गाजियाबाद पुलिस की बड़ी सफलता: 5.08 करोड़ की साइबर ठगी की पूरी रकम 'गोल्डन आवर' में कराई फ्रीज
साइबर अपराध के मामलों में त्वरित कार्रवाई किस तरह पीड़ित की मेहनत की कमाई बचा सकती है, इसका ताजा उदाहरण गाजियाबाद से सामने आया है. कमिश्नरेट गाजियाबाद पुलिस ने महज कुछ घंटों के भीतर 5.08 करोड़ रुपये की साइबर ठगी की पूरी रकम फ्रीज़ कराकर एक बड़ी सफलता हासिल की है.
पुलिस के अनुसार, 2 जुलाई 2026 की रात करीब 11:45 बजे थाना इंदिरापुरम क्षेत्र के निवासी राजकपूर ने 5.08 करोड़ रुपये की साइबर ठगी की सूचना दी. शिकायत मिलते ही साइबर क्राइम पुलिस ने तत्काल कार्रवाई शुरू की और विभिन्न एजेंसियों एवं बैंकों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए रात करीब 3 बजे तक ठगी की पूरी धनराशि फ्रीज़ करा दी.
गोल्डन आवर ने बचाए करोड़ों रुपये
साइबर अपराधों में शुरुआती कुछ घंटे सबसे महत्वपूर्ण माने जाते हैं, जिन्हें 'गोल्डन आवर' कहा जाता है. यदि पीड़ित इस दौरान तुरंत शिकायत दर्ज करा देता है, तो ठगी की रकम को दूसरे खातों में ट्रांसफर होने से पहले फ्रीज़ या होल्ड कराया जा सकता है. इस मामले में भी समय पर सूचना मिलने के कारण पुलिस पूरी राशि सुरक्षित कराने में सफल रही.
24 घंटे सक्रिय है साइबर सुरक्षा तंत्र
पुलिस आयुक्त के निर्देशन में कमिश्नरेट गाजियाबाद में साइबर अपराधों से निपटने के लिए विशेष व्यवस्था की गई है. थाना साइबर क्राइम के अलावा सभी थानों में 24×7 साइबर हेल्प डेस्क संचालित हैं. साथ ही तीनों जोनों में जोनल साइबर सेल भी स्थापित हैं, जो साइबर मामलों की निगरानी और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करती हैं.
बेहतर समन्वय के लिए इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C), नई दिल्ली में भी कमिश्नरेट गाजियाबाद की ओर से अधिकारियों की नियुक्ति की गई है, जिससे बड़े साइबर मामलों में तेजी से कार्रवाई संभव हो रही है.
MRM और GRM से मिल रही है राहत
राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर उपलब्ध Money Restoration Module (MRM) के माध्यम से 50 हजार रुपये तक की फ्रीज़ की गई राशि नियमानुसार औपचारिकताएं पूरी होने पर बिना न्यायालय के आदेश के वापस कराई जा सकती है.
वहीं Grievance Redressal Mechanism (GRM) के जरिए ऐसे खाताधारकों को भी राहत मिल रही है, जिनके खाते में साइबर ठगी की राशि किसी लेयर के माध्यम से पहुंचने के कारण फ्रीज़ या होल्ड लगा है. संबंधित व्यक्ति अपने बैंक के माध्यम से आवेदन कर खाते से होल्ड हटवाने की प्रक्रिया शुरू कर सकता है.
गाजियाबाद पुलिस की अपील
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि यदि वे किसी भी प्रकार की साइबर ठगी का शिकार होते हैं तो बिना देरी किए तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं. समय पर की गई शिकायत से ठगी गई रकम को फ्रीज़ कराने और वापस दिलाने की संभावना काफी बढ़ जाती है.
मुख्य बिंदु
- 5.08 करोड़ रुपये की साइबर ठगी की पूरी रकम फ्रीज़.
- शिकायत रात 11:45 बजे दर्ज, रात 3 बजे तक कार्रवाई पूरी.
- समय पर शिकायत के कारण मिली बड़ी सफलता.
- गाजियाबाद में 24×7 साइबर हेल्प डेस्क और जोनल साइबर सेल सक्रिय.
- साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें.
विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर 19 लाख की ठगी, ज्योतिषी बनकर छिपा मास्टरमाइंड गिरफ्तार
विदेश में नौकरी का सपना दिखाकर बेरोजगार युवाओं से लाखों रुपये की ठगी करने वाले एक बड़े गिरोह का दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने पर्दाफाश किया है. पुलिस ने गिरोह के कथित मास्टरमाइंड भारत मिश्रा उर्फ प्रीतम कुमार मिश्रा उर्फ राजेश प्रसाद (52) को गिरफ्तार किया है. आरोपी अपनी पहचान बदलकर नोएडा में ज्योतिषी बनकर रह रहा था.
पुलिस के अनुसार, गिरोह ने 27 बेरोजगार युवाओं को विदेश में नौकरी दिलाने का झांसा देकर उनसे करीब 19 लाख रुपये की ठगी की. आरोपियों ने पीड़ितों को फर्जी वीजा और नकली हवाई टिकट भी थमा दिए थे.
ऐसे दिया ठगी को अंजाम
EOW के मुताबिक, मामला वर्ष 2022-23 का है. गौतम कुमार थापा समेत 27 पीड़ितों ने शिकायत दर्ज कराई थी कि दिल्ली के जनकपुरी स्थित DDA मार्केट में Sky-Blue Overseas Consultancy नाम से एक कार्यालय खोलकर विदेश में आकर्षक नौकरी दिलाने का दावा किया जा रहा था.
आरोपियों ने नौकरी की प्रक्रिया का हवाला देकर युवाओं से उनके मूल पासपोर्ट जमा कराए और मेडिकल जांच, वीजा प्रोसेसिंग तथा एयर टिकट के नाम पर प्रति व्यक्ति हजारों रुपये वसूले. कुल मिलाकर करीब 19 लाख रुपये नकद और ऑनलाइन माध्यम से ठगे गए.
फर्जी पहचान से खोला था ऑफिस
जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी भारत मिश्रा और उसके साथियों ने मकान मालिक से लेकर ग्राहकों तक, सभी से अपनी असली पहचान छिपाई थी. उन्होंने फर्जी पहचान पत्रों के जरिए कार्यालय किराए पर लिया था.
पीड़ितों का भरोसा जीतने के लिए उनका मेडिकल परीक्षण भी कराया गया. इसके बाद उन्हें फर्जी वीजा और नकली एयर टिकट सौंप दिए गए. जैसे ही आरोपियों ने सभी से पैसे और पासपोर्ट हासिल कर लिए, वे रातों-रात कार्यालय बंद कर फरार हो गए और अपने मोबाइल फोन भी बंद कर दिए.
तकनीकी जांच से मिला सुराग
डीसीपी अमित वर्मा की निगरानी में EOW ने मामले की जांच शुरू की. पुलिस ने आरोपियों के संभावित ठिकानों पर छापेमारी की और उनके देश छोड़कर भागने की आशंका को देखते हुए लुक आउट सर्कुलर (LOC) भी जारी किया.
तकनीकी सर्विलांस, मोबाइल लोकेशन और बैंक खातों की जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि भारत मिश्रा नोएडा के सेक्टर-80 स्थित शिव धाम एन्क्लेव में नाम बदलकर रह रहा है और ज्योतिष का काम कर रहा है.
नोएडा से दबोचा गया आरोपी
दिल्ली पुलिस की विशेष टीम ने 1 जुलाई को नोएडा में छापेमारी कर भारत मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस का कहना है कि आरोपी के खिलाफ पहले कोई आपराधिक रिकॉर्ड दर्ज नहीं मिला है.
फिलहाल EOW आरोपी से पूछताछ कर रही है ताकि गिरोह के अन्य फरार सदस्यों का पता लगाया जा सके, ठगी की रकम बरामद की जा सके और पूरे रैकेट का खुलासा किया जा सके.
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