पंजाब कांग्रेस के अंदरूनी मतभेद तब सबके सामने आ गए, जब पूर्व मुख्यमंत्री और हाल ही में चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष बनाए गए चरणजीत सिंह चन्नी ने मोरिंडा में अपने समर्थकों की बैठक बुलाई। चन्नी, जिन्हें पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) का अध्यक्ष बनने का दावेदार माना जा रहा था, ने प्रचार समिति की ज़िम्मेदारी तब स्वीकार की जब कांग्रेस आलाकमान ने अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को ही PCC अध्यक्ष बनाए रखने का फ़ैसला किया।
बैठक में नेताओं ने खुलकर मांग की कि चन्नी को राज्य कांग्रेस में शीर्ष पद संभालना चाहिए। कांग्रेस नेता तरसेम सिंह डीसी ने कहा कि पार्टी अमरिंदर सिंह राजा वडिंग के नेतृत्व में सरकार नहीं बना सकती, क्योंकि उन्हें जनता का समर्थन हासिल नहीं है। पत्रकारों से बात करते हुए तरसेम सिंह डीसी ने कहा कि कांग्रेस (पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग के नेतृत्व में) सरकार नहीं बना सकती क्योंकि जनता उन्हें समर्थन नहीं देती। जनता चाहती थी कि पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को बदला जाए। जनता चरणजीत सिंह चन्नी को पंजाब के अगले मुख्यमंत्री के तौर पर देखना चाहती है।
एक और नेता, हरमिंदर सिंह गिल ने चरणजीत सिंह चन्नी के लिए जनता के ज़बरदस्त समर्थन की बात कही। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में पंजाब में चुनाव होने वाले हैं। उन चुनावों में लोग चाहते हैं कि चन्नी साहब नंबर वन पर रहें। मैं उस पर (राजा वडिंग पर) कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता, लेकिन लोग चन्नी साहब को नंबर वन की स्थिति में देखना चाहते हैं। बुधवार को, ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) ने राज्य में पार्टी के चुनाव अभियान की तैयारियों के तहत 2027 के पंजाब विधानसभा चुनावों से जुड़ी अहम संगठनात्मक नियुक्तियों की घोषणा की। इसमें कई चुनाव समितियों के चेयरमैन और को-चेयरमैन की नियुक्ति शामिल है।
AICC के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इन नियुक्तियों को तत्काल प्रभाव से मंज़ूरी दे दी है। चरणजीत सिंह चन्नी को कैंपेन कमेटी का चेयरमैन, विजय इंदर सिंगला को चुनाव प्रबंधन और समन्वय समिति का चेयरमैन, सुखजिंदर सिंह रंधावा को कोर कमेटी का चेयरमैन और अमर सिंह को घोषणापत्र समिति का प्रमुख नियुक्त किया गया है।
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वेनेजुएला में आए दो भीषण भूकंपों के बाद एक ऐसा चमत्कार हुआ है, जिसे देखकर हर कोई हैरान है। 43 साल के सिक्योरिटी गार्ड हरनान अल्बर्टो गिल फ्लोर्स करीब 140 टन भारी मलबे के नीचे पूरे आठ दिनों तक दबे रहे। इसके बाद चले 100 घंटे के बेहद मुश्किल रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद उन्हें सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
मलबे में तब्दील हो गया था शॉपिंग सेंटर
यह हादसा वेनेजुएला के एक शॉपिंग सेंटर में हुआ, जो भूकंप के कारण पूरी तरह ढह गया था। हरनान वहां नाइट शिफ्ट में सिक्योरिटी गार्ड का काम करते थे। जब 24 जून को 7.2 और 7.5 तीव्रता के दो लगातार भूकंप आए, तब वह एक छोटे सुरक्षा केबिन के अंदर थे। आसपास की पूरी कंक्रीट की बिल्डिंग गिर गई, लेकिन वह छोटा केबिन सही-सलामत रहा, जिसने उन्हें मलबे से बचाए रखा और उन्हें सांस लेने के लिए थोड़ी जगह मिल गई।
इमोशनल कर देने वाला पल
जब रेस्क्यू टीम ने कई दिनों की कड़ी मशक्कत के बाद हरनान को स्ट्रेचर पर बाहर निकाला, तो वहां मौजूद सभी लोगों की आंखें नम हो गईं। धूल से सने हरनान को ऑक्सीजन मास्क लगाकर एम्बुलेंस तक ले जाया गया। इस कामयाबी पर अलग-अलग देशों के बचावकर्मी खुशी से झूम उठे। कोस्टा रिका के एक रेस्क्यू वर्कर ने बताया कि जब उन्होंने हरनान को पहली बार ढूंढा, तो हरनान ने उनसे कहा था, "मेरी पत्नी को मत बताना कि मैं जिंदा हूं, कहीं ऐसा न हो कि मैं बाहर न आ पाऊं।" लेकिन टीम ने ठान लिया था कि वे उन्हें बचाकर ही दम लेंगे।
ऐसे बची मलबे के नीचे जान
आमतौर पर भूकंप के बाद 48 से 72 घंटों को ही जान बचाने के लिए सबसे जरूरी माना जाता है, लेकिन यह रेस्क्यू ऑपरेशन इससे कहीं ज्यादा लंबा चला। रेस्क्यू टीम ने कंक्रीट हटाते समय एक पतले पाइप के जरिए हरनान तक पानी और लिक्विड फूड पहुंचाया, जिससे वह इतने दिनों तक जिंदा रह सके। हरनान की पत्नी गुस्बीमार गोंजालेज ने बताया कि वह पूरी तरह उम्मीद खो चुकी थीं, लेकिन जब उन्हें पति के जिंदा होने की खबर मिली, तो अंधेरे में एक रोशनी की किरण नजर आई। उनके दो बच्चे भी हैं।
कई देशों की टीमों ने मिलकर चलाया ऑपरेशन
इस बेहद मुश्किल ऑपरेशन को चिली के फायरफाइटरों की टीम लीड कर रही थी। इसमें अमेरिका, पुर्तगाल, मैक्सिको, कोस्टा रिका, अल साल्वाडोर और खुद वेनेजुएला की एक्सपर्ट टीमों ने दिन-रात काम किया। रेस्क्यू टीम ने हरनान से बात करने के लिए एक खास टेलीस्कोपिक कैमरे का इस्तेमाल किया। चिली की एक महिला फायरफाइटर लगातार हरनान से बातचीत कर उनका हौसला बढ़ाती रहीं, ताकि वह पैनिक न हों।
सरकार पर उठे सवाल, मिली बड़ी राहत
इस भयानक भूकंप में अब तक 2,595 लोगों की जान जा चुकी है और हजारों लोग अभी भी लापता हैं। संकट की इस घड़ी में वेनेजुएला की सरकार को लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि लोगों का मानना है कि राहत कार्य ठीक से नहीं हुआ। इस बीच, देश की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज ने सोशल मीडिया पर इस रेस्क्यू की तारीफ करते हुए इसे इंसानियत की बड़ी जीत बताया और इंटरनेशनल टीमों का शुक्रिया अदा किया।
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