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'कुछ तो गड़बड़ है...', सुनील गावस्कर का बयान हुआ वायरल, बताया आखिर क्यों बार-बार चोटिल हो रहे भारतीय खिलाड़ी

Sunil Gavaskar Statement: भारतीय क्रिकेट टीम इस वक्त श्रीलंका दौरे पर है. जहां, दोनों टीमों के बीच खेली जाने वाली 2 मैचों की टेस्ट सीरीज का पहला मुकाबला गॉल इंटरनेशनल स्टेडियम में खेला जा रहा है. इधर टीम इंडिया एक्शन में है, तो दूसरी ओर पूर्व भारतीय दिग्गज सुनील गावस्कर ने भारतीय खिलाड़ियों के बार-बार इंजर्ड होने पर बात की है. उनका कहना है कि आखिर भारतीय खिलाड़ी बार-बार हैमस्ट्रिंग की समस्या से परेशान कैसे हो रहे हैं. उन्होंने इसकी वजह के बारे में भी बात की.

ट्रेनिंग को ठहराया जिम्मेदार

भारतीय क्रिकेटर्स की फिटनेस पिछले कुछ वक्त से वाकई चिंता का विषय बन गई है. हार्दिक पांड्या, जसप्रीत बुमराह सहित कई खिलाड़ी फिटनेस संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं. हाल ही में केएल राहुल को गाले टेस्ट मैच के दौरान हैमस्ट्रिंग में खिंचाक महसूस हुआ था और उन्होंने दर्द में कराहते हुए मैदान भी छोड़ दिया था. हालांकि, वह अगले दिन फिट होकर वापस लौटे थे. अब पूर्व भारतीय क्रिकेटर सुनील गावस्कर ने भारतीय खिलाड़ियों के बार-बार चोटिल होने पर बयान दिया है. उनका कहना है कि कोचिंग में कोई जिम्मेदारी है.

सुनील गावस्कर ने 'मिड-डे' में लिखे एक कॉलम में कहा, "बुमराह को घुटने की चोट है, लेकिन देखा गया है कि अधिकतर भारतीय खिलाड़ी हैमस्ट्रिंग की चोट से परेशान रहते हैं. साफ है कि उनकी ट्रेनिंग में कुछ गड़बड़ है, और इसीलिए उन्हें बार-बार हैमस्ट्रिंग की चोट लग रही है. ये चोटें तब लगती हैं जब वो भारत के लिए खेल रहे होते हैं, लेकिन अफसोस की बात है कि इसका दोष BCCI के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के फिजियो पर मढ़ दिया जाता है."

प्रैक्टिस के दौरान कम गेंदबाजी करने पर भी दी प्रतिक्रिया

पूर्व भारतीय दिग्गज सुनील गावस्कर ने सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का बचाव करते हुए कहा है कि खिलाड़ी ट्रेनिंग के दौरान गलती करते हैं और उसका जिम्मेदार CoE को ठहरा दिया जाता है. गावस्कर ने इस बात पर भी जोर दिया कि "जिम-फिट" होने के बजाय "मैच-फ़िट" होना अधिक जरूरी है.

उन्होंने आगे लिखा, "तथाकथित बायोमैकेनिक्स, जिसके तहत एक बॉलर प्रैक्टिस नेट्स में सिर्फ कुछ ही गेंदें फेंक सकता है, एक संदिग्ध तरीका है. यहां तक कि IPL में भी पता चला है कि कुछ विदेशी फिजियो बॉलर्स को नेट्स में 20 से अधिक गेंदें नहीं फेंकने देते. अगर मैच में आपको 24 गेंदें फेंकनी हैं... यानी अगर आप नो-बॉल और वाइड नहीं फेंकते हैं, तो नेट्स में कम गेंदें फेंकने से क्या फायदा होगा?"

इंजरी बन चुकी है सिर दर्द

मौजूदा समय में भारत के एक दो नहीं बल्कि काफी सारे खिलाड़ी चोट से परेशान हैं और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में रिहैब कर रहे हैं. जसप्रीत बुमराह के बाएं घुटने में सूजन है, हार्दिक पांड्या को काड्रीसेप्स है, हर्षित राणा को हैमस्ट्रिंग की समस्या है. वरुण चक्रवर्ती हैमस्ट्रिंग गियर से परेशान हैं. वॉशिंगटन सुंदर हैमस्ट्रिंग और क्वाड्रीसेप्स से परेशान हैं. आकाश दीप को स्ट्रेट फ्रैक्टर है और साईं सुदर्शन का अंगूठा फ्रेक्चर है.

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अमेरिका के साथ शांति समझौता 'सम्मान और ताकत' के साथ आगे बढ़ा, ईरानी राष्ट्रपति ने किया MoU का बचाव

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने कहा कि ईरान ने पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई द्वारा बताए गए सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए अमेरिका के साथ हालिया शांति समझौता ज्ञापन (एमओयू) 'सम्मान' और 'ताकत' के साथ किया है. मसूद पेजेश्कियन ने रविवार को शिक्षा मंत्री अलीरेजा काजेमी की मौजूदगी में हुई एक बैठक में ये बातें कहीं.

ईरानी राष्ट्रपति ने किया एमओयू का बचाव

उनके कार्यालय से जारी बयान के अनुसार, इस बैठक में राष्ट्रपति ने उस एमओयू का बचाव किया, जिस पर ईरान और अमेरिका ने 18 जून को क्षेत्र में युद्ध खत्म करने के लिए हस्ताक्षर किए थे. सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, पेजेश्कियन ने कहा, "हमने हालिया समझौते को मजबूती से आगे बढ़ाया और अपने दुश्मनों के सामने घुटने नहीं टेके. यह एमओयू विशेषज्ञों के साथ सोच-समझकर और विस्तार से चर्चा करने के बाद तैयार किया गया था."

शांति एमओयू को बताया ईरान की शान और जीत का सबूत

आधिकारिक समाचार एजेंसी आईआरएनए के अनुसार, शनिवार को ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर कालीबाफ ने शांति एमओयू को "ईरान की शान और जीत" का सबूत बताया और कहा कि यह कूटनीति के क्षेत्र में देश की जीत को मजबूत करने की दिशा में एक कदम है. एमओयू के तहत, ईरान और अमेरिका को सोमवार को खत्म होने वाली 60 दिनों की अवधि में बातचीत करके किसी अंतिम समझौते पर पहुंचना था. हालांकि, हाल के हफ्तों में दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने के बाद बातचीत का भविष्य अनिश्चित हो गया है.

अमेरिकी सैनिकों को भुगतना पड़ा खामियाजा- सीनेटर रूबेन गैलेगो

इस बीच, रविवार को अमेरिकी डेमोक्रेटिक सीनेटर रूबेन गैलेगो ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन बिना किसी स्पष्ट योजना, बाहर निकलने की रणनीति या तय मिशन के ईरान युद्ध में शामिल हुआ, जिसका खामियाजा अमेरिकी सैनिकों को भुगतना पड़ा. इराक युद्ध के अनुभवी और मरीन कॉर्प्स में सेवा दे चुके गैलेगो ने रविवार को कहा कि इस संघर्ष ने पेंटागन की योजना और नेतृत्व में गंभीर कमियों को उजागर किया है.

सीनेटर ने एबीसी न्यूज से कहा, "इस प्रशासन ने इस युद्ध के लिए कोई योजना नहीं बनाई थी. उन्होंने यह योजना नहीं बनाई कि इस युद्ध से कैसे बाहर निकला जाए और न ही वे वास्तव में यह समझ पाए कि यह युद्ध कैसे बढ़ेगा." एरिजोना के सीनेटर यूएसएस अब्राहम लिंकन पर थकान, गिरते मनोबल और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं की खबरों पर प्रतिक्रिया दे रहे थे.

स्रोत- आईएएनएस

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