CP Radhakrishnan ने छात्रों को नशे से दूर रहने की सीख दी, SRM Institute में बोले
उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने रविवार को छात्रों से मादक पदार्थों और हर तरह के नशीले पदार्थों के सेवन से दूर रहने का आग्रह किया तथा उनसे “भटकाव के बजाय अनुशासन, प्रलोभन के बजाय उद्देश्य और आसान रास्तों के बजाय उत्कृष्टता” को चुनने का आह्वान किया। तमिलनाडु में मादक पदार्थ की तस्करी से जुड़ी जानकारी साझा करने के कारण हाल में एक छात्र की हत्या पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह दुखद घटना उन्हें अपने परिवार के किसी सदस्य को खोने जैसी लगी। उन्होंने कहा, “मैं आप सभी (छात्रों) से आग्रह करता हूं कि हमेशा नशीले पदार्थों और हर तरह के मादक पदार्थों के सेवन से दूर रहें।
हमें किसी बाहरी ताकत के नियंत्रण में नहीं आना चाहिए, बल्कि अपने मन को स्वयं नियंत्रित करना चाहिए... हमें नशीले पदार्थों को ना कहना चाहिए।” यहां के निकट एसआरएम इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के 22वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने 2014 के बाद देश में उच्च शिक्षा के विस्तार को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि इस अवधि में 16 आईआईआईटी, आठ केंद्रीय विश्वविद्यालय, आठ आईआईएम, सात आईआईटी, दो आईआईएसईआर, एक एनआईटी और 12 एम्स स्थापित किए गए हैं। उन्होंने कहा, “आज भारत में 1,425 से अधिक विश्वविद्यालय, 54,000 कॉलेज और 16,850 स्वतंत्र संस्थान हैं।” उच्च शिक्षा में महिलाओं के नामांकन में उल्लेखनीय वृद्धि को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि यह 2014-15 में 1.57 करोड़ से बढ़कर 2023-24 में 2.24 करोड़ हो गया है, जो 42.2 प्रतिशत की वृद्धि है।
उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोहों में डिग्री और पदक हासिल करने वाली महिलाओं की बढ़ती संख्या स्वागत योग्य है। कोविड-19 महामारी के दौरान भारत की प्रतिक्रिया का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश ने 100 से अधिक देशों को कोरोना वायरस के टीके उपलब्ध कराए। उन्होंने कहा कि भारत ने मानवीय सहायता को व्यावसायिक बनाने की कोशिश नहीं की।
उपराष्ट्रपति ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री ने उनसे कहा था कि देशभर में एम्स उपलब्ध होने चाहिए, ताकि पूरे भारत में लोगों तक चिकित्सा सुविधाएं और चिकित्सा शिक्षा पहुंच सके। राधाकृष्णन ने कहा कि देश की सबसे बड़ी ताकत उसके लोग, खासकर युवा हैं। स्नातक छात्रों को संदेश देते हुए उन्होंने कहा, “भविष्य के लिए खुद को तैयार भर न करें, बल्कि भविष्य को आकार देने के लिए खुद को तैयार करें।” स्नातकों से ‘राष्ट्र प्रथम’ को अपना मार्गदर्शक सिद्धांत बनाने का आह्वान करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि उनके ज्ञान, नवाचार और कड़ी मेहनत से भारत की प्रगति, सुरक्षा और समृद्धि में योगदान होना चाहिए।
उन्होंने उनसे संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखने, विविधता का सम्मान करने, राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने और संकीर्ण स्वार्थ से ऊपर व्यापक राष्ट्रीय हित को रखने का आग्रह किया।
West Bengal में Ayushman Bharat योजना लागू, 1867 अस्पतालों में मिलेगा लाभ
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने रविवार को कहा कि आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा योजना और मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ राज्य के 1,240 निजी अस्पतालों और 627 सरकारी अस्पतालों में मिलेगा। राज्य में इन योजनाओं की शुरुआत के मौके पर शुभेंदु ने कहा कि अब इन दो योजनाओं के लाभार्थी न केवल पश्चिम बंगाल में, बल्कि पूरे देश में स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ ले सकेंगे। उन्होंने यहां ‘आयुष्मान दिवस’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘पहले राज्य सरकार की योजना केवल पश्चिम बंगाल तक ही सीमित थी।
अब आपको पूरे भारत में इसका लाभ मिलेगा।’’ मुख्यमंत्री ने कहा कि लाभार्थियों को देश भर के लगभग 38,600 अस्पतालों में इलाज की सुविधा मिलेगी। उन्होंने कहा कि जो लोग आयुष्मान भारत के लिए पात्र नहीं हैं, उन्हें मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना से लाभान्वित किया जाएगा और ऐसे परिवारों की संख्या लगभग 80 लाख होने की संभावना है। शुभेंदु ने कहा कि इन योजनाओं में करीब 1,950 इलाज व जांच शामिल होंगी, जो राज्य की पहले की स्वास्थ्य योजना के तहत मिलने वाली करीब 1,700 इलाज व जांच से अधिक है।
स्वास्थ्य मंत्री शारद्वत मुखर्जी ने शुक्रवार को संवाददाताओं को बताया था कि इस योजना के तहत लाभार्थियों को पांच लाख रुपये तक की नकदी रहित इलाज सुविधा मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि योजना के तहत हुए समझौतों के बाद राज्य के सरकारी अस्पतालों में 100 ‘अमृत’ दवा दुकानों और करीब 480 प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों के माध्यम से भी लाभार्थियों को सुविधा मिलेगी। अधिकारी ने बताया कि राज्य सरकार ने आंखों की देखभाल के लिए एक कार्यक्रम भी शुरू किया है और उन्होंने खुद इस पहल के तहत अपनी आंखों की जांच कराई है।
उन्होंने कहा कि राज्य के कुछ निजी अस्पतालों (जिनमें रामकृष्ण मिशन द्वारा चलाए जा रहे अस्पताल भी शामिल हैं) ने इन योजनाओं के तहत मिलने वाली प्रतिपूर्ति राशि की दरों को लेकर चिंता जताई है। मुख्यमंत्री ने कहा, “कुछ अस्पतालों ने कहा है कि वे श्रेणी-बी में हैं, जबकि मुंबई और चेन्नई जैसे शहरों तथा सीएमसी वेल्लोर जैसे संस्थानों में दरें अलग हैं। मैं उन्हें आश्वस्त करता हूं कि सरकार उनकी चिंताओं पर विचार करेगी।” उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार निजी अस्पतालों के साथ मिलकर काम करेगी ताकि लाभार्थियों को बिना किसी बाधा के गुणवत्तापूर्ण इलाज मिल सके।
अधिकारी ने पिछली स्वास्थ्य योजना का जिक्र करते हुए कहा कि उसमें आबादी के एक वर्ग को कुछ सुविधाएं उपलब्ध थीं, लेकिन वे सभी लोगों के लिए उपलब्ध नहीं थीं। इस अवसर पर स्वास्थ्य कार्ड भी वितरित किए गए। मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार ने राज्य में आयुष्मान भारत योजना के क्रियान्वयन के लिए करीब 1,000 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।
इसमें 60 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार देगी, जबकि शेष 40 प्रतिशत खर्च राज्य सरकार वहन करेगी।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
prabhasakshi










