राहुल गांधी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई:आय से अधिक संपत्ति से जुड़ा है मामला; इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी
सुप्रीम कोर्ट सोमवार को राहुल गांधी की उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई है। हाईकोर्ट ने सीबीआई और ईडी को राहुल के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के आरोपों की जांच करने का निर्देश दिया था। याचिका की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी। हाईकोर्ट ने CBI से मांगा था नया हलफनामा इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने 20 जुलाई को सीबीआई के जवाब पर असंतोष जताया था। कोर्ट ने एजेंसी के वरिष्ठ अधिकारी को जांच की अब तक की स्थिति बताते हुए नया हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि सीबीआई का पहले दाखिल किया गया हलफनामा उसके पुराने आदेश के मुताबिक नहीं था। कोर्ट ने अगली सुनवाई से पहले सीबीआई के नई दिल्ली के एंटी करप्शन हेडक्वार्टर के संबंधित जोन के जॉइंट डायरेक्टर को व्यक्तिगत रूप से नया हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया था। भाजपा कार्यकर्ता विग्नेश शिशिर ने याचिका दाखिल किया कर्नाटक के भाजपा कार्यकर्ता विग्नेश शिशिर ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर राहुल गांधी पर आय से अधिक संपत्ति का आरोप लगाया था। उन्होंने CBI और ED से इसकी जांच कराने की मांग की थी। इसके बाद कोर्ट ने आरोपों के वेरिफिकेशन के आदेश दिए थे। इस मामले में CBI विग्नेश शिशिर से पूछताछ भी कर चुकी है। कोर्ट में 6 मई को पहली बार सुनवाई हुई थी कोर्ट में 6 मई को पहली बार सुनवाई हुई थी। कोर्ट से एजेंसियों ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा था। फिर 6 दिन बाद कोर्ट में सुनवाई हुई थी। कोर्ट ने CBI और ED का पक्ष सुना। फिर अपने आदेश में कहा- अगर याचिकाकर्ता की शिकायत मिली है, तो उसमें लगाए गए आरोपों का कानून के अनुसार वेरिफिकेशन किया जाए। --------------- ये खबर भी पढ़ें… राहुल बोले-सरकार के खिलाफ खड़े होने वालों की तारीफ हो:कहा- छात्रों के साथ बदसलूकी, गाली-गलौज और हिंसा हुई; प्रदर्शनकारियों से बातचीत का Video शेयर किया लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने रविवार को कहा कि सरकार की हिंसा के खिलाफ मजबूती से खड़े रहने वाले भारत के युवाओं का साहस सराहनीय है। पूरी खबर पढ़ें…
जरूरत की खबर- बारिश में छत-दीवारों में बढ़ता लीकेज:इन 10 संकेतों को न करें इग्नोर, घर की सीलन और लीकेज ठीक करने के 6 तरीके
बारिश के मौसम में कई घरों में छत से पानी टपकने, दीवारों पर सीलन आने और पेंट उखड़ने जैसी समस्याएं होने लगती हैं। शुरुआत में यह मामूली लगती हैं। लेकिन लगातार नमी घर की दीवारों और छत को कमजोर कर सकती है। साथ ही फर्नीचर, इलेक्ट्रिक वायरिंग और घरेलू सामान को भी नुकसान पहुंचा सकती है। समस्या यह है कि ज्यादातर लोग लीकेज पर तब ध्यान देते हैं, जब पानी घर के अंदर आने लगता है। जबकि इसके संकेत अक्सर पहले ही दिखाई देने लगते हैं। पुराने घरों, खराब वाटरप्रूफिंग और जाम ड्रेनेज वाले मकानों में इसका रिस्क ज्यादा रहता है। ऐसे में लीकेज के शुरुआती संकेत पहचानना और समय रहते जरूरी कदम उठाना बेहद जरूरी है। इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में हम बारिश में छत व दीवारों के लीकेज ठीक करने के टिप्स बताएंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- प्रमोद कुमार मौर्य, चार्टर्ड इंजीनियर (आर्किटेक्ट), लखनऊ सवाल- मानसून में घर में लीकेज की समस्या क्यों होती है? जवाब- मानसून में लगातार बारिश से छत, दीवारों और घर के बाहरी हिस्सों पर नमी और पानी का प्रेशर बढ़ जाता है। अगर कहीं भी पानी के घुसने का छोटा-सा रास्ता बन जाए तो वह धीरे-धीरे दीवारों, छत या फर्श के अंदर पहुंचने लगता है। कई बार यह समस्या शुरुआत में दिखाई नहीं देती, लेकिन समय के साथ सीलन, फफूंदी, पेंट उखड़ने और पानी टपकने के रूप में सामने आने लगती है। लीकेज के सभी संभावित कारण ग्राफिक में देखिए- सवाल- घर की किन जगहों पर लीकेज का रिस्क ज्यादा होता है? जवाब- घर के कुछ हिस्से बारिश के पानी और नमी के सीधे संपर्क में आते हैं, इसलिए वहां लीकेज का रिस्क ज्यादा रहता है। खासकर छत, पाइपलाइन कनेक्शन और बाहरी दीवारों के जॉइंट्स सबसे ज्यादा सेंसिटिव माने जाते हैं। ग्राफिक में देखिए किन जगहों पर लीकेज का रिस्क ज्यादा होता है- सवाल- क्या लीकेज शुरू होने से पहले भी कुछ संकेत दिखाई देते हैं? जवाब- हां, दीवारों पर दाग, पेंट उखड़ना और नमी इसके शुरुआती संकेत हैं। अगर समय रहते इन संकेतों पर ध्यान दिया जाए तो बड़े नुकसान से बचा जा सकता है। सभी संकेत ग्राफिक में देखिए- सवाल- लीकेज से दीवार पर सीलन आती है। इससे क्या नुकसान हो सकता है? जवाब- पॉइंटर्स में देखिए- सवाल- क्या ये सेहत के लिए भी नुकसानदायक है? जवाब- सीलन से फफूंदी बढ़ती है, जो सांस संबंधी समस्याएं पैदा कर सकती है। लगातार नमी और फंगस से कई हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं। जैसेकि- सवाल- अगर बारिश में लीकेज हो तो तुरंत क्या करना चाहिए? जवाब- ऐसी स्थिति में सबसे पहले सुरक्षा का ध्यान रखें। इसके लिए- साथ ही ग्राफिक में दी गई बाताें का ध्यान रखें। आइए, इन तरीकों को समझते हैं। वाटरप्रूफ कोटिंग छत और बाहरी दीवारों पर वाटरप्रूफ कोटिंग लगाने से बारिश का पानी अंदर नहीं जाता है। यह सतह पर एक प्रोटेक्टिव लेयर बनाती है, जो सीलन और रिसाव कम करने में मदद करती है। क्रैक फिलिंग दीवारों और छत की छोटी-बड़ी क्रैक्स को तुरंत भरवाना जरूरी है। दरारें खुली रहने पर इन्हीं रास्तों से पानी धीरे-धीरे अंदर पहुंचता है। टेरेस स्लोप सही करना अगर छत का ढलान सही नहीं होगा तो बारिश का पानी जमा होने लगेगा। सही स्लोप से पानी ड्रेनेज पाइप तक आसानी से पहुंचता है। मेम्ब्रेन वाटरप्रूफिंग इस तकनीक में छत पर एक मजबूत वाटरप्रूफ लेयर लगाई जाती है। यह लंबे समय तक पानी को सतह के अंदर जाने से रोकती है और भारी बारिश वाले इलाकों में काफी असरदार मानी जाती है। टाइल ग्राउटिंग पुरानी या ढीली टाइलों के बीच के खुले जोड़ से पानी नीचे रिस सकता है। दोबारा ग्राउटिंग कराने से ये गैप बंद हो जाते हैं और लीकेज का रिस्क कम होता है। ड्रेनेज सुधारना छत और बालकनी के ड्रेनेज पाइप साफ और सही हालत में होने चाहिए। पाइप जाम होने पर पानी जमा होता है और लीकेज की समस्या बढ़ जाती है। सवाल- दीवारों में सीलन क्यों आती है? जवाब- दीवारों में सीलन मुख्य रूप से पानी के लगातार संपर्क में रहने से आती है। सवाल- दीवारों में सीलन रोकने के लिए क्या करें? जवाब- इसके लिए कुछ बाताें का ध्यान रखें- लीकेज से जुड़े कॉमन सवाल-जवाब सवाल- क्या नई बिल्डिंग में भी लीकेज हो सकता है? जवाब- हां, अगर निर्माण के दौरान सही तरीके से वाटरप्रूफिंग न की गई हो या खराब क्वालिटी का मटेरियल इस्तेमाल हुआ हो तो नई बिल्डिंग में भी लीकेज हो सकता है। सवाल- कम बजट में लीकेज रोकने के उपाय क्या हैं? जवाब- छोटी क्रैक्स की सीलिंग, ड्रेनेज सफाई, वाटरप्रूफ कोटिंग और पाइपलाइन रिपेयर जैसे उपाय कम खर्च में लीकेज की समस्या को ठीक कर सकते हैं। सवाल- क्या सिर्फ वाटरप्रूफिंग पेंट से लीकेज की समस्या खत्म हो सकती है? जवाब- नहीं, अगर क्रैक्स, पाइपलाइन लीकेज या स्ट्रक्चरल समस्या हो तो सिर्फ पेंट लगाने से समाधान नहीं होगा। सवाल- मानसून के दौरान इमरजेंसी लीकेज कैसे कंट्रोल करें? जवाब- अस्थायी रूप से प्लास्टिक शीट, सीलेंट या वाटरप्रूफ टेप का इस्तेमाल कर सकते हैं। साथ ही पानी जमा होने से रोकना जरूरी है। सवाल- कौन-सी वाटरप्रूफिंग तकनीक सबसे टिकाऊ है? जवाब- मेम्ब्रेन वाटरप्रूफिंग और पॉलीयूरेथेन बेस्ड कोटिंग को लंबे समय तक टिकाऊ होती है। हालांकि, सही तकनीक घर की स्थिति पर निर्भर करती है। सवाल- एक बार वाटरप्रूफिंग कराने पर वह कितने साल चलती है? जवाब- अच्छी क्वालिटी की वाटरप्रूफिंग आमतौर पर 5-10 साल तक चल सकती है। इसकी उम्र मेंटेनेंस और मौसम की स्थिति पर भी निर्भर करती है। ……………………… जरूरत की ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- बारिश में कपड़ों से आती स्मेल: हो सकती है स्किन एलर्जी, एक्सपर्ट से जानें- बैड स्मेल कैसे भगाएं, कपड़े कैसे रखें फ्रेश बारिश के मौसम में कपड़े ठीक से नहीं सूखते हैं। धूप की कमी और हवा में ज्यादा नमी की वजह से कपड़ों से अजीब स्मेल आने लगती है। कई बार अलमारी में रखे कपड़ों से भी सीलन की स्मेल आती है। पूरी खबर पढ़ें…
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