महिलाओं के नेतृत्व में विकास को आगे बढ़ाने के लिए भारत में ब्रिक्स की बैठक
नई दिल्ली, 5 जुलाई (आईएएनएस)। भारत इस साल अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत 6-7 जुलाई को केरल के कोच्चि में महिला वर्किंग ग्रुप (डब्ल्यूडब्ल्यूजी) की बैठक की मेजबानी करेगा। महिला वर्किंग ग्रुप की बैठक सदस्य देशों को महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास को आगे बढ़ाने वाले मुद्दों पर चर्चा करने और आम सहमति बनाने का अवसर प्रदान करेगी।
रविवार को जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, कोच्चि की बैठक से 8-9 जुलाई को होने वाली ब्रिक्स महिला मंत्री-स्तरीय बैठक के लिए एक मजबूत आधार तैयार होने की उम्मीद है। यह बैठक व्यावहारिक सहयोग और महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास के प्रति ब्रिक्स सदस्य देशों की साझा प्रतिबद्धता को दोहराएगी।
बयान में कहा गया है, ब्रिक्स सदस्य देशों के वरिष्ठ सरकारी अधिकारी सभी क्षेत्रों में महिलाओं के सशक्तिकरण और महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर चर्चा करने और साझा प्राथमिकताओं पर सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए एक साथ आएंगे।
ब्रिक्स संगठन में कुल 11 देश ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) शामिल हैं। ये सभी मिलकर वैश्विक जीडीपी का लगभग 40 प्रतिशत योगदान देते हैं।
ब्रिक्स देशों में दुनिया की लगभग 49.5 प्रतिशत आबादी रहती है। इस विशाल जनसंख्या में महिलाओं का राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक विकास हर क्षेत्र को प्रभावित करता है, जिससे महिला ट्रैक ब्रिक्स 2026 में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बन गया है।
यह वर्किंग ग्रुप बैठक पहले आयोजित की गई तीन वर्चुअल प्रारंभिक बैठकों के दौरान हुई व्यापक चर्चाओं पर आधारित है। इन चर्चाओं ने सदस्य देशों को कोच्चि में होने वाली बैठकों से पहले बातचीत को आगे बढ़ाने में सक्षम बनाया है।
2026 में भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण थीम पर आधारित है। ब्रिक्स महिला ट्रैक ने चार प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया है, जिनमें महिलाओं की शासन और नेतृत्व में भागीदारी, डिजिटल और वित्तीय समावेशन, उद्यमिता और कौशल विकास और जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा व पोषण में महिलाओं की भूमिका शामिल है।
--आईएएनएस
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सरकार ने LNG सप्लाई पर लगी रोक हटाईं:अमेरिका-ईरान जंग रुकने से स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से शिपमेंट शुरू, इससे इंडस्ट्रीज को राहत मिलेगी
देश में लिक्विफाइड नेचुरल गैस यानी LNG की सप्लाई अब सामान्य हो गई है। केंद्र सरकार ने अमेरिका-इजराइल और ईरान युद्ध के दौरान देश में लागू किए गए 'इमरजेंसी नेचुरल गैस सप्लाई रेगुलेशन ऑर्डर' के आदेशों को वापस ले लिया है। LNG का उपयोग इंडस्ट्रीज में ज्यादा होता है, ऐसे में इस फैसले से इंडस्ट्रीज को राहत मिलेगी। यह फैसला पश्चिम एशिया में सीजफायर (युद्धविराम) होने और 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' से लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) के जहाजों की आवाजाही दोबारा सामान्य होने के बाद लिया गया है। पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्रालय ने इस संबंध में शनिवार को नया नोटिफिकेशन जारी किया है। हॉर्मुज रूट बंद होने से सप्लाई संकट आया, 9 मार्च को लागू हुआ था इमरजेंसी ऑर्डर पेट्रोलियम मंत्रालय ने बताया कि 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमलों और उसके बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई के कारण स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से गैस और तेल की सप्लाई पूरी तरह ठप हो गई थी। इसके बाद कई विदेशी सप्लायर्स ने भारत आने वाले गैस कार्गो को रोक दिया था या दूसरे देशों की तरफ डाइवर्ट कर दिया था। इस संकट से निपटने के लिए सरकार ने 9 मार्च 2026 को एसेंशियल कमोडिटीज एक्ट यानी आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत देश में गैस सप्लाई को रेगुलेट करने का आपातकालीन आदेश जारी किया था। संकट टलने के बाद सरकार ने सभी 3 इमरजेंसी फैसले वापस लिए LNG सप्लाई पर लगी रोक को हटाना सरकार का तीसरा बड़ा कदम है। इससे पहले सरकार दो और आपातकालीन फैसले वापस ले चुकी है। भारत के लिए क्यों खतरनाक है हॉर्मुज रूट का बंद होना? भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक और उपभोक्ता देश है। भारत अपनी जरूरत का करीब 88% कच्चा तेल और लगभग 50% नेचुरल गैस (LNG) दूसरे देशों से खरीदता है। भारत के कुल क्रूड ऑयल इंपोर्ट का 40-45% और कुल LNG सप्लाई का करीब 65% हिस्सा पश्चिम एशिया यानी खाड़ी देशों से आता है। ज्यादातर LNG कतर से आती है, जिसके जहाजों को स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से होकर ही गुजरना पड़ता है। यही वजह है कि इस रूट पर जरा सा भी तनाव होते ही भारत में फ्यूल संकट का खतरा मंडराने लगता है।
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