बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा- माल्या-SBI विवाद खत्म करें:इससे देश की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ रहा; ED से संपत्तियों का ब्योरा मांगा
बॉम्बे हाई कोर्ट ने भगोड़े कारोबारी विजय माल्या और बैंकों के बीच चल रहे कॉमर्शियल विवाद को अब खत्म करने की बात कही है। कोर्ट ने इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ED से जांच की मौजूदा स्थिति और अटैच की गई संपत्तियों का ब्योरा भी मांगा है। जस्टिस मिलिंद जाधव की सिंगल जज बेंच ने माल्या की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि अगर दोनों पक्ष इस विवाद को खत्म कर आगे नहीं बढ़ते हैं, तो इसका देश की अर्थव्यवस्था पर सीधा और नकारात्मक असर पड़ेगा। एक दशक से चल रहे विवाद का खत्म होना जरूरी हाईकोर्ट की बेंच ने कहा कि लगभग एक दशक से चल रहे इस मामले को अब एक तार्किक अंत यानी लॉजिकल कंक्लूजन तक पहुंचना चाहिए। 70 साल के विजय माल्या ने याचिका दाखिल कर संपत्तियों को बैंकों को सौंपने के आदेश को अनुचित बताया था। इस पर कोर्ट ने कहा कि कॉमर्शियल विवादों का समाधान अक्सर खुद विवादों के भीतर ही छिपा होता है। पक्षों को आपसी उलझन में रहने की बजाय व्यावहारिक समाधान यानी प्रैक्टिकल सॉल्यूशन की तरफ बढ़ना चाहिए। PMLA कोर्ट के आदेश को माल्या ने दी थी चुनौती साल 2020 में माल्या ने विशेष प्रीवेन्शन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट यानी PMLA अदालत के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की अगुआई वाले बैंकों के कंसोर्टियम को ED द्वारा अटैच की गई उसकी संपत्तियों का उपयोग करने की अनुमति दी गई थी। माल्या पर बंद हो चुकी किंगफिशर एयरलाइंस (KFA) के लिए कई बैंकों से लिए गए ₹9,000 करोड़ के लोन डिफॉल्ट का आरोप है। मार्च 2016 में देश छोड़कर भागा, 2019 में भगोड़ा घोषित विजय माल्या मार्च 2016 में यूके भाग गया था। इसके बाद साल 2019 में अधिकारियों ने भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम (FEOA) के तहत उसे भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित कर दिया था। कानून के तहत प्राधिकारियों को उसकी संपत्तियों को जब्त करने का अधिकार मिला है। भारत सरकार लगातार यूके से उसके प्रत्यर्पण की कोशिश कर रही है। भारत वापस आने तक राहत देने से कोर्ट का इनकार इससे पहले फरवरी में चीफ जस्टिस श्री चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम अनखड की बेंच ने माल्या की दो याचिकाओं पर सुनवाई की थी। इन याचिकाओं में FEOA के तहत खुद को भगोड़ा घोषित किए जाने के आदेश को चुनौती दी गई थी। 12 फरवरी की सुनवाई में कोर्ट ने साफ कहा था कि जब तक माल्या भारत लौटकर उसके क्षेत्राधिकार में सरेंडर नहीं करता, तब तक उसकी याचिका पर विचार नहीं किया जाएगा। वापसी पर अनिश्चितता, वकील ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का दिया हवाला 18 फरवरी को हुई अगली सुनवाई में माल्या ने कहा कि इंग्लैंड की अदालतों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के कारण वह फिलहाल यह नहीं बता सकता कि भारत कब लौटेगा। माल्या की तरफ से पेश सीनियर एडवोकेट अमित देसाई ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए आग्रह किया कि याचिकाकर्ता की गैर-मौजूदगी में भी संवैधानिक अदालतें रिट याचिकाओं पर फैसला सुना सकती हैं, इसलिए दोनों याचिकाओं पर अलग से सुनवाई की जाए। क्या है भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम (FEOA)? FEOA कानून उन आर्थिक अपराधियों पर नकेल कसने के लिए बनाया गया है जो भारतीय अदालतों की कार्रवाई और गिरफ्तारी से बचने के लिए देश छोड़कर भाग जाते हैं। इस कानून के तहत अदालतों को मामले की सुनवाई पूरी होने से पहले ही आरोपी की देश और विदेश में मौजूद संपत्तियों को अटैच यानी जब्त करने और उन्हें नीलाम/बेचकर बैंकों का बकाया वसूलने का अधिकार मिलता है। ये खबर भी पढ़ें… टाटा संस में चंद्रशेखरन की जगह ले सकते हैं नरेंद्रन: चेयरमैन की रेस में टाटा स्टील के MD सबसे आगे; सिलेक्शन कमेटी बनाने की प्रक्रिया शुरू टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के अचानक इस्तीफे के बाद नए उत्तराधिकारी की तलाश शुरू हो गई है। सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट ने आज 13 अगस्त को एक प्रस्ताव पास कर 5 सदस्यीय सिलेक्शन कमेटी गठित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस पद की रेस में टाटा स्टील के मैनेजिंग डायरेक्टर टीवी नरेंद्रन का नाम सबसे आगे है। नरेंद्रन 1988 से टाटा ग्रुप से जुड़े हुए हैं। उनका पूरा करियर टाटा स्टील में ही रहा है। पूरी खबर पढ़ें…
टाटा संस में चंद्रशेखरन की जगह ले सकते हैं नरेंद्रन:चेयरमैन की रेस में टाटा स्टील के MD सबसे आगे; 1988 से ग्रुप से जुड़े हैं
टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के इस्तीफे के ऐलान के बाद नए उत्तराधिकारी की तलाश शुरू हो गई है। सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट ने आज 13 अगस्त को एक प्रस्ताव पास कर 5 सदस्यीय सिलेक्शन कमेटी गठित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस पद की रेस में टाटा स्टील के मैनेजिंग डायरेक्टर टीवी नरेंद्रन का नाम सबसे आगे है। नरेंद्रन 1988 से टाटा ग्रुप से जुड़े हुए हैं। उनका पूरा करियर टाटा स्टील में ही रहा है। चेयरमैन चुनने के लिए फरवरी 2027 तक का समय चंद्रशेखरन ने भले ही इस्तीफा दे दिया हो लेकिन वे फरवरी 2027 तक टाटा संस के चेयरमैन पद पर बने रहेंगे। यानी वे अपना कार्यकाल पूरा करेंगे। इस वजह से टाटा संस के पास नया प्रमुख को चुनने और उनके स्मूथ ट्रांजैक्शन की योजना बनाने के लिए लगभग 6 महीने का वक्त है। 5 सदस्यीय कमेटी नए चेयरमैन का फैसला करेगी टाटा संस के नियमों के मुताबिक चेयरमैन के चयन के लिए 5 सदस्यों की एक खास कमेटी बनाई जाती है। नामों की स्क्रूटनी के बाद कमेटी उनका इंटरव्यू करती है। फिर टाटा संस बोर्ड को अंतिम नाम की सिफारिश की जाती है। नरेंद्रन का नाम चर्चा में आने की तीन वजह… नरेंद्रन की जिंदगी की 3 रोचक बातें 1. 40 की उम्र में सीखा ड्रम: टी.वी. नरेंद्रन ने 2024 में दिए एक इंटरव्यू में बताया कि 40 साल की उम्र में उन्हें लगा कि जिंदगी में एक चीज सीखना रह गई है, जो था ड्रम बजाना। उस समय वे सिंगापुर में काम कर रहे थे। उन्होंने वहीं ड्रम सीखने की क्लास जॉइन की और करीब तीन साल तक ड्रम सीखा। 2. दौड़ने वाले CEO के नाम से भी पहचान: नरेंद्रन की एक खास पहचान उनकी दौड़ने की आदत से भी जुड़ी है। वे सुबह जल्दी उठकर करीब 9 किमी दौड़ते हैं। उनके लिए दौड़ना सिर्फ फिट रहने का तरीका नहीं, बल्कि खुद के साथ समय बिताने और दिमाग को तरोताजा रखने का जरिया भी है। उन्हें अकेले दौड़ना पसंद है, क्योंकि इस दौरान उन्हें सोचने और अपने लिए समय मिलता है। 3. नाना कोचीन राज्य के पहले प्रधानमंत्री थे: टी.वी. नरेंद्रन के नाना ई. इक्कंडा वॉरियर थे। नरेंद्रन ने एक इंटरव्यू में बताया कि उनके नाना तत्कालीन कोचीन राज्य के पहले प्रधानमंत्री और स्वतंत्रता सेनानी थे। बचपन में उनका नरेंद्रन पर काफी असर रहा। उन्होंने नरेंद्रन को शतरंज सिखाया, स्वतंत्रता आंदोलन के बारे में बताया और उनके सोचने और विचार बनाने के तरीके को प्रभावित किया। चयन प्रक्रिया में कानूनी अड़चन: चैरिटी कमिश्नर के आदेश से फंसा पेंच नए चेयरमैन के चयन की प्रक्रिया में प्रशासनिक और कानूनी अड़चन है। महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के एक निर्देश के कारण सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) फिलहाल अपने ट्रस्टियों की बैठक आयोजित नहीं कर पा रहा है। इस वजह से कमेटी में ट्रस्ट की ओर से 3 सदस्यों को नामित करने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, जो चंद्रशेखरन के उत्तराधिकारी के चयन में एक नया पेंच बन गया है। नोएल टाटा क्यों नहीं बन सकते अंतरिम चेयरमैन? 2016 में जब साइरस मिस्त्री को पद से हटाया गया था, तब रतन टाटा ने 78 साल की उम्र में अंतरिम चेयरमैन की जिम्मेदारी संभाली थी। इसके बाद चंद्रशेखरन को चेयरमैन बनाया गया था। हालांकि, नोएल टाटा इस बार वह रास्ता नहीं अपना सकते। साल 2022 में टाटा संस के नियमों में संशोधन किया गया था, जिसके तहत टाटा ट्रस्ट्स का चेयरमैन एक साथ टाटा संस का चेयरमैन नहीं बन सकता। रतन टाटा ही अंतिम व्यक्ति थे जिन्होंने दोनों पदों को एक साथ संभाला था। नोएल टाटा का क्या रोल रहेगा? नोएल टाटा इस साल नवंबर में 70 साल के हो रहे हैं। टाटा ग्रुप की नीति के अनुसार नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स के लिए रिटायरमेंट की उम्र 70 साल तय है। इसके तहत वे ग्रुप की अन्य कंपनियों के बोर्ड से रिटायर हो जाएंगे। हालांकि, वे टाटा संस के बोर्ड में डायरेक्टर बने रहेंगे, क्योंकि वे ट्रस्ट के नॉमिनी हैं। ट्रस्ट नॉमिनी पर रिटायरमेंट उम्र की सीमा लागू नहीं होती। नॉलेज पार्ट: जानें क्या है टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स का स्ट्रक्चर -------------------------------------------------- बिजनेस से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… मुथूट फिनकॉर्प 3 हजार करोड़ का IPO लाएगी:सेबी के पास DRHP जमा कराया, पूरा पैसा नए शेयर जारी करके जुटाया जाएगा मुथूट फिनकॉर्प ₹3,000 करोड़ का IPO ला रही है। इसके लिए कंपनी ने सेबी के पास DRHP दाखिल किया है। आईपीओ से मिले पैसों का इस्तेमाल भविष्य की पूंजी जरूरतें पूरी करने, आगे कर्ज देने और कारोबार के विस्तार में होगा। पूरी खबर पढ़ें…
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