कौन हैं कृष्ण मोहन? जिन्हें बनाया गया राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का नया महासचिव
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े विवाद के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया है. ट्रस्ट के महासचिव पद पर कृष्ण मोहन की नियुक्ति की गई है. इससे पहले वे ट्रस्ट के सदस्य के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे थे. हाल के घटनाक्रम के बाद उनका नाम अचानक सुर्खियों में आ गया है, क्योंकि चढ़ावा मामले में दर्ज कराई गई शिकायत में उनकी अहम भूमिका रही है. आइए जानते हैं आखिर कौन हैं कृष्ण मोहन जिन्हें इस बड़े विवाद के बीच मिली है अहम जिम्मेदारी.
हरदोई से राष्ट्रीय स्तर तक का सफर
कृष्ण मोहन उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के निवासी हैं. वे लंबे समय से सामाजिक, धार्मिक और संगठनात्मक गतिविधियों से जुड़े रहे हैं. उनकी पहचान एक प्रशासनिक अधिकारी के साथ-साथ अनुशासित संगठनकर्ता के रूप में भी रही है.
उन्होंने वर्ष 1970 में लखनऊ विश्वविद्यालय से जियोलॉजी विषय में एमएससी की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद उनका चयन भारतीय वन सेवा (Indian Forest Service) में हुआ और उन्हें महाराष्ट्र कैडर आवंटित किया गया.
भारतीय वन सेवा में लंबा अनुभव
वन सेवा के दौरान कृष्ण मोहन ने महाराष्ट्र में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया. उन्होंने डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (DFO), कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट सहित कई प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालीं. अपने कार्यकाल में वन संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन और प्रशासनिक कार्यों का व्यापक अनुभव हासिल किया.
करीब चार दशक की सेवा के बाद वर्ष 2012 में वे भारतीय वन सेवा से सेवानिवृत्त हुए और अपने गृह जनपद हरदोई लौट आए.
आरएसएस में निभाईं कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां
सेवानिवृत्ति के बाद कृष्ण मोहन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से सक्रिय रूप से जुड़ गए. संगठन में उन्होंने विभिन्न स्तरों पर जिम्मेदारियां निभाईं. वे नगर संघ चालक, जिला संघ चालक और अवध प्रांत के प्रांत संघ चालक जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे.
संगठनात्मक अनुभव और सामाजिक कार्यों में सक्रिय भागीदारी के कारण उनकी पहचान एक प्रभावशाली कार्यकर्ता के रूप में बनी.
कैसे बने राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य?
सितंबर 2025 में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कामेश्वर चौपाल के निधन के बाद रिक्त हुई जगह पर कृष्ण मोहन को ट्रस्ट का सदस्य बनाया गया. ट्रस्ट की बैठक में सभी सदस्यों की सहमति से उनकी नियुक्ति हुई थी.
इसके बाद वे ट्रस्ट की विभिन्न गतिविधियों और प्रशासनिक निर्णयों में सक्रिय भूमिका निभाने लगे. अब महासचिव के रूप में उन्हें ट्रस्ट के दैनिक प्रशासन, समन्वय और विभिन्न योजनाओं के संचालन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है.
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चढ़ावा मामले में क्यों आया नाम?
राम मंदिर चढ़ावा मामले में कृष्ण मोहन का नाम उस समय चर्चा में आया, जब उनकी शिकायत के आधार पर अयोध्या में एफआईआर दर्ज की गई. शिकायत में कई लोगों पर चढ़ावे से जुड़े मामले में कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए गए.
उनकी शिकायत के बाद पुलिस ने संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की. यही वजह है कि ट्रस्ट में हुए हालिया बदलावों के दौरान भी कृष्ण मोहन का नाम प्रमुखता से सामने आया.
नई जिम्मेदारी के साथ बढ़ीं अपेक्षाएं
महासचिव बनने के बाद कृष्ण मोहन के सामने ट्रस्ट के प्रशासन को और अधिक पारदर्शी एवं व्यवस्थित बनाने की चुनौती होगी. हाल के विवाद के बाद श्रद्धालुओं का विश्वास मजबूत बनाए रखना और चढ़ावे के प्रबंधन सहित अन्य व्यवस्थाओं को प्रभावी बनाना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारियों में शामिल होगा. धार्मिक और प्रशासनिक दोनों क्षेत्रों का अनुभव उनके लिए इस भूमिका में उपयोगी माना जा रहा है.
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कृष्ण मोहन का सफर प्रशासनिक सेवा से लेकर सामाजिक और धार्मिक संगठनों तक फैला हुआ है. भारतीय वन सेवा में लंबे अनुभव, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में संगठनात्मक जिम्मेदारियों और राम मंदिर ट्रस्ट में सक्रिय भूमिका के बाद अब उन्हें महासचिव की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है. ऐसे समय में जब ट्रस्ट पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर चर्चा में है, उनकी नियुक्ति को प्रशासनिक मजबूती और संगठनात्मक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
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भारत में स्टील उत्पादन की रफ्तार तेज, अप्रैल-जून तिमाही में दर्ज की गई 5.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी
नई दिल्ली, 6 जुलाई (आईएएनएस)। स्टील मंत्रालय द्वारा सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 में देश का फिनिश्ड (तैयार) स्टील उत्पादन बढ़कर 1.38 करोड़ टन (13.8 मिलियन टन) हो गया, जो पिछले वर्ष जून के 1.3 करोड़ टन (13 मिलियन टन) की तुलना में 6 प्रतिशत अधिक है।
चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के दौरान भी फिनिश्ड स्टील उत्पादन में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस अवधि में उत्पादन 3.87 करोड़ टन से बढ़कर 4.10 करोड़ टन हो गया, जो 5.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।
फिनिश्ड स्टील की खपत में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिली। जून 2026 में इसकी खपत 1.42 करोड़ टन (14.2 मिलियन टन) रही, जबकि पिछले साल इसी महीने यह 1.32 करोड़ टन (13.2 मिलियन टन) थी। यानी सालाना आधार पर इसमें 7.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। सरकार द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग, रेलवे और बंदरगाहों जैसी बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर किए जा रहे निवेश के कारण स्टील की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है।
अप्रैल-जून तिमाही के दौरान फिनिश्ड स्टील की कुल खपत 3.84 करोड़ टन से बढ़कर 4.16 करोड़ टन हो गई। इस तरह पहली तिमाही में इसकी खपत में 8.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो देश में बड़े पैमाने पर चल रहे इंफ्रास्ट्रक्चर विकास कार्यों की गति को दर्शाती है।
भारत के स्टील निर्यात में भी तेज उछाल देखने को मिला। जून 2026 में देश ने 6.16 लाख टन स्टील का निर्यात किया, जबकि पिछले वर्ष जून में यह आंकड़ा 4.46 लाख टन था। इस तरह स्टील निर्यात में 38.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
वहीं, कच्चे स्टील (क्रूड स्टील) का उत्पादन जून 2026 में 1.41 करोड़ टन रहा, जबकि पिछले वर्ष इसी महीने यह 1.35 करोड़ टन था।
मूल्य के लिहाज से भी स्टील निर्यात में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। जून 2026 में स्टील निर्यात का मूल्य 4,674 करोड़ रुपए रहा, जबकि पिछले वर्ष जून में यह 3,256.9 करोड़ रुपए था, यानी निर्यात मूल्य में 43.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
आधिकारिक बयान के अनुसार, जून 2026 तक भारत की कुल क्रूड स्टील उत्पादन क्षमता बढ़कर 221.9 मिलियन टन प्रति वर्ष हो गई है। इससे देश राष्ट्रीय इस्पात नीति के तहत वर्ष 2030 तक 300 मिलियन टन प्रति वर्ष की उत्पादन क्षमता हासिल करने के लक्ष्य की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है।
--आईएएनएस
डीबीपी
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