जरूरत की खबर- बारिश में छत-दीवारों में बढ़ता लीकेज:इन 10 संकेतों को न करें इग्नोर, घर की सीलन और लीकेज ठीक करने के 6 तरीके
बारिश के मौसम में कई घरों में छत से पानी टपकने, दीवारों पर सीलन आने और पेंट उखड़ने जैसी समस्याएं होने लगती हैं। शुरुआत में यह मामूली लगती हैं। लेकिन लगातार नमी घर की दीवारों और छत को कमजोर कर सकती है। साथ ही फर्नीचर, इलेक्ट्रिक वायरिंग और घरेलू सामान को भी नुकसान पहुंचा सकती है। समस्या यह है कि ज्यादातर लोग लीकेज पर तब ध्यान देते हैं, जब पानी घर के अंदर आने लगता है। जबकि इसके संकेत अक्सर पहले ही दिखाई देने लगते हैं। पुराने घरों, खराब वाटरप्रूफिंग और जाम ड्रेनेज वाले मकानों में इसका रिस्क ज्यादा रहता है। ऐसे में लीकेज के शुरुआती संकेत पहचानना और समय रहते जरूरी कदम उठाना बेहद जरूरी है। इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में हम बारिश में छत व दीवारों के लीकेज ठीक करने के टिप्स बताएंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- प्रमोद कुमार मौर्य, चार्टर्ड इंजीनियर (आर्किटेक्ट), लखनऊ सवाल- मानसून में घर में लीकेज की समस्या क्यों होती है? जवाब- मानसून में लगातार बारिश से छत, दीवारों और घर के बाहरी हिस्सों पर नमी और पानी का प्रेशर बढ़ जाता है। अगर कहीं भी पानी के घुसने का छोटा-सा रास्ता बन जाए तो वह धीरे-धीरे दीवारों, छत या फर्श के अंदर पहुंचने लगता है। कई बार यह समस्या शुरुआत में दिखाई नहीं देती, लेकिन समय के साथ सीलन, फफूंदी, पेंट उखड़ने और पानी टपकने के रूप में सामने आने लगती है। लीकेज के सभी संभावित कारण ग्राफिक में देखिए- सवाल- घर की किन जगहों पर लीकेज का रिस्क ज्यादा होता है? जवाब- घर के कुछ हिस्से बारिश के पानी और नमी के सीधे संपर्क में आते हैं, इसलिए वहां लीकेज का रिस्क ज्यादा रहता है। खासकर छत, पाइपलाइन कनेक्शन और बाहरी दीवारों के जॉइंट्स सबसे ज्यादा सेंसिटिव माने जाते हैं। ग्राफिक में देखिए किन जगहों पर लीकेज का रिस्क ज्यादा होता है- सवाल- क्या लीकेज शुरू होने से पहले भी कुछ संकेत दिखाई देते हैं? जवाब- हां, दीवारों पर दाग, पेंट उखड़ना और नमी इसके शुरुआती संकेत हैं। अगर समय रहते इन संकेतों पर ध्यान दिया जाए तो बड़े नुकसान से बचा जा सकता है। सभी संकेत ग्राफिक में देखिए- सवाल- लीकेज से दीवार पर सीलन आती है। इससे क्या नुकसान हो सकता है? जवाब- पॉइंटर्स में देखिए- सवाल- क्या ये सेहत के लिए भी नुकसानदायक है? जवाब- सीलन से फफूंदी बढ़ती है, जो सांस संबंधी समस्याएं पैदा कर सकती है। लगातार नमी और फंगस से कई हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं। जैसेकि- सवाल- अगर बारिश में लीकेज हो तो तुरंत क्या करना चाहिए? जवाब- ऐसी स्थिति में सबसे पहले सुरक्षा का ध्यान रखें। इसके लिए- साथ ही ग्राफिक में दी गई बाताें का ध्यान रखें। आइए, इन तरीकों को समझते हैं। वाटरप्रूफ कोटिंग छत और बाहरी दीवारों पर वाटरप्रूफ कोटिंग लगाने से बारिश का पानी अंदर नहीं जाता है। यह सतह पर एक प्रोटेक्टिव लेयर बनाती है, जो सीलन और रिसाव कम करने में मदद करती है। क्रैक फिलिंग दीवारों और छत की छोटी-बड़ी क्रैक्स को तुरंत भरवाना जरूरी है। दरारें खुली रहने पर इन्हीं रास्तों से पानी धीरे-धीरे अंदर पहुंचता है। टेरेस स्लोप सही करना अगर छत का ढलान सही नहीं होगा तो बारिश का पानी जमा होने लगेगा। सही स्लोप से पानी ड्रेनेज पाइप तक आसानी से पहुंचता है। मेम्ब्रेन वाटरप्रूफिंग इस तकनीक में छत पर एक मजबूत वाटरप्रूफ लेयर लगाई जाती है। यह लंबे समय तक पानी को सतह के अंदर जाने से रोकती है और भारी बारिश वाले इलाकों में काफी असरदार मानी जाती है। टाइल ग्राउटिंग पुरानी या ढीली टाइलों के बीच के खुले जोड़ से पानी नीचे रिस सकता है। दोबारा ग्राउटिंग कराने से ये गैप बंद हो जाते हैं और लीकेज का रिस्क कम होता है। ड्रेनेज सुधारना छत और बालकनी के ड्रेनेज पाइप साफ और सही हालत में होने चाहिए। पाइप जाम होने पर पानी जमा होता है और लीकेज की समस्या बढ़ जाती है। सवाल- दीवारों में सीलन क्यों आती है? जवाब- दीवारों में सीलन मुख्य रूप से पानी के लगातार संपर्क में रहने से आती है। सवाल- दीवारों में सीलन रोकने के लिए क्या करें? जवाब- इसके लिए कुछ बाताें का ध्यान रखें- लीकेज से जुड़े कॉमन सवाल-जवाब सवाल- क्या नई बिल्डिंग में भी लीकेज हो सकता है? जवाब- हां, अगर निर्माण के दौरान सही तरीके से वाटरप्रूफिंग न की गई हो या खराब क्वालिटी का मटेरियल इस्तेमाल हुआ हो तो नई बिल्डिंग में भी लीकेज हो सकता है। सवाल- कम बजट में लीकेज रोकने के उपाय क्या हैं? जवाब- छोटी क्रैक्स की सीलिंग, ड्रेनेज सफाई, वाटरप्रूफ कोटिंग और पाइपलाइन रिपेयर जैसे उपाय कम खर्च में लीकेज की समस्या को ठीक कर सकते हैं। सवाल- क्या सिर्फ वाटरप्रूफिंग पेंट से लीकेज की समस्या खत्म हो सकती है? जवाब- नहीं, अगर क्रैक्स, पाइपलाइन लीकेज या स्ट्रक्चरल समस्या हो तो सिर्फ पेंट लगाने से समाधान नहीं होगा। सवाल- मानसून के दौरान इमरजेंसी लीकेज कैसे कंट्रोल करें? जवाब- अस्थायी रूप से प्लास्टिक शीट, सीलेंट या वाटरप्रूफ टेप का इस्तेमाल कर सकते हैं। साथ ही पानी जमा होने से रोकना जरूरी है। सवाल- कौन-सी वाटरप्रूफिंग तकनीक सबसे टिकाऊ है? जवाब- मेम्ब्रेन वाटरप्रूफिंग और पॉलीयूरेथेन बेस्ड कोटिंग को लंबे समय तक टिकाऊ होती है। हालांकि, सही तकनीक घर की स्थिति पर निर्भर करती है। सवाल- एक बार वाटरप्रूफिंग कराने पर वह कितने साल चलती है? जवाब- अच्छी क्वालिटी की वाटरप्रूफिंग आमतौर पर 5-10 साल तक चल सकती है। इसकी उम्र मेंटेनेंस और मौसम की स्थिति पर भी निर्भर करती है। ……………………… जरूरत की ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- बारिश में कपड़ों से आती स्मेल: हो सकती है स्किन एलर्जी, एक्सपर्ट से जानें- बैड स्मेल कैसे भगाएं, कपड़े कैसे रखें फ्रेश बारिश के मौसम में कपड़े ठीक से नहीं सूखते हैं। धूप की कमी और हवा में ज्यादा नमी की वजह से कपड़ों से अजीब स्मेल आने लगती है। कई बार अलमारी में रखे कपड़ों से भी सीलन की स्मेल आती है। पूरी खबर पढ़ें…
फिजिकल हेल्थ- बैठने, खड़े रहने पर भी फूलती है सांस:हो सकता है डिस्प्निया, डॉक्टर से जानें यह कब खतरनाक, बचाव के लिए 6 सावधानियां
आपने देखा होगा कि कुछ लोग थोड़ी दूर चलने, सीढ़ियां चढ़ने या हल्का-सा काम करने पर ही हांफने लगते हैं। ऐसा कभी-कभार हो तो सामान्य है। लेकिन बिना किसी मेहनत या मूवमेंट के अगर बैठे–बैठे भी सांस फूल रही है तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कई बार यह लंग्स, हार्ट या ब्लड से जुड़ी किसी बीमारी का संकेत हो सकता है। मेडिसिन की भाषा में इसे 'डिस्प्निया' (Dyspnea) कहते हैं। मई, 2026 में 'BMC पल्मोनरी मेडिसिन' जर्नल में पब्लिश एक स्टडी रिव्यू के मुताबिक, दुनिया में लगभग हर 5 में से 1 वयस्क डिस्प्निया से जूझ रहा है। मई, 2024 में 'नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन' में पब्लिश एक सर्वे के मुताबिक, भारत में करीब 62.6 करोड़ लोग सांस फूलने की इस समस्या से प्रभावित हैं। इनमें से लगभग 5.2 करोड़ लोगों की समस्या इतनी गंभीर है कि इसका असर उनके रोजमर्रा के कामकाज पर पड़ता है। ऐसे में समय रहते डिस्प्निया की वजह का पता लगाना और सही इलाज शुरू करना जरूरी है। इसलिए ‘फिजिकल हेल्थ’ में आज डिस्प्निया की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- डॉ. (कर्नल) एस. पी. राय, कंसल्टेंट, पल्मोनरी एंड स्लीप मेडिसिन, कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल, मुंबई सवाल- डिस्प्निया क्या है? यह कोई बीमारी है या सिर्फ लक्षण? जवाब- जब किसी व्यक्ति को सांस लेने में तकलीफ होती है या उसकी सांस फूलती है, तो डॉक्टर इस लक्षण को ‘डिस्प्निया’ कहते हैं। यह अपने आप में कोई बीमारी नहीं है। इसके पीछे अस्थमा, क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD), निमोनिया, एनीमिया, एंग्जाइटी, हार्ट डिजीज या फेफड़ों से जुड़ी अन्य बीमारियां हो सकती हैं। सवाल- डिस्प्निया कितने प्रकार का होता है? जवाब- डिस्प्निया मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है- 1. एक्यूट डिस्प्निया 2. क्रॉनिक डिस्प्निया सवाल- क्या हर बार और हर तरह की सांस फूलने की समस्या डिस्प्निया होती है? जवाब- नहीं, तेज दौड़ने, सीढ़ियां चढ़ने, हैवी एक्सरसाइज करने या ऊंचाई वाले इलाके में जाने पर कुछ समय के लिए सांस फूलना सामान्य है। वहीं अगर आराम की स्थिति में, बिना ज्यादा मेहनत किए बार-बार सांस फूले तो ये डिस्प्निया का संकेत हो सकता है। सवाल- डिस्प्निया क्यों होता है? जवाब- जब शरीर को जरूरत के मुताबिक ऑक्सीजन नहीं मिलती या लंग्स और हार्ट को सामान्य से ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, तब डिस्प्निया होता है। इससे व्यक्ति को सांस लेने में परेशानी होती है। सवाल- डिस्प्निया यानी सांस फूलने के पीछे क्या संभावित हेल्थ कंडीशंस हो सकती हैं? जवाब- कई हेल्थ कंडीशंस में सांस फूलने की समस्या होती है। इसके संभावित कारण ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या डिस्प्निया हमेशा लंग्स डिजीज का संकेत होता है? जवाब- यह सिर्फ लंग्स डिजीज का संकेत नहीं होता। कई बार इसके पीछे हार्ट, ब्लड और किडनी से जुड़ी समस्याएं भी हो सकती हैं। इसके अलावा एंग्जाइटी, मोटापा या फिजिकल एक्टिविटी की कमी से भी सांस फूलने की समस्या हो सकती है। सवाल- किन स्थितियों में डिस्प्निया यानी सांस फूलना नॉर्मल है? जवाब- सांस फूलना हमेशा बीमारी का संकेत नहीं होता। कुछ स्थितियों में यह बॉडी की सामान्य प्रतिक्रिया होती है। ग्राफिक में ऐसी स्थितियां देखिए- सवाल- डिस्प्निया को कब बीमारी का संकेत मानना चाहिए? जवाब- अगर बार-बार, बिना मेहनत किए या आराम की स्थिति में भी सांस फूले तो यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है। ऐसे सभी संकेत ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या डिस्प्निया कोई मेडिकल इमरजेंसी है? जवाब- हर बार नहीं। लेकिन कुछ स्थितियों में यह मेडिकल इमरजेंसी हो सकती है। जैसेकि- ऐसी स्थिति में तुरंत हॉस्पिटल जाना चाहिए। सवाल- किन लोगों को डिस्प्निया की समस्या ज्यादा होती है? जवाब- कुछ लोगों में डिस्प्निया का रिस्क ज्यादा होता है। ग्राफिक में हाई-रिस्क ग्रुप देखिए- सवाल- किस स्थिति में डॉक्टर को दिखाना जरूरी है? जवाब- अगर सांस फूलने के साथ होंठ नीले पड़ना और बेहोशी जैसे गंभीर लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से कंसल्ट करना चाहिए। ग्राफिक में ऐसे संकेत देखिए- सवाल- डिस्प्निया की वजह पता करने के लिए डॉक्टर कौन-से टेस्ट कराते हैं? जवाब- डॉक्टर लक्षण और मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर जरूरत के अनुसार कुछ टेस्ट कराते हैं। इनमें शामिल हैं- पल्स ऑक्सीमीटर– ब्लड में ऑक्सीजन का लेवल चेक करने के लिए। ब्लड टेस्ट– एनीमिया, इन्फेक्शन या अन्य कारणों का पता लगाने के लिए। चेस्ट एक्स-रे– लंग्स और हार्ट की स्थिति देखने के लिए। ईसीजी (ECG)– हार्ट से जुड़ी समस्याओं की जांच के लिए। इकोकार्डियोग्राफी (2D Echo)– हार्ट की फंक्शनिंग चेक करने के लिए। पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट (PFT)– लंग्स की फंक्शनिंग चेक करने के लिए। कार्डियोपल्मोनरी एक्सरसाइज टेस्ट (CPET)– एक्सरसाइज के दौरान शरीर में ऑक्सीजन की जरूरत और कार्बन डाइऑक्साइड के लेवल का आकलन करने के लिए। सवाल- डिस्प्निया का इलाज क्या है? जवाब- यह अपने आप में कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक लक्षण है। इसलिए डॉक्टर पहले सांस फूलने की वजह का पता लगाते हैं और उसी के अनुसार इलाज करते हैं। जरूरत पड़ने पर दवाएं, ऑक्सीजन थेरेपी, इनहेलर, पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन या अन्य ट्रीटमेंट्स दिए जा सकते हैं। सवाल- डिस्प्निया से बचने के लिए डेली लाइफ में क्या बदलाव करें? जवाब- डिस्प्निया के रिस्क को कम करने और लंग्स व हार्ट को हेल्दी रखने के लिए कुछ अच्छी आदतें अपनाना जरूरी है। जरूरी उपाय ग्राफिक में देखिए- सवाल- कौन-सी एक्सरसाइज फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने में मदद कर सकती है? जवाब- रेगुलर कुछ ब्रीदिंग और हल्की एरोबिक एक्सरसाइज करने से लंग्स की फंक्शनिंग बेहतर बनी रहती है। अगर पहले से लंग्स या हार्ट डिजीज है, तो कोई भी एक्सरसाइज शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें। प्रमुख एक्सरसाइज हैं- ध्यान रखें- ये एक्सरसाइज लंग्स को हेल्दी रखने और सांस लेने में मदद कर सकती हैं, लेकिन डिस्प्निया का इलाज नहीं हैं। लगातार सांस फूलने की स्थिति में डॉक्टर से कंसल्ट करना जरूरी है। …………………… जरूरत की ये खबर भी पढ़िए फिजिकल हेल्थ- हर साल 10 लाख लोगों को होता पाइल्स: 10 कारणों से बढ़ता रिस्क, इन 7 संकेतों को इग्नोर न करें, तुरंत डॉक्टर को दिखाएं ‘रिसर्च गेट’ में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, भारत में करीब 4.7 करोड़ लोग पाइल्स यानी बवासीर से पीड़ित हैं। वहीं हर साल लगभग 10 लाख नए मामलों की पुष्टि होती है। इससे साफ है कि बवासीर आज एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है। पूरी खबर पढ़िए…
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