदोई से राष्ट्रीय स्तर तक का सफर
कृष्ण मोहन उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के निवासी हैं. वे लंबे समय से सामाजिक, धार्मिक और संगठनात्मक गतिविधियों से जुड़े रहे हैं. उनकी पहचान एक प्रशासनिक अधिकारी के साथ-साथ अनुशासित संगठनकर्ता के रूप में भी रही है.
उन्होंने वर्ष 1970 में लखनऊ विश्वविद्यालय से जियोलॉजी विषय में एमएससी की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद उनका चयन भारतीय वन सेवा (Indian Forest Service) में हुआ और उन्हें महाराष्ट्र कैडर आवंटित किया गया.
भारतीय वन सेवा में लंबा अनुभव
वन सेवा के दौरान कृष्ण मोहन ने महाराष्ट्र में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया. उन्होंने डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (DFO), कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट सहित कई प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालीं. अपने कार्यकाल में वन संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन और प्रशासनिक कार्यों का व्यापक अनुभव हासिल किया.
करीब चार दशक की सेवा के बाद वर्ष 2012 में वे भारतीय वन सेवा से सेवानिवृत्त हुए और अपने गृह जनपद हरदोई लौट आए.
आरएसएस में निभाईं कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां
सेवानिवृत्ति के बाद कृष्ण मोहन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से सक्रिय रूप से जुड़ गए. संगठन में उन्होंने विभिन्न स्तरों पर जिम्मेदारियां निभाईं. वे नगर संघ चालक, जिला संघ चालक और अवध प्रांत के प्रांत संघ चालक जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे.
संगठनात्मक अनुभव और सामाजिक कार्यों में सक्रिय भागीदारी के कारण उनकी पहचान एक प्रभावशाली कार्यकर्ता के रूप में बनी.
कैसे बने राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य?
सितंबर 2025 में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कामेश्वर चौपाल के निधन के बाद रिक्त हुई जगह पर कृष्ण मोहन को ट्रस्ट का सदस्य बनाया गया. ट्रस्ट की बैठक में सभी सदस्यों की सहमति से उनकी नियुक्ति हुई थी.
इसके बाद वे ट्रस्ट की विभिन्न गतिविधियों और प्रशासनिक निर्णयों में सक्रिय भूमिका निभाने लगे. अब महासचिव के रूप में उन्हें ट्रस्ट के दैनिक प्रशासन, समन्वय और विभिन्न योजनाओं के संचालन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है.
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चढ़ावा मामले में क्यों आया नाम?
राम मंदिर चढ़ावा मामले में कृष्ण मोहन का नाम उस समय चर्चा में आया, जब उनकी शिकायत के आधार पर अयोध्या में एफआईआर दर्ज की गई. शिकायत में कई लोगों पर चढ़ावे से जुड़े मामले में कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए गए.
उनकी शिकायत के बाद पुलिस ने संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की. यही वजह है कि ट्रस्ट में हुए हालिया बदलावों के दौरान भी कृष्ण मोहन का नाम प्रमुखता से सामने आया.
नई जिम्मेदारी के साथ बढ़ीं अपेक्षाएं
महासचिव बनने के बाद कृष्ण मोहन के सामने ट्रस्ट के प्रशासन को और अधिक पारदर्शी एवं व्यवस्थित बनाने की चुनौती होगी. हाल के विवाद के बाद श्रद्धालुओं का विश्वास मजबूत बनाए रखना और चढ़ावे के प्रबंधन सहित अन्य व्यवस्थाओं को प्रभावी बनाना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारियों में शामिल होगा. धार्मिक और प्रशासनिक दोनों क्षेत्रों का अनुभव उनके लिए इस भूमिका में उपयोगी माना जा रहा है.
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कृष्ण मोहन का सफर प्रशासनिक सेवा से लेकर सामाजिक और धार्मिक संगठनों तक फैला हुआ है. भारतीय वन सेवा में लंबे अनुभव, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में संगठनात्मक जिम्मेदारियों और राम मंदिर ट्रस्ट में सक्रिय भूमिका के बाद अब उन्हें महासचिव की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है. ऐसे समय में जब ट्रस्ट पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर चर्चा में है, उनकी नियुक्ति को प्रशासनिक मजबूती और संगठनात्मक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
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