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PM स्वनिधि योजना के क्रियान्वयन में MP देश में प्रथम, अब तक 10.42 लाख पथ-विक्रेता लाभान्वित ,विशेष अभियान में 16,500 को ऋण वितरित

पीएम स्वनिधि योजना के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश देश में प्रथम बना हुआ है। योजना से अब तक 10.42 लाख से अधिक पथ-विक्रेता लाभान्वित हो चुके है। योजना के भावी रोडमैप और समीक्षा के लिये आज, 17 अगस्त 2026 को उज्जैन स्मार्ट सिटी में समस्त बैंकर्स हेड्स तथा नगरीय निकायों के अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक होगी।

नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा संचालित ‘प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि’ (पीएम स्वनिधि) योजना के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश निरंतर राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष स्थान पर बना हुआ है। प्रदेश के सूक्ष्म कार्यक्षेत्रीय रेहड़ी-पटरी व्यवसायियों एवं पथ-विक्रेताओं के लिये संचालित इस योजना के माध्यम से अब तक 10.42 लाख से अधिक पथ-विक्रेता लाभान्वित हुए हैं।

नवीन एवं पुनर्गठित पीएम स्वनिधि योजनान्तर्गत पथ-विक्रेताओं के व्यवसाय संवर्धन के लिये विभिन्न चरणों में क्रमशः 15,000, 25,000 एवं 50,000 रुपए तक की ऋण सहायता प्रदाय की जा रही है, जिसके साथ 30,000 रुपए की सीमा वाला UPI-लिंक्ड क्रेडिट कार्ड भी उपलब्ध कराया जा रहा है। 31 मार्च, 2030 तक प्रभावी इस महत्वाकांक्षी योजना में प्रदेश के अथक प्रयासों से अब तक कुल 16.55 लाख ऋण प्रकरणों का सफलतापूर्वक वितरण कर 2,852.03 करोड़ रूपये की धनराशि जारी की जा चुकी है।

योजना में 40 प्रतिशत महिला हितग्राही हुई लाभांवित

समावेशन एवं महिला सशक्तीकरण का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करते हुए योजना के अंतर्गत 40 प्रतिशत महिला हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया है। डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा देने के फलस्वरूप प्रदेश के 7.17 लाख से अधिक पथ-विक्रेता डिजिटल लेन-देन में सक्रियता से सहभागिता कर रहे हैं, जिन्हें अब तक 53.85 करोड़ रुपये से अधिक की राशि कैश बैक के रूप में प्राप्त हो चुकी है।

1 से 15 अगस्त तक चला प्रदेश में विशेष अभियान “स्वनिधि पखवाड़ा”

  • 1 अगस्त से 15 अगस्त, 2026 तक प्रदेश के समस्त जिलों, नगरीय निकायों तथा संबंधित सेन्सस टाउंस में मिशन मोड के अंतर्गत विशेष अभियान “स्वनिधि पखवाड़ा” का आयोजन किया गया।
  • पखवाड़े में योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार के साथ पात्र पथ-विक्रेताओं के नवीन ऋण आवेदन पत्र तथा क्रेडिट कार्ड के आवेदन तैयार कर त्वरित स्वीकृति के लिये बैंकों को प्रेषित किए गए।
  • अभियान की अवधि में 12 हजार से अधिक ऋण प्रकरण बैंकों में प्रेषित किए गए तथा 4 हजार से अधिक नवीन पथ-विक्रेताओं को योजना की मुख्यधारा से जोड़ा गया।
  • प्रशासनिक मुस्तैदी और बैंकिंग समन्वय के फलस्वरूप 17,400 से अधिक ऋण प्रकरण स्वीकृत हुए, जिनमें से 16,500 से अधिक हितग्राहियों को ऋण राशि का प्रत्यक्ष वितरण किया गया।
  • 3 हजार से अधिक पथ-विक्रेताओं के क्रेडिट कार्ड स्वीकृत कर 1,000 क्रेडिट कार्ड्स को सफलतापूर्वक एक्टिवेट कराया जा चुका है।

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Nag Panchami 2026: नाग पंचमी पर घर के दरवाजे पर क्यों बनाते हैं नाग की आकृति? जानें धार्मिक और वैज्ञानिक वजह

Nag Panchami 2026: सावन मास में नाग पंचमी का पर्व आते ही कई घरों के मुख्य दरवाजे पर नाग की आकृति नजर आने लगती है। कहीं गोबर और हल्दी से नाग बनाए जाते हैं तो कहीं गेरू से चित्र उकेरा जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि नाग देवता का चित्र खास तौर पर घर के मुख्य द्वार पर ही क्यों बनाया जाता है? इसके पीछे धार्मिक आस्था के साथ-साथ ज्योतिष, वास्तु और खेती-किसानी से जुड़ी मान्यताएं भी बताई जाती हैं।

मुख्य दरवाजे पर ही क्यों बनाई जाती है नाग की आकृति?
भारतीय परंपरा में घर के मुख्य द्वार को बेहद महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। मान्यता है कि घर में प्रवेश करने वाली ऊर्जा और लोगों का पहला संपर्क इसी स्थान से होता है। इसी वजह से नाग पंचमी पर मुख्य दरवाजे के दोनों ओर नाग देवता की आकृति बनाने और उनकी पूजा करने की परंपरा कई क्षेत्रों में प्रचलित है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, नाग देवता की पूजा करने से घर-परिवार पर उनकी कृपा बनी रहती है और नकारात्मकता से रक्षा होती है।

राहु-केतु से भी जोड़ा जाता है नाग का संबंध
ज्योतिषीय मान्यताओं में नाग और राहु-केतु का संबंध बताया जाता है। इसी वजह से नाग पंचमी को इन ग्रहों से जुड़ी परेशानियों को शांत करने के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

नाग की आकृति पर जल, दूध, दूर्वा और अक्षत अर्पित करने की परंपरा कुछ स्थानों पर देखने को मिलती है। हालांकि, राहु-केतु के प्रभाव और उपायों से जुड़े दावे ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं।

वास्तु में मुख्य द्वार का खास महत्व
वास्तु परंपरा में घर के मुख्य दरवाजे को महत्वपूर्ण माना गया है। इसी कारण नाग पंचमी पर यहां नाग देवता का प्रतीक बनाने की परंपरा को घर की सुरक्षा और शुभता से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि नाग देवता की पूजा करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है और नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं।

खेती-किसानी से भी जुड़ी है यह परंपरा
नाग पंचमी की परंपरा का एक महत्वपूर्ण पक्ष प्रकृति और खेती से जुड़ा हुआ भी माना जा सकता है। सांप खेतों में चूहों और अन्य छोटे जीवों की संख्या नियंत्रित करने में भूमिका निभाते हैं। चूहे फसलों को नुकसान पहुंचा सकते हैं, इसलिए पारंपरिक कृषि समाज में सांपों को पारिस्थितिकी तंत्र का उपयोगी हिस्सा माना जाता रहा है। ऐसे में नाग देवता की पूजा को प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त करने की परंपरा से भी जोड़कर देखा जाता है।

आज भी कायम है सदियों पुरानी परंपरा
समय के साथ घरों की बनावट और जीवनशैली बदली है, लेकिन नाग पंचमी से जुड़ी कई पारंपरिक मान्यताएं आज भी लोगों के बीच कायम हैं। मुख्य द्वार पर नाग की आकृति बनाना भी ऐसी ही परंपराओं में शामिल है।

नोट: नाग पंचमी, वास्तु और ज्योतिष से जुड़ी बातें धार्मिक एवं पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें वैज्ञानिक तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि आस्था और लोकपरंपरा के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
 

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टेस्ट में बिना शतक बनाए सबसे ज्यादा रन, इस अनचाहे वर्ल्ड रिकॉर्ड पर मंडराया खतरा; 33 साल का बल्लेबाज इतिहास बदलने की ओर बढ़ रहा

most runs in test cricket without a hundred: टेस्ट करियर में बिना कोई शतक लगाए सबसे ज्यादा रन बनाने का अनचाहा वर्ल्ड रिकॉर्ड शेन वॉर्न के नाम दर्ज है. उन्होंने 145 टेस्ट मैचों के अपने करियर में 3154 रन बनाए, लेकिन कभी शतक नहीं जड़ा. अब उनका यह रिकॉर्ड न चाहते हुए भी एक बल्लेबाज तोड़ने की ओर बढ़ रहा है. यह बल्लेबाज और कोई नहीं, बल्कि अब तक 55 टेस्ट खेल चुके श्रीलंकाई बल्लेबाज निरोशन डिकवेला हैं. Tue, 18 Aug 2026 05:01:03 +0530

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