जेलेंस्की के गृह शहर में रूस का भयानक हमला: लक्ष्मी मित्तल के अर्सेलर मित्तल स्टील प्लांट पर स्ट्राइक; 2 की मौत
Lakshmi Mittal steel plant Attack: रूस की तरफ से यूक्रेन के क्रिवी रीह शहर पर एक भीषण मिसाइल और ड्रोन हमला किया गया है। यह शहर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की का गृह नगर भी है। इस बड़े हमले की चपेट में भारतीय मूल के अरबपति लक्ष्मी मित्तल के स्वामित्व वाला 'अर्सेलर मित्तल' स्टील प्लांट आ गया है, जिससे वहां भारी तबाही मची है। यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, इस घातक हमले में दो लोगों की मौत हो गई है और 14 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
स्टील प्लांट के उत्पादन पर असर और नुकसान
अर्सेलर मित्तल क्रिवी रीह कंपनी की ओर से यह पुष्टि की गई है कि इस रूसी स्ट्राइक में उनकी बिजली उत्पादन और ब्लास्ट फर्नेस इकाइयों से जुड़े बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। इस वजह से कंपनी को अपने उत्पादन कार्यों को आंशिक रूप से रोकना पड़ा है। आपको बता दें कि यह प्लांट यूक्रेन के सबसे बड़े इस्पात उत्पादकों में से एक है और दिग्गज कारोबारी लक्ष्मी मित्तल द्वारा स्थापित वैश्विक समूह 'अर्सेलर मित्तल' का हिस्सा है, जिसकी इस यूक्रेनी कारोबार में 95.1 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
रूस-यूक्रेन संघर्ष और अन्य क्षेत्र प्रभावित
क्रिवी रीह पर हुआ यह हमला रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे व्यापक हवाई हमलों का हिस्सा है। राष्ट्रपति जेलेंस्की ने बताया कि इस खूनी संघर्ष में न केवल क्रिवी रीह बल्कि राजधानी कीव, जापोरिज्झिया, सूमी और अन्य इलाके भी निशाना बने हैं। कीव में पोचाइना स्थित एक लोकप्रिय ओपन-एयर बुक मार्केट पर भी हमला हुआ, जहां आग लगने से कई स्टॉल पूरी तरह जलकर खाक हो गए।
इसके अलावा, युद्ध के इस बढ़ते दायरे के बीच रोमानियाई हवाई क्षेत्र में एक ड्रोन के घुसने पर नाटो मिशन के तहत तैनात स्पेनिश एफ-18 फाइटर जेट द्वारा उसे मार गिराए जाने की भी खबर है।
युद्ध के साये में प्लांट का इतिहास
क्रिवी रीह का यह औद्योगिक संयंत्र दशकों से यूक्रेन के स्टील उद्योग का एक अहम स्तंभ रहा है। साल 2022 में रूस के पूर्ण पैमाने पर आक्रमण शुरू होने के बाद से ही इस प्लांट के संचालन को सुरक्षा कारणों और बार-बार होने वाले बुनियादी ढांचे के नुकसान के चलते कई बार निलंबित और बहाल करना पड़ा है। वर्तमान में अर्सेलर मित्तल के अधिकारियों के सामने पहली प्राथमिकता नुकसान का आकलन करना और प्रभावित उत्पादन सुविधाओं को जल्द से जल्द बहाल करना है, जबकि सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे घटनाक्रम की जांच में जुटी हुई हैं।
पाक राष्ट्रपति जरदारी बोले- हम यहां हिंदुओं को झेलते हैं:जावेद अख्तर भड़के, कहा- खुद भुट्टो से शादी कर सुर्खियों में आए; ट्रोलर्स को भी फटकारा
भारतीय डायलॉग राइटर और गीतकार जावेद अख्तर ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के उस बयान पर भड़क गए, जिसमें उन्होंने कहा कि वह पाकिस्तान में हिंदुओं को झेलते हैं। जावेद अख्तर ने उनकी आलोचना करते हुए उन्हें संवेदनहीन कहा है। जब कुछ लोग जावेद अख्तर के बयान की निंदा करने लगे, तो उन्होंने एक-एक कर सबको फटकार लगाई है। जरदारी बोले- हम हिंदुओं को झेलते हैं, हम मुस्लिम जरदारी ने पाकिस्तान में हिंदुओं की स्थिति पर बात करते हुए भारत के हिंदुओं से उनकी तुलना की थी। जरदारी ने कहा, “भारतीयों का नजरिया अलग है। उनके दिमाग में अपना एजेंडा है। वे अखंड भारत में विश्वास करते हैं। लेकिन बीच में बहुत कुछ ऐसा है, जिसे वे भूल चुके हैं।” उन्होंने आगे कहा, “हम मुसलमान हैं और वे नहीं हैं। लेकिन हम ऐसे सोच वाले मुसलमान हैं, जो पाकिस्तान में 3-4 फीसदी हिंदू आबादी को सहन करते हैं। वे उतने ही आजाद और अच्छे हैं, जितने कहीं और थे। वे उनके साथ रहने के बजाय हमारे साथ रहना पसंद करेंगे।” इस बयान पर जावेद अख्तर ने ऑफिशियल सोशल मीडिया से लिखा है, “पाकिस्तान के मिस्टर जरदारी, जो बेनजीर भुट्टो से शादी करने के बाद सुर्खियों में आए थे, कहते हैं कि उनके देश में 3-4 प्रतिशत हिंदू आबादी को वे बर्दाश्त करते हैं। मैं समझता हूं, मिस्टर जरदारी, आप हमेशा उन सभी चीजों के प्रति असंवेदनशील रहे हैं, जिनका प्रतिशत 10 प्रतिशत से भी कम है।” जावेद अख्तर ने दबे शब्दों में किया ट्रोल जावेद अख्तर ने अपने बयान में 10 प्रतिशत का जिक्र इसलिए किया, क्योंकि जरदारी को मिस्टर टेन पर्सेंट कहा जाता है। पूर्व पाकिस्तानी प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो के पति रहे जरदारी को 1980 के दशक के आखिर और 1990 के दशक की शुरुआत में “मिस्टर टेन परसेंट” उपनाम मिला था। उन पर सरकारी परियोजनाओं और कारोबारी सौदों के सिलसिले में 10 फीसदी कमीशन मांगने के आरोप लगे थे। जरदारी ने इन आरोपों से इनकार किया था। 1990 में तत्कालीन राष्ट्रपति गुलाम इशाक खान द्वारा भुट्टो सरकार को बर्खास्त किए जाने के बाद यह उपनाम और ज्यादा चर्चित हुआ। जावेद अख्तर ने ट्रोलर्स को भी लगाई फटकार एक तरफ जहां जावेद अख्तर के बयान की सराहना हो रही है, वहीं एक पाकिस्तानी यूजर ने सवाल उठाते हुए कहा, “क्या आपने कभी भारत में अल्पसंख्यकों के लिए अपनी आवाज उठाई है? नहीं। कड़वी सच्चाई यह है कि भारत में जिंदा रहने के लिए हर गैर-हिंदू को हिंदू अभिजात वर्ग की चापलूसी और उन्हें खुश करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। उनके खिलाफ तमाम आरोपों के बावजूद जरदारी एक देश के राष्ट्रपति बन गए। फिर भी आप भारत में और हर जगह एक शून्य ही हैं और शून्य ही बने रहेंगे, चाहे आप उनके तलवे कितनी भी चाटते रहें। आप बेहद शर्मनाक और घटिया इंसान हैं। जावेद अख्तर ने अपने अंदाज में इसका भी जवाब दिया। उन्होंने लिखा, “आपका पहला सवाल मुझे बताता है कि आप मेरे बारे में कितना कम जानते हैं। और आपके आखिरी शब्द बताते हैं कि आपकी ‘क्लास’ क्या है।” जावेद अख्तर ने पहले भी दिए पाक विरोधी बयान नरक और पाकिस्तान में से नरक चुनूंगा: 17 मई 2025 को मुंबई में शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत की किताब 'नरकातला स्वर्ग' के विमोचन पर जावेद अख्तर ने पाकिस्तान को नरक से बदतर बताते हुए तीखा बयान दिया था। उन्होंने कहा था- 'अगर पाकिस्तान और नरक में से चुनना हो तो मैं नरक चुनूंगा।' भारत का विभाजन गलत था, पाकिस्तान हिंदुस्तान से ही निकला: 2023 में लाहौर के फैज फेस्टिवल में जावेद अख्तर ने स्पष्ट कहा कि भारत का विभाजन ऐतिहासिक भूल थी। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान हिंदुस्तान का हिस्सा था, जो 1947 में दो देशों में बंट गया। अख्तर ने जोर देकर कहा कि दोनों देशों के लोग मूल रूप से एक ही सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े हैं और विभाजन ने अनावश्यक दुश्मनी पैदा की। इस बयान पर पाकिस्तानी दर्शकों ने तालियां बजाईं, लेकिन भारत-पाक मीडिया में विवाद छा गया। पाकिस्तान में सेकुलरिज्म लगभग मर चुका है: भारत-पाक संबंधों पर एक चर्चा में जावेद अख्तर ने पाकिस्तान की सामाजिक स्थिति पर तीखा प्रहार किया। उनका मानना था कि वहां धर्मनिरपेक्षता नाममात्र को रह गई है और कट्टरवाद हावी हो चुका है। पाकिस्तान के कुछ बुद्धिजीवियों ने इसे ओवर-जनरलाइजेशन कहा, लेकिन भारत में ये बयान साहित्यिक सर्कल तक सीमित रहा। जावेद ने उदाहरण देते हुए कहा कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की हालत देखकर साफ है कि सेक्युलरिज्म खतरे में है।
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