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सुप्रीम कोर्ट बोला- पैकेज्ड फूड पर वॉर्निंग लेबल लगाओ:ज्यादा चीनी-नमक और फैट की जानकारी दो, सरकार ऐसा नहीं करती तो हम आदेश देंगे

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पैकेज्ड फूड प्रोडक्ट्स के वॉर्निंग लेबल पर केंद्र सरकार और फूड सेफ्टी अथॉरिटी (FSSAI) को आखिरी चेतावनी दी है। कोर्ट ने कहा कि नमकीन, बिस्किट और चिप्स के पैकेट पर ज्यादा चीनी-नमक और फैट की चेतावनी देने वाले वॉर्निंग लेबल लगाने पर अगर सरकार फैसला नहीं ले पा रही है तो हम आदेश जारी करेंगे। अदालत ने केंद्र सरकार से कहा- पहले भी आपको सख्त न्यूट्रिशन वॉर्निंग को लेकर निर्देश दिए थे फिर आनाकानी क्यों । हमने जो कहा है, आपको करना चाहिए, क्या आप पर कॉर्पोरेट घरानों का दबाव है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम जनता के हित में काम कर रहे हैं, अपने लिए नहीं। आपने अब तक क्या किया। 6 महीने पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने सरकार और FSSAI से कहा था कि पैकेज्ड फूड पर वॉर्निंग लेबल लगाने पर विचार किया जाए। इस पूरे मामले को 8 सवाल-जवाब में समझें… 1. सवाल: सुप्रीम कोर्ट ने पैकेज्ड फूड वॉर्निंग लेबल को लेकर केंद्र सरकार से क्या कहा? जवाब: सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने कहा कि यह मामला नागरिकों और विशेषकर बढ़ते बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ा है। इसलिए इस पर कोई भी निर्णय कॉरपोरेट कंपनियों के दबाव में आकर नहीं लिया जाना चाहिए। 2. सवाल: कोर्ट में यह सुनवाई क्यों हुई और किसने याचिका दाखिल की थी? जवाब: यह सुनवाई एक जनहित याचिका (PIL) पर हुई। याचिकाकर्ता ने कोर्ट से कहा कि FSSAI की 7 मार्च की बैठक में लिए गए फैसले सुप्रीम कोर्ट के पिछले निर्देशों के विपरीत थे। याचिकाकर्ता ने बताया कि FSSAI कंपनियों के विरोध को आधार बना रहा है, जबकि सिविल सोसाइटी के उन प्रमाणों को नजरअंदाज किया जा रहा है जो स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए वॉर्निंग लेबल के पक्ष में हैं। 3. सवाल: FSSAI और कंपनियों का इस वॉर्निंग लेबल पर क्या कहना है? जवाब: FSSAI ने कोर्ट में बताया कि फूड इंडस्ट्री पैकेट के सामने वाले भाग पर वॉर्निंग लेबल लगाने के खिलाफ है। इसके विकल्प के रूप में FSSAI ने एक न्यूट्रिशन टेबल में एडेड शुगर, सैचुरेटेड फैट और दिन में कितना नमक लेना चाहिए यह दर्शाने का सुझाव दिया है। कंपनियों का मानना है कि पैकेट के आगे लाल चेतावनी वाले निशान से उनके व्यापार पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। 4. सवाल: सरकार ने अपनी दलील में भारतीय खान-पान और नमकीन का क्या तर्क दिया? जवाब: केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) ब्रिजेंदर चाहर ने तर्क दिया कि पारंपरिक भारतीय खाद्य पदार्थों जैसे- नमकीन, भुजिया और स्नैक्स में स्वाभाविक रूप से नमक और वसा (फैट) का स्तर अधिक होता है। यदि विकसित देशों के मानक लागू किए गए तो कई पारंपरिक भारतीय खाद्य पदार्थों पर 'रेड वॉर्निंग मार्क' लग जाएगा। 5. सवाल: सरकार के 'भारतीय नमकीन' और विकसित देशों वाले तर्क पर कोर्ट ने क्या कहा? जवाब: अदालत ने सरकार के इस तर्क को खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया- ‘क्या भारत को हमेशा एक अविकसित देश ही बने रहना चाहिए?’ कोर्ट ने पूछा कि क्या सरकार अपने नागरिकों और बच्चों का स्वास्थ्य सुनिश्चित नहीं करना चाहती? बेंच ने कहा कि निर्माता इसे पसंद न करें, लेकिन उपभोक्ता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि वह क्या खा रहा है। 6. सवाल: क्या इस तरह के वॉर्निंग लेबल लगने से पैक्ड फूड की बिक्री पर रोक लग जाएगी? जवाब: नहीं, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वॉर्निंग लेबल का उद्देश्य बिक्री रोकना नहीं, बल्कि ग्राहक को जागरूक करना है। बेंच ने कहा कि निर्माता सोच सकते हैं कि इससे उनका बिजनेस प्रभावित होगा, लेकिन चेतावनी देखने के बाद अंतिम निर्णय ग्राहक का होगा कि वह उत्पाद खरीदना चाहता है या नहीं। इस विषय में निर्माताओं की भूमिका निर्णायक नहीं हो सकती। 7. सवाल: सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सरकार को कितना समय दिया है? जवाब: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और FSSAI को वॉर्निंग लेबल प्रस्ताव का पालन करने के लिए 2 सप्ताह का समय दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय में कदम नहीं उठाए गए, तो अगली सुनवाई पर अदालत अपना फैसला सुनाएगी। 8. सवाल: इस फैसले का आम उपभोक्ताओं और पैक्ड फूड इंडस्ट्री पर क्या असर पड़ेगा? जवाब: यदि 'फ्रंट-ऑफ-पैक वॉर्निंग लेबल' लागू होता है, तो उपभोक्ताओं को खरीदारी करते समय ही पैकेट के सामने स्पष्ट दिख जाएगा कि उत्पाद में चीनी, नमक या फैट की मात्रा तय सीमा से अधिक तो नहीं है। इससे लोग खान-पान के प्रति अधिक जागरूक होंगे और कंपनियों को भी अपने प्रोडक्ट्स के पोषण स्तर में सुधार करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। फ्रंट-ऑफ-पैक वॉर्निंग लेबल क्या होता है? फ्रंट-ऑफ-पैक वॉर्निंग लेबल यानी FoPL फूड आइटम्स के पैकेट के आगे वाले हिस्से पर लगने वाला एक सरल विजुअल सिंबल या रंगीन लेबल होता है। इसका उद्देश्य आम ग्राहक को आसानी से यह समझाना होता है कि प्रोडक्ट में साल्ट, शुगर या फैट का स्तर सुरक्षित सीमा से ज्यादा है। रीडर टिप्स: पैक्ड स्नैक्स, बिस्किट या नमकीन खरीदते समय केवल 'एमआरपी' और 'एक्सपायरी डेट' न देखें। न्यूट्रिशन वैल्यू में सोडियम (नमक) और 'एडेड शुगर' की मात्रा पर ध्यान दें। यदि प्रतिदिन की आवश्यक सीमा से यह बहुत ज्यादा है, तो इसका सीमित मात्रा में ही सेवन करें। दुनिया के किन देशों में पहले से लागू है फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग ये खबर भी पढ़ें… पान मसाला की प्लास्टिक पैकिंग पर बैन: अब सिर्फ पेपर, टिन या कांच के जार में बिकेगा गुटखा; FSSAI ने जारी किए नए नियम भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने पान मसाला की पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक को बैन कर दिया है। नए नियमों के तहत कंपनियां अब सिर्फ पेपर, टिन या ग्लास कंटेनर में ही पान मसाला पैक कर बेच सकेंगी। कंपनियों को नए ईको-फ्रेंडली विकल्पों की तरफ जाना होगा। FSSAI ने फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड पैकेजिंग अमेंडमेंट रेगुलेशन 2026 को नोटिफाई कर दिया है। ये नए नियम तुरंत लागू हो गए हैं। पूरी खबर पढ़ें…

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महंगे रोबोट, धीमा काम; इंसान अब भी मशीनों से आगे:जो काम 9,500 में हो सकता था, उसके लिए लगाए 9.5 करोड़, पर कारगर नहीं

कार फैक्ट्री में इंसानों जैसे रोबोट्स (ह्यूमनॉइड) पर अरबों का दांव लगाने के बावजूद इनकी उत्पादकता इंसानों से काफी कम और सुस्त बनी हुई है। साउथ कैरोलाइना के बीएमडब्ल्यू और जॉर्जिया के ह्युंडई प्लांट में एआई रोबोट्स ट्रॉली खींचने और पुर्जे उठाने का काम कर रहे हैं। बीएमडब्ल्यू के लॉजिस्टिक्स वाइस प्रेसिडेंट उलरिच विएलैंड ने माना कि रोबोट्स इंसानों से धीमे हैं। एमआईटी के बेन आर्मस्ट्रांग के मुताबिक, पुर्जे छांटने जैसे साधारण काम के लिए ह्यूमनॉइड ‘100 डॉलर (9,500) की समस्या का 10 लाख डॉलर (9.5 करोड़) का महंगा हल’ हैं। कंपनियां बिना कारखानों में बदलाव किए ऑटोमेशन बढ़ाने के लिए इन पर दांव लगा रही हैं, क्योंकि ये लंच ब्रेक, यूनियन या हेल्थ इंश्योरेंस नहीं मांगते। हालांकि प्रो. सुसान हेल्पर और प्रो. लॉरेंस एल्स के अनुसार देखा-देखी महंगे रोबोट्स लाने से काम सुस्त होगा और इंसानों के पास केवल कम सैलरी वाली बोरिंग नौकरियां बचेंगी। चीन में मजबूत कम्पोनेंट सप्लाई चेन से रोबोट सस्ते बनते हैं, जिसे देखते हुए अमेरिकी संचार नियामक (एफसीसी) ने इनके आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है। टेस्ला के इलॉन मस्क ने ‘ऑप्टिमस’ रोबोट के उत्पादन के लिए कैलिफोर्निया में मॉडल एस और एक्स कारों का उत्पादन रोक दिया। लॉस एंजिलिस स्थित टेस्ला के रेस्टोरेंट में इस रोबोट का इस्तेमाल करने के बाद मस्क ने माना कि इंसानी हाथ की निपुणता और संवेदनशीलता की नकल बनाना सबसे मुश्किल चुनौती है। इसी वजह से रोबोट्स काम करने की गति और उत्पादकता में इंसानों से पिछड़ रहे हैं। इसके बावजूद कंपनियां कारखानों में रोबोट्स का दायरा लगातार बढ़ा रही हैं। ह्युंडई के एलाबेल प्लांट में ऑटोमैटिक गाड़ियाँ, रोबोटिक कुत्ते और चपटे रोबोट्स इयोनिक 5 और 9 कारों को टेस्टिंग स्टेशनों तक ले जाते हैं। असेंबली प्रबंधक जेरी रोच के अनुसार ये खंभों से नहीं टकराते। हुंडई ने रोबोटिक्स कंपनी बोस्टन डायनामिक्स को खरीद लिया है। वहीं बीएमडब्ल्यू ‘फिगर एआई’ और मर्सिडीज ‘एपट्रोनिक’ के रोबोट्स इस्तेमाल कर रही हैं। ह्युंडई के चीफ एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर ब्रेंट स्टब्स दावा है कि रोबोट्स आने से इंसानों को उनकी देखभाल और मेंटेनेंस में बेहतर नौकरियां मिलेंगी। हालांकि अमेरिकी यूनाइटेड ऑटोमोटिव वर्कर्स यूनियन (यूएडब्ल्यू) के प्रेसिडेंट शॉन फेन ने इसे इंसानी नौकरियों के लिए गंभीर खतरा बताया है। इसी विरोध में दक्षिण कोरिया में हुंडई कर्मचारी हड़ताल पर चले गए हैं। यू टर्न - फोर्ड ने 350 अनुभवी इंजीनियर वापस बुलाए एआई की गलतियों और सुस्त काम से तंग आकर फोर्ड ने 350 अनुभवी और रिटायर्ड इंजीनियरों को वापस बुला लिया। इनकी मदद से क्वालिटी सुधरी। इसी वजह से फोर्ड को जेडी पावर स्टडी में पहला स्थान मिला। वहीं जनरल मोटर्स के स्टर्लिंग एंडरसन के मुताबिक पैरों वाले महंगे रोबोट्स किसी काम के नहीं हैं। इनकी जगह पहियों वाले सस्ते ‘कोबॉट्स’ ज्यादा असरदार हैं। ये रोबोट इंसानों को नौकरी से हटाए बिना उनका काम आसान बनाते हैं।

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दिग्वेश राठी नहीं सुधरेंगे! प्रियांश आर्य को आउट करने के बाद दिया नोट बुक सैंड ऑफ, क्लेश होते-होते बचा

दिल्ली प्रीमियर लीग 2026 में प्रियांश आर्य और दिग्वेश राठी के बीच बवाल होते-होते बच गया. आउट दिल्ली वारियर्स के लिए खेलने वाले प्रियांश आर्य को दिग्वेश ने जब आउट किया तो उन्होंने नोटबुक सैंड ऑफ देकर जश्न मनाया. हालांकि, अच्छी बात ये रही की प्रियांश ने इस पर रिएक्शन नहीं किया, जिसके कारण मामला आगे नहीं बढ़ा. Mon, 17 Aug 2026 07:38:45 +0530

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