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India Bangladesh Border पर Smart Fencing का काम और तेज, घुसपैठियों और तस्करों पर चौबीसों घंटे रहेगी नजर

पश्चिम बंगाल की भारत बांग्लादेश सीमा पर अब हालात तेजी से बदल रहे हैं। मुर्शिदाबाद के जलंगी गांव से लेकर कूचबिहार, उत्तर चौबीस परगना और सिलीगुड़ी तक सीमा सुरक्षा को अभेद्य बनाने का अभियान तेज हो चुका है। वर्षों तक राजनीतिक टकराव, ढीले रवैये और स्थानीय विवादों में उलझी सीमा अब नई तकनीक और सख्त प्रशासनिक फैसलों के सहारे मजबूत की जा रही है। इस पूरी कवायद का सबसे स्पष्ट संदेश है कि भारत की सीमा अब किसी भी घुसपैठिए के लिए खुला रास्ता नहीं रहने वाली।

मुर्शिदाबाद के जलंगी गांव में उमस भरी दोपहर के बीच निर्माण कार्य जारी है और सीमा के किनारे लोहे के खंभे, कंटीले तार, बुलडोजर और सीमा सुरक्षा बल के जवान एक नई तस्वीर पेश कर रहे हैं। यहां अत्याधुनिक स्मार्ट फेंसिंग का काम तेजी से चल रहा है। देखा जाये तो स्मार्ट फेंसिंग केवल तार लगाने की योजना नहीं है। इसमें तापीय कैमरे, अवरक्त सेंसर, लेजर आधारित चेतावनी तंत्र, रडार, सोनार और चौबीसों घंटे निगरानी करने वाली प्रणाली शामिल है। इससे सीमा पर किसी भी संदिग्ध गतिविधि का तुरंत पता लगाया जा सकेगा। इसका सीधा असर उन बांग्लादेशी घुसपैठियों पर पड़ेगा जो अब तक नदी, दलदली जमीन और बिना बाड़ वाले हिस्सों का फायदा उठाकर भारत में दाखिल होते रहे हैं।

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पश्चिम बंगाल में कुल 2217 किलोमीटर लंबी भारत बांग्लादेश सीमा आती है। गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार इसमें 569 किलोमीटर हिस्सा अब तक बिना बाड़ का है। इनमें से 456 किलोमीटर क्षेत्र में बाड़ लगाना संभव है जबकि 113 किलोमीटर इलाका नदियों और बदलती भौगोलिक स्थिति के कारण बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता है। इसके बावजूद सीमा सुरक्षा बल नई तकनीक के सहारे इन क्षेत्रों को भी सुरक्षित बनाने की तैयारी कर रहा है।

राजनीतिक स्तर पर भी यह मुद्दा लंबे समय से विवाद का केंद्र रहा है। पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार पर आरोप लगते रहे कि उसने सीमा पर बाड़ लगाने में सहयोग नहीं किया और ढीले रवैये के कारण अवैध घुसपैठ को बढ़ावा मिला। चुनाव के दौरान यह मुद्दा प्रमुख बना और नई सरकार ने सत्ता में आते ही सीमा सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी ने पद संभालते ही सीमा सुरक्षा बल को जमीन सौंपने की प्रक्रिया तेज कर दी। केवल कुछ ही हफ्तों में सैकड़ों एकड़ जमीन सीमा सुरक्षा बल को हस्तांतरित कर दी गई।

हालांकि जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया आसान नहीं है। सर्वेक्षण दल पहले सीमा से डेढ़ सौ गज दूरी पर संभावित फेंसिंग लाइन तय करते हैं। इसके बाद भूमि सुधार विभाग और लोक निर्माण विभाग सफेद झंडों से क्षेत्र चिह्नित करते हैं। किसानों और जमीन मालिकों को दस्तावेज लेकर बुलाया जाता है और मुआवजे पर बातचीत होती है। रिपोर्टों के मुताबिक कुछ गांवों में कम मुआवजे को लेकर विरोध प्रदर्शन भी हुए हैं।

इसके अलावा, सीमा क्षेत्र की भौगोलिक चुनौतियां भी कम नहीं हैं। पद्मा नदी के कटाव ने कई जगह पुरानी सड़क और फेंसिंग को बहा दिया। चर भूमि वाले इलाके मानसून में पूरी तरह पानी में डूब जाते हैं और वहां नाव से आवाजाही करनी पड़ती है। ऐसे क्षेत्रों में स्थायी बाड़ बनाना बेहद कठिन माना जाता है। फिर भी सीमा सुरक्षा बल इन चुनौतियों से निपटने के लिए नई तकनीक का सहारा ले रहा है।

इतिहास भी इस संकट की जड़ में रहा है। वर्ष 1947 में खींची गई रेडक्लिफ रेखा ने कई गांवों और बस्तियों को उलझन में डाल दिया। बाद में भारत और बांग्लादेश के बीच भूमि सीमा समझौते के जरिए कई एन्क्लेव बदले गए, लेकिन आज भी कुछ इलाकों में जमीन के कागजों में बांग्लादेश का नाम दर्ज है। ऐसे गांवों के लोग पहले भूमि अभिलेखों में सुधार की मांग कर रहे हैं।

इसके बावजूद एक बात साफ है कि अब सीमा सुरक्षा को लेकर भारत का रुख पहले से कहीं अधिक कठोर हो चुका है। अवैध घुसपैठ, तस्करी और सीमा पार से होने वाली संदिग्ध गतिविधियों पर निर्णायक प्रहार की तैयारी चल रही है। बांग्लादेशी घुसपैठियों को यह समझ लेना चाहिए कि भारत की सीमा अब पहले जैसी कमजोर नहीं रही। आधुनिक निगरानी प्रणाली, चौबीसों घंटे सक्रिय सुरक्षा बल और तेजी से बन रही स्मार्ट फेंसिंग उनके हर रास्ते को बंद करने की दिशा में बढ़ रही है।

बहरहाल, जो लोग अब भी भारत की सीमा को आसान रास्ता समझते हैं, उनके लिए यह स्पष्ट चेतावनी है कि अवैध प्रवेश की हर कोशिश अब पकड़ी जाएगी और कानून के तहत सख्त कार्रवाई होगी। देश की सुरक्षा से खिलवाड़ अब किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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उपचुनाव का बिगुल! Election Commission ने बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात की 3 विधानसभा सीटों के लिए किया तारीखों का ऐलान, देखें पूरा शेड्यूल

देश के तीन प्रमुख राज्यों— बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात में राजनीतिक सरगर्मियां एक बार फिर तेज होने वाली हैं। चुनाव आयोग (ECI) ने गुरुवार को इन राज्यों की तीन रिक्त विधानसभा सीटों पर उपचुनाव (By-Elections) कराने के कार्यक्रम की घोषणा कर दी है। इन सभी सीटों पर आगामी 30 जुलाई को मतदान (वोटिंग) होगा, जबकि मतों की गिनती और नतीजों का ऐलान 3 अगस्त को किया जाएगा। जिन तीन सीटों पर उपचुनाव होना है, उनमें बिहार की बांकीपुर, मध्य प्रदेश की दतिया और गुजरात की मंजलपुर सीट शामिल है।
 

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किन सीटों पर क्यों हो रहे हैं चुनाव? जानिए सियासी समीकरण
 
1. बांकीपुर विधानसभा (बिहार)
बिहार की हाई-प्रोफाइल बांकीपुर सीट पर उपचुनाव भाजपा (BJP) नेता नितिन नवीन के इस्तीफे के बाद हो रहा है। नितिन नवीन को पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के बाद वे अब राज्यसभा के सदस्य चुने जा चुके हैं, जिसके कारण उन्होंने विधानसभा सदस्यता छोड़ दी थी। गौरतलब है कि 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में नितिन नवीन ने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की रेखा कुमारी को 51,000 से अधिक वोटों के भारी अंतर से शिकस्त दी थी।

2. दतिया विधानसभा (मध्य प्रदेश)
मध्य प्रदेश की दतिया सीट पर मुकाबला बेहद दिलचस्प होने की उम्मीद है। यह सीट कांग्रेस के विधायक राजेंद्र भारती को धोखाधड़ी के एक मामले में अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद अयोग्य (Disqualified) घोषित किए जाने से खाली हुई है। राजेंद्र भारती ने 2023 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा के दिग्गज नेता और पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा को हराकर उलटफेर किया था।

3. मंजलपुर विधानसभा (गुजरात)
गुजरात के वडोदरा क्षेत्र की मंजलपुर सीट पर उपचुनाव भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ विधायक योगेश पटेल के दुखद निधन के कारण हो रहा है। योगेश पटेल ने 2022 के गुजरात विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की तशवीन सिंह को 1 लाख से अधिक मतों के रिकॉर्ड अंतर से पराजित किया था।
 

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उपचुनाव का शेड्यूल
उपचुनाव के लिए नोटिफिकेशन 6 जुलाई को जारी किया जाएगा। नॉमिनेशन पेपर भरने की आखिरी तारीख 13 जुलाई तय की गई है।

नॉमिनेशन पेपर की जांच 14 जुलाई को होगी और नॉमिनेशन वापस लेने की आखिरी तारीख 16 जुलाई तय की गई है।

सभी सीटों पर MCC लागू
चुनाव आयोग ने कहा कि वोटिंग प्रक्रिया के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) और VVPAT का इस्तेमाल किया जाएगा। चुनाव वाली तीनों सीटों पर आदर्श आचार संहिता (MCC) लागू हो गई है।
 
पोलिंग स्टेशन पर दिखाए जा सकने वाले डॉक्यूमेंट्स की लिस्ट
वोटिंग के लिए पहचान की पुष्टि करने वाले जिन डॉक्यूमेंट्स को दिखाया जा सकता है, उनमें शामिल हैं: आधार कार्ड, MGNREGA जॉब कार्ड, बैंक/पोस्ट ऑफिस द्वारा जारी फोटो वाली पासबुक, श्रम मंत्रालय की स्कीम के तहत जारी हेल्थ इंश्योरेंस स्मार्ट कार्ड/आयुष्मान भारत हेल्थ कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, NPR के तहत RGI द्वारा जारी स्मार्ट कार्ड, भारतीय पासपोर्ट, फोटो वाला पेंशन डॉक्यूमेंट, केंद्र/राज्य सरकार/PSU/पब्लिक लिमिटेड कंपनियों द्वारा कर्मचारियों को जारी फोटो वाले सर्विस आइडेंटिटी कार्ड, MP/MLA/MLC को जारी ऑफिशियल आइडेंटिटी कार्ड, और भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय का यूनिक डिसेबिलिटी ID (UDID) कार्ड। 

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शर्मनाक! डोपिंग बैन के मामले में भारत नंबर-1, CWG और एशियन गेम्स से पहले चौंकाने वाला खुलासा

भारत में डोपिंग की समस्या नई नहीं है और ये खत्म होने का नाम नहीं ले रही है, बल्कि लगातार बढ़ ही रही है. AIU की ताजा रिपोर्ट ने भारत के ग्लोबल इवेंट्स होस्ट करने की ख्वाहिशों को भी मुश्किल में डाला है. Thu, 02 Jul 2026 21:52:57 +0530

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