Jharkhand exam protest: छात्रों ने हेमंत सोरेन का पुतला फूंका, 20 को घेराव का ऐलान
झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ़ विरोध कर रहे छात्रों ने रविवार को यहां मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, राहुल गांधी और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता तेजस्वी यादव के पुतले जलाए। छात्रों ने आरोप लगाया कि उनकी मांगों पर कार्रवाई करने के मामले में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो)-कांग्रेस गठबंधन ‘ठोस कदम उठाने में विफल’ रहा है। आंदोलन के 23वें दिन में प्रवेश करने के साथ ही प्रदर्शनकारियों ने रविवार को जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम स्थित धरना स्थल से अल्बर्ट एक्का चौक तक मशाल जुलूस निकाला।
वहां उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, राहुल गांधी और राजद नेता तेजस्वी यादव के पुतले फूंके। प्रदर्शनकारियों ने सत्तारूढ़ गठबंधन पर उनके मुद्दों को लेकर राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने घोषणा की कि वे 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे और मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग करेंगे।
फिल्म और टीवी अभिनेत्री कुनिका सदानंद ने स्टेडियम में प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की। उन्होंने सबिता कुमारी से भी बातचीत की जो उन छह प्रदर्शनकारियों में शामिल हैं जो दो सप्ताह से अधिक समय से भूख हड़ताल पर हैं। कुनिका सदानंद ने कहा कि प्रदर्शनकारियों की मांगें वाजिब हैं।
एक दिन पहले प्रदर्शनकारियों ने मांग की थी कि कांग्रेस को सत्तारूढ़ गठबंधन से अपना समर्थन वापस ले लेना चाहिए, क्योंकि उनके अनुसार मुख्यमंत्री ‘उनकी बात नहीं सुन रहे हैं।’ रविवार को झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को आंदोलन कर रहे छात्रों की मांगें स्वीकार करनी चाहिए।’’ विरोध प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे प्रमुख छात्र संगठन ‘जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच’ की मुख्य मांगों में 14वीं जेपीएससी परीक्षा को रद्द करना, सभी परीक्षाओं की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराना, जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करना और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करना शामिल है। छात्र वित्त विभाग के ‘अनुभाग अधिकारी’ और अनियमितता का खुलासा करने वाले संतोष कुमार मस्ताना का निलंबन रद्द करने और उनके खिलाफ दर्ज मामले वापस लेने की भी मांग कर रहे हैं। मरांडी ने कहा, ‘‘छात्र गड़बड़ियों की सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं और मुझे लगता है कि सरकार को इसका आदेश देना चाहिए।
सरकार इससे क्यों डर रही है? अगर सरकार अड़ी रहती है, तो इसका मतलब यह है कि वह युवाओं और छात्रों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर रही है।’’ मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने के छात्रों के आह्वान पर भाजपा नेता ने कहा कि पार्टी ‘उनके आंदोलन को नैतिक समर्थन देती है क्योंकि वे तीन सप्ताह से अधिक समय से शांतिपूर्ण ढंग से विरोध कर रहे हैं’। प्रदेश कांग्रेस के मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने एक बयान में कहा, ‘‘प्रदेश कांग्रेस 18 अगस्त को एक बैठक करेगी।
इसमें झारखंड लोक सेवा आयोग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग द्वारा आयोजित भर्ती परीक्षाओं में सुधार के मुद्दे पर चर्चा की जाएगी। झारखंड के युवाओं के भविष्य को नुकसान पहुंचाने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।’’ जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच के नेता रविंद्र पासवान ने कहा, ‘‘हम 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे। हम मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग करते हैं, क्योंकि झामुमो और कांग्रेस दोनों हमारे साथ राजनीति कर रहे हैं।
हमारी यह भी मांग है कि यदि मुख्यमंत्री उनकी बात नहीं सुन रहे हैं, तो राहुल गांधी झामुमो के नेतृत्व वाले गठबंधन से अपना समर्थन वापस ले लें।’’ प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देती, तब तक वे अपना आंदोलन वापस नहीं लेंगे। उनकी मांगों में उन परीक्षाओं को रद्द करना शामिल है, जिनमें कथित तौर पर अनियमितताएं पाई गई हैं, और भर्ती प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच कराना शामिल है। प्रदर्शनकारियों ने झारखंड के सभी जिलों के छात्रों से अपील की कि वे 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास के प्रस्तावित घेराव के लिए रांची में एकत्र हों।
उन्होंने राहुल गांधी को भी निशाना बनाया और कहा कि उन्होंने छात्रों का समर्थन करने की बात तो कही थी, लेकिन इसके बाद “कोई ठोस कदम” नहीं उठाया गया। छात्रों के संगठन ने मांग की कि यदि झामुमो के नेतृत्व वाली सरकार उनकी समस्याओं पर कार्रवाई करने के लिए तैयार नहीं है, तो कांग्रेस उससे अपना समर्थन वापस ले ले। पासवान ने कहा, ‘‘हम हेमंत सोरेन के इस्तीफे की मांग करते हैं, क्योंकि सरकार उन जेएसएससी-सीजीएल और जेपीएससी परीक्षाओं को रद्द करने में विफल रही, जिनमें अनियमितताएं पाई गई थीं।” प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनका आंदोलन केवल कुछ खास परीक्षाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी भर्ती व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा हुआ है।
हालांकि, राज्य सरकार ने भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से कई कदमों की घोषणा करके नौकरी के इच्छुक अभ्यर्थियों को भरोसा दिलाने की कोशिश की है।
CP Radhakrishnan ने छात्रों को नशे से दूर रहने की सीख दी, SRM Institute में बोले
उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने रविवार को छात्रों से मादक पदार्थों और हर तरह के नशीले पदार्थों के सेवन से दूर रहने का आग्रह किया तथा उनसे “भटकाव के बजाय अनुशासन, प्रलोभन के बजाय उद्देश्य और आसान रास्तों के बजाय उत्कृष्टता” को चुनने का आह्वान किया। तमिलनाडु में मादक पदार्थ की तस्करी से जुड़ी जानकारी साझा करने के कारण हाल में एक छात्र की हत्या पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह दुखद घटना उन्हें अपने परिवार के किसी सदस्य को खोने जैसी लगी। उन्होंने कहा, “मैं आप सभी (छात्रों) से आग्रह करता हूं कि हमेशा नशीले पदार्थों और हर तरह के मादक पदार्थों के सेवन से दूर रहें।
हमें किसी बाहरी ताकत के नियंत्रण में नहीं आना चाहिए, बल्कि अपने मन को स्वयं नियंत्रित करना चाहिए... हमें नशीले पदार्थों को ना कहना चाहिए।” यहां के निकट एसआरएम इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के 22वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने 2014 के बाद देश में उच्च शिक्षा के विस्तार को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि इस अवधि में 16 आईआईआईटी, आठ केंद्रीय विश्वविद्यालय, आठ आईआईएम, सात आईआईटी, दो आईआईएसईआर, एक एनआईटी और 12 एम्स स्थापित किए गए हैं। उन्होंने कहा, “आज भारत में 1,425 से अधिक विश्वविद्यालय, 54,000 कॉलेज और 16,850 स्वतंत्र संस्थान हैं।” उच्च शिक्षा में महिलाओं के नामांकन में उल्लेखनीय वृद्धि को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि यह 2014-15 में 1.57 करोड़ से बढ़कर 2023-24 में 2.24 करोड़ हो गया है, जो 42.2 प्रतिशत की वृद्धि है।
उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोहों में डिग्री और पदक हासिल करने वाली महिलाओं की बढ़ती संख्या स्वागत योग्य है। कोविड-19 महामारी के दौरान भारत की प्रतिक्रिया का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश ने 100 से अधिक देशों को कोरोना वायरस के टीके उपलब्ध कराए। उन्होंने कहा कि भारत ने मानवीय सहायता को व्यावसायिक बनाने की कोशिश नहीं की।
उपराष्ट्रपति ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री ने उनसे कहा था कि देशभर में एम्स उपलब्ध होने चाहिए, ताकि पूरे भारत में लोगों तक चिकित्सा सुविधाएं और चिकित्सा शिक्षा पहुंच सके। राधाकृष्णन ने कहा कि देश की सबसे बड़ी ताकत उसके लोग, खासकर युवा हैं। स्नातक छात्रों को संदेश देते हुए उन्होंने कहा, “भविष्य के लिए खुद को तैयार भर न करें, बल्कि भविष्य को आकार देने के लिए खुद को तैयार करें।” स्नातकों से ‘राष्ट्र प्रथम’ को अपना मार्गदर्शक सिद्धांत बनाने का आह्वान करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि उनके ज्ञान, नवाचार और कड़ी मेहनत से भारत की प्रगति, सुरक्षा और समृद्धि में योगदान होना चाहिए।
उन्होंने उनसे संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखने, विविधता का सम्मान करने, राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने और संकीर्ण स्वार्थ से ऊपर व्यापक राष्ट्रीय हित को रखने का आग्रह किया।
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