बारिश के मौसम में अक्सर जूते गीले हो जाते हैं। ऐसे में उनमें से स्मेल आने लगती है। धूप की कमी और हवा में ज्यादा नमी की वजह से जूते जल्दी सूख नहीं पाते। इससे उनके अंदर बैक्टीरिया और फंगस पनपने लगते हैं। नतीजतन, जूतों में स्मेल के साथ पैरों में खुजली, रैशेज और फंगल इन्फेक्शन का रिस्क बढ़ जाता है। लगातार गीले या नम जूते पहनने से यह समस्या और गंभीर हो सकती है। ऐसे में मानसून में जूतों की रेगुलर सफाई, उन्हें पूरी तरह सुखाना और सही तरीके से स्टोर करना जरूरी है। इसलिए ‘जरूरत की खबर’ में बात करेंगे कि बारिश में जूतों को लेकर क्या सावधानियां बरतनी चाहिए। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट: डॉ. डिंपल कोठारी, कंसल्टेंट, डर्मेटोलॉजी, नारायणा हॉस्पिटल, जयपुर सवाल- मानसून में जूतों से स्मेल क्यों आती है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- नमी जूतों को कैसे प्रभावित करती है? जवाब- नमी की वजह से जूते का इनसोल और कपड़ा खराब होने लगता है। लंबे समय तक गीले रहने पर जूते की सिलाई और गोंद भी कमजोर पड़ सकती है। इससे जूते की लाइफ कम हो जाती है। सवाल- किस तरह के जूतों में फंगस का रिस्क ज्यादा होता है? जवाब- जिन जूतों में एयर-फ्लो कम होता है, उनमें फंगस का रिस्क ज्यादा रहता है, जैसेकि कैनवास, लेदर और टाइट फिटेड शूज। ग्राफिक में ऐसे जूतों की लिस्ट देखिए- सवाल- गीले जूते पहनने से कौन-सा इन्फेक्शन हो सकता है? जवाब- इससे दाद, खुजली और लाल चकत्ते जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अगर स्किन पर पहले से कट या घाव हो तो बैक्टीरियल इन्फेक्शन का रिस्क बढ़ सकता है। ग्राफिक में देखिए- सवाल- किन लोगों को मानसून में जूतों से इन्फेक्शन का ज्यादा रिस्क होता है? जवाब- मानसून में गीले जूते और मोजे पहनने से किसी को भी इन्फेक्शन हो सकता है। हालांकि, कुछ लोगों में इसका रिस्क ज्यादा होता है। ग्राफिक में देखिए- सवाल- जूते गीले हो जाएं तो उन्हें सही तरीके से कैसे सुखाएं? जवाब- पॉइंटर्स में देखिए- सवाल- जूतों की स्मेल कैसे दूर करें? जवाब- इसके लिए कुछ आसान तरीके अपनाए जा सकते हैं, जैसेकि सवाल- मानसून में पैरों का हाइजीन (फुट केयर) कैसे मेंटेन करें? जवाब- इसे पॉइंटर्स में देखिए- सवाल- क्या वॉशिंग मशीन में जूते धोना सही है? जवाब- यह जूतों के मैटेरियल पर निर्भर करता है। कैनवास और कुछ स्पोर्ट्स शूज जेंटल मोड में धोए जा सकते हैं। वहीं लेदर और सिंथेटिक जूते मशीन में धोना सही नहीं है। इससे मैटेरियल खराब हो सकता है। सवाल- लेदर, स्पोर्ट्स और कैनवास जूतों की सफाई का सही तरीका क्या है? जवाब- मैटेरियल के हिसाब से तरीका बदलता है। पॉइंटर्स में देखिए- लेदर जूते स्पोर्ट्स शूज कैनवास शूज सवाल- मानसून में किस तरह के जूते पहनना सबसे बेहतर है? जवाब- ऐसे जूते चुनें, जो जल्दी सूखें और नमी न रोकें, जैसेकि- …………………………………. ये खबर भी पढ़ें… जरूरत की खबर- बारिश में कपड़ों से आती स्मेल:हो सकती है स्किन एलर्जी, एक्सपर्ट से जानें- बैड स्मेल कैसे भगाएं, कपड़े कैसे रखें फ्रेश बारिश के मौसम में कपड़े ठीक से नहीं सूखते हैं। धूप की कमी और हवा में ज्यादा नमी की वजह से कपड़ों से अजीब स्मेल आने लगती है। कई बार अलमारी में रखे कपड़ों से भी सीलन की स्मेल आती है। पूरी खबर पढ़ें…
Continue reading on the app
अपनी आजादी का जश्न मना रहे बलूचिस्तानियों पर पाकिस्तान ने एयर स्ट्राइक कर दी। इसके जवाब में बलूच लड़ाकों ने बंदूकें उठा लीं और पाकिस्तानी सेना पर कई जगह ताबड़तोड़ हमले शुरू कर दिए। देखते ही देखते सोराब और ग्वादर से लेकर चागाई, खुजदार, वाध, मंगुचर और झाओ तक हिंसा फैल गई और दोनों पक्षों के बीच जबरदस्त संघर्ष छिड़ गया। पाकिस्तान की हवाई कार्रवाई में महिलाओं और बच्चों समेत कम से कम 21 नागरिकों के मारे जाने की खबर है, जबकि जवाबी हमलों में बलूच विद्रोहियों ने पुलिस और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इस तरह बलूचिस्तान एक बार फिर पाकिस्तान की सैन्य ताकत और बलूचों की आजादी की लड़ाई के बीच सीधे टकराव का मैदान बन गया है।
स्थानीय लोगों और कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पाकिस्तानी विमानों ने अलग-थलग आतंकी ठिकानों की बजाय आबादी वाले इलाकों को निशाना बनाया। हमलों के बाद सोराब और ग्वादर में विरोध प्रदर्शन हुए और लोगों ने सैन्य कार्रवाई के खिलाफ आवाज उठाते हुए जवाबदेही की मांग की। हम आपको बता दें कि बलूचों को जबरन गायब कर देना, सुरक्षा अभियानों के नाम पर बलूचों से बदसलूकी, बलूच महिलाओं के शोषण, उनकी राजनीतिक अभिव्यक्ति पर पाबंदियों और गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों ने पाकिस्तान के खिलाफ स्थानीय असंतोष को दशकों से लगातार गहरा किया है।
देखा जाये तो बलूचिस्तान का संकट अचानक पैदा हुआ कोई सुरक्षा संकट नहीं है। पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत प्राकृतिक संसाधनों जैसे गैस, खनिज, ऊर्जा और रणनीतिक समुद्री क्षेत्र से बेहद समृद्ध है, लेकिन स्थानीय आबादी लंबे समय से खुद को विकास और संसाधनों के लाभ से वंचित मानती रही है। बलूच राष्ट्रवादियों का आरोप है कि इस प्राकृतिक संपदा का फायदा स्थानीय लोगों की बजाय पाकिस्तान के सत्ता प्रतिष्ठान को मिलता है। साथ ही वह पंजाबी प्रभुत्व वाले संघीय ढांचे पर राजनीतिक और जातीय भेदभाव का आरोप लगाते हैं।
इसी असंतोष ने आत्मनिर्णय की उस लंबी लड़ाई को जन्म दिया, जिसने बलूचिस्तान को पाकिस्तान के सबसे चुनौतीपूर्ण इलाकों में बदल दिया है। साथ ही बलूच राष्ट्रवादियों का कहना है कि 1947 में ब्रिटिश सत्ता समाप्त होने के समय कलात खानत ने अपनी संप्रभुता का दावा किया था। 11 अगस्त इसी ऐतिहासिक घटना की याद में बलूच राष्ट्रवादियों के लिए प्रतीकात्मक स्वतंत्रता दिवस है। उनका दावा है कि मार्च 1948 में पाकिस्तान में विलय का फैसला स्वतंत्र इच्छा से नहीं, बल्कि दबाव में कराया गया। हालांकि पाकिस्तान इस दावे को स्वीकार नहीं करता और 14 अगस्त को ही बलूचिस्तान समेत पूरे देश का स्वतंत्रता दिवस मानता है। दूसरी ओर, इस बार 11 अगस्त का संदेश केवल प्रतीकात्मक नहीं रहा। बलूच राष्ट्रवादियों ने इसे अपनी राजनीतिक पहचान और स्वतंत्र अस्तित्व की घोषणा के रूप में पेश किया। सोशल मीडिया पर कुछ बलूच समर्थकों ने दावा किया कि भविष्य में अलग ‘रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान’ के लिए पासपोर्ट, मुद्रा और दूतावास जैसी संस्थाओं की तैयारी की जा रही है।
उधर, पाकिस्तान की एयर स्ट्राइक के बाद हालात और विस्फोटक हो गए। बलूच लिबरेशन आर्मी यानी BLA ने इसके समानांतर कई जिलों में समन्वित हमले किए। चागाई में आधी रात को पुलिस स्टेशन पर बम हमला कर उसे नष्ट किए जाने और तीन सुरक्षा कर्मियों के मारे जाने की खबर है। यखमाच में वाणिज्यिक वाहनों पर घात लगाकर हमला और एक ट्रक हाईजैक किए जाने की सूचना सामने आई। खुजदार RCD हाईवे पर सुरक्षा काफिले और बख्तरबंद वाहन को निशाना बनाए जाने, वाध में सैन्य वाहनों पर घात लगाकर हमला करने, मंगुचर बाजार में सुरक्षा चौकी पर विस्फोट और भारी गोलीबारी तथा झाओ में पाकिस्तानी सैन्य शिविर पर रात में हमले की रिपोर्ट है।
साथ ही BLA ने इस महीने अलग-अलग हमलों में कम से कम 32 पाकिस्तानी सैनिकों को मारने का दावा भी किया है। दूसरी ओर पाकिस्तान का कहना है कि सुरक्षा बलों ने बलूचिस्तान में मुठभेड़ों के दौरान 10 उग्रवादियों को मार गिराया। एक कार बम के समय से पहले फटने की घटना में आठ आतंकियों और पास के घर में मौजूद तीन लोगों समेत 11 लोगों के मारे जाने की बात भी पाकिस्तानी अधिकारियों ने कही है।
देखा जाये तो इन घटनाओं को अलग-अलग हमलों के रूप में देखना बड़ी तस्वीर को नजरअंदाज करना होगा। बलूचिस्तान में अब एक खतरनाक चक्र बनता दिखाई दे रहा है। पाकिस्तानी सैन्य कार्रवाई, नागरिकों में आक्रोश, बलूच विद्रोहियों की जवाबी हिंसा और फिर और कठोर सैन्य अभियान। यही चक्र इस संघर्ष को लगातार गहरा कर रहा है।
बलूचिस्तानियों की आजादी की लड़ाई की ‘सफलता’ को फिलहाल पाकिस्तान से वास्तविक राजनीतिक स्वतंत्रता के रूप में देखना जल्दबाजी होगी। लेकिन इतना स्पष्ट है कि दशकों के दमन, सैन्य अभियानों और राजनीतिक असंतोष के बावजूद स्वतंत्रता की मांग खत्म नहीं हुई। बल्कि 11 अगस्त जैसे प्रतीक, सड़कों पर विरोध और BLA जैसे सशस्त्र संगठनों की बढ़ती गतिविधियां बताते हैं कि बलूच सवाल अब भी पाकिस्तान के सामने एक गंभीर और जटिल चुनौती है।
बहरहाल, पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वह बलूचिस्तान को केवल बंदूक और एयर स्ट्राइक से नियंत्रित कर पाएगा। क्योंकि जिस संघर्ष को दशकों तक सुरक्षा समस्या बताकर दबाने की कोशिश की गई, वह अब राजनीतिक पहचान, संसाधनों पर अधिकार और आत्मनिर्णय की मांग से जुड़ा व्यापक संकट बन चुका है। और जब किसी जमीन पर लोग अपनी आजादी का दिन मनाने के लिए भी डर और गोलियों के साये में खड़े हों, तो यह सिर्फ कानून-व्यवस्था का सवाल नहीं रहता, यह उस राज्य की वैधता पर उठता एक बेहद गंभीर सवाल बन जाता है।
Continue reading on the app