पेरिमेनोपॉज, मेनोपॉज से पहले का चरण होता है। इस दौरान महिलाओं के पीरियड्स पूरी तरह बंद नहीं होते हैं, लेकिन इसका प्रोसेस शुरू हो जाता है। इस दौरान पीरियड्स अनियमित होने लगते हैं, कभी हैवी ब्लीडिंग तो कभी लंबे समय तक पीरियड्स बंद हो जाते हैं। आमतौर पर माना जाता है कि 40 की उम्र के बाद महिलाओं को पेरिमेनोपॉज होता है। लेकिन कई बार 40 की उम्र से पहले भी पेरिमेनोपॉज के लक्षण नजर आते हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको पेरिमेनोपॉज के लक्षणों के बारे में बताने जा रहे हैं।
40 से पहले पेरिमेनोपॉज
आमतौर पर माना जाता है कि पेरिमेनोपॉज की शुरूआत 40 की उम्र के बाद होती है। एक्सपर्ट के मुताबिक 40 साल की उम्र से पहले पेरिमेनोपॉज होना असामान्य है, लेकिन इसको असंभव नहीं समझना चाहिए। आमतौर पर 40 से 50 साल की उम्र के बीच महिलाओं में यह बदलाव शुरू होता है। लेकिन हार्मोन में बदलाव 35 से 40 की उम्र के बीच भी शुरू हो सकते हैं। लेकिन अगर किसी महिला के पीरियड्स 40 की उम्र से पहले पूरी तरह से बंद हो जाते हैं, तो इसको प्रीमैच्योर मेनोपॉज कहते हैं। या फिर इसको प्राइमरी ओवेरियन इंसफिशिएंसी कहा जाता है।
लक्षण
पेरिमेनोपॉज होने पर महिलाओं के पीरियड्स पूरी तरह से अनियमित हो जाते हैं। कई बार ब्लीडिंग ज्यादा होती है, तो वहीं कई बार कम ब्लीडिंग होती है सिर्फ स्पॉटिंग होती है। वहीं कई बार दो पीरियड्स के बीच स्पॉटिंग भी देखी जा सकती है।
पेरिमेनोपॉज में ब्लीडिंग अनियमित हो जाते हैं। इसके कारण हार्मोनल परिवर्तन भी होते हैं। खासतौर एस्ट्रोजन का लेवल भी प्रभावित होता है। इस स्थिति में मूड स्विंग्स भी देखा सकता है। पेरिमेनोपॉज के दौरान महिलाओं को एंग्जायटी और चिड़चिड़ेपन की समस्या हो सकती है।
पेरिमेनोपॉज की वजह से महिलाओं को गहरी और अच्छी नींद लेने में भी समस्या होती है। पेरिमेनोपॉज होने पर कुछ महिलाओं को रात को बहुत ज्यादा पसीने और हॉट फ्लैशेज हो सकते हैं, जोकि उनकी नींद को बाधित कर सकते हैं।
इस दौरान रात को अच्छी नींद न ले पाना और हार्मोनल बदलाव होने की वजह से महिलाओं का एनर्जी लेवल भी प्रभावित हो सकता है। ऐसे में महिलाएं कमजोरी और थकान महसूस करती हैं। वहीं कई बार आराम करने के बाद भी थकान कम नहीं होती है।
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